यूपी से 30 लाख वोट…इसलिए महाराष्ट्र में जुटे नेता:धनंजय ने भाजपा का प्रचार किया, सपा के अबू आजमी ने आजमगढ़ से जुटाई फौज

महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में यूपी के नेताओं की धमक रही, खासकर पूर्वी यूपी के नेताओं ने जमकर प्रचार किया। वजह थी, वहां यूपी से करीब 30 लाख मतदाता हैं। इनको लुभाने के लिए ही बड़े-बड़े नेता कई दिनों तक मुंबई में ही डेरा डाले रहे। कल वोटिंग हो चुकी है और आज नतीजे भी आ जाएंगे। यूपी के कौन-कौन से नेता महाराष्ट्र पहुंचे? महाराष्ट्र के चुनाव में यूपी के लोगों का कितना प्रभाव है? आजमगढ़ और जौनपुर के नेता ही क्यों इतना सक्रिय रहे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले जानिए महाराष्ट्र का लोकल चुनाव कितना अहम
मुंबई चुनाव में सक्रिय यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले जफर आजमी बताते हैं- यहां 227 सीट बीएमसी के तहत आती हैं। इनमें से 70 सीटें ऐसी हैं, जहां पूर्वी यूपी और बिहार के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इन सभी 70 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे। आजमी कहते हैं- बीएमसी सबसे अमीर निकाय है। यहां का सालाना बजट 70 हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में सभी की ख्वाहिश होती है कि वह बीएमसी का कारपोरेटर (पार्षद) बने। यहां आमतौर पर 12 से 15 हजार वोट पाने वाला प्रत्याशी भी कारपोरेटर बन जाता है। यहां कई ऐसी सीटें हैं, जहां पूर्वी यूपी और बिहार के लोगों की आबादी 30 फीसदी तक है। इनमें भिवंडी, मलाट, अंधेरी, कुर्ला जैसे जिले शामिल हैं। इसके अलावा थाणे के मुंबरा इलाके में भी बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। यही वजह है कि यूपी के नेता बड़ी संख्या में प्रचार करने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे। नोकझोंक… दबदबा दिखाने की भी रही होड़
महाराष्ट्र निकाय चुनाव के दौरान पूर्वांचल के बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गले में भाजपा का पट्‌टा नजर आया। जबकि वह यूपी में जेडीयू का झंडा बुलंद करते हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने पार्टी के प्रचार के लिए बड़ी संख्या में आजमगढ़ और उसके आसपास के जिलों के नेताओं को बुलाया था। प्रचार के दौरान तीखी नोकझोंक, ताने-उलाहने, यहां तक कि गाली-गलौज तक की नौबत रही। एक सभा को संबोधित करते हुए अबू आसिम आजमी ने एमआईएम के नेता इम्तियाज जलील को चैलेंज देते हुए कहा कि ‘मैं उत्तर प्रदेश का हूं, पटक दूंगा बत्तीसी बाहर आ जाएगी। एक एमपी लेकर दनदनाते फिरते हो, मेरे पास 37 एमपी हैं।’ महाराष्ट्र चुनाव में सपा की फायर ब्रांड नेता और मछलीशहर से विधायक रागिनी सोनकर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज, कौशांबी से सांसद पुष्पेंद्र सरोज, आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव, जौनपुर के सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, बस्ती से सांसद राम प्रसाद चौधरी, अंबेडकर नगर से विधायक राम अचल राजभर, सपा विधायक नफीस अहमद जैसे नेता भी प्रचार करने पहुंचे। अपर्णा यादव भी पहुंचीं प्रचार करने
बीएमसी के चुनाव में प्रचार करने के लिए मुलायम सिंह यादव की बहू और भाजपा नेता व महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी मुंबई प्रचार करने के लिए पहुंचीं। इनके अलावा भाजपा के नेताओं में जौनपुर जिले की बदलापुर सीट से विधायक रमेश मिश्रा, चंदौली की मुगलसराय सीट से विधायक रमेश जायसवाल भी प्रचार करने के लिए मुंबई पहुंचे। धनंजय सिंह को क्यों जाना पड़ा महाराष्ट्र?
धनंजय सिंह पूर्वांचल की राजनीति करते रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब वे मुंबई में भाजपा और शिंदे गठबंधन के नेता के प्रचार के लिए पहुंचे। धनंजय सिंह वैसे तो जनता दल यूनाइटेड के नेता हैं, लेकिन महाराष्ट्र में वे पूरी तरह से भगवा रंग में रंगे नजर आए। उनके गले में भाजपा का पट्टा भी पड़ा हुआ था। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जौनपुर के बड़े नेताओं में से एक कृपाशंकर सिंह, जिनका प्रभाव मुंबई की राजनीति में अच्छा खासा रहा है, उनके रहते हुए धनंजय को भी मैदान में उतरना पड़ा। कृपाशंकर सिंह भाजपा के बड़े नेता हैं। बीते लोकसभा चुनाव में जौनपुर से भाजपा के प्रत्याशी भी थे। धनंजय ने उनका सपोर्ट भी किया था। आजमगढ़ और जौनपुर के लोग ही क्यों इतना सक्रिय?
लंबे समय से मुंबई में रह रहे मोअज्जम ने दैनिक भास्कर को बताया कि पूर्वांचल के दो प्रमुख जिलों आजमगढ़ और जौनपुर के लोग बड़ी संख्या में मुंबई में रहते हैं। कई तो ऐसे भी जिन्होंने वहीं अपना मकान और जायदाद भी बना ली है। मोअज्जम कहते हैं- बीएमसी के चुनाव में पूर्वांचल के वोटरों का अच्छा प्रभाव होता है। कई सीटों पर ये हार-जीत तय करते हैं। यही वजह है कि आजमगढ़ और जौनपुर के बड़े नेता इस चुनाव में प्रचार करने के लिए यहां आए। समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश के चीफ जनरल सेक्रेटरी मेराज सिद्दीकी बताते हैं- पूर्वी यूपी या यूं कहिए उत्तर भारतीय बड़ी संख्या में मुंबई में रहते हैं। कई इलाके ऐसे हैं, जहां महसूस ही नहीं होता कि ये हिस्सा यूपी से बाहर का है। मेराज के मुताबिक, इस चुनाव में भी बड़ी संख्या में यूपी के लोग चुनाव लड़े। हालांकि, चुनाव की बात आती है तो यूपी-महाराष्ट्र के लोगों के टकराव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। कई बार भाषा के तौर पर भी विरोध देखने को मिलता है। महाराष्ट्र के लोग आरोप लगाते हैं कि यूपी वाले उनके रोजगार छीन रहे। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के विरोध की शुरुआत बाला साहेब ठाकरे के दौर से हुई। हालांकि उनका विरोध इस बात को लेकर था कि यूपी और गुजरात के लोग महाराष्ट्र के लोगों का हक छीन रहे हैं। उनका विरोध बेहद तार्किक तरीके से चलता रहा। लेकिन, जब राज ठाकरे का दौर आया तो उन्होंने उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। इसका परिणाम ये रहा कि उत्तर भारतीय पूरे महाराष्ट्र में जहां भी रहा, वह संगठित हो गया। बाकायदा उत्तर भारतीयों का संगठन भी बना। जिसमें आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर, बस्ती, गोंडा जैसे जिलों के लोग सक्रिय रहे। यही वजह रही कि वहां उत्तर भारतीयों का प्रभाव बढ़ता गया। चुनाव बीएमसी का हो या विधानसभा का। यहां के लोग वहां चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जाने लगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… मायावती चिल्लाईं- आप हरिजन कहकर जलील कर रहे…:यही तेवर देख कांशीराम ने चुना दिल्ली का इंदरपुरी इलाका। एक छोटा-सा खस्ताहाल मकान। दिसंबर, 1977 की एक सर्द रात थी। अचानक रात 11 बजे किसी ने घर की कुंडी खटखटाई। घर के मालिक प्रभुदास ने दरवाजा खोला, तो देखा कि बाहर मुड़े-तुड़े कपड़ों में गले में मफलर डाले, लगभग गंजा हो चला एक अधेड़ शख्स खड़ा था। उस अधेड़ ने अपना परिचय दिया- ‘मैं बामसेफ का अध्यक्ष हूं…आपकी बेटी को पुणे में एक भाषण देने के लिए आमंत्रित करने आया हूं।’ ये शख्स कोई और नहीं, कांशीराम थे। जो प्रभुदास की छठी संतान मायावती के संबंध में बात कर रहे थे। इस एक मुलाकात ने मायावती की जिंदगी बदल दी। IAS बनने का सपना देखने वाली ये लड़की आगे चलकर देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की 4 बार सीएम बनीं। समर्थक उन्हें प्यार से ‘बहनजी’ कहकर बुलाते हैं। पढ़ें पूरी खबर