यूपी में SIR प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है। मंगलवार को इसकी पहली ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद एक महीने यानी 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। SIR की शुरुआत में प्रदेश में लगभग 15.44 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता थे। 4 नवंबर से शुरू हुई पहले चरण की SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये संख्या 12.55 करोड़ रह गई है। इस दौरान 2 बार यूपी में SIR का समय बढ़ाया गया। पहले 7 और फिर 15 दिन का समय बढ़ाया गया। ड्राफ्ट मतदाता सूची मंगलवार यानी 6 जनवरी को प्रकाशित हो सकती है। जानिए पहले चरण में क्या हुआ?
SIR का पहला चरण 4 नवंबर, 2025 से शुरू हुआ। इसमें बीएलओ ने घर-घर जाकर फॉर्म बांटे और मतदाताओं से जानकारी इकट्ठा की। पहले यह चरण 4 दिसंबर तक चलना था। लेकिन, विपक्ष की मांग पर पहले इसे 7 दिन बढ़ाया गया, फिर 15 दिन का समय बढ़ाया गया। पहले चरण में 2003 की मतदाता सूची से तुलना की गई और मौजूदा वोटर की उनसे मैपिंग की गई। कहां कम हो गए वोटर
लखनऊ जैसे शहरी क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक रही, जहां 39 लाख मतदाताओं में से 12 लाख वोटर कम हो गए। इनमें 5.4 लाख दोहरी पंजीकरण वाले और 4.3 लाख अनट्रेसेबल थे। शहरी क्षेत्रों में फॉर्म कलेक्शन की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम रही, क्योंकि लोग काम या माइग्रेशन के कारण घर पर उपलब्ध नहीं थे। कानपुर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में भी यही समस्या देखने को मिली। प्रमुख जिलों में लखनऊ के अलावा प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर 9 लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख वोटर कम हाे गए। दूसरे चरण में क्या होगा: ड्राफ्ट प्रकाशन और आगे की प्रक्रिया जानिए
SIR का दूसरा चरण मंगलवार से शुरू हो रहा है, जब ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी। पहले ये समय-सारणी में 31 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित होनी थी। लेकिन राजनीतिक दलों की मांग पर इसे 6 जनवरी तक बढ़ाया गया। इस संशोधन के साथ, दावे और आपत्तियों की अवधि भी बढ़ाकर 6 फरवरी, 2026 तक कर दी गई है। इसके बाद दावों और आपत्तियों का निपटारा 26 फरवरी तक होगा। अंतिम मतदाता सूची मार्च के पहले सप्ताह में प्रकाशित की जाएगी। दूसरे चरण का मुख्य फोकस मतदाताओं को अपनी स्थिति जांचने और सुधार करने का अवसर देना है। ड्राफ्ट सूची में नाम न होने पर नए पंजीकरण, गलतियों पर सुधार या अनुचित नामों पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है। आयोग ने कहा है कि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए, इसलिए नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। दावे और आपत्तियां मुफ्त हैं और 6 फरवरी तक जमा की जा सकती हैं। आयोग ने हेल्पलाइन नंबर- 1950 जारी किया है, जहां सहायता ली जा सकती है। शहरी क्षेत्रों में कम सहयोग को देखते हुए आयोग ने विशेष कैंप लगाने की योजना बनाई है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश विधानसभा चुनाव में दलितों पर दांव लगाएंगे, सामान्य सीटों पर भी टिकट देंगे समाजवादी पार्टी यूपी की सियासत में एक बार फिर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। उसका फोकस दलित वोटों को अपनी ओर करने का है। इसके लिए विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर सामान्य सीटों पर भी दलित बिरादरी से आने वाले नेता को अपना उम्मीदवार बना सकती है। इसके पीछे की रणनीति क्या है? पढ़ें पूरी खबर
SIR का पहला चरण 4 नवंबर, 2025 से शुरू हुआ। इसमें बीएलओ ने घर-घर जाकर फॉर्म बांटे और मतदाताओं से जानकारी इकट्ठा की। पहले यह चरण 4 दिसंबर तक चलना था। लेकिन, विपक्ष की मांग पर पहले इसे 7 दिन बढ़ाया गया, फिर 15 दिन का समय बढ़ाया गया। पहले चरण में 2003 की मतदाता सूची से तुलना की गई और मौजूदा वोटर की उनसे मैपिंग की गई। कहां कम हो गए वोटर
लखनऊ जैसे शहरी क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक रही, जहां 39 लाख मतदाताओं में से 12 लाख वोटर कम हो गए। इनमें 5.4 लाख दोहरी पंजीकरण वाले और 4.3 लाख अनट्रेसेबल थे। शहरी क्षेत्रों में फॉर्म कलेक्शन की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम रही, क्योंकि लोग काम या माइग्रेशन के कारण घर पर उपलब्ध नहीं थे। कानपुर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में भी यही समस्या देखने को मिली। प्रमुख जिलों में लखनऊ के अलावा प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर 9 लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख वोटर कम हाे गए। दूसरे चरण में क्या होगा: ड्राफ्ट प्रकाशन और आगे की प्रक्रिया जानिए
SIR का दूसरा चरण मंगलवार से शुरू हो रहा है, जब ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी। पहले ये समय-सारणी में 31 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित होनी थी। लेकिन राजनीतिक दलों की मांग पर इसे 6 जनवरी तक बढ़ाया गया। इस संशोधन के साथ, दावे और आपत्तियों की अवधि भी बढ़ाकर 6 फरवरी, 2026 तक कर दी गई है। इसके बाद दावों और आपत्तियों का निपटारा 26 फरवरी तक होगा। अंतिम मतदाता सूची मार्च के पहले सप्ताह में प्रकाशित की जाएगी। दूसरे चरण का मुख्य फोकस मतदाताओं को अपनी स्थिति जांचने और सुधार करने का अवसर देना है। ड्राफ्ट सूची में नाम न होने पर नए पंजीकरण, गलतियों पर सुधार या अनुचित नामों पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है। आयोग ने कहा है कि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए, इसलिए नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। दावे और आपत्तियां मुफ्त हैं और 6 फरवरी तक जमा की जा सकती हैं। आयोग ने हेल्पलाइन नंबर- 1950 जारी किया है, जहां सहायता ली जा सकती है। शहरी क्षेत्रों में कम सहयोग को देखते हुए आयोग ने विशेष कैंप लगाने की योजना बनाई है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश विधानसभा चुनाव में दलितों पर दांव लगाएंगे, सामान्य सीटों पर भी टिकट देंगे समाजवादी पार्टी यूपी की सियासत में एक बार फिर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। उसका फोकस दलित वोटों को अपनी ओर करने का है। इसके लिए विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर सामान्य सीटों पर भी दलित बिरादरी से आने वाले नेता को अपना उम्मीदवार बना सकती है। इसके पीछे की रणनीति क्या है? पढ़ें पूरी खबर