योगी सरकार के संकट मोचक हैं गोयल:पर्दे के पीछे काम कर यूपी का परसेप्शन बदला, ऑनलाइन सेवाओं से लेकर एयरपोर्ट तक में भूमिका

यूपी के नए मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल (एसपी गोयल) ने साढ़े 8 साल तक पंचम तल (मुख्यमंत्री कार्यालय) पर रहकर सरकार के संकट मोचक की भूमिका निभाई। साथ ही ऑनलाइन सेवाओं से लेकर सिविल एविएशन के क्षेत्र में यूपी को फर्श के अर्श तक लाने में अहम रोल निभाया। शासन के पूर्व अधिकारी बताते हैं कि एसपी गोयल ने पर्दे के पीछे रहकर सरकार को किसी गड़बड़ी में फंसने से बचाया। साथ ही सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट की प्लानिंग से लेकर उनको साकार करने में भी बड़ा किरदार निभाया। जानिए यूपी का परसेप्शन बदलने में क्या रही गोयल की भूमिका… जानकार बताते हैं कि साल-2017 में एसपी गोयल भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव थे। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के लिए एक दमदार और भरोसेमंद अफसर की तलाश की जा रही थी। केंद्र सरकार के तत्कालीन बड़े अधिकारियों ने एसपी गोयल और देवेश चतुर्वेदी का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा। मोदी ने योगी के सारथी के रूप में गोयल को चुना। परसेप्शन बदलने में अहम भूमिका
मुख्य सचिव एसपी गोयल की यूपी का परसेप्शन बदलने में अहम भूमिका रही है। 2017 से पहले केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में बहुत नीचे स्थान रहता था। गोयल ने पद संभालने के बाद केंद्र सरकार और प्रदेश की योजनाओं की निगरानी अपने हाथ में ली। आज यूपी केंद्र सरकार की 55 से अधिक योजनाओं में नंबर-1 है। हर विभाग की पॉलिसी निर्धारित कराई
यूपी में पॉलिसी पैरालिसिस का बड़ा संकट था। गोयल ने प्रयास कर हर विभाग की पॉलिसी निर्धारित कराई। उसके क्रियान्वयन की निगरानी भी खुद की। एक्सप्रेस-वे हो या काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, नई आबकारी पॉलिसी हो या निवेश मित्र पोर्टल की स्थापना, इनके पीछे भी गोयल की भूमिका रही। शासन के अधिकारी मानते हैं कि इन्हीं कार्यों के कारण यूपी का परसेप्शन बदला है। आज सीएम योगी ही नहीं, पीएम नरेंद्र मोदी भी केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में यूपी की तारीफ करते हैं। पर्दे के पीछे रहे, प्रदेश को आगे बढ़ाया
एसपी गोयल ने पंचम तल की साढ़े 8 साल तक कमान संभाली, लेकिन वह हमेशा पर्दे के पीछे रहे। सरकार को नई योजनाओं का सुझाव देकर वाहवाही दिलानी हो या सलाह देकर गलत काम होने से रोकना। गोयल हमेशा उचित काम करते रहे। उन्होंने कभी मीडिया के सामने या लाइमलाइट में आने का प्रयास नहीं किया। कभी किसी काम का श्रेय लेने का प्रयास भी नहीं किया। त्वरित आर्थिक विकास योजना का बजट बढ़ाया
माना जाता है कि 2017 से पहले अधिकांश विधायक सीएम से ज्यादा पीडब्ल्यूडी मंत्री के पास जाते थे। इसकी वजह पीडब्ल्यूडी में सड़क के लिए सबसे अधिक बजट होना है। 2017 में ऐसी स्थिति सामने आने पर एसपी गोयल के प्रयास से सीएम के नियंत्रण में संचालित त्वरित आर्थिक विकास योजना का बजट करीब एक हजार करोड़ से अधिक किया गया। सीएम ने भी त्वरित आर्थिक विकास योजना से विधायकों के कामकाज स्वीकृत करना शुरू किए। पीसीएस, आईएएस सहित अन्य संवर्ग में लंबे समय से पदोन्नतियां अटकी हुई थीं। एसपी गोयल के प्रयास से ही पदोन्नतियां हर साल होना शुरू हुईं। तीन एयरपोर्ट से 21 एयरपोर्ट बनवाए
एसपी गोयल के पास अपर मुख्य सचिव नागरिक उड्‌डयन का भी कार्यभार रहा है। गोयल ने जब विभाग की कमान संभाली थी, तब यूपी में मात्र लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी तीन एयरपोर्ट थे। लेकिन, आज यूपी में 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डे सहित 21 एयरपोर्ट हैं। यूपी में पायलट ट्रेनिंग स्कूल, पर्यटन स्थलों पर हेलिकॉप्टर सेवा सहित सिविल एविएशन के ट्रांसफॉर्मेशन में गोयल की भूमिका रही है। जेवर और अयोध्या एयरपोर्ट बड़ी उपलब्धि
जेवर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण से लेकर एयरपोर्ट के निर्माण में गोयल की ही भूमिका रही। एयरपोर्ट का डिजाइन इस तरह का तैयार किया गया है कि वह 5 रनवे वाला भारत का इकलौता एयरपोर्ट है। एशिया के पांच बड़े एयरपोर्ट में उसकी गिनती है। अयोध्या में भी महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट का कम समय में निर्माण कराने में अहम भूमिका रही। कई अहम योजनाओं में भी है गोयल का रोल जनहित गारंटी को ऑनलाइन कराया
जनहित गारंटी अधिनियम के तहत लागू सेवाओं में विस्तार कराया। यूपी में अब 45 विभागों की 382 सेवाओं का फायदा इसमें मिल रहा है। एसपी गोयल ने 100 से ज्यादा नई सेवाओं को शामिल कराया। सेवाओं को ऑनलाइन कराने में अहम भूमिका निभाई। परियोजनाओं की मॉनिटरिंग स्वयं करते थे। जिस काम को शुरू किया, उसे समाप्त भी किया। गोयल के खिलाफ हर कोशिश नाकाम हुई
शासन के एक अधिकारी बताते हैं कि कामकाज को लेकर एसपी गोयल का सख्त रवैया उनके सीनियर या समकक्ष अधिकारियों को नागवार गुजरता था। साढ़े 8 साल में ऐसे कई मौके आए जब गोयल को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव या अपर मुख्य सचिव पद से हटवाने के लिए कई प्रयास हुए। लेकिन, सीएम योगी के प्रति उनकी निष्ठा और कामकाज के चलते सभी प्रयास नाकाम हुए। गोयल को मुख्य सचिव की दौड़ से बाहर कराने के लिए बीते दिनों लोकायुक्त में भी उनके खिलाफ शिकायत की गई। लेकिन, लोकायुक्त ने उसे रद्द कर दिया। ‘सरकार के लिए धरोहर हैं गोयल’
पूर्व मुख्य सचिव आरके तिवारी कहते हैं कि मुख्य सचिव के रूप में एसपी गोयल एक बेहतरीन पसंद हैं। गोयल बहुत सुलझे हुए और विनम्र अधिकारी हैं। यूपी में कामकाज का लंबा अनुभव है। मुख्यमंत्री कार्यालय का लंबा अनुभव होने के कारण उनके पास जानकारी बहुत है। वह पूरे यूपी को नहीं यूपी के हर आईएएस अफसर को गहराई से जानते हैं। मुख्य सचिव के पद पर जब नए अधिकारी आते हैं, तो वह नई सोच और नई ऊर्जा से काम करते हैं। एसपी गोयल को नवाचार पसंद हैं। वह कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जो जनता और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद हो। पूर्व एसीएस और प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल बताते हैं कि एसपी गोयल एक सीनियर और हार्डवर्किंग ऑफिसर हैं। वह प्रदेश की प्रतिबद्धता समझते हैं। स्वभाव में सरल और कामकाज में गहराई तक जाना उनका गुण है। गोयल का कमजोर पक्ष क्या?
शासन के अधिकारी मानते हैं कि एसपी गोयल का सबसे कमजोर पक्ष ये है कि वह आईएएस अफसर के आगे किसी की नहीं सुनते। जिलों में जिलाधिकारी या शासन के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत आने पर एसपी गोयल उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास करते हैं। ताजा मामला बताया जाता है कि इन्वेस्ट यूपी के निलंबित सीईओ अभिषेक प्रकाश के खिलाफ राजस्व परिषद ने एक साल पहले जांच रिपोर्ट सौंपी थी। उनके खिलाफ बरेली और लखीमपुर जिलाधिकारी रहते हुए भी जमीन खरीदने की शिकायतें मिली थीं। लेकिन, गोयल ने उन्हें बचाए रखा। इससे पहले भी सोनभद्र में 2019 में जमीन विवाद में हुए नरसंहार में 10 लोगों की मौत हुई थी। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने जांच रिपोर्ट में आईएएस अफसरों को दोषी ठहराया था। ऐसा कहा जाता है कि गोयल ने ही उन पर कार्रवाई होने से बचाया था। ———————– ये खबर भी पढ़ें… एसपी गोयल यूपी के नए मुख्य सचिव, पंचायत और विधानसभा चुनाव कराएंगे; मनोज सिंह को केंद्र ने सेवा विस्तार नहीं दिया IAS शशि प्रकाश गोयल (एसपी गोयल) यूपी के नए मुख्य सचिव बन गए हैं। मोदी सरकार ने मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार नहीं दिया। 37 साल की सेवा के बाद मनोज सिंह गुरुवार को रिटायर हो गए। मोदी सरकार के कुछ ताकतवर मंत्रियों ने मनोज सिंह को सेवा विस्तार देने का विरोध किया था। सीएम योगी ने मनोज सिंह को सेवा विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। लेकिन, केंद्र सरकार ने बात नहीं मानी। इससे पहले डीजीपी प्रशांत कुमार को भी सेवा विस्तार नहीं मिला था। इसके बाद योगी सरकार ने राजीव कृष्णा को डीजीपी बनाया था। पढ़ें पूरी खबर