रक्षा मंत्री और लगातार तीसरी बार लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह का आज 74वां जन्मदिन है। राजधानी में उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता इसे यादगार बनाने में जुटे हैं। राजनीतिक हलकों में अभी से चर्चा होने लगी है कि क्या 2029 में राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे या अपनी राजनीतिक विरासत किसी को सौंप देंगे? राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनाथ सिंह का भाजपा ही नहीं देश की राजनीति में इतना बड़ा कद है कि उनका राजनीतिक भविष्य वह खुद तय करेंगे। राजनाथ सिंह ही तय करेंगे कि उन्हें चुनावी राजनीति करनी है या किसी अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारी में रहकर पार्टी और समाज की सेवा करनी है। राजनाथ सिंह के सियासत का सितारा शुरू से ही बुलंद रहा है। जब देश में मतदान करने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष थी, तब 1974 में राजनाथ सिंह मात्र 23 साल की उम्र में मिर्जापुर में जनसंघ के जिला सचिव बन गए थे। उन्होंने भले ही शिक्षा फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) में ली, लेकिन पांच दशक में राजनीतिक की केमिस्ट्री के कई सूत्र दिए। स्वस्थ शरीर, शांत मन और ठंडे दिमाग से राजनीति करने में वह पारंगत हैं। यही वजह है कि 1980 में मिर्जापुर और 1993 में लखनऊ की मोहना सीट से चुनाव हारने के बाद भी वह नई ऊर्जा के साथ लगातार आगे बढ़ते रहे। राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी उन्होंने अपने राजनीतिक वजूद को बनाए रखा। भाजपा की राजनीतिक मेंं अटलजी के बाद राजनाथ सिंह ही ऐसा नेता माने जाते हैं, जिनके बारे में विपक्ष के लोग भी कोई आरोप नहीं लगाते हैं। राजनाथ सिंह अगले साल 75 साल के हो जाएंगे। भाजपा में चुनिंदा नेताओं पर 75 वर्ष की आयु में मंत्री पद पर नहीं रखने का सिद्धांत लागू होता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनाथ सिंह से पहले पीएम नरेंद्र मोदी इसी साल 17 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे। यदि मोदी पर 75 साल की उम्र वाला सिद्धांत लागू हुआ तो ही अगले साल राजनाथ पर भी वह सिद्धांत लागू होगा। राजनीति के पांच दशक पूरे किए
राजनाथ सिंह ने 1974 में जनसंघ से सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। 1975 में मिर्जापुर के भाजपा जिलाध्यक्ष बने। 1977 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, उसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। विधायक से लेकर देश के गृहमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभालते हुए राजनीतिक के पांच दशक पूरे किए हैं। राजनीतिक दलों से बेहतर संबंध
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनाथ सिंह अटलजी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से लेकर मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार तक संकट मोचक की भूमिका निभाते रहे हैं। दलगत राजनीति से इतर राजनाथ सिंह के स्वर्गीय जयललिता, रामविलास पासवान, करुणानिधि, अहमद पटेल और प्रणव मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं से उनके अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते थे। मौजूदा समय में भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं से उनके संबंध मधुर हैं। भाजपा को जब भी अन्य दलों के सहयोग की जरूरत पड़ती है, राजनाथ सिंह एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका में दिखाई देते हैं। अटलजी की विरासत को संभाला
भाजपा के संस्थापक रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1991 से 2009 तक लगातार लखनऊ के सांसद रहे। अटलजी के बाद लालजी टंडन 2009 में लखनऊ के सांसद रहे। उसके बाद अटलजी की राजनीतिक विरासत को राजनाथ सिंह ने संभाला। राजनाथ सिंह ने अटलजी की खड़ाऊ लेकर ही चुनाव मैदान में उतरे थे। आज भी वह अटलजी को याद करते हुए उनके संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने पर गौरव की अनुभूति करते हैं। लखनऊ में राजनाथ सिंह की मौजूदगी में ऐसा कोई सार्वजनिक समारोह नहीं होता है, जिसमें वह अटलजी को याद न करें। विरासत संभालने को तैयार बेटे नीरज सिंह
राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह गौतमबुद्ध नगर से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। पंकज भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। राजनाथ के छोटे बेटे नीरज सिंह भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। लखनऊ में राजनाथ सिंह के सामाजिक और राजनीतिक कामकाज नीरज ही संभालते हैं। बूथ से लेकर पार्टी की गतिविधियों, जातीय संतुलन, कार्यकर्ताओं का सम्मान और जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान नीरज ही देखते हैं। नीरज प्रदेश भाजपा की राजनीति में भी सक्रिय हैं। हाल ही में अटलजी की जयंती पर स्वास्थ्य शिविर, डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर अंबेडकर मैराथन, अहिल्याबाई होल्कर की जयंती समारोह, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम नीरज की देखरेख में आयोजित हुए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि राजनाथ सिंह जब भी सक्रिय राजनीति छोड़ेंगे तो लखनऊ में नीरज सिंह की उनकी विरासत को संभालेंगे। नीरज ने बीते एक दशक में लखनऊ के हर गली- वार्ड और समाज में पकड़ बनाई है। सबसे पहले कलराज पर लागू हुआ 75 वर्ष का फॉर्मूला कलराज मिश्र यूपी के पहले मंत्री थे, जिन पर 75 वर्ष का फॉर्मूला लागू हुआ था। 2019 में कलराज को एमएसएमई मंत्री पद से हटाकर राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कानपुर के सांसद सत्यदेव पचौरी, बरेली के सांसद गंगवार संतोष गंगवार, प्रयागराज की सांसद रीता बहुगुणा जोशी का टिकट भी 75 वर्ष की आयु के फार्मूले पर ही काटा गया। हेमा मालिनी को मिली छूट
हेमा मालिनी को 2024 लोकसभा चुनाव में 75 वर्ष की आयु के नियम में छूट मिली। हेमा को 76 वर्ष की उम्र में भी मथुरा से प्रत्याशी बनाया गया। लोकसभा चुनाव से पहले 2023 में मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भी 75 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं को प्रत्याशी बनाया गया। कल्याण सिंह से रही राजनीतिक अदावत
राजनाथ सिंह और पूर्व सीएम कल्याण सिंह की राजनीतिक अदावत जगजाहिर रही है। ऐसा माना जाता है कि कल्याण सिंह के भाजपा से अलग होने के पीछे राजनाथ सिंह भी बड़ा कारण थे। एक समय कल्याण सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, उस दौरान राजनाथ सिंह मिर्जापुर तक सीमित थे। फिर एक दौर ऐसा भी आया जब राजनाथ सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और कल्याण सिंह उनकी टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। 40 हजार करोड़ के विकास कार्य हुए
राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी बताते हैं कि राजनाथ सिंह के सांसद कार्यकाल में लखनऊ में करीब 40 हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य हुए हैं। 6 हजार करोड़ की लागत से आउटर रिंग रोड बनाया गया। शहर में 17 फ्लाईओवर बन गए हैं और आठ फ्लाईओवर निर्माणाधीन हैं। गोमतीनगर रेलवे टर्मिनस, आलम नगर सैटेलाइट स्टेशन, चारबाग रेलवे स्टेशन की द्वितीय एंट्री, अमौसी एयरपोर्ट पर तीसरा टर्मिनल, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस, लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर तक फोर लेन हाईवे का निर्माण हुआ। लखनऊ से सुल्तानपुर होते हुए गाजीपुर तक एनएच 31 फोर लेन और हैदर कैनाल पर एसटीपी का निर्माण कराया है। शहीद पथ भी राजनाथ की देन
दिवाकर त्रिपाठी बताते हैं कि शहीद पथ भी तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह की देन है। वह बताते हैं कि सन 1999 में अटलजी प्रधानमंत्री बनने के बाद लखनऊ आए। ज्योतिबा फूले मैदान में उनका स्वागत समारोह रखा गया। दिवाकर त्रिपाठी उस दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी थे। त्रिपाठी ने एक पर्ची लालजी टंडन को देते हुए शहीद पथ बनवाने की मांग करने का आग्रह किया। लालजी टंडन ने जैसे ही मंच से मांग रखी। अटलजी ने राजनाथ सिंह की तरफ देखा, राजनाथ सिंह ने तुरंत खड़े होकर आग्रह को स्वीकार करते हुए शहीद पथ बनाने की घोषणा की। छात्र गर्व से कहते- हम राजनाथ सिंह कार्यकाल के इंटर पास हैं
राजनाथ सिंह ने कल्याण सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री रहते हुए नकल विरोधी अध्यादेश लागू किया था। जिस साल अध्यादेश लागू हुआ उस साल यूपी में नकल माफिया पर पूरी तरह लगाम कस गई। बोर्ड परीक्षा का परिणाम एक तरफा गिर गया, कई जिलों का परिणाम 20 फीसदी से ज्यादा नहीं रहा। उस समय जो विद्यार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पास हुए, वह गर्व से कहते थे हम राजनाथ और कल्याण सिंह के कार्यकाल के इंटर पास हैं। दो बार कल्याण सिंह की सरकार बचाई
राजनाथ सिंह के ओएसडी रहे अशोक तिवारी बताते हैं, राजनाथ सिंह का यूपी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का कार्यकाल बड़ी-बड़ी घटनाओं से भरा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए राजनाथ सिंह ने दो बार कल्याण सिंह की सरकार बचाई थी। सिंतबर 1997 में कल्याण सिंह सरकार से मायावती ने बहुमत वापस लिया। राजनाथ सिंह के प्रयास से बसपा तोड़कर जन बसपा और कांग्रेस के विधायक तोड़कर लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन हुआ। दोनों दलों के समर्थन से कल्याण सिंह सरकार बची। 1999 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह सरकार को भंग कर जगदंबिका पाल को सीएम पथ की शपथ दिलाई। उस दौरान भी राजनाथ सिंह के प्रयास से ही हाईकोर्ट में मामला गया। हाईकोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया। राजनाथ ने विधायकों को लामबंद कर सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई। ………………….. ये खबर भी पढ़ें… छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। आखिर यह कैसे हुआ? कैसे सब कुछ बदल गया? करोड़ों रुपए कहां से आए? इन सारे सवालों को जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम बलरामपुर में छांगुर बाबा के गांव पहुंची। जो कुछ निकलकर सामने आया, वह हैरान करने वाला है। पढ़िए पूरी खबर…
राजनाथ सिंह ने 1974 में जनसंघ से सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। 1975 में मिर्जापुर के भाजपा जिलाध्यक्ष बने। 1977 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, उसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। विधायक से लेकर देश के गृहमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभालते हुए राजनीतिक के पांच दशक पूरे किए हैं। राजनीतिक दलों से बेहतर संबंध
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनाथ सिंह अटलजी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से लेकर मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार तक संकट मोचक की भूमिका निभाते रहे हैं। दलगत राजनीति से इतर राजनाथ सिंह के स्वर्गीय जयललिता, रामविलास पासवान, करुणानिधि, अहमद पटेल और प्रणव मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं से उनके अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते थे। मौजूदा समय में भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं से उनके संबंध मधुर हैं। भाजपा को जब भी अन्य दलों के सहयोग की जरूरत पड़ती है, राजनाथ सिंह एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका में दिखाई देते हैं। अटलजी की विरासत को संभाला
भाजपा के संस्थापक रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1991 से 2009 तक लगातार लखनऊ के सांसद रहे। अटलजी के बाद लालजी टंडन 2009 में लखनऊ के सांसद रहे। उसके बाद अटलजी की राजनीतिक विरासत को राजनाथ सिंह ने संभाला। राजनाथ सिंह ने अटलजी की खड़ाऊ लेकर ही चुनाव मैदान में उतरे थे। आज भी वह अटलजी को याद करते हुए उनके संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने पर गौरव की अनुभूति करते हैं। लखनऊ में राजनाथ सिंह की मौजूदगी में ऐसा कोई सार्वजनिक समारोह नहीं होता है, जिसमें वह अटलजी को याद न करें। विरासत संभालने को तैयार बेटे नीरज सिंह
राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह गौतमबुद्ध नगर से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। पंकज भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। राजनाथ के छोटे बेटे नीरज सिंह भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। लखनऊ में राजनाथ सिंह के सामाजिक और राजनीतिक कामकाज नीरज ही संभालते हैं। बूथ से लेकर पार्टी की गतिविधियों, जातीय संतुलन, कार्यकर्ताओं का सम्मान और जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान नीरज ही देखते हैं। नीरज प्रदेश भाजपा की राजनीति में भी सक्रिय हैं। हाल ही में अटलजी की जयंती पर स्वास्थ्य शिविर, डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर अंबेडकर मैराथन, अहिल्याबाई होल्कर की जयंती समारोह, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम नीरज की देखरेख में आयोजित हुए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि राजनाथ सिंह जब भी सक्रिय राजनीति छोड़ेंगे तो लखनऊ में नीरज सिंह की उनकी विरासत को संभालेंगे। नीरज ने बीते एक दशक में लखनऊ के हर गली- वार्ड और समाज में पकड़ बनाई है। सबसे पहले कलराज पर लागू हुआ 75 वर्ष का फॉर्मूला कलराज मिश्र यूपी के पहले मंत्री थे, जिन पर 75 वर्ष का फॉर्मूला लागू हुआ था। 2019 में कलराज को एमएसएमई मंत्री पद से हटाकर राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कानपुर के सांसद सत्यदेव पचौरी, बरेली के सांसद गंगवार संतोष गंगवार, प्रयागराज की सांसद रीता बहुगुणा जोशी का टिकट भी 75 वर्ष की आयु के फार्मूले पर ही काटा गया। हेमा मालिनी को मिली छूट
हेमा मालिनी को 2024 लोकसभा चुनाव में 75 वर्ष की आयु के नियम में छूट मिली। हेमा को 76 वर्ष की उम्र में भी मथुरा से प्रत्याशी बनाया गया। लोकसभा चुनाव से पहले 2023 में मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भी 75 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं को प्रत्याशी बनाया गया। कल्याण सिंह से रही राजनीतिक अदावत
राजनाथ सिंह और पूर्व सीएम कल्याण सिंह की राजनीतिक अदावत जगजाहिर रही है। ऐसा माना जाता है कि कल्याण सिंह के भाजपा से अलग होने के पीछे राजनाथ सिंह भी बड़ा कारण थे। एक समय कल्याण सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, उस दौरान राजनाथ सिंह मिर्जापुर तक सीमित थे। फिर एक दौर ऐसा भी आया जब राजनाथ सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और कल्याण सिंह उनकी टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। 40 हजार करोड़ के विकास कार्य हुए
राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी बताते हैं कि राजनाथ सिंह के सांसद कार्यकाल में लखनऊ में करीब 40 हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य हुए हैं। 6 हजार करोड़ की लागत से आउटर रिंग रोड बनाया गया। शहर में 17 फ्लाईओवर बन गए हैं और आठ फ्लाईओवर निर्माणाधीन हैं। गोमतीनगर रेलवे टर्मिनस, आलम नगर सैटेलाइट स्टेशन, चारबाग रेलवे स्टेशन की द्वितीय एंट्री, अमौसी एयरपोर्ट पर तीसरा टर्मिनल, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस, लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर तक फोर लेन हाईवे का निर्माण हुआ। लखनऊ से सुल्तानपुर होते हुए गाजीपुर तक एनएच 31 फोर लेन और हैदर कैनाल पर एसटीपी का निर्माण कराया है। शहीद पथ भी राजनाथ की देन
दिवाकर त्रिपाठी बताते हैं कि शहीद पथ भी तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह की देन है। वह बताते हैं कि सन 1999 में अटलजी प्रधानमंत्री बनने के बाद लखनऊ आए। ज्योतिबा फूले मैदान में उनका स्वागत समारोह रखा गया। दिवाकर त्रिपाठी उस दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी थे। त्रिपाठी ने एक पर्ची लालजी टंडन को देते हुए शहीद पथ बनवाने की मांग करने का आग्रह किया। लालजी टंडन ने जैसे ही मंच से मांग रखी। अटलजी ने राजनाथ सिंह की तरफ देखा, राजनाथ सिंह ने तुरंत खड़े होकर आग्रह को स्वीकार करते हुए शहीद पथ बनाने की घोषणा की। छात्र गर्व से कहते- हम राजनाथ सिंह कार्यकाल के इंटर पास हैं
राजनाथ सिंह ने कल्याण सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री रहते हुए नकल विरोधी अध्यादेश लागू किया था। जिस साल अध्यादेश लागू हुआ उस साल यूपी में नकल माफिया पर पूरी तरह लगाम कस गई। बोर्ड परीक्षा का परिणाम एक तरफा गिर गया, कई जिलों का परिणाम 20 फीसदी से ज्यादा नहीं रहा। उस समय जो विद्यार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पास हुए, वह गर्व से कहते थे हम राजनाथ और कल्याण सिंह के कार्यकाल के इंटर पास हैं। दो बार कल्याण सिंह की सरकार बचाई
राजनाथ सिंह के ओएसडी रहे अशोक तिवारी बताते हैं, राजनाथ सिंह का यूपी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का कार्यकाल बड़ी-बड़ी घटनाओं से भरा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए राजनाथ सिंह ने दो बार कल्याण सिंह की सरकार बचाई थी। सिंतबर 1997 में कल्याण सिंह सरकार से मायावती ने बहुमत वापस लिया। राजनाथ सिंह के प्रयास से बसपा तोड़कर जन बसपा और कांग्रेस के विधायक तोड़कर लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन हुआ। दोनों दलों के समर्थन से कल्याण सिंह सरकार बची। 1999 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह सरकार को भंग कर जगदंबिका पाल को सीएम पथ की शपथ दिलाई। उस दौरान भी राजनाथ सिंह के प्रयास से ही हाईकोर्ट में मामला गया। हाईकोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया। राजनाथ ने विधायकों को लामबंद कर सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई। ………………….. ये खबर भी पढ़ें… छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। आखिर यह कैसे हुआ? कैसे सब कुछ बदल गया? करोड़ों रुपए कहां से आए? इन सारे सवालों को जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम बलरामपुर में छांगुर बाबा के गांव पहुंची। जो कुछ निकलकर सामने आया, वह हैरान करने वाला है। पढ़िए पूरी खबर…