यूपी सरकार में शामिल सुभासपा और निषाद पार्टी के चीफ आमने-सामने आ गए हैं। मामला आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट से जुड़ा है। गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचे सुभासपा चीफ ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि उनकी पार्टी यहां की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसको लेकर तैयारी चल रही है। आजमगढ़ किसी का गढ़ नहीं है। यहां सभी जाति-धर्म के लोग रहते हैं। राजभर ने जिन 10 सीटों की बात की है, उनमें अतरौलिया सीट भी शामिल है, जहां से 2022 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने चुनाव लड़ा था। राजभर के इस बयान को लेकर संजय निषाद ने नाराजगी जताते हुए पलटवार किया। वाराणसी में संजय निषाद ने कहा- अभी तो सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है। न ही किसी सीट को लेकर किसी कोई बातचीत हुई है। फिर भी ओमप्रकाश राजभर ने अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही, जो ठीक नहीं है। यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। पहले जानिए संजय निषाद ने क्या कहा… कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा- अतरौलिया की सीट निषाद बिरादरी बाहुल्य सीट है। यहां पर निषाद पार्टी की पहली दावेदारी है। पिछले विधानसभा चुनाव में निषाद प्रत्याशी कुछ वोटों से हारकर रनर रहा था। इस चुनाव में निषाद प्रत्याशी ही जरूर लड़ेगा। अगर मुझे गठबंधन में सीट नहीं मिली, तो हमारा प्रत्याशी निर्दलीय या निषाद पार्टी से लड़ेगा। संजय निषाद ने कहा- ओम प्रकाश राजभर ने बिना किसी चर्चा के ऐलान किया है, तो वही इस बारे में जानें। हम मर्यादा में रहने वाले हैं। उन्होंने मर्यादा का मान नहीं रखा। उनको बातचीत करनी थी। अगर हम भी उनकी सीट पर ऐसे ही ऐलान करने लगे, तो क्या उनको ठीक लगेगा? भाजपा हमारे लिए बड़े भाई के समान
संजय निषाद ने कहा- भाजपा हमारे लिए बड़े भाई जैसी है। हम हमेशा उसकी राय के अनुसार ही काम करते हैं। गठबंधन का यह नियम होता है कि बिना किसी सहमति के हम कोई राय नहीं दें। वैसे भाजपा ने हमें आज तक जो भी राजनीतिक राय दी है, हमारे लिए पूरी तरह से फायदेमंद रही है। वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा, यह देखना चाहिए
संजय निषाद ने कहा- अगर वास्तव में राजभर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें इस मामले में बात जरूर करनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा है? पूरे प्रदेश में 80 सीटों पर निषाद समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में भाजपा हमें जिन सीटों से भी चुनाव लड़ाएगी, हम वहां से जीत कर दिखाएंगे। पिछले चुनाव में कुछ सीटें ऐसी थीं, जहां हमारी हार-जीत का अंतर काफी कम था। राजभर की बात पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना
संजय निषाद ने बताया कि 2022 के चुनाव में भाजपा से गठबंधन में अतरौलिया सीट हमारी पार्टी को मिली थी। यहां से हमने प्रशांत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन, वह सपा के संग्राम यादव से हार गए थे। वह दूसरे नंबर पर रहे थे। इस हार के बाद भी प्रशांत सिंह ने इलाके में निषाद पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे में राजभर का यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। अब पढ़िए आजमगढ़ में राजभर ने क्या कहा सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नजर अब आजमगढ़ पर है। इसीलिए वह 3 महीने से लगातार आजमगढ़ का दौरा कर रहे हैं। गुरुवार को राजभर ने आजमगढ़ में कहा- सुभासपा यहां की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे। इस बार 40 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीतेंगे। मुजफ्फरनगर में जब दंगे हो रहे थे, तब अखिलेश नाच देख रहे थे दैनिक भास्कर से बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने किडनी कांड और धुरंधर फिल्म पर बयानबाजी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा। कहा कि वह कोडीन भैया, कालीन भैया की बात करते हैं। रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात नहीं करते। 27 परसेंट आरक्षण लागू करने की बात नहीं करेंगे। पिछड़ों को हिस्सा दिलाने की बात नहीं करेंगे। उल्टा-पुल्टा बयानबाजी करते हैं। राजभर ने कहा- अखिलेश यादव को यह बताना चाहिए कि जब मुजफ्फरनगर में दंगे हो रहे थे, तब वो सैफई में नाच देख रहे थे। सपा की सरकार में दंगे होते थे। कर्फ्यू लगता था। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार है। कोई दंगा नहीं हुआ। यूपी में सब चंगा है। हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन की मजबूती को लेकर जुट जाने के लिए कहा है। हमारे सभी कार्यकर्ता तेजी से तैयारियों में लगे हुए हैं। अब जानिए अतरौलिया सीट का समीकरण
अतरौलिया सीट पर सपा विधायक संग्राम यादव 2012 से लगातार जीत रहे हैं। इसी सीट से इनके पिता बलराम यादव भी 4 बार से विधायक रह चुके हैं। वह सपा सरकार में मंत्री पद पर भी रहे हैं। अगर आंकड़ों को देखा जाए, तो अतरौलिया सीट से अभी तक एक बार कांग्रेस और 2 बार बसपा के प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद सपा के संग्राम यादव ने बाजी मारी थी। जातिगत वोटरों की बात करें, तो दलित और सवर्ण वोटरों की जीत में अहम भूमिका रहती है। यहां पर यादव 60 से 70 हजार और मुस्लिम 40 से 50 हजार के बीच हैं। राजभर और निषाद 60 से 70 हजार के बीच हैं। इसके अलावा दलित (जाटव, पासी) 40 हजार से 50 हजार के बीच हैं। ब्राह्मण मतदाता 20 से 30 हजार, क्षत्रिय 20 से 25 हजार, वैश्य/बनिया भी करीब 25 हजार और अन्य छोटी जातियां 20 से 30 हजार के बीच हैं। ऐसे में सवर्ण और दलित वोट जिस तरफ जाता है, जीत लगभग उसी पार्टी के प्रत्याशी की होती है। यादव और मुस्लिम फैक्टर के साथ ही विकास कार्यों की बदौलत संग्राम यादव लातार जीतते रहे हैं। आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… —————————– ये खबर भी पढ़िए- नोएडा एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र की गड्ढे में डूबकर मौत, परीक्षा खत्म होने के बाद दोस्तों के साथ गया था नोएडा में एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 साल के छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, बुधवार शाम को परीक्षा खत्म होने के बाद हर्षित अपने तीन दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था। इसी दौरान वह गड्ढे में उतर गया। वह गहराई में चला गया और डूबने लगा। पढ़ें पूरी खबर
संजय निषाद ने कहा- भाजपा हमारे लिए बड़े भाई जैसी है। हम हमेशा उसकी राय के अनुसार ही काम करते हैं। गठबंधन का यह नियम होता है कि बिना किसी सहमति के हम कोई राय नहीं दें। वैसे भाजपा ने हमें आज तक जो भी राजनीतिक राय दी है, हमारे लिए पूरी तरह से फायदेमंद रही है। वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा, यह देखना चाहिए
संजय निषाद ने कहा- अगर वास्तव में राजभर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें इस मामले में बात जरूर करनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा है? पूरे प्रदेश में 80 सीटों पर निषाद समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में भाजपा हमें जिन सीटों से भी चुनाव लड़ाएगी, हम वहां से जीत कर दिखाएंगे। पिछले चुनाव में कुछ सीटें ऐसी थीं, जहां हमारी हार-जीत का अंतर काफी कम था। राजभर की बात पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना
संजय निषाद ने बताया कि 2022 के चुनाव में भाजपा से गठबंधन में अतरौलिया सीट हमारी पार्टी को मिली थी। यहां से हमने प्रशांत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन, वह सपा के संग्राम यादव से हार गए थे। वह दूसरे नंबर पर रहे थे। इस हार के बाद भी प्रशांत सिंह ने इलाके में निषाद पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे में राजभर का यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। अब पढ़िए आजमगढ़ में राजभर ने क्या कहा सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नजर अब आजमगढ़ पर है। इसीलिए वह 3 महीने से लगातार आजमगढ़ का दौरा कर रहे हैं। गुरुवार को राजभर ने आजमगढ़ में कहा- सुभासपा यहां की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे। इस बार 40 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीतेंगे। मुजफ्फरनगर में जब दंगे हो रहे थे, तब अखिलेश नाच देख रहे थे दैनिक भास्कर से बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने किडनी कांड और धुरंधर फिल्म पर बयानबाजी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा। कहा कि वह कोडीन भैया, कालीन भैया की बात करते हैं। रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात नहीं करते। 27 परसेंट आरक्षण लागू करने की बात नहीं करेंगे। पिछड़ों को हिस्सा दिलाने की बात नहीं करेंगे। उल्टा-पुल्टा बयानबाजी करते हैं। राजभर ने कहा- अखिलेश यादव को यह बताना चाहिए कि जब मुजफ्फरनगर में दंगे हो रहे थे, तब वो सैफई में नाच देख रहे थे। सपा की सरकार में दंगे होते थे। कर्फ्यू लगता था। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार है। कोई दंगा नहीं हुआ। यूपी में सब चंगा है। हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन की मजबूती को लेकर जुट जाने के लिए कहा है। हमारे सभी कार्यकर्ता तेजी से तैयारियों में लगे हुए हैं। अब जानिए अतरौलिया सीट का समीकरण
अतरौलिया सीट पर सपा विधायक संग्राम यादव 2012 से लगातार जीत रहे हैं। इसी सीट से इनके पिता बलराम यादव भी 4 बार से विधायक रह चुके हैं। वह सपा सरकार में मंत्री पद पर भी रहे हैं। अगर आंकड़ों को देखा जाए, तो अतरौलिया सीट से अभी तक एक बार कांग्रेस और 2 बार बसपा के प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद सपा के संग्राम यादव ने बाजी मारी थी। जातिगत वोटरों की बात करें, तो दलित और सवर्ण वोटरों की जीत में अहम भूमिका रहती है। यहां पर यादव 60 से 70 हजार और मुस्लिम 40 से 50 हजार के बीच हैं। राजभर और निषाद 60 से 70 हजार के बीच हैं। इसके अलावा दलित (जाटव, पासी) 40 हजार से 50 हजार के बीच हैं। ब्राह्मण मतदाता 20 से 30 हजार, क्षत्रिय 20 से 25 हजार, वैश्य/बनिया भी करीब 25 हजार और अन्य छोटी जातियां 20 से 30 हजार के बीच हैं। ऐसे में सवर्ण और दलित वोट जिस तरफ जाता है, जीत लगभग उसी पार्टी के प्रत्याशी की होती है। यादव और मुस्लिम फैक्टर के साथ ही विकास कार्यों की बदौलत संग्राम यादव लातार जीतते रहे हैं। आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… —————————– ये खबर भी पढ़िए- नोएडा एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र की गड्ढे में डूबकर मौत, परीक्षा खत्म होने के बाद दोस्तों के साथ गया था नोएडा में एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 साल के छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, बुधवार शाम को परीक्षा खत्म होने के बाद हर्षित अपने तीन दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था। इसी दौरान वह गड्ढे में उतर गया। वह गहराई में चला गया और डूबने लगा। पढ़ें पूरी खबर