अहमदाबाद में प्लेन क्रैश हादसे के बाद लखनऊ एयरपोर्ट के जिम्मेदारों ने भी सतर्कता शुरू की। हादसे के बाद जिला प्रशासन, अमौसी एयरपोर्ट अथॉरिटी और LDA ने हाईलेवल मीटिंग की थी। इसमें अफसरों ने एयरपोर्ट के आसपास मानकों के विपरीत बनी इमारतों पर एक्शन की तैयारी की। जो भी बिल्डिंग तय ऊंचाई से ज्यादा होगी उसका उतना हिस्सा तोड़ दिया जाएगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक्शन की सूची में 15 इमारतों के नाम डाल दिए हैं जिन पर जल्द ही एक्शन लिया जाएगा। इस बैठक के बाद दैनिक भास्कर रिपोर्टर जमीनी हकीकत जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। यहां पाया कि एयरपोर्ट के आसपास इमारतें ही नहीं, बल्कि और भी कई निर्माण हैं जिन्हें नजरअंदाज किया गया। नो कंस्ट्रक्शन जोन में करीब 60-70 मीटर ऊंचा टावर लगा है। जिस जोन के लिए नियम केवल 1 मंजिला मकान का है, वहां 2 मंजिला मकान बना है। इतना ही नहीं, उसके ऊपर होर्डिंग भी लगी है। जिस जोन में 11 मीटर से ऊंची बिल्डिंग नहीं होनी चाहिए वहां 10 मंजिला होटल है। तीनों जोन में करीब 8 टावर, कई मकान और होटल ऐसे हैं जिनकी हाइट नियम का उल्लंघन करती है। पहले जानिए एयरपोर्ट के आसपास बिल्डिंग बनाने के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियम… एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सभी हवाई हड्डों के आसपास निर्माण के लिए 3 जोन बनाए हैं। जोन-1 में 100 मीटर के सर्कल को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया है। यानी इस दायरे में कोई निर्माण नहीं होगा। जोन-2 में 101 से 200 मीटर तक की दूरी पर 1 मंजिला से ऊंचा मकान नहीं बनवाया जा सकता। वहीं, जोन-3 में 201 से 300 मीटर तक की दूसरी पर 2 मंजिला तक ही घर बनवाए जा सकते हैं। इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानेंगे अमौसी एयरपोर्ट के आसपास के निर्माणों के मौजूदा हालात… पहले 3 तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जोन-1 (100 मीटर) : नो कंस्ट्रक्शन जोन में मोबाइल फोन के टावर एयरपोर्ट के बेहद निकट यानी महज 100 मीटर की परिधि को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण प्रतिबंधित है, फिर भी यहां रनवे के जस्ट बगल मोबाइल फोन के 2 टावर मौजूद हैं। इनकी ऊंचाई 60 मीटर के करीब होगी। प्रतिबंधित तीनों में ऐसे करीब 7-8 टावर आते हैं। हवाई सुरक्षा मानकों के अनुसार, इतने पास स्थित इतनी ऊंची इमारतें या स्ट्रक्चर ऑब्सटेकल लिमिटेशन सरफेस (OLS) का उल्लंघन करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टावर के अलावा और भी बिल्डिंग हैं जो वर्तमान विमानों की टेकऑफ दिशा में आती हैं। जोन-2 (200 मीटर) : रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से होर्डिंग्स लगीं एयरपोर्ट के 200 के दायरे में शांतिनगर और अमौसी रोड जैसे घने रिहायशी इलाके हैं। नियमों के मुताबिक, यहां एक मंजिल या अधिकतम 11 मीटर ऊंचाई तक ही निर्माण किया जा सकता है। इसके उलट यहां की हकीकत इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है। इन इलाकों में सैकड़ों मकानों की छतों पर बिना किसी अनुमति के बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स, एलईडी बोर्ड और फ्लैश डिस्प्ले लगे हुए हैं। ये होर्डिंग्स रात के समय विमानों की लैंडिंग के दौरान ATC टावर से उड़ान निर्देश प्राप्त करने वाले पायलटों के लिए दृश्य भ्रम पैदा कर सकते हैं। ATC सूत्रों के मुताबिक, बीते एक वर्ष में 6 बार ऐसी होर्डिंग्स की वजह से विजिबिलिटी संबंधी दिक्कतें दर्ज की गईं। इनमें से अधिकांश को हटाने के आदेश तो दिए गए, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। जोन-3 (800 मीटर) : फाइव स्टार होटल जो टेकऑफ में बन सकता है बाधा लखनऊ एयरपोर्ट से महज 800 मीटर की दूरी पर बने हॉलिडे इन और लेमन ट्री जैसे नामचीन फाइव और थ्री स्टार होटल शहर के विकास की कहानी तो कह रहे हैं, लेकिन ये उड़ानों के लिए संभावित खतरे भी बनते जा रहे हैं। दोनों होटलों की ऊंचाई 6 से 10 मंजिला तक है, जबकि इस दूरी पर अधिकतम 11 मीटर यानी दो मंजिला निर्माण की अनुमति है। नागरिक उड्डयन की गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई इमारत तय ऊंचाई से ज्यादा है और वह रनवे के अप्रोच जोन में आती है, तो वह एक “एरियल हजार्ड” मानी जाती है। पायलटों और टेक्निकल स्टाफ की मानें तो कम दृश्यता तेज बारिश या खराब मौसम में ये होटल एक गंभीर ऑपरेशनल खतरा बन सकते हैं। अभी तक इन्हें लेकर जो कार्रवाई हुई, वो सिर्फ चेतावनी नोटिसों तक सीमित रही है। हवाई सुरक्षा के लिए एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द निर्माण के लिए गाइडलाइन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने क्या कहा… एयरपोर्ट प्रशासन ने 15 इमारतें चिह्नित कीं एलडीए, एयरपोर्ट प्रशासन और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने पहले भी कई बार उन 15 प्रमुख इमारतों को चिह्नित किया था, जिनकी ऊंचाई खतरनाक सीमा से ऊपर है। इनकी ऊपरी मंजिलों को तोड़ने के आदेश भी जारी हुए, लेकिन ज्यादातर जगह या तो राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ या नोटिसों के जवाब तक ही मामला सीमित रहा। प्रशासन ने ऐसी इमारतों पर अब तक क्या एक्शन लिए लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर के दायरे में लेजर लाइट और पतंग उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, पक्षियों को आकर्षित करने वाली मांस और मछली की दुकानों को हटाने का निर्णय लिया गया है। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं… एयरपोर्ट के पास मीट की दुकानें इसलिए नहीं होनी चाहिए मेजर विराट मिश्रा (रि.) ने बताया- एयरपोर्ट का एरिया सेंसिटिव होता है। इसके आसपास कई सारी गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं। इसके पास मीट की दुकानें इसलिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि उसकी वजह से वहां पक्षियों का बहुत आना-जाना हो सकता है। इसके अलावा मोबाइल टावर, ईंट भट्ठे वाली चिमनी, क्रेन लगाना, कचरे के डंप, झील या जलाशय भी एयरपोर्ट के पास नहीं होने चाहिए। चिमनी, क्रेन और ऊंचे मकान विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ में बाधा बनते हैं। वहीं, झील-जलाशय, डंप कूड़ा-कचरा और मीट प्रोसेसिंग यूनिट पक्षियों को आकर्षित करता है। एयरपोर्ट के पास चमकदार रोशनी या लेजर शो भी प्रतिबंधित है। ये रोशनी पायलट को चकाचौंध कर सकती है। 2024 में 50 से ज्यादा ऊंचे मकानों पर हुआ था केस पिछले साल एयरपोर्ट के पास बने 50 से ज्यादा ऊंचे मकान बनवा लिए गए थे। इसका मामला कमिश्नर कोर्ट तक पहुंच गया था। उसके बाद LDA ने मकानों को सील कर दिया। उस कार्रवाई के बाद लोगों ने LDA की सील मार्किंग पर पेंट कर फिर से रहना शुरू कर दिया। कमिश्नर कोर्ट ने निर्णय दिया कि 39 मकानों को गिरा दिया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़िए… अवध बार एसोसिएशन के एस चंद्रा बने अध्यक्ष:ललित तिवारी महासचिव, ट्रेजरार पद पर आलोक कुमार त्रिपाठी की जीत लखनऊ में अवध बार एसोसिएशन चुनाव में अध्यक्ष पद पर एस चंद्रा की जीत हुई है। महासचिव ललित किशोर तिवारी बने हैं, जबकि आलोक कुमार त्रिपाठी ट्रेजरार का चुनाव जीते हैं। इनकी जीत के बाद समर्थकों और बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। (पूरी खबर पढ़िए)