लखनऊ में टिटनेस के मरीज को ठीक किया:निजी मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में ICU में भर्ती कर इलाज हुआ

लखनऊ में सीतापुर निवासी मरीज टिटनेस की चपेट में आने के बाद रिकवर हुआ है। सीतापुर निवासी राजेश कुमार गंभीर टिटनेस से पीड़ित थे, जिससे उनके मांसपेशियों में अकड़न आ गई थी और मुंह खुलना बंद हो गया था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद, डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया। टिटनेस के कारण सीतापुर निवासी किसान राजेश कुमार (40) का मुंह खुलना बंद हो गया था। मांसपेशियां अकड़ गई थीं। शरीर में मामूली हरकत थी। परिवारीजन सभी उम्मीद खो बैठे थे। गंभीर अवस्था में मरीज को एरा मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां डॉक्टरों को नया जीवन देने में कामयाबी मिली। गंभीर हालत में किया गया भर्ती एरा मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने बताया कि सिजर टिटनेस की वजह से रेस्पिरेटरी पैरालिसिस हो जाता है। खाना सांस की नली में चला जाता है, जो जानलेवा हो सकता है। इलाज के दौरान 40% ही गंभीर टिटनेस के मरीज बच पाते हैं। उन्होंने बताया कि राजेश कुमार भी गंभीर अवस्था में 16 जून भर्ती किया गया। परिवारजनों ने बताया कि लगभग 20 दिन पहले खेत में काम करते समय लोहे की कील से उसे चोट लग गई थी। चार दिन के बाद उसकी तबीयत खराब होने लगी। पहले सीतापुर के एक स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां से दो दिन बाद उसे रेफर कर दिया गया। 4 से 21 दिन में आते हैं लक्षण डॉ.मुस्तहसिन ने बताया कि टिटनेस का लक्षण 4 से 21 दिन के अन्दर आ सकता है। गंभीरता को भांपते हुए हमने राजेश को तत्काल आईसीयू में शिफ्ट किया। टिटनेस का इलाज शुरू कर दिया। तीन सप्ताह बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। 10 साल में बूस्टर डोज जरूरी उन्होंने बताया कि टिटनेस आमतौर पर मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न एक विष के कारण होता है, जो गहरे घावों में प्रवेश कर जाता है। इसका तुरंत इलाज होता है। उन लोगों को अधिक खतरा रहता है, जिन्हें पूरी तरह से टीका नहीं लगा है। उन्होंने बताया कि टिटनेस से बचने के लिए सभी को प्रत्येक 10 वर्ष में टिटनेस का बूस्टर टीका लगवाना चाहिए।