लखनऊ से 45 मिनट में कानपुर पहुंचेंगे:हाईवे के सफर से 3 गुना ज्यादा टोल देना होगा, अगले महीने हो सकता है उद्घाटन

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार है। यह यूपी के सबसे छोटे एक्सप्रेस-वे में शामिल है, लेकिन इस पर सफर करने के लिए 3 गुना टोल देना होगा। अब लखनऊ से कानपुर तक का सफर 3 घंटे के बजाय सिर्फ 45 मिनट में पूरा हो जाएगा। हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे पर 120 किमी की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेंगी। हालांकि, कार-वैन को ही चलने की अनुमति है, बाइक नहीं चल सकेंगी। 63 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे का 18 किमी हिस्सा एलिवेटेड (पिलर पर बनी सड़क) है। निगरानी के लिए लगाए गए CCTV कैमरे 500 मीटर की रेंज तक देख सकते हैं। यात्रियों के लिए रास्ते में फ्यूल स्टेशन, रेस्टोरेंट, ट्रामा सेंटर और पार्किंग की सुविधाएं बन रही हैं। टोल टैक्स के बोर्ड भी लग चुके हैं। इसका उद्घाटन भी अगले महीने होने की बात कही जा रही है। ऐसे में लोगों को क्या उतनी सुविधाएं भी मिलेंगी? यह देखने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने एक्सप्रेस-वे पर सफर किया। समझा कि दावे कितने सही हैं? पढ़िए रिपोर्ट… उद्घाटन से पहले बंथरा तक ट्रैफिक चलने लगा
हमारी टीम नेशनल हाईवे-27 पर पहुंची। हम लखनऊ से चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट (अमौसी) की तरफ बढ़े। वहां मेन रोड पर जाम लगा था। इससे होते हुए हम सरोजनीनगर पहुंचे। यहां से एलिवेटेड पुल पर चढ़ने की कोशिश की। देखा, रोड ब्लॉक करते हुए पत्थर रखे थे। लेकिन, एक हिस्सा खुला हुआ था। बाइक सवार यहां से एक्सप्रेस-वे पर जा रहे थे। दरअसल, एक्सप्रेस-वे आम लोगों के लिए बंद है। लेकिन, लोग बंथरा तक इस पर चलने लगे हैं। NHAI के अधिकारियों से बात करके हमने पूरे एक्सप्रेस-वे पर कवरेज की अनुमति ली। इसके बाद हम एक्सप्रेस-वे पर आ गए। करीब 3-4 किमी चलने पर हमें स्कूटर इंडिया (पुरानी फैक्ट्री) दिखा। इस वक्त सड़क एलिवेटेड थी। हमने नीचे झांककर देखा। नेशनल हाईवे-27 पर जहां कभी जाम लगता था, अब लोग वहां आराम से गाड़ियां लेकर निकल पा रहे थे। आउटर रिंग रोड के लिए सर्विस लेन भी तैयार
थोड़ा आगे चलने के बाद एलिवेटेड रोड नीचे की तरफ उतर गई, क्योंकि सामने लखनऊ आउटर रिंग रोड है। अगर कोई कानपुर से आता है और उसे रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, सुल्तानपुर जाना हो, तो उसे लखनऊ शहर में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह इसी रास्ते से निकल जाएगा। आउटर रिंग रोड करीब 105 किमी के एरिया में बनी है। यहां रिंग रोड पर चढ़ने और उतरने के लिए सर्विस रोड बन चुकी है। ट्रांसमिशन लाइन मोनोपोल से होकर गुजर रहीं
एक्सप्रेस-वे पर 12 किमी चलने के बाद हम बंथरा के गौरी चौराहा पर पहुंचे। पता चला कि यहां एक्सप्रेस-वे बनाने में सबसे ज्यादा वक्त लगा। दरअसल, यहां से 1.32 लाख वोल्ट की ट्रांसमिशन लाइनें गुजरती हैं। उसे हटाने के लिए 3 मोनोपोल बनाने की जरूरत थी। मोनोपोल बनने के बाद टेस्टिंग के लिए हैदराबाद भेजे गए। टेस्टिंग में 2 मोनोपोल ही पास हो पाए। तीसरा मोनोपोल दोबारा बनाना पड़ा। टेस्टिंग में पास होने के बाद लखनऊ लाया गया। तब जाकर कहीं ट्रांसमिशन लाइन शिफ्ट की जा सकी। इसके बाद यहां एक्सप्रेस-वे बन सका। बनी स्पॉट से एक्सप्रेस-वे और हाईवे अलग हो गए
लखनऊ से गुजरने वाले एक्सप्रेस-वे का ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड है। इसकी वजह यह है कि नीचे नेशनल हाईवे मौजूद है। अमौसी से दरोगाखेड़ा तक एक्सप्रेस-वे 4 लेन है। इसके आगे बनी (जगह का नाम) से एक्सप्रेस-वे और हाईवे अलग हो जाते हैं। ये एक्सप्रेस-वे ग्रीनलैंड एरिया में बना हुआ है। मतलब यहां पहले कोई रास्ता नहीं था। उन्नाव जिले के गांव दतौली, कांथा, तौरा, नेरोना से होते हुए अमरसास तक जाता है। हमारी गाड़ी इन गांव के ऊपर से होते हुए गई। सड़क का कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है। 3 गुना ज्यादा टोल देना होगा
पूरे एक्सप्रेस-वे पर कुल 4 टोल प्लाजा बनाए गए हैं। अगर आप कार से सफर करते हैं, तो एक तरफ का टोल 275 रुपए लगेगा। अगर 24 घंटे में वापसी करते हैं, तो कुल टोल 410 रुपए होगा। अभी हाईवे से कानपुर पहुंचने के लिए नवाबगंज के टोल प्लाजा से जाना होता था। हाईवे पर कार का टोल 95 रुपए लगता है। यानी हाईवे से एक्सप्रेस-वे पर चलने के लिए तीन गुना ज्यादा टोल देना होगा। रेस्टोरेंट और फ्यूल स्टेशन बनाए जाएंगे
एक्सप्रेस-वे पर फ्यूल स्टेशन, रेस्टोरेंट, ट्रामा सेंटर और पार्किंग की सुविधाएं भी देने की तैयारी है। उन्नाव से गुजरते हुए हमें सड़क के किनारे कई स्पॉट खाली मिले। NHAI के अधिकारियों से पता चला कि अलग-अलग स्पॉट पर रेस्टोरेंट और फ्यूल स्टेशन बनाए जाने हैं। वहीं, ट्रामा सेंटर टोल प्लाजा के पास बनाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, उद्घाटन होने के बाद इनका कंस्ट्रक्शन कराया जाएगा। फिलहाल रेस्ट एंड सर्विस के बोर्ड एक्सप्रेस-वे पर लगा दिए गए हैं। एक्सप्रेस-वे क्यों है खास… हाईटेक कैमरे- एक्सप्रेस-वे पर चलते हुए हर 1 किमी पर CCTV नजर आए। NHAI के अधिकारियों ने बताया कि पूरे एक्सप्रेस-वे पर 63 CCTV लगाए गए हैं। ये कैमरे इतने पॉवरफुल हैं कि 500 मीटर तक साफ देखा जा सकता है। जूमिंग पावर अच्छी है। ऊपर और नीचे की तरफ मूव कर सकते हैं। 6 इंटरचेंज- सड़क पर 6 जगह इंटरचेंज बनाए गए हैं। लोग यहां से एक्सप्रेस-वे पर एंट्री और एग्जिट कर सकते हैं। इसमें शहीदपथ से आगे बढ़ने पर मेन टोल का स्पॉट बना है। फिर 2 स्पॉट लखनऊ में ही बनी और हरौनी में बनाए गए हैं। बाकी के 2 स्पॉट उन्नाव में अजगैन और अमरसास पर बनाए गए हैं। फिर कानपुर के आजाद चौक पर मेन टोल बना है। ऑनलाइन चालान- इंटरचेंज पर निगरानी के लिए 21 CCTV लगाए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि गलत दिशा से सड़क पर आने वालों को इन्हीं कैमरों में देखकर चालान काटा जाएगा। एक्सीडेंट अलर्ट- एक्सप्रेस-वे इसलिए भी खास है, क्योंकि एक्सीडेंट, आग लगने और रुकी हुई गाड़ियों का अलर्ट देने के लिए 16 VIDS (वीडियो इंसीडेंट डिटेक्शन सिस्टम) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे AI से लैस होते हैं। ये कंट्रोल रूम को मैसेज देंगे। वहां से मदद भेजी जाएगी। कंट्रोल रूम मैनेजमेंट- इस सड़क पर 2 कंट्रोल रूम बन चुके हैं। पहला- 27 किमी पर। दूसरा- 35 किमी पर। यहीं से निगरानी की जाएगी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का दावा है कि लखनऊ से कानपुर लोग 45 मिनट में पहुंच सकेंगे। लेकिन, ऐसा होता नहीं दिखा। लिंक पर अंडरपास, 6 फ्लाईओवर, 28 छोटे पुल बनाए
एक्सप्रेस-वे पर जहां लिंक रोड थीं, वहां अंडरपास बनाए गए थे। ऐसे 38 अंडरपास दिखे। 6 फ्लाईओवर, 3 बड़े और 28 छोटे पुल बनाए गए हैं, जिससे हाईस्पीड (120 किमी) पर गाड़ियां दौड़ सकें। अभी तक लखनऊ से कानपुर जाने के लिए लोग नेशनल हाईवे-27 का सहारा लेते थे। हाईवे से दोनों शहरों की दूरी 93 किमी पड़ती है। सड़क के बाद लोगों के पास सिर्फ ट्रेन का ऑप्शन था। ट्रेन से दोनों शहरों के बीच की दूरी 74 किमी है। ट्रेन से सफर में 2 घंटे लगते हैं। लखनऊ-कानपुर के बीच फ्लाइट शुरू नहीं की गई है। कनेक्टिंग फ्लाइट हैं, लेकिन सफर का खर्च 7 से 8 हजार रुपए तक पहुंच जाता है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे क्यों बनाना पड़ा
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर जाम की स्थिति रहती थी। इसी को देखते हुए तय किया गया कि दोनों शहरों के बीच एक्सप्रेस-वे बनाया जाए। नवंबर, 2018 में इस प्रोजेक्ट की डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) यूपी सरकार को सौंपी गई, लेकिन कोरोना के चलते काम रुक गया। सितंबर, 2020 से फरवरी, 2021 के बीच जमीनों का अधिग्रहण पूरा हुआ। मुआवजे के तौर पर किसानों को करीब 900 करोड़ रुपए दिए गए। अप्रैल 2021 में कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ। यह लखनऊ के 11 गांव और उन्नाव जिले के 31 गांव से होकर गुजरता है। सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे क्यों कहा गया?
NHAI के अधिकारियों के मुताबिक, 62.7 किमी लंबी सड़क बनाने के लिए 4700 करोड़ रुपए खर्च हुए। यानी 1 किमी सड़क बनाने के लिए करीब 75 करोड़ रुपए खर्च हुए। 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे 37 हजार 350 करोड़ रुपए में बना था। यानी हर किमी पर करीब 63 करोड़ रुपए खर्च हुए। इस तरह से ये अब तक का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे होगा। इसकी वजह यहां की जमीनों के सर्किल रेट ज्यादा होना है। किसानों को 900 करोड़ रुपए सिर्फ मुआवजे में दिए गए। आर्थिक असर- ————————-
ये खबर भी पढ़ें… मेरठ से अब 6 घंटे में पहुंचेंगे प्रयागराज, गंगा एक्सप्रेस-वे पर ड्राइवरों को नहीं आएगी झपकी यूपी में 594Km लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे लगभग तैयार हो चुका है। अब फिनिशिंग चल रही है। PM मोदी इसका उद्धाटन कर सकते हैं। पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी सिर्फ 6 घंटे में पूरी हो जाएगी। अब तक 11-12 घंटे लगते हैं। पढ़िए पूरी खबर…