‘हेल्प मी…मदद करो… ये कहते हुए बेटा चीख रहा था। लोग VIDEO बना रहे थे, बचाने के लिए कोई कुछ नहीं कर रहा था। मैंने उन्हें डांटा। फिर भी कोशिश नहीं हुईं। मेरा बेटा तो खामखाह ही मर गया।’ ये दर्द है नोएडा के इंजीनियर युवराज के पिता राजकुमार मेहता का…। पिता ने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे युवराज को कार के साथ डूबते हुए देखा। राजकुमार कहते हैं कि मौके पर 80 कर्मचारी थे। कोई भी पानी में नहीं उतरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हादसे पर नाराज हैं। नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेशन एम. को हटा दिया है। हादसे के लिए जिम्मेदार हर चेहरे को सामने लाने की जिम्मेदारी SIT को दी है। 5 दिन में रिपोर्ट तलब की है। अब 16 जनवरी की रात एक्सीडेंट और रेस्क्यू में हुई लापरवाही कहानी पिता राजकुमार से सुनते हैं। पहले पढ़िए हादसे की रात क्या-कुछ हुआ… 12.20 बजे (रात) कॉल आया, प्लीज बचा लो, पिता बोले- सुनते ही भागा
पिता राजकुमार कहते हैं- शुक्रवार की रात के करीब 12.20 बजे मैं बेड पर लेटा था। अचानक बेटे युवराज का कॉल आया। वो घर ही आने वाला था, इसलिए मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वो मुझे कॉल क्यों कर रहा है? मैंने फोन उठाया। उधर से घबराई आवाज सुनाई दी। बोला- पापा…पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं। मुझे बचा लीजिए। इतना सुनने के बाद मैं जिन कपड़ों में था, उन्हीं में दौड़ पड़ा। सोसाइटी से निकलने से पहले मैंने एक मैसेज टाइप किया और सोसाइटी के ग्रुप पर पोस्ट किया, ताकि मदद मिल सके। बेटे ने जो नाला बताया था, वो हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था। मैं दौड़ता हुआ उस नाले तक पहुंचा। यहां 30 मिनट तक बेटे को घने कोहरे और अंधेरे में ढूंढने की कोशिश करता रहा, चिल्ला रहा था कि रिस्पॉन्स मिल जाए। फिर मुझे लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ रहा हूं। 12.30 बजे वीडियो बना रहे लोगों से कहा- प्लीज मेरे बेटे को बचाइए
इसके बाद मैं रोड के कट की तरफ पहुंचा, जहां एक बिल्डिंग का निर्माण अधूरा पड़ा था। यहां बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा गया था। वहां पहुंचकर मैं चिल्लाने लगा, मेरी आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया…बचाओ…बचाओ। हेल्प मी… की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यहीं पर बेटा गिरा है। मैं थोड़ा और आगे तक गया, कोहरे में दिखा कि कार पानी में हैं और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है। वो सड़क से 50 से 60 फीट दूर था। धीरे-धीरे डूब रहा था। वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े हम जान सकें कि वो जिंदा है। मैंने डायल-112 पर फोन किया। उस समय करीब साढ़े 12 बज रहे थे। मैं उसे अपने सामने डूबता देख रहा था। वहां और लोग भी थे, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैंने उन लोगों से कहा- प्लीज, वीडियो नहीं बनाइए, मेरे बेटे की मदद करिए। सर्च ऑपरेशन कैसे चला, ये समझिए 12:50 बजे क्रेन 30 फीट पहुंची, युवराज 50 फीट दूर था रात करीब पौने एक बजे डायल-112 के साथ पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कोहरा और घना हो चुका था। विजिबिलिटी लगभग जीरो थी, सबसे पहले पुलिस और अग्निशमन की टीम ने पहले रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया। मगर, रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी। कोई पुलिस वाला कह रहा था कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं। कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं। इसके बाद क्रेन मंगवाई गई। मगर क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ 30-40 फीट तक जा रही थी। वहां मौजूद कोई भी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था। पिता ने बताया- वो गड्ढा शायद 15 से 20 फीट गहरा था, इसलिए गोताखोर वहां होते तो बेटे की जान बच सकती थी। 1.45 बजे SDRF बुलाई, मगर डूब गई कार SDRF की टीम रात 1.15 बजे पहुंची। उसके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। सब चिल्ला रहे थे बचाओ, कुछ तो करो। पिता कहते हैं- मैं खुद पानी में उतरने को तैयार था, लेकिन पुलिस ने मुझको आगे जाने नहीं दिया। 1.45 बजे के आसपास युवराज की कार पूरी तरह पानी डूब गई। उसके ऊपर लेटा युवराज भी पानी में समा गया। ये हम सिर्फ देखते ही रहे। 80 कर्मचारियों ने 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया करीब पौने दो बजे के आसपास NDRF की टीम पहुंची। SDRF और NDRF के 30 कर्मचारी आ चुके थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग के 50 कर्मचारी वहां मौजूद थे। करीब 80 लोगों ने रेस्क्यू और सर्च आपरेशन चलाया। सर्च लाइट, क्रेन और लैडर से मदद से टीम पानी में गई। 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज के शव को 4.15 बजे के आसपास निकाला गया। उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी सांस थम चुकी है। लाइफ जैकेट पहनकर नीचे उतरे अग्निशमन कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही थी, क्योंकि विजिबिलिटी नहीं थी। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी मदद नहीं कर सका। कार को पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका। पिता बोले- प्राधिकरण जिम्मेदार, स्पॉट की शिकायतें हुईं, सब सोते रहे
पिता राजकुमार मेहता ने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार नोएडा प्राधिकरण को ठहराया। उन्होंने कहा- सोसाइटी के लोग पहले भी कई बार शिकायत दे चुके थे। यहां लाइट, रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं, ऐसे में हादसा हो सकता है, लेकिन इंतजाम नहीं किए गए। 15 दिन पहले ट्रक की टक्कर से जो ड्रेन टूटी, उसकी मरम्मत तक नहीं की गई। अब ग्राउंड जीरो से 19 जनवरी के हाल पढ़िए बैरिकेडिंग की, मगर लाइट, रिफ्लेक्टर नहीं लगे पिता राजकुमार मेहता से हादसे की रात की पूरी कहानी समझने के बाद दैनिक भास्कर टीम नोएडा सेक्टर–150 के पास एटीएस ली- ग्रैंडिओस मोड़ पर पहुंची। यहीं पर वो जानलेवा टर्न है, जहां हादसा हुआ। हमने देखा कि जिस जगह पर हादसा हुआ था, वहां पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। मगर कोई लाइट या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे। भीड़ जमा थी, हमें बताया गया कि हर दिन यहां से 10 हजार लोगों की आवाजाही होती है। डबल बेसमेंट खोदकर अधूरा छोड़ा
हमने स्पॉट को करीब से समझा, ड्रेनेज की बाउंड्री टूटी हुई थी। करीब 15 दिन पहले इस दीवार से एक ट्रक टकराया था। इसको रिपेयर नहीं किया गया। इसके आगे एससी-02 सेक्टर-150 का निर्माणाधीन प्लॉट है। ये प्लाट एमजी विश टाउन का है। यहां डबल बेसमेंट का काम किया गया और इसे अधूरा छोड़ दिया गया। नाले के रिसाव से यहां पानी भरता चला गया। लंबे समय से पानी भरा होने की वजह से यहां मिट्टी की दलदल जैसी बन गई थी। यहां सिर्फ 1 बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था– सेक्टर 150। हादसे के स्पॉट को समझने के लिए हमने वहां कई लोगों से बात की। सामने आया कि बिल्डर एमजेड विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड और लोटस ग्रीन ने इस साइट का नक्शा प्राधिकरण से पास कराया था। यहां कामर्शियल दुकानें बननी थीं। बेसमेंट खोदा गया, मगर फिर काम बंद कर दिया गया। इसी प्लाट में पानी भर गया। प्लॉट नहीं, ज्यादातर का यही हाल
हमने देखना शुरू किया, सड़क के दोनों ओर सोसाइटी हैं। जहां भी खाली प्लाट दिखे, वहां यहीं हाल था। प्लॉट में खोदाई की गई और उसे ऐसे ही छोड़ दिया गया था। ज्यादातर में 30 से 40 फीट तक पानी भरा दिख रहा था। कोई ड्रेनेज का सिस्टम ही नहीं था। आधे अधूरे फ्लैट बने थे, जिनसे सरिया निकली हुईं थीं। कंस्ट्रक्शन नहीं हो रहे थे। अब मौके पर मौजूद लोग क्या सोचते हैं, ये पढ़िए नोएडा में रहने वाले विजय महरोत्रा कहते हैं- एक सप्ताह पहले हम चार पांच दोस्त पार्टी से आ रहे थे। हम बिल्कुल ड्रेन के पास आकर रुके। नजर नहीं आ रहा था कि सड़क कहां है, कुछ दिन पहले ट्रक भी यहां आकर फंसा था। उसी से बाउंड्री टूटी थी। अगर से बाउंड्री न टूटी होती तो ये बच्चा अंदर नहीं जाता यहीं रुक जाता। बाउंड्री रिपेयर नहीं की गई। एक्शन, क्या–क्या हुआ… नालेज पार्क कोतवाली पुलिस ने 18 जनवरी को 2 बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज किया है। पिता राजकुमार मेहता ने शिकायत की है। बिल्डर्स के खिलाफ इन धाराओं में FIR लिखी गई- इस हादसे के बाद 19 जनवरी की शाम को 2 घटनाक्रम हुए- पहला. प्राधिकरण के CEO ने जूनियर इंजीनियर को हटाया
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम. ने जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सभी विभागों को अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था देखने के लिए कहा गया। दूसरा. मुख्यमंत्री ने CEO को ही हटा दिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम. को हटा दिया। उन्हें फिलहाल कोई चार्ज नहीं दिया गया। घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। एडीजी जोन मेरठ एसआईटी अध्यक्ष हैं। मंडलायुक्त मेरठ और चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी को भी SIT में शामिल किया गया हैं। एसआईटी 5 दिनों में इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपेगी। अब जानिए पुलिस क्या कहती है… पुलिस आयुक्त बोले- एफआईआर लिखी, जांच कर रहे
डॉक्टर राजीव नारायणी पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) कहते हैं- ये घटना दुखद है। जानकारी मिलते ही मौके पर अग्निशमन की टीम सभी प्रकार के उपकरणों के साथ गई। बचाने का प्रयास किया गया। फाइनल रेस्क्यू एसडीआरएफ को जोड़कर किया गया। उस समय जीरो विजिबिलिटी थी। मगर लड़के को बचाया नहीं जा सका। इस घटना के संबंध में पिता ने शिकायत दी है। FIR लिखी गई है। ……………. ये भी पढ़ें – नोएडा में इंजीनियर की मौत पर एक्शन में आए योगी:तीन सदस्यीय SIT बनाई, ADG मेरठ हेड; प्राधिकरण के CEO को हटाया नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में सीएम योगी एक्शन में आ गए हैं। घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। एडीजी जोन मेरठ एसआईटी अध्यक्ष हैं। मंडलायुक्त मेरठ और चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी को भी SIT में शामिल किया गया हैं। एसआईटी पांच दिनों में इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपेगी। पढ़िए पूरी खबर…
पिता राजकुमार कहते हैं- शुक्रवार की रात के करीब 12.20 बजे मैं बेड पर लेटा था। अचानक बेटे युवराज का कॉल आया। वो घर ही आने वाला था, इसलिए मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वो मुझे कॉल क्यों कर रहा है? मैंने फोन उठाया। उधर से घबराई आवाज सुनाई दी। बोला- पापा…पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं। मुझे बचा लीजिए। इतना सुनने के बाद मैं जिन कपड़ों में था, उन्हीं में दौड़ पड़ा। सोसाइटी से निकलने से पहले मैंने एक मैसेज टाइप किया और सोसाइटी के ग्रुप पर पोस्ट किया, ताकि मदद मिल सके। बेटे ने जो नाला बताया था, वो हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था। मैं दौड़ता हुआ उस नाले तक पहुंचा। यहां 30 मिनट तक बेटे को घने कोहरे और अंधेरे में ढूंढने की कोशिश करता रहा, चिल्ला रहा था कि रिस्पॉन्स मिल जाए। फिर मुझे लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ रहा हूं। 12.30 बजे वीडियो बना रहे लोगों से कहा- प्लीज मेरे बेटे को बचाइए
इसके बाद मैं रोड के कट की तरफ पहुंचा, जहां एक बिल्डिंग का निर्माण अधूरा पड़ा था। यहां बेसमेंट के लिए गड्ढा खोदा गया था। वहां पहुंचकर मैं चिल्लाने लगा, मेरी आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया…बचाओ…बचाओ। हेल्प मी… की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यहीं पर बेटा गिरा है। मैं थोड़ा और आगे तक गया, कोहरे में दिखा कि कार पानी में हैं और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है। वो सड़क से 50 से 60 फीट दूर था। धीरे-धीरे डूब रहा था। वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े हम जान सकें कि वो जिंदा है। मैंने डायल-112 पर फोन किया। उस समय करीब साढ़े 12 बज रहे थे। मैं उसे अपने सामने डूबता देख रहा था। वहां और लोग भी थे, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैंने उन लोगों से कहा- प्लीज, वीडियो नहीं बनाइए, मेरे बेटे की मदद करिए। सर्च ऑपरेशन कैसे चला, ये समझिए 12:50 बजे क्रेन 30 फीट पहुंची, युवराज 50 फीट दूर था रात करीब पौने एक बजे डायल-112 के साथ पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कोहरा और घना हो चुका था। विजिबिलिटी लगभग जीरो थी, सबसे पहले पुलिस और अग्निशमन की टीम ने पहले रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया। मगर, रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी। कोई पुलिस वाला कह रहा था कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं। कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं। इसके बाद क्रेन मंगवाई गई। मगर क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ 30-40 फीट तक जा रही थी। वहां मौजूद कोई भी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था। पिता ने बताया- वो गड्ढा शायद 15 से 20 फीट गहरा था, इसलिए गोताखोर वहां होते तो बेटे की जान बच सकती थी। 1.45 बजे SDRF बुलाई, मगर डूब गई कार SDRF की टीम रात 1.15 बजे पहुंची। उसके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। सब चिल्ला रहे थे बचाओ, कुछ तो करो। पिता कहते हैं- मैं खुद पानी में उतरने को तैयार था, लेकिन पुलिस ने मुझको आगे जाने नहीं दिया। 1.45 बजे के आसपास युवराज की कार पूरी तरह पानी डूब गई। उसके ऊपर लेटा युवराज भी पानी में समा गया। ये हम सिर्फ देखते ही रहे। 80 कर्मचारियों ने 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया करीब पौने दो बजे के आसपास NDRF की टीम पहुंची। SDRF और NDRF के 30 कर्मचारी आ चुके थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग के 50 कर्मचारी वहां मौजूद थे। करीब 80 लोगों ने रेस्क्यू और सर्च आपरेशन चलाया। सर्च लाइट, क्रेन और लैडर से मदद से टीम पानी में गई। 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज के शव को 4.15 बजे के आसपास निकाला गया। उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी सांस थम चुकी है। लाइफ जैकेट पहनकर नीचे उतरे अग्निशमन कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही थी, क्योंकि विजिबिलिटी नहीं थी। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी मदद नहीं कर सका। कार को पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका। पिता बोले- प्राधिकरण जिम्मेदार, स्पॉट की शिकायतें हुईं, सब सोते रहे
पिता राजकुमार मेहता ने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार नोएडा प्राधिकरण को ठहराया। उन्होंने कहा- सोसाइटी के लोग पहले भी कई बार शिकायत दे चुके थे। यहां लाइट, रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं, ऐसे में हादसा हो सकता है, लेकिन इंतजाम नहीं किए गए। 15 दिन पहले ट्रक की टक्कर से जो ड्रेन टूटी, उसकी मरम्मत तक नहीं की गई। अब ग्राउंड जीरो से 19 जनवरी के हाल पढ़िए बैरिकेडिंग की, मगर लाइट, रिफ्लेक्टर नहीं लगे पिता राजकुमार मेहता से हादसे की रात की पूरी कहानी समझने के बाद दैनिक भास्कर टीम नोएडा सेक्टर–150 के पास एटीएस ली- ग्रैंडिओस मोड़ पर पहुंची। यहीं पर वो जानलेवा टर्न है, जहां हादसा हुआ। हमने देखा कि जिस जगह पर हादसा हुआ था, वहां पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। मगर कोई लाइट या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे। भीड़ जमा थी, हमें बताया गया कि हर दिन यहां से 10 हजार लोगों की आवाजाही होती है। डबल बेसमेंट खोदकर अधूरा छोड़ा
हमने स्पॉट को करीब से समझा, ड्रेनेज की बाउंड्री टूटी हुई थी। करीब 15 दिन पहले इस दीवार से एक ट्रक टकराया था। इसको रिपेयर नहीं किया गया। इसके आगे एससी-02 सेक्टर-150 का निर्माणाधीन प्लॉट है। ये प्लाट एमजी विश टाउन का है। यहां डबल बेसमेंट का काम किया गया और इसे अधूरा छोड़ दिया गया। नाले के रिसाव से यहां पानी भरता चला गया। लंबे समय से पानी भरा होने की वजह से यहां मिट्टी की दलदल जैसी बन गई थी। यहां सिर्फ 1 बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था– सेक्टर 150। हादसे के स्पॉट को समझने के लिए हमने वहां कई लोगों से बात की। सामने आया कि बिल्डर एमजेड विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड और लोटस ग्रीन ने इस साइट का नक्शा प्राधिकरण से पास कराया था। यहां कामर्शियल दुकानें बननी थीं। बेसमेंट खोदा गया, मगर फिर काम बंद कर दिया गया। इसी प्लाट में पानी भर गया। प्लॉट नहीं, ज्यादातर का यही हाल
हमने देखना शुरू किया, सड़क के दोनों ओर सोसाइटी हैं। जहां भी खाली प्लाट दिखे, वहां यहीं हाल था। प्लॉट में खोदाई की गई और उसे ऐसे ही छोड़ दिया गया था। ज्यादातर में 30 से 40 फीट तक पानी भरा दिख रहा था। कोई ड्रेनेज का सिस्टम ही नहीं था। आधे अधूरे फ्लैट बने थे, जिनसे सरिया निकली हुईं थीं। कंस्ट्रक्शन नहीं हो रहे थे। अब मौके पर मौजूद लोग क्या सोचते हैं, ये पढ़िए नोएडा में रहने वाले विजय महरोत्रा कहते हैं- एक सप्ताह पहले हम चार पांच दोस्त पार्टी से आ रहे थे। हम बिल्कुल ड्रेन के पास आकर रुके। नजर नहीं आ रहा था कि सड़क कहां है, कुछ दिन पहले ट्रक भी यहां आकर फंसा था। उसी से बाउंड्री टूटी थी। अगर से बाउंड्री न टूटी होती तो ये बच्चा अंदर नहीं जाता यहीं रुक जाता। बाउंड्री रिपेयर नहीं की गई। एक्शन, क्या–क्या हुआ… नालेज पार्क कोतवाली पुलिस ने 18 जनवरी को 2 बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज किया है। पिता राजकुमार मेहता ने शिकायत की है। बिल्डर्स के खिलाफ इन धाराओं में FIR लिखी गई- इस हादसे के बाद 19 जनवरी की शाम को 2 घटनाक्रम हुए- पहला. प्राधिकरण के CEO ने जूनियर इंजीनियर को हटाया
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम. ने जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सभी विभागों को अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था देखने के लिए कहा गया। दूसरा. मुख्यमंत्री ने CEO को ही हटा दिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम. को हटा दिया। उन्हें फिलहाल कोई चार्ज नहीं दिया गया। घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। एडीजी जोन मेरठ एसआईटी अध्यक्ष हैं। मंडलायुक्त मेरठ और चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी को भी SIT में शामिल किया गया हैं। एसआईटी 5 दिनों में इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपेगी। अब जानिए पुलिस क्या कहती है… पुलिस आयुक्त बोले- एफआईआर लिखी, जांच कर रहे
डॉक्टर राजीव नारायणी पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) कहते हैं- ये घटना दुखद है। जानकारी मिलते ही मौके पर अग्निशमन की टीम सभी प्रकार के उपकरणों के साथ गई। बचाने का प्रयास किया गया। फाइनल रेस्क्यू एसडीआरएफ को जोड़कर किया गया। उस समय जीरो विजिबिलिटी थी। मगर लड़के को बचाया नहीं जा सका। इस घटना के संबंध में पिता ने शिकायत दी है। FIR लिखी गई है। ……………. ये भी पढ़ें – नोएडा में इंजीनियर की मौत पर एक्शन में आए योगी:तीन सदस्यीय SIT बनाई, ADG मेरठ हेड; प्राधिकरण के CEO को हटाया नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में सीएम योगी एक्शन में आ गए हैं। घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। एडीजी जोन मेरठ एसआईटी अध्यक्ष हैं। मंडलायुक्त मेरठ और चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी को भी SIT में शामिल किया गया हैं। एसआईटी पांच दिनों में इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपेगी। पढ़िए पूरी खबर…