विधायक पूजा पाल की दूसरी शादी का सच:पूर्व MLA बृजेश वर्मा से की कोर्ट मैरिज, बोलीं- भाई की साजिश थी

‘2017 में मैं विधानसभा का चुनाव हारी, तो अतीक और मेरे मायके के रिश्तेदार इस चक्कर में लग गए गए कि मैं एकदम पीछे चली जाऊं। मेरा राजनीतिक करियर खत्म हो जाए। इन लोगों ने कहा कि आप शादी कर लीजिए, हम आपके साथ हैं। शादी हो गई और मुझे इसके कुछ दिनों बाद सच्चाई का पता चला। मैं राजू पाल का मुकदमा न लड़ पाऊं, इसलिए ये सब षडयंत्र अतीक अहमद ने किया था। मेरे खुद के परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। सच्चाई पता चलते ही मैंने कोर्ट में शादी से अलगाव के लिए अर्जी दे दी।’ ये बातें 17 अगस्त को विधायक पूजा पाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखीं। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या सच में उनका पति से तलाक हो गया है? पूजा के दूसरा पति कौन हैं? अब तक सामने क्यों नहीं आए? दूसरी शादी को लेकर उनके गांव के लोग क्या कहते हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने दैनिक भास्कर की टीम पूजा पाल की दूसरी ससुराल पहुंची। आइए सबकुछ एक तरफ से जानते हैं… पूजा पाल के दूसरे पति बसपा से विधायक रह चुके हैं
2022 के विधानसभा चुनाव में पूजा पाल कौशांबी की चायल सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने उतरीं। उस वक्त उन्होंने नामांकन में जो हलफनामा दिया, उसमें उन्होंने खुद को शादीशुदा बताया। पति का नाम बृजेश वर्मा लिखा। पूजा ने अपना पता हरदोई जिले के मल्लावां ब्लॉक का मेहंदी खेड़ा गांव बताया। यह पहला मौका था, जब तमाम लोगों को पता चला कि पूजा पाल ने दूसरी शादी कर ली है। मेहंदी खेड़ा गांव हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर है। पूजा पाल ने जिन बृजेश वर्मा से शादी की थी, वह 2012 में हरदोई की बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। बृजेश ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी टिकट की दावेदारी की थी। लेकिन, टिकट नहीं मिलने की वजह से उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। 2018 में पूजा पाल और उनकी शादी हो गई। यह शादी कोर्ट मैरिज थी और बेहद गुपचुप तरीके से हुई थी। किसी को भी इसकी खबर नहीं लगी थी। जो करीब के लोग थे, उन्हें ही इस शादी के बारे में पता था। बृजेश गांव नहीं आते, इसलिए जानकारी भी नहीं
हम लखनऊ से संडीला के रास्ते मेहंदी खेड़ा गांव पहुंचे। 2012 में जिस घर में रहकर बृजेश वर्मा ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, वहां अब ताला लगा हुआ है। गेट जर्जर हो गया है। हमारी मुलाकात गांव के ही किसान गंगाराम वर्मा से हुई। हमने पूछा कि बृजेश वर्मा का घर यही है? गंगाराम ने बताना शुरू किया। कहते हैं- बृजेश वर्मा सज्जन परिवार से थे। हम सब उस परिवार से दिल से जुड़े हुए थे। चुनाव में भी खूब समर्थन किया। गंगाराम आगे कहते हैं- साथ रहने के बावजूद कुछ फायदा नहीं हुआ। उनके भट्‌ठे के पास हमारा खेत है, उन्होंने खुदवा दिया। मानक को भी नहीं माना। हम लोगों ने एतराज किया, व्यवहार कम कर दिया। हमारी पत्नी का देहांत हुआ, तब भी वह नहीं आए। अब जब नहीं आए, तो फिर व्यवहार किस बात का? सच बात यह है कि विधायकी जाने के बाद वह गांव के एक किनारे भट्ठे वाले घर पर बस गए। वहीं रहते हैं, यहां तो आते ही नहीं। बृजेश ने पहले कभी कोई शादी नहीं की
गांव के संतोष वर्मा बृजेश के इतिहास को लेकर बात करते हैं। वह कहते हैं- बृजेश और सतीश वर्मा ममेरे भाई थे। सतीश 2007 में दूसरी बार विधायक बने थे। तब कामकाज के लिए बृजेश को अपने साथ जोड़ा था। लेकिन, कुछ वक्त के बाद विवाद हो गया और दोनों अलग हो गए। बृजेश को बसपा ने टिकट दे दिया और सतीश सपा के टिकट से उतरे। 2012 में यहां से बृजेश चुनाव जीत गए। हमने पूछा कि क्या आपने कभी बृजेश वर्मा की पत्नी पूजा पाल को देखा है? संतोष कहते हैं- चुनाव जीतने के बाद उन्होंने गांव के एक छोर पर अपना घर बनवा लिया था। वहीं भट्ठा भी बना लिया। फिर गांव बहुत कम आते थे। हमें उनकी शादी की कोई जानकारी नहीं थी। पूजा पाल से शादी की बात तो हम लोगों ने सुनी, लेकिन कभी ‌उनको यहां देखा नहीं। फिर बड़े लोग हैं, उनके बारे में हमें कहां जानकारी मिल पाती है? एक बार काफिला लेकर कौशांबी गए थे
गांव में हमने कई अन्य लोगों से भी बात की। तमाम लोग कैमरे पर बात करने को लेकर राजी नहीं हुए। फिर हमने ऑफ कैमरा ही बात की। एक व्यक्ति कहते हैं- बृजेश के पिता पुत्तू लाल कानपुर में फंड ऑफिस में बाबू थे। वह कभी-कभी घर आते थे। उनके साथ उनके दोनों बेटे भी वहीं रहते थे। बृजेश तो सतीश के साथ चले आए। दूसरे बेटे यहीं मल्लावा में टीचर हैं। 2018 में जब उन्होंने पूजा पाल से कोर्ट मैरिज की थी, तब तो किसी को नहीं पता चला। लेकिन, बाद में लोगों को पता चला गया था। वह कहते हैं- साल तो नहीं याद, लेकिन एक बार वह यहां से 50-60 गाड़ियों का काफिला लेकर कौशांबी गए थे। पूजा पाल गांव में आई हैं या फिर नहीं, इसकी जानकारी नहीं हो पाती थी। हो सकता है कि कभी आती भी रही हों। लेकिन, हम लोगों को कैसे पता चल सकता है? एक अन्य व्यक्ति कहते हैं- 2019 में पूजा पाल को उन्नाव लोकसभा का टिकट मिला था। वो गाड़ियां उसी प्रचार के लिए गई थीं। 2019 में पेपर की गड़बड़ी के चलते टिकट वापस किया
2018 में पूजा और बृजेश वर्मा की शादी हो गई। पूजा के साथ अब बृजेश भी सपा में आ गए थे। 2019 में लोकसभा चुनाव होना था। सपा-बसपा का गठबंधन हुआ। उन्नाव लोकसभा सीट सपा के खाते में आई। सपा ने यहां पूजा पाल को प्रत्याशी बनाया। पूजा पाल ने प्रचार भी शुरू किया, लेकिन आखिरी वक्त में उन्होंने टिकट वापस कर दिया। कुछ लोग कहते हैं कि उस वक्त पूजा नहीं चाहती थी कि चुनावी हलफनामे में पति के नाम के आगे बृजेश वर्मा लिखा जाए। हालांकि, उन्हें यह भी डर था कि अगर पति का नाम नहीं लिखेंगी तो पर्चा रद्द हो सकता है। इस दुविधा के चलते ही उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। बृजेश ने बीजेपी और फिर सपा से टिकट की कोशिश की
बृजेश वर्मा ने 2017 के चुनाव में भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी। हालांकि, उस वक्त उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। इसके वह भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। 2022 में टिकट की उम्मीद लगाकर प्रचार में जुट गए। जब टिकट की बारी आई, तो उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया। सपा के ही एक नेता कहते हैं- उस वक्त पति-पत्नी दोनों टिकट के दावेदार थे। तय किया गया कि किसी एक को ही टिकट मिलेगा। इसके बाद पूजा पाल का टिकट पास हुआ और बृजेश वर्मा को इंतजार करने को कहा गया। हम बृजेश वर्मा के भट्ठा वाले घर पर गए। उन्होंने बड़ा मकान बनवाया है। बगल में ही भट्ठा है। बातचीत में पता चला कि 2022 में टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने व्यवसाय बढ़ाया। भट्ठे के अलावा तीन डी-फॉर्मा कॉलेज बनाए। इस वक्त उन कॉलेजों में बड़ी संख्या में स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं। बृजेश अक्सर इन कॉलेजों के प्रोग्राम में जाते रहे हैं। इसकी तस्वीरें वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी शेयर करते रहे हैं। अपने वैवाहिक रिश्ते पर बोलने से बचते रहे बृजेश
हमने इस सिलसिले में बृजेश वर्मा से बात करने की कोशिश की। हम पूजा पाल से उनके रिश्ते के बारे में जानना चाहते थे। यह भी समझना चाहते थे कि कोर्ट में इस मामले पर क्या चल रहा? बृजेश वर्मा ने कहा कि हम कल बात करेंगे। उसके बाद हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन, उन्होंने अपने रिश्ते को लेकर कोई जवाब नहीं दिया। पूजा पाल इस वक्त कौशांबी की चायल सीट से विधायक हैं। हमने वहां के लोगों से बात की। पूछा कि क्या कभी आपने बृजेश पाल को देखा है? वह कहते हैं- चुनाव से पहले एक बार वह यहां आए थे। चुनाव के बाद कभी नहीं दिखे। एक अन्य व्यक्ति कहते हैं- पूजा पाल नहीं चाहती थीं कि बृजेश वर्मा किसी से मिले या फिर उन्हें लोग जाने। इसलिए भी वह उन्हें किसी से नहीं मिलवाती थीं। हालांकि अब दोनों के बीच अलगाव की स्थिति है। कोर्ट में मामला है। इस बारे में भी किसी को कुछ पता नहीं है। सोशल मीडिया पर पूजा पाल ने रखा अपना पक्ष
पूजा पाल ने 17 अगस्त, 2025 को सोशल मीडिया पोस्ट में अपना पक्ष क्लियर कर दिया। पोस्ट में उन्होंने अपनी इस शादी को साजिश के तहत होना बताया था। उन्होंने लिखा- मेरे ही परिवार के एक भाई थे। वह विधायकी लड़ना चाहते थे। वह इस चक्कर में लग गए कि मैं राजनीति में एकदम पीछे चली जाऊं। मेरा राजनीतिक करियर ही समाप्त हो जाए। मैं राजू पाल का मुकदमा न लड़ पाऊं। इसीलिए राजू पाल की हत्या के बाद मेरे उसी भाई ने उनका मामला ले लिया। इसके बाद मुझसे कहा कि आप शादी कर लीजिए, हम आपके साथ हैं। जब मेरी शादी हो गई, तब यही लोग बैठकर यह बातें कर रहे थे कि अब अतीक के खिलाफ मुकदमा खत्म हो जाएगा। लेकिन, मैं अपने इरादे से डिगी नहीं। पूजा पाल ने विधायकी लड़ने वाले भाई और उनकी हत्या का जो जिक्र किया, वह उमेश पाल को लेकर है। 2023 में अतीक गैंग ने ही उनकी हत्या की थी। पूजा ने आगे लिखा- मैंने भरी विधानसभा में सच बोल दिया। तब सब कुछ पता होने के बावजूद चिढ़ और प्रतिशोध के चलते मेरी छवि को धूमिल किया जा रहा है। मेरी तकलीफ सबको पता है, इसलिए जनता आज भी मेरे साथ है। ————————— ये खबर भी पढें… सपा सांसद बर्क बोले- हर चीज का जवाब बुलडोजर नहीं, क्या मुसलमानों को कभी ये कहते देखा कि मंदिर नहीं, मस्जिद थी ‘आपने कभी मुसलमानों को ये कहते देखा कि वहां मंदिर नहीं, मस्जिद थी? ये आपस में बांटने की राजनीति गलत है। फतेहपुर जिले के मकबरे में पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ हुई। कानून का डर सबको होना चाहिए।’ यह कहना है, यूपी की संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का। UP में सपा के 4 मुस्लिम सांसद हैं, इनमें एक बर्क भी हैं। 24 नवंबर, 2024 की संभल हिंसा के बाद से सांसद बर्क की लगातार घेराबंदी हो रही है। उन पर हिंसा फैलाने, बिजली चोरी करने, अतिक्रमण करके मकान बनाने सहित कई और भी आरोप हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे इन तमाम आरोपों, मंदिर-मस्जिद विवाद, बुलडोजर एक्शन सहित कई मुद्दों पर बात की। पढ़िए पूरी खबर…