विनय कटियार बोले- अयोध्या मेरी सीट:भाजपा के टिकट पर ही लड़ूंगा, राम मंदिर आंदोलन के फायर ब्रांड नेता फिर एक्टिव

राम मंदिर आंदोलन के दौरान हिंदुत्व आधारित राजनीति से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं फायर ब्रांड नेता विनय कटियार फिर चर्चा में हैं। वजह, एकाएक उनका सार्वजनिक और राजनीतिक रूप से फिर सक्रिय होना। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की उनसे मुलाकात। फिर कटियार का चुनाव लड़ने का ऐलान कर देना। हाल ही में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेई का उनसे मिलना। प्रदेश की राजनीति में एकाएक विनय कटियार के सक्रिय होने के राजनीतिक मायने क्या हैं? क्या भाजपा को इससे फायदा मिलेगा? राजनीति के जानकार क्या कहते हैं? खबर के आखिर में पूरे घटनाक्रम पर विनय कटियार से बातचीत भी पढ़िए… पहले जानिए कटियार के एक्टिव होने के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषक त्रियुग नारायण तिवारी का कहना है- करीब 2 महीने पहले मैं विनय कटियार से मिला था। तब कटियार ने कहा था कि राजनीति से संन्यास लेंगे। लेकिन पंकज चौधरी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने, पंकज चौधरी से उनकी मुलाकात के बाद वह फिर से राजनीति में सक्रिय हुए हैं। ऐसा लगता है कि पंकज चौधरी और उनके बीच चुनावी राजनीति को लेकर बात हुई है। पंकज और विनय कटियार पुराने मित्र और साथी भी हैं। अब फिर से विनय कटियार अयोध्या में एक्टिव हो गए हैं। कार्यकर्ताओं की बैठक कर चाय-समोसा खिलाया। अगर विनय कटियार चुनाव लड़ते हैं, तो कुर्मी भाजपा के साथ आ जाएगा। 2024 में अयोध्या और अंबेडकर नगर में कुर्मी भाजपा से अलग हो गया था। मेरा मानना है, 2014 में विनय कटियार ने कहा था कि लालकृष्ण आडवाणी को भावी पीएम होना चाहिए। इसी वजह से वे नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद भाजपा में साइड लाइन कर दिए गए थे। मुकाबला रोचक करेंगे, जीत तय नहीं
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- 2027 में भाजपा अगर विनय कटियार को प्रत्याशी बनाती है, तो वह चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन, अगर वह भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर मुकाबला भाजपा के लिए कठिन और जनता के लिए रोचक होगा। मौजूदा दौर में कटियार के लिए निर्दलीय चुनाव जीतना मुश्किल होगा। 2029 में भी अगर वे लोकसभा चुनाव लड़ते हैं, तो निर्दलीय कोई कमाल नहीं दिखा पाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा दौर में भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी समाज में कटियार से बड़े चेहरे हैं। वहीं हिंदुत्व में सीएम योगी से बड़ा कोई चेहरा नहीं। लिहाजा, जाति और हिंदुत्व के मोर्चे पर कटियार के लिए अपने बूते भाजपा से मुकाबला करना मुश्किल होगा। फायर ब्रांड नेता…राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे विनय कटियार श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रज नेताओं में शामिल रहे। जानकार मानते हैं कि उस दौर में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर होने वाली रैलियां, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती और विनय कटियार के भाषण के बिना अधूरी मानी जाती थीं। विनय कटियार अपने अग्रेसिव भाषण से हिंदुओं में चेतना जगाने का काम करते थे। बाबरी ढांचा विध्वंस सहित श्रीराम जन्मभूमि को लेकर चले आंदोलनों में उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए। भाजपा के पहले कुर्मी चेहरे विनय कटियार पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल का भी आशीर्वाद रहा है। अशोक सिंघल कानपुर में आरएसएस के विभाग प्रचारक रहे, तब से विनय कटियार उनके करीबी बने। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान विनय कटियार की न केवल कुर्मी समाज, बल्कि हिंदुओं में बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन्हें भाजपा ने पहला कुर्मी चेहरा बनाया। 1991 में जब श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था, उस दौरान उन्हें फैजाबाद सीट से प्रत्याशी बनाया गया। भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और विनय कटियार ने 1991 में पहली बार लोकसभा चुनाव साथ लड़ा था। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी विनय कटियार से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। अचानक साइडलाइन होने लगे कटियार
भाजपा से कटियार के साइडलाइन होने को लेकर पार्टी के एक नेता बताते हैं- 2004 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष वैंकेया नायडू ने विनय कटियार से इस्तीफा मांगा। नायडू ने उन्हें सुझाव दिया कि आप खुद को बीमार बताकर स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दीजिए। कटियार ने दो टूक कहा कि ‘मैं बीमार नहीं हूं, मैं साफ कारण बताऊंगा कि पार्टी मुझसे इस्तीफा मांग रही। अनुशासित कार्यकर्ता होने के नाते मैं इस्तीफा दे रहा हूं।’ हालांकि, जब राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो 2009 के लोकसभा चुनाव में विनय कटियार को अंबेडकर नगर से प्रत्याशी बनाया गया। गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी कटियार के समर्थन में सभा करने आए। मंच से कलराज मिश्र ने कहा कि सभा को केवल कलराज और मोदी संबोधित करेंगे। विनय कटियार ने कलराज से माइक लेते हुए कहा कि पहले मैं बोलूंगा, मोदीजी मेरी बात सुनेंगे। विनय कटियार ने इतना लंबा भाषण दिया कि मोदी को फैजाबाद में लल्लू सिंह के समर्थन में आयोजित सभा में जाने का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। मोदी-शाह युग में हाशिए पर आए वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश बाजपेयी मानते हैं- 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव अमित शाह ने यूपी की कमान संभाली। गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी से भाजपा के प्रत्याशी बने। मोदी के पीएम बनने के बाद प्रदेश में हिंदुत्व के चेहरे के रूप में किसी दूसरे नेता को आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा। पिछड़े वर्ग में भी भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह जैसे नेताओं के रूप में नई लीडरशिप खड़ी करनी शुरू कर दी। विनय कटियार स्वभाव से भी किसी के आगे झुकने वाले नेताओं में नहीं रहे। न ही किसी पद की लालसा में किसी बड़े नेता या आरएसएस पदाधिकारी के यहां हाजिरी लगाने वालों में उनकी गिनती होती है। केंद्र और प्रदेश के भाजपा नेताओं की आपसी योजना के तहत कटियार धीरे-धीरे हाशिए पर आते गए। अयोध्या मंदिर की धर्म ध्वजा तक में नहीं बुलाए गए
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रज और चेहरे रहे विनय कटियार 5 अगस्त, 2020 को श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन समारोह और 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। लेकिन, 25 नवंबर, 2025 को धर्म ध्वजा फहराकर शास्त्रीय पद्धति से मंदिर निर्माण पूर्ण होने के कार्यक्रम में विनय कटियार को आमंत्रित नहीं किया गया। हालांकि अब विनय कटियार का कहना है कि मकर सक्रांति के बाद वह अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि पर बने राम मंदिर के दर्शन करने जाएंगे। अब जानिए राजनीतिक सक्रियता पर कटियार क्या बोले… कटियार की अचानक सक्रियता और आगामी योजनाओं को लेकर दैनिक भास्कर डिजिटल ने उनसे सवाल किए। कटियार ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि मोदी-शाह के युग में पिछड़े वर्ग के भाजपा कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया गया है। सवाल: इतने लंबे समय बाद अचानक चुनाव लड़ने की क्यों इच्छा हुई?
कटियार: अब जो चुनाव सामने आएगा, वही चुनाव लड़ेंगे। सवाल: किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, क्या तैयारी है?
कटियार: अरे भाई, अयोध्या से ही लड़ेंगे, विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। पहले लोकसभा चुनाव हो गया, तो लोकसभा चुनाव लड़ूंगा। सवाल: भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो फिर क्या करेंगे?
कटियार: भाजपा से ही चुनाव लड़ूंगा, पार्टी से ही चुनाव लड़ूंगाष बाकी इधर-उधर जाने का सवाल ही नहीं उठता। सवाल: आप कहते थे रामलला हम आएंगे, लेकिन आप मंदिर नहीं गए?
कटियार: मंदिर तो बना दिया, भव्य मंदिर बना दिया। जब हमारी इच्छा होगी, तब जाएंगे। मैं राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुआ था। धर्मध्वजा के समय हमें भी बाहर जाना था। बार-बार क्या झंझट करें, देखेंगे। सवाल: पंकज चौधरी आपसे मिलने आए थे, क्या बातचीत हुई?
कटियार: पंकज चौधरी से हमारे संबंध हैं, हम पहले भी मिलते रहे हैं। सवाल: क्या उनसे मुलाकात के बाद चुनाव लड़ने का भाव जगा?
कटियार: ऐसा नहीं हैं, हम पहले भी मिलते रहे हैं। चिंता मत कीजिए, सब ठीक हो जाएगा। सवाल: आपने 2014, 2019 और 2024 का चुनाव क्यों नहीं लड़ा?
कटियार: हमारी इच्छा थी, इसलिए चुनाव नहीं लड़े। इस बार इच्छा जागृत हो गई है, तो चुनाव लड़ेंगे। सवाल: मोदी-शाह के युग में यूपी में पिछड़े वर्ग को आगे बढ़ाया गया, आप कैसे पीछे रह गए?
कटियार: पिछड़े वर्ग को आगे नहीं बढ़ाया गया। पिछड़े वर्ग में जो भाजपा के कार्यकर्ता अच्छा काम कर रहे थे, जो योग्य थे, उन्हें आगे बढ़ाया गया। जब हम प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्र्रीय महासचिव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे, तब हम भी काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाते थे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… SIR- क्या UP में BJP को 63 सीटों पर नुकसान, सपा 41 पर पिछड़ सकती है SIR के बाद उत्तर प्रदेश में 2.88 करोड़ वोटरों के नाम कट गए हैं। 14 दिसंबर, 2025 को भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ताजपोशी के दौरान सीएम योगी इसे लेकर आगाह किया था। कहा था- यदि छूटे वोटरों को समय रहते नहीं जोड़ा गया, तो 10 हजार से कम मार्जिन वाली सीटों पर भाजपा को सबसे अधिक नुकसान की संभावना रहेगी। पढ़ें पूरी खबर