शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का प्रयागराज प्रशासन से टकराव 11 दिन तक चला। 28 जनवरी की सुबह शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ दिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम ने सबको चौंका दिया। दैनिक भास्कर की छानबीन में सामने आया कि 27 जनवरी की शाम को प्रशासन की ओर से विवाद को सुलझाने के लिए एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी। इस हाई लेवल मीटिंग में 3 अहम पाॅइंट पर सहमति तो बन गई। लेकिन 2 पॉइंट पर बात अटक गई। पहली- प्रशासन ने कुछ भी लिखकर देने से मना कर दिया। दूसरी- अधिकारी सार्वजनिक माफी मांगने पर सहमत नहीं हुए। इस मीटिंग में हुई बातचीत को रात में ही शंकराचार्य तक पहुंचा दिया गया। चूंकि, प्रशासन पूरे मामले में अपनी गलती मान रहा था, इसलिए शंकराचार्य ने मेला छोड़ने का फैसला किया और 28 जनवरी की सुबह उन्होंने इसका ऐलान कर दिया। ये मीटिंग कहां हुई? इसमें कौन-कौन लोग शामिल हुए? उनके बीच क्या बातचीत हुई? इसे डिटेल में समझने के लिए दैनिक भास्कर ने शंकराचार्य के शिष्य और प्रयागराज प्रशासन के अधिकारियों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… 2 तस्वीरों में शंकराचार्य के माघ मेला छोड़ने और आश्रम को हटाने के सीन देखिए- धर्म संघ के शिविर में अधिकारी बैठे, श्रीधरानंद बने शंकराचार्य के प्रतिनिधि शंकराचार्य के शिष्य योगीराज के मुताबिक, मौनी अमावस्या से शुरू हुए स्नान के विवाद को खत्म करने के लिए प्रशासन ने एक हाई लेवल मीटिंग तय की। 27 जनवरी की शाम को धर्म संघ के शिविर में अधिकारी पहुंचे, जो त्रिवेणी मार्ग पर शंकराचार्य के शिविर से कुछ दूरी पर स्थित है। माघ मेला प्रशासन के मेल अधिकारी ऋषि राज, अपर मेला अधिकारी दयानंद प्रसाद और मेला प्रशासन के अन्य अफसर मीटिंग में मौजूद थे। मगर शंकराचार्य के शिष्य इस मीटिंग में शामिल होने नहीं गए। बल्कि शंकराचार्य की तरफ से बात करने के लिए प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी भेजे गए। योगीराज के अनुसार, इस बैठक में प्रशासन ने 3 मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। (इन सभी बिंदुओं को महंत श्रीधरानंद ने स्वीकार किया।) अधिकारियों ने कहा- माफी नहीं, हम खेद प्रकट करेंगे योगीराज ने बताया- मेला प्रशासन की ओर से यह स्वीकार किया गया कि उनसे गलती हुई है। उन्होंने इसके पीछे भीड़ कंट्रोल करने का हवाला दिया। इन स्थितियों में शंकराचार्य स्नान नहीं कर सके। अधिकारियों ने कहा- हमें इसका खेद हैं। तब महंत श्रीधरानंद ने कहा- शंकराचार्य चाहते हैं कि आप माफी मांगें। इसे लेकर अधिकारियों ने कहा कि हम सार्वजनिक माफी नहीं मांग सकते। मगर हम खेद जता सकते हैं। अधिकारियों ने कहा- आप जब चाहे स्नान कर लें, हम पूरी व्यवस्थाएं करेंगे। अब इस मामले पर विराम लगना चाहिए। योगीराज ने कहा- जब अधिकारियों से यही बातें लिखकर देने के लिए कहीं गईं, तो उन्होंने कहा कि ये नहीं हो सकेगा। अब आपके सामने हैं, सारी बातें कह रहे हैं, खेद जता रहे हैं। इसके बाद महंत अड़ गए कि बिना लिखित सहमति के शंकराचार्य क्यों आपको माफ करेंगे। शिष्य कहते हैं- हमारी तरफ से महंत ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर जो कुछ हुआ, वो सिर्फ माफी मांगने योग्य ही है। लेकिन, प्रशासन खेद शब्द तक सीमित रखना चाहता था। इसलिए देर रात तक सहमति नहीं बन सकी। सोर्स कहते हैं- माघ मेला 15 फरवरी तक चलना है, कल्पवास करने वाले लोग लौटने भी लगे हैं। मुख्य स्नान भी हो चुके हैं, इसलिए शंकराचार्य ने निर्णय लिया कि अधिकारी पहले ही अपनी गलती स्वीकार करने लगे हैं। ऐसे में अब माघ मेला क्षेत्र से प्रस्थान किया जा सकता है। मेला क्षेत्र से जाने से पहले शंकराचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा- आज मन बहुत व्यथित है। हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। इस दुख की भरपाई करने पता नहीं कौन सा नेता आएगा, कौन सी पार्टी आएगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी। जिन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान किया है, उन्हें औकात दिखानी होगी। उन्होंने कहा- “कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।” अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- मैं अगर प्रशासन की बातें स्वीकार कर लेता, तब बटुक और शिष्यों के साथ हुई अभद्रता और मारपीट की घटना का क्या होता? इसलिए अब मेरा मेला क्षेत्र से जाना ही उचित है। इस पूरे मामले में मेला प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। लेकिन मेला अधिकारी ने कई प्रयास के बाद भी कॉल रिसीव नहीं की। अब 5 पॉइंट में पूरा विवाद समझिए ………. ये खबर भी पढ़ें – ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा ने बाहर निकाला, अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी और 10 में से 9 महामंडलेश्वर को झूठा कहा था किन्नर अखाड़ा से महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को बाहर कर दिया गया है। इसकी पुष्टि अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर किया। उन्होंने कहा- अखाड़े के पदाधिकारी से बैठक करके यह निर्णय लिया है। अब ममता कुलकर्णी से अखाड़े का कोई संबंध नहीं है। वह अखाड़े की अधिकारी या सदस्य नहीं हैं। हमारे अखाड़े में महिला भी हैं, पुरुष भी हैं और किन्नर भी हैं। हम किसी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं। मौनी अमावस्या के दिन जिस तरह से बटुक ब्राह्मणों को शिखा पकड़कर पीटा गया, इससे हमारी भी नाराजगी है। पढ़िए पूरी खबर…