शंकराचार्य बोले-मुख्यमंत्री नहीं, योगी को अल्टीमेटम दिया:आशुतोष की बातों का डिप्टी सीएम खंडन करें, नहीं तो दोनों मिले हैं

‘वो मुख्यमंत्री होंगे, हमें उससे लेना-देना नहीं है। लेकिन जो योगी हैं, उनसे हम पूछ सकते है कि तुम धर्म विरुद्ध काम कैसे कर रहे हो? एक संन्यासी कभी भी नौकरीपेशा नहीं हो सकता। एक संन्यासी हिंसा नहीं कर सकता। वो करोड़ों पशुओं का मांस काट-काटकर बेच रहे हैं।’ यह कहना है, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर से बात की। योगी आदित्यनाथ को 40 दिन के अल्टीमेटम देने पर कहते हैं- हमने CM को नहीं, योगी को 40 दिन का समय दिया। सुधार कर लें। भूला भटका अगर सही रास्ते पर आ जाए, तो कोई दिक्कत नहीं होती है। आशुतोष महाराज के आरोप कि डिप्टी सीएम की सेटिंग है। इस पर शंकराचार्य कहते हैं कि हिस्ट्रीशीटर की बातों का डिप्टी सीएम ने खंडन नहीं किया। इससे लगता है कि वो मिले हुए हैं। गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा पर शंकराचार्य कहते हैं- हम अपने नेताओं के साथ व्यवहार साफ करना चाहते हैं। अगर गो हत्यारा है, तो वैसा व्यवहार। अगर गोरक्षक है, तो वैसा व्यवहार। अब मिला-जुला नहीं चलेगा। देश की जनता चाहती है कि नेताजी जैसे अंदर से हैं, वैसे ही बाहर से भी दिखें। पढ़िए शंकराचार्य का हूबहू इंटरव्यू… सवाल. आशुतोष महाराज कह रहे कि ये पूरा प्रपंच सीएम योगी की कुर्सी हथियाने के लिए रचा गया?
शंकराचार्य. ये सब जनता में भ्रम फैलाने के लिए उसको (आशुतोष) खुला छोड़ दिया है। न कोई खंडन कर रहा, न ही कोई स्वीकार कर रहा। ये कहां तक उचित है? एक अपराधी भ्रम फैला सकता है। सरकार को आगे आकर बात खत्म करनी चाहिए। सवाल. आपसे कहा है कि लखनऊ आएं, धरना दें। जब मैं आऊं तभी आप पानी पीना?
शंकराचार्य. एक हिस्ट्रीशीटर, एक के बाद एक बयान देता चला जा रहा है। इसमें वो साफतौर पर उपमुख्यमंत्री का भी नाम ले रहा है। उपमुख्यमंत्री कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। या तो उन्हें कहना चाहिए कि हां, हमारी ऐसी बात हुई है। तब हम खंडन करेंगे कि ऐसी कोई बात नहीं हुई। अब अगर उपमुख्यमंत्री उसकी बात का खंडन नहीं कर रहे, तो इसका मतलब हैकि वो जानबूझकर उससे बुलवा रहे हैं। नहीं तो वो किसी व्यक्ति का नाम लेकर झूठ कैसे बोल सकता था? इसका मतलब है कि दोनों मिले हुए हैं। सवाल. आशुतोष महाराज ने कहा कि आप गो-प्रतिष्ठा यात्रा के बहाने विदेश भागने की तैयारी में हैं?
शंकराचार्य. वो न जाने कैसे हिंदुओं में है? उसको शंकराचार्य की परंपरा के बारे में पता ही नहीं है। जो शंकराचार्य होते हैं, वो विदेश यात्रा करते ही नहीं। जब हमने पासपोर्ट बनवाया ही नहीं, तो क्या वीजा लेंगे और क्या विदेश जाएंगे? वो जानता नहीं है, इसलिए कुछ भी बोल रहा। सवाल. आशुतोष महाराज ने आपकी गुप्त पत्नी होने के आरोप लगाए हैं, क्या कहेंगे?
शंकराचार्य. जब व्यक्ति नीचता पर आता है, तो उसकी कोई लिमिट नहीं होती। फिर वो कुछ भी कहता है। सवाल. बटुक के साथ 2024 में गलत हरकत हुई, तो 2 साल बाद क्यों मुद्दा बनाया जा रहा?
शंकराचार्य. ये 2 साल की बात भी कल्पित है। सच्चाई ये है कि वो कभी वहां नहीं गया। जिन तारीखों में उसने आरोप लगाए, उसमें हम वहां नहीं थे। कहानी बनानी थी, तो कुछ भी बना ली गई। कोर्ट में इसके सारे प्रमाण दिए गए हैं। सवाल. आशुतोष ने आप पर इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए? क्या उनकी आपसे कोई दुश्मनी है?
शंकराचार्य. किसी व्यक्ति से शत्रुता या मित्रता के लिए उससे परिचित होना चाहिए। उसके और आपके बीच किसी स्वार्थ का होना जरूरी होता है। ये व्यक्ति न तो हमसे परिचित है, न हमने कभी इसके साथ मिलकर कोई काम किया। हमारा कोई लेना-देना ही नहीं है। ऐसा व्यक्ति लगातार अगर आरोप लगाने लगता है, तब दो ही अनुमान होते हैं। पहला- उसके पीछे कोई और है, ये सिर्फ मोहरा है। दूसरा- प्रसिद्धि के लिए हमको मोहरा बना रहा कि इनकी सीढ़ी पर चढ़कर हम प्रसिद्ध हो जाएं।
सवाल. आपने योगी को खुद को हिंदू साबित करने के लिए 40 दिनों का समय दिया था?
शंकराचार्य. हमने सीएम कोई को अल्टीमेटम नहीं दिया है। हमने योगी आदित्यनाथ को दिया है। आदित्यनाथ, चूंकि भगवा कपड़ा पहनते हैं, इसलिए हमारे धार्मिक क्षेत्राधिकार में आते हैं। शंकराचार्य होने के नाते जितने भी संत, महंत हैं, वो सभी हमारे अंडर आते हैं। उनसे प्रश्न करना हमारा अधिकार है। इसलिए हमने पूछा कि तुम भगवा कपड़ा पहनकर मांस का व्यापार कैसे कर सकते हो? तुमने घर और मां-पिता छोड़ दिए, तो सैलरी लेकर काम कैसे कर सकते हो? यही सब पूछा है। सवाल. माघ मेले की लड़ाई व्यक्तिगत हो चुकी है? इससे पूरा सनातन धर्म पर छींटाकशी हो रही?
शंकराचार्य. पहली बात, माघ मेले से लड़ाई शुरू नहीं हुई। लड़ाई…दोनों तरफ से लड़ी जाती है। ये तो एकतरफा हमला था। ये किसी व्यक्ति पर नहीं सनातनियों के स्वाभिमान पर हमला था। इसलिए सनातनियों के सारे प्रतीक, चाहे वो संन्यासी हो, चाहे वो ब्रह्मचारी हो, चाहे शंकराचार्य की छतरी हो, चाहे वो बटुक की चोटी हो। इसका मतलब है कि सनातन के स्वाभिमान को समाप्त करने का प्रयास था। आज तक प्रयास जारी है। आज तक ये नहीं कहा गया कि कुछ गलती हुई। आज तक उसी को समर्थन देकर अहंकार को दिखाया जा रहा है। सवाल. पिछले कुछ वर्षों में एक के बाद एक शंकराचार्य मोदी और योगी सरकार से खफा हैं?
शंकराचार्य. इसे विडंबना कहा जाएगा। मुगल, ब्रिटिश या कोई विधर्मी शासन होता, तो समझ में आता। जब हमारे ही वोट से बना शासन है, उसमें भी खासतौर पर खुद को हिंदू कहने वाला शासन है। उसमें अगर बीफ एक्सपोर्ट बढ़ता चला जाए, गाय कम होती चली जाएं। तो क्या कहेंगे? सवाल. क्या ये लड़ाई सनातन के सर्वोच्च और सबसे पूजनीय बनने की है?
शंकराचार्य. मुख्यमंत्री का पद राजनीतिक है, शंकराचार्य का पद धार्मिक है। जब 15 अगस्त या 26 जनवरी का राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता है, तो उसमें देश की जनता भाग लेती है। वहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आते हैं। क्या वो आम जनता की तरह आते हैं, आप ही बता दीजिए। उनके आने का एक खास तरीका होता है। वहां क्या सब बराबर दिख रहे होते हैं? जब आपके राष्ट्र पर्व में एक जैसी व्यवस्था नहीं होती। तब माघ मेला, जो एक धार्मिक आयोजन है, उसमें शंकराचार्य का प्रोटोकॉल क्यों नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है, तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी जनता के साथ घुल-मिलकर जाना शुरू करें। वो नहीं करेंगे, हमारे लिए इस तरह के तर्क गढ़ देंगे। सवाल. लखनऊ के आयोजन में कौन-कौन पहुंच रहा?
शंकराचार्य. ये कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं, जिसमें कोई अतिथि हो। ये गोमाता की रक्षा के लिए जो युद्ध शुरू हो रहा है, उसका शंखनाद है। जो भी गोमाता के लिए भक्ति भावना रखता होगा, वो आकर वहां खड़ा होगा और शंख बजाएगा। क्या हो रहा है कि 78 साल से हर पार्टी, हर नेता कहता है हम गोभक्त हैं, बिल्कुल गोरक्षा करेंगे। उसके बाद भी कुछ होता नहीं। एक तरफ गाय की पूजा करते हुए तस्वीरें देते हैं, दूसरी तरफ डेटा आता है कि कितना ब्रीफ एक्सपोर्ट किया। इस तरह से सब भ्रम में रहते हैं। …………………………. यह खबर भी पढ़ें . शंकराचार्य को 26 शर्तों के साथ धर्म सभा की अनुमति, लखनऊ प्रशासन बोला- भड़काऊ भाषण नहीं होना चाहिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सभा की लखनऊ प्रशासन से अनुमति मिल गई है। हालांकि, 26 शर्तें भी रखी गई हैं। प्रशासन के मुताबिक, किसी भी शर्त के टूटने पर अनुमति रद्द हो जाएगी। सभा में धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काने वाली बात नहीं होगी। कोविड के नियमों का भी पालन करना होगा। किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। पढ़िए पूरी खबर…