शंकराचार्य यौन शोषण केस आशुतोष महाराज की साजिश:खुफिया कैमरे पर बटुक पलटा, कहा- आशुतोष ने धमकी-लालच देकर झूठे बयान कराए

प्रयागराज का माघ मेला… संगम किनारे एक टेंट से आ रही मंत्रों की आवाज। कुछ घंटे बाद यज्ञ पूरा हुआ। शाकंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने 2 बटुकों को बुलाया। सिर पर हाथ रखा और 6-6 हजार रुपए दक्षिणा दी। दक्षिणा कार्ड बनवाने के लिए आधार कार्ड लिए। कोरे कागज पर साइन कराए। बस यहीं से शुरू हुआ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन शोषण में फंसाने का खेल। आशुतोष ने जिन कोरे कागजों पर बटुके के साइन लिए, उन पर यौन प्रताड़ना की झूठी स्क्रिप्ट लिख दी। इस षडयंत्र को अंजाम देने के लिए आशुतोष ने साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लिया। दैनिक भास्कर ने 4 महीने इन्वेस्टिगेशन किया। खुफिया कैमरे पर पहली बार बटुक, उसके पिता और चाचा ने आशुतोष के षड़यंत्र की पूरी कहानी बताई… सबसे पहले बताते हैं आशुतोष ने इन्हीं दो बटुकों को क्यों चुना इसके लिए एक साल पीछे जाना होगा। दोनों बटुक पिछले साल यूपी के दो अलग-अलग शहरों में हुए यज्ञ में शामिल हुए। उन्हें 60-60 हजार रुपए दक्षिणा मिली। यहां ये दोनों आशुतोष महाराज के संपर्क में आए। आशुतोष महाराज ने इन्हें शंकराचार्य यौन शोषण केस में 4 वजह से फरियादी बनाया – अब एक के बाद एक बताते हैं आशुतोष महाराज के षड़यंत्र का हर चैप्टर – हम लखनऊ से सटे एक जिले के उस गांव पहुंचे, जहां एक बटुक अपने परिवार के साथ रहता है। यहां सबसे पहले बटुक से बात की – रिपोर्टर: आप शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जानते हो?
बटुक: नहीं, हम नहीं जानते। रिपोर्टर: मिले हो कभी?
बटुक: नहीं। रिपोर्टर: उनके आश्रम में कभी पढ़ने के लिए गए?
बटुक: नहीं, नहीं। रिपोर्टर: आपको पता है, क्या मामला हुआ था?
बटुक: नहीं, हमको नहीं मालूम। बाद में पता चला। रिपोर्टर: क्या पता चला बाद में?
बटुक: यही कि हमसे झूठा आरोप लगवा दिया आशुतोष ने। रिपोर्टर: क्या आरोप?
बटुक: यही, कुकर्म वाला। रिपोर्टर: आपके साथ ऐसा कुछ हुआ था?
बटुक: नहीं, नहीं। रिपोर्टर: कभी नहीं हुआ?
बटुक: कभी नहीं। रिपोर्टर: आशुतोष अपने साथ कैसे ले गए आपको?
बटुक: हम इनके यहां यज्ञ करने गए थे। प्रयागराज बुलाया था। कहा था कि कोई जान-पहचान वाले हैं, उनके यहां प्रोग्राम है। तुम 2 लोग चले आओ। मैं और एक बटुक चले गए। वहां आशुतोष ने हमसे कहा कि आपको कृष्णजी की गवाही देनी है। इस बातचीत के बीच बटुक के चाचा आए और हमें गांव से बाहर खेतों की तरफ ले गए – रिपोर्टर: बटुक आशुतोष के आश्रम में कब गया था?
बटुक के चाचा: ये माघ में गया था, जनवरी में। रिपोर्टर: कैसे गया, कौन ले गया था?
बटुक के चाचा: देवीकिशोर (बदला हुआ नाम) है। इनसे बड़ा है। आपको मिलवा देंगे। वो लेकर गया था। पिछली बार 60 हजार रुपए कमाकर लाए थे। उसने फोन किया कि हमारे साथ चलो, तुमको अच्छा-खासा पैसा दिलवा देंगे। ये लालच में आ गए। रिपोर्टर: ठीक है। फिर क्या हुआ?
बटुक के चाचा: फिर उन्होंने पता नहीं क्या-कैसे इसको फंसा दिया। बोला कि लड्डू गोपाल का केस है। आशुतोष बड़े लड्डू गोपाल लेकर घर आए थे। कहने लगे कि इनका केस चल रहा है। उसमें तुम्हें चलकर गवाही देनी है। अब इसको क्या मालूम कि लड्डू गोपाल की गवाही देनी है या किसकी देनी है? बटुक बोला- आशुतोष ने कहा कि मथुरा में मंदिर-मकान देंगे, आराम से रहना रिपोर्टर: अब तक कितने पैसे दिए हैं?
बटुक: 6 हजार रुपए। रिपोर्टर: उन्होंने कभी किसी अधिकारी का नाम लिया आपसे?
बटुक: नहीं लिया। रिपोर्टर: अच्छा, ये कहा कि आप बयान दे दो, तो आपको कुछ दे देंगे?
बटुक: ये (आशुतोष) बोले कि वहां रहना है, मथुरा में। तुम कृष्णजी की गवाही दो। घर का मंदिर बन जाएगा मथुरा में, वहीं रहना बढ़िया। हमने बटुक के पिता से बात की। उन्होंने पहली बार चुप्पी तोड़ी और अपने साथ हुई जबरदस्ती के बारे में बताया- रिपोर्टर: आपको पता है, क्या हुआ था?
बटुक के पिता: हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा आदमी हमें कोई मिल जाए जो सुरक्षित यहां से ले जाए। फिर सुरक्षित यहीं छोड़ दे तो जो सच है, हम सबको बता देंगे। (लड़के की तरफ इशारा करते हुए) यह लड़का हमारा है, इस बेचारे को फंसा दिया। अब कुछ सवालों को और ज्यादा स्पष्ट करने के लिए हमने बटुक, उसके पिता और चाचा से एकसाथ बात की – बटुक ने कहा- परीक्षा दे रहे थे, आशुतोष ब्रह्मचारी ने उठवा लिया… रिपोर्टर: क्या आप आशुतोष के पास रहे?
बटुक: हां, यज्ञ में गए थे। बटुक के चाचा: दक्षिणा कार्ड के लिए इन्होंने जो आधार कार्ड दिया था, उसी से उन्होंने सब कुछ किया। रिपोर्टर: FIR में लिखा है कि आप शंकराचार्य जी के यहां पढ़ते थे, उन्होंने कुकर्म किया। साथ में सुलाते थे, ऐसा कुछ था?
बटुक: नहीं, हम उनके यहां कभी गए ही नहीं। बटुक के चाचा: जब गए ही नहीं तो झूठ कैसे बोलते? हमको भी भगवान के यहां जाना है भाई, लेकिन इतना था कि हमें अपनी जान बचानी थी। ये बच्चा पहली बार प्रयागराज गया। ये पैसे के कारण या मान लो किसी लालच के कारण चला गया। रिपोर्टर: क्या आशुतोष ने आरोप लगवाए कि इनके साथ गलत हुआ?
बटुक के चाचा: हां। रिपोर्टर: कुछ बताया, इतने पैसे दे देंगे, क्या दे देंगे?
बटुक के पिता: 21 हजार रुपए दक्षिणा के बारे में बताया था। बटुक: हम स्कूल में पेपर दे रहे थे। इन्होंने (आशुतोष ने) स्कूल के बाहर 2 लड़के भेज दिए। वो मुझे और पापा को जबरदस्ती मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गए। रिपोर्टर: कहां ले गए?
बटुक: एक होटल था, वहां स्कॉर्पियो आई और हमें लखनऊ ले गए। बटुक के चाचा: एक तरह से उन्होंने 4-5 दिन इस पर पकड़ (किडनैप करके रखना) रखी। बटुक के पिता: हम खुद थे साथ में। हमारा मोबाइल ले लिया। कमरे में बंद कर दिया, 2-3 कमरों के अंदर। हम रोते रहते। वहां पुलिसवाले थे। उन्हीं के पास जाकर रोए कि बाबूजी हमें जाने दो, नहीं तो हम फांसी पर लटक रहे हैं। तब जाकर उसने हमें वहां से अपनी पर्सनल गाड़ी से घर भेजा। आशुतोष को ये अंदाजा था कि बटुक या उसका परिवार पीछे हट सकता है। उसका षड़यंत्र कमजोर न हो, इसलिए उसने धोखे से पहले ही सादे कागज पर दोनों बटुकों से साइन करा लिए थे। फिर उन कागजों पर यौन शोषण के बयान खुद लिख लिए- रिपोर्टर: FIR में है कि कुंभ के दौरान आप प्रयागराज गए थे?
बटुक: नहीं गए कभी। रिपोर्टर: फिर FIR में कुकर्म जैसी बात कैसे लिखी?
बटुक: उन्होंने (आशुतोष) खुद ही लिखित बयान दे दिए, अपने आप। रिपोर्टर: साइन तो आपके हैं उस पर?
बटुक: साइन उन्होंने पहले ही करवा लिए थे, दक्षिणा कार्ड के नाम पर। कहने लगे कि दक्षिणा कार्ड बनाएंगे, तुम लोगों के। साइन कर दो इस पर। रिपोर्टर: FIR आपने पढ़ी थी, जो हुई थी?
बटुक: नहीं। इस केस का अभी क्या स्टेटस है? पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है। अब तक चार्जशीट कोर्ट में पेश नहीं हुई है। न ही पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद से पूछताछ की है। शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद गिरि ने केस को झूठा बताते हुए कोर्ट में शिकायत की है, जिस पर 28 जुलाई को सुनवाई होनी है। बटुक और उसके परिवार की बातचीत के बाद हमने आशुतोष महाराज से बात की – ——————————————- ये इन्वेस्टिगेशन भी पढ़िए… ‘बहनजी के दर्शन कर 5 लाख टेबल पर रखे’:बसपा जिलाध्यक्ष बोले- ये आपकी तरफ से गिफ्ट; सामान्य मुलाकात का रेट 2 लाख राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा रखने वाली बसपा में एंट्री के लिए दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने खुद को नेता दिखाने के लिए फाइल तैयार की। बसपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं से जान-पहचान बढ़ाई। फिर लखनऊ की BKT (बख्शी का तालाब) विधानसभा सीट से टिकट की डिमांड की। पूरी खबर पढ़ें…