संभल में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (ATS) यूनिट स्थापित की जाएगी। दरअसल, संभल पुलिस ने सरकार को एक कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट भेजी थी। इसमें यहां के 20 से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम थे, जो आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इस रिपोर्ट में पुलिस ने अलकायदा, हिजबुल, ISIS और सिमी जैसे आतंकी संगठनों से स्थानीय लोगों के जुड़े होने के पुख्ता सबूत दिए थे। इसके बाद यूपी सरकार ने संभल में जामा मस्जिद के सामने ATS दफ्तर खोलने का फैसला लिया है। दैनिक भास्कर को ये कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट हाथ लगी है। इससे हमने समझा कि यहां ATS क्यों भेजी जा रही? इसके मायने क्या हैं? लोगों की इस पर प्रतिक्रिया क्या है? ये रिपोर्ट पढ़िए… जामा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी में खुलेगा ATS ऑफिस
यूपी ATS के आईजी प्रेम गौतम ने 8 सितंबर को संभल SP को एक लेटर भेजा। इसमें बताया कि संभल में एटीएस फील्ड यूनिट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। न्यूनतम 10 लोगों के लिए कार्यालय भवन और उनके रहने के लिए आवासीय व्यवस्था पुलिस लाइन में कराई कराए। फिलहाल संभल पुलिस ने जामा मस्जिद के ठीक सामने सत्यव्रत पुलिस चौकी में एटीएस ऑफिस खोलने की तैयारियां की हैं। ये बिल्डिंग तीन मंजिला है। यहां अत्याधुनिक और बड़े-बड़े कमरे बनाए गए हैं। इसकी दीवारों पर महाभारत से जुड़े कुछ श्लोक उकेरे गए हैं। इसी बिल्डिंग में पुलिस का रेडियो ऑपरेटिंग सिस्टम भी लगा हुआ है। जामा मस्जिद इलाके में हिन्दू और मुसलमान दोनों रहते हैं। ऐसे में ये पुलिस चौकी एक तरह से सुरक्षा की दीवार बनकर काम कर रही है। हिंसा के बाद 20 से ज्यादा संदिग्ध आतंकी मिले
संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण विश्नोई ने दैनिक भास्कर को बताया- 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा हुई। पुलिस को घटनास्थल से कुछ कारतूस रिकवर हुए, जो दंगाइयों ने पुलिस पर चलाए थे। हमने इनकी फोरेंसिक जांच कराई। पता चला कि इसमें कुछ कारतूस पाकिस्तान मेड थे। पुलिस ने गहनता से जांच शुरू की तो सामने आया कि संभल के कई लोग ऐसे हैं, जो पूर्व में आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इतना ही नहीं, संभल हिंसा में जिस संदिग्ध व्यक्ति की तलाश हो रही थी, वो लाहौर की सेंट्रल जेल में बंद मिला। इसके अलावा दूसरे व्यक्ति की लोकेशन दुबई में पाई गई। पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस यूनिट, इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों से इनपुट लिए। जब रिपोर्ट तैयार हुई तो संभल निवासी करीब 20 संदिग्ध आतंकियों के नाम सामने आए। इनमें से वर्तमान में कुछ यूपी की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। कुछ मारे जा चुके हैं। जबकि कुछ कोर्ट से सजा पूरी करके या बरी होकर दूसरे काम-धंधे कर रहे हैं। SP ने आगे बताया- सभी जांच एजेंसियों का इनपुट इकट्ठा होने के बाद मैंने एक रिपोर्ट यूपी सरकार को भेजी। यहां पर एंटी टेरेरिस्ट यूनिट स्थापित करने की मांग की। इसी महीने यूपी सरकार ने एटीएस यूनिट स्थापित करने का फैसला लेते हुए आदेश जारी कर दिया है। अब संभल का आतंकी कनेक्शन पढ़िए अलकायदा चीफ था शन्नू, अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया
संभल के मोहल्ला दीपा राय निवासी मौलाना आसिम उमर उर्फ शन्नू 1995 में लापता हुआ। उस समय वो पढ़ाई के लिए सऊदी जाने की योजना बना रहा था, लेकिन पैसे न होने पर घर छोड़ दिया। बाद में पता चला कि वो पाकिस्तान में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, तहरीक-ए-तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है। 2008 में खुफिया एजेंसी ने उसकी पहचान की। तब पता चला कि वो अलकायदा प्रमुख था, जो दक्षिण एशिया में आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहा था। 30 जून 1996 को खुफिया एजेंसियों ने शन्नू के परिवार को ये बात ऑफिशियल बताई। एक जुलाई 2016 को अमेरिका ने शन्नू का नाम आतंकियों की ग्लोबल लिस्ट में डाला। सितंबर–2019 में अफगानिस्तान के हैल्मंड प्रांत में अमेरिकी ड्रोन हमले में शन्नू मारा गया। शन्नू के साथी भगौड़े आतंकी सईद अख्तर और शरजील अख्तर का आज तक कुछ पता नहीं चला है। हिजबुल, ISIS से जुड़े आतंकी भी पकड़े गए पाकिस्तान-अफगानिस्तान तक नेटवर्क संभल के कई और युवक भी जेलों में बंद
संभल में डूंगर सराय कोटला निवासी मोहम्मद नोमान, लोधी सराय निवासी फरहान रसूल, तुर्तीपुर इल्हा निवासी मोहम्मद नाजिम, मोहम्मा कोटगर्वी निवासी अब्दुल समद भी अलग-अलग जेलों में बंद हैं। इनके खिलाफ ATS और NIA ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। सभी के केस कोर्ट में ट्रायल पर चल रहे हैं। लोग बोले- संभल सहित सभी शहरों में ATS स्थापित हो संभल में ATS यूनिट की स्थापना को लेकर यहां के लोग क्या सोचते हैं? इसे लेकर हमने अलग-अलग वर्ग के लोगों से बात की। डॉक्टर रशीक अनवर कहते हैं कि संभल में एटीएस की स्थापना अच्छी बात है। अगर कुछ नौजवान भटके हुए हैं तो शायद उन्हें सही किया जा सके। अगर यहां पर एटीएस की यूनिट भेजी जा रही है तो सरकार और जिला प्रशासन ने ठीक ही सोचा समझकर निर्णय लिया होगा। संभल ही नहीं बाकी शहरों में भी एटीएस के कैंप खोले जाने चाहिए। संभल के कुछ नौजवान पहले भी पाकिस्तान गए थे। उनके खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हुई थी। उसके बाद से मुझे ऐसा लगता है कि अब कोई भी नौजवान ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है। हो सकता है कि कुछ लड़के पैसों के लालच में आ गए हो और उन्होंने देश के खिलाफ कदम उठाए हो, लेकिन इस वक्त एकदम सब ठीक है। नगर पालिका परिषद संभल के सभासद गगन वार्ष्णेय बताते हैं कि एटीएस यूनिट की स्थापना से हमारा क्षेत्र और सुरक्षित होगा। देश में जो भी गलत कृत्य संभल से संचालित हो रहे हैं, उन पर भी रोकथाम लगेगी। कोई भी व्यक्ति अगर देश का नाम खराब कर रहा है, ऐसे व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए। एटीएस इन्हीं सब चीजों पर रोकथाम के लिए है। वहीं, स्थानीय निवासी अजय शर्मा का कहना है कि अच्छी बात है एटीएस जैसी संस्था अब संभल में आतंकी तत्वों को ढूंढेगी। ऐसी संस्था यदि संभल में होगी तो यहां के नागरिकों को और सुरक्षित माहौल मिलेगा। …………….. ये खबर भी पढ़ें… मायावती फिर कमाल कर पाएंगी?:आकाश की रीलॉन्चिंग, बुआ-भतीजे का नया प्लान; कांशीराम की पुण्यतिथि पर शक्ति प्रदर्शन बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 साल बाद 9 अक्टूबर को शक्ति प्रदर्शन करने वाली हैं। इसी दिन कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) है। बसपा का खुद को साबित करने का पुराना हथियार रैली है। जब भी पार्टी को अपना दमखम दिखाना होता है, वह बड़े स्तर पर रैलियां करती है और भीड़ इकट्ठा करती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बसपा का प्लान क्या है? क्या ये 2007 की यादें ताजा करने की कोशिश है? क्या आकाश आनंद की वापसी के बाद की नई रणनीति है? क्या कांशीराम की नीतियों को बसपा लागू करने वाली है? क्या बुआ-भतीजे की जोड़ी कमाल दिखा पाएगी? एक्सपर्ट क्या मानते हैं? पढ़िए पूरी खबर…
यूपी ATS के आईजी प्रेम गौतम ने 8 सितंबर को संभल SP को एक लेटर भेजा। इसमें बताया कि संभल में एटीएस फील्ड यूनिट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। न्यूनतम 10 लोगों के लिए कार्यालय भवन और उनके रहने के लिए आवासीय व्यवस्था पुलिस लाइन में कराई कराए। फिलहाल संभल पुलिस ने जामा मस्जिद के ठीक सामने सत्यव्रत पुलिस चौकी में एटीएस ऑफिस खोलने की तैयारियां की हैं। ये बिल्डिंग तीन मंजिला है। यहां अत्याधुनिक और बड़े-बड़े कमरे बनाए गए हैं। इसकी दीवारों पर महाभारत से जुड़े कुछ श्लोक उकेरे गए हैं। इसी बिल्डिंग में पुलिस का रेडियो ऑपरेटिंग सिस्टम भी लगा हुआ है। जामा मस्जिद इलाके में हिन्दू और मुसलमान दोनों रहते हैं। ऐसे में ये पुलिस चौकी एक तरह से सुरक्षा की दीवार बनकर काम कर रही है। हिंसा के बाद 20 से ज्यादा संदिग्ध आतंकी मिले
संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण विश्नोई ने दैनिक भास्कर को बताया- 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा हुई। पुलिस को घटनास्थल से कुछ कारतूस रिकवर हुए, जो दंगाइयों ने पुलिस पर चलाए थे। हमने इनकी फोरेंसिक जांच कराई। पता चला कि इसमें कुछ कारतूस पाकिस्तान मेड थे। पुलिस ने गहनता से जांच शुरू की तो सामने आया कि संभल के कई लोग ऐसे हैं, जो पूर्व में आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इतना ही नहीं, संभल हिंसा में जिस संदिग्ध व्यक्ति की तलाश हो रही थी, वो लाहौर की सेंट्रल जेल में बंद मिला। इसके अलावा दूसरे व्यक्ति की लोकेशन दुबई में पाई गई। पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस यूनिट, इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों से इनपुट लिए। जब रिपोर्ट तैयार हुई तो संभल निवासी करीब 20 संदिग्ध आतंकियों के नाम सामने आए। इनमें से वर्तमान में कुछ यूपी की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। कुछ मारे जा चुके हैं। जबकि कुछ कोर्ट से सजा पूरी करके या बरी होकर दूसरे काम-धंधे कर रहे हैं। SP ने आगे बताया- सभी जांच एजेंसियों का इनपुट इकट्ठा होने के बाद मैंने एक रिपोर्ट यूपी सरकार को भेजी। यहां पर एंटी टेरेरिस्ट यूनिट स्थापित करने की मांग की। इसी महीने यूपी सरकार ने एटीएस यूनिट स्थापित करने का फैसला लेते हुए आदेश जारी कर दिया है। अब संभल का आतंकी कनेक्शन पढ़िए अलकायदा चीफ था शन्नू, अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया
संभल के मोहल्ला दीपा राय निवासी मौलाना आसिम उमर उर्फ शन्नू 1995 में लापता हुआ। उस समय वो पढ़ाई के लिए सऊदी जाने की योजना बना रहा था, लेकिन पैसे न होने पर घर छोड़ दिया। बाद में पता चला कि वो पाकिस्तान में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, तहरीक-ए-तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है। 2008 में खुफिया एजेंसी ने उसकी पहचान की। तब पता चला कि वो अलकायदा प्रमुख था, जो दक्षिण एशिया में आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहा था। 30 जून 1996 को खुफिया एजेंसियों ने शन्नू के परिवार को ये बात ऑफिशियल बताई। एक जुलाई 2016 को अमेरिका ने शन्नू का नाम आतंकियों की ग्लोबल लिस्ट में डाला। सितंबर–2019 में अफगानिस्तान के हैल्मंड प्रांत में अमेरिकी ड्रोन हमले में शन्नू मारा गया। शन्नू के साथी भगौड़े आतंकी सईद अख्तर और शरजील अख्तर का आज तक कुछ पता नहीं चला है। हिजबुल, ISIS से जुड़े आतंकी भी पकड़े गए पाकिस्तान-अफगानिस्तान तक नेटवर्क संभल के कई और युवक भी जेलों में बंद
संभल में डूंगर सराय कोटला निवासी मोहम्मद नोमान, लोधी सराय निवासी फरहान रसूल, तुर्तीपुर इल्हा निवासी मोहम्मद नाजिम, मोहम्मा कोटगर्वी निवासी अब्दुल समद भी अलग-अलग जेलों में बंद हैं। इनके खिलाफ ATS और NIA ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। सभी के केस कोर्ट में ट्रायल पर चल रहे हैं। लोग बोले- संभल सहित सभी शहरों में ATS स्थापित हो संभल में ATS यूनिट की स्थापना को लेकर यहां के लोग क्या सोचते हैं? इसे लेकर हमने अलग-अलग वर्ग के लोगों से बात की। डॉक्टर रशीक अनवर कहते हैं कि संभल में एटीएस की स्थापना अच्छी बात है। अगर कुछ नौजवान भटके हुए हैं तो शायद उन्हें सही किया जा सके। अगर यहां पर एटीएस की यूनिट भेजी जा रही है तो सरकार और जिला प्रशासन ने ठीक ही सोचा समझकर निर्णय लिया होगा। संभल ही नहीं बाकी शहरों में भी एटीएस के कैंप खोले जाने चाहिए। संभल के कुछ नौजवान पहले भी पाकिस्तान गए थे। उनके खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हुई थी। उसके बाद से मुझे ऐसा लगता है कि अब कोई भी नौजवान ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है। हो सकता है कि कुछ लड़के पैसों के लालच में आ गए हो और उन्होंने देश के खिलाफ कदम उठाए हो, लेकिन इस वक्त एकदम सब ठीक है। नगर पालिका परिषद संभल के सभासद गगन वार्ष्णेय बताते हैं कि एटीएस यूनिट की स्थापना से हमारा क्षेत्र और सुरक्षित होगा। देश में जो भी गलत कृत्य संभल से संचालित हो रहे हैं, उन पर भी रोकथाम लगेगी। कोई भी व्यक्ति अगर देश का नाम खराब कर रहा है, ऐसे व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए। एटीएस इन्हीं सब चीजों पर रोकथाम के लिए है। वहीं, स्थानीय निवासी अजय शर्मा का कहना है कि अच्छी बात है एटीएस जैसी संस्था अब संभल में आतंकी तत्वों को ढूंढेगी। ऐसी संस्था यदि संभल में होगी तो यहां के नागरिकों को और सुरक्षित माहौल मिलेगा। …………….. ये खबर भी पढ़ें… मायावती फिर कमाल कर पाएंगी?:आकाश की रीलॉन्चिंग, बुआ-भतीजे का नया प्लान; कांशीराम की पुण्यतिथि पर शक्ति प्रदर्शन बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 साल बाद 9 अक्टूबर को शक्ति प्रदर्शन करने वाली हैं। इसी दिन कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) है। बसपा का खुद को साबित करने का पुराना हथियार रैली है। जब भी पार्टी को अपना दमखम दिखाना होता है, वह बड़े स्तर पर रैलियां करती है और भीड़ इकट्ठा करती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बसपा का प्लान क्या है? क्या ये 2007 की यादें ताजा करने की कोशिश है? क्या आकाश आनंद की वापसी के बाद की नई रणनीति है? क्या कांशीराम की नीतियों को बसपा लागू करने वाली है? क्या बुआ-भतीजे की जोड़ी कमाल दिखा पाएगी? एक्सपर्ट क्या मानते हैं? पढ़िए पूरी खबर…