संभल हिंसा की रिपोर्ट लीक कैसे हुई, जांच हो:सांसद बर्क बोले- जिसे CO से ASP बनाया गया, उसे गलत काम का इनाम मिला है

संभल हिंसा की जांच के लिए आयोग बना था, न कि वहां के इतिहास का पता लगाने के लिए। अगर इतिहास की बात हो रही है तो मैं भी इतिहास बताऊंगा। संभल हिंसा की रिपोर्ट लीक कैसे हुई, इसकी जांच होनी चाहिए। ये कहना है संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा- अनुज चौधरी को सीओ से एएसपी बनाया गया। मुझे नहीं लगता कि उनका प्रमोशन रूटीन प्रक्रिया में किया गया। अभी तक न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई है। जब तक रिपोर्ट सामने नहीं आएगी, तब तक मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इतना जरूर कहूंगा कि अगर ये गोपनीय रिपोर्ट है, तो ये मीडिया तक कैसे पहुंची। इसे सार्वजनिक नहीं किया गया, तो ये लीकेज कैसे हुई? पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आयोग ने कहा है कि संभल में हिंदुओं की आबादी घटी है, क्या कहेंगे?
जवाब : पहले तो मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। रिपोर्ट आ जाए, उसे हम देखें उसके बाद टिप्पणी जरूर करूंगा। लेकिन मैं इतना जानता हूं कि ये आयोग इसलिए नहीं बना था कि इतिहास क्या रहा है। इतिहास से जुड़ी कोई बात रिपोर्ट में रखी गई है, तो हम इतिहास भी बताने का काम करेंगे कि वहां का इतिहास क्या रहा है। लेकिन आयोग इसलिए गठित हुआ था कि वहां पर हिंसा क्यों हुई और हिंसा का जिम्मेदार कौन है? आयोग का मकसद यही होता है कि जो चीजें हुईं, वो आगे न हो इसके क्या उपाय हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब आयोग असली सच्चाई सामने लाए। सवाल : आप पर बिजली चोरी से लेकर हिंसा तक के केस दर्ज हैं?
जवाब : इससे आप लोग भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं। जिन लोगों की राजनीति इसी बेस पर चल रही है, हिंदू मुस्लिम के बीच मतभेद पैदा करने से। ऐसे में कहीं न कहीं मुझे टारगेट करके मुस्लिम लीडरशिप को रोकना और आपस में लड़ाई करके हिंदू मुस्लिमों के बीच खाई पैदा करके किस तरह से आगे बढ़ सकते हैं, इस बात को लेकर ही ये चीजें हुई हैं। मुझे न्यायालय पर भरोसा है कि अगर पुलिस-प्रशासन से इंसाफ नहीं मिलता है, तो न्यायालय से इंसाफ जरूर मिलेगा। सवाल: क्या आपके दादा के बेबाक बयान, आपको निशाना बनाने की वजह?
जवाब : मैंने अपने दादा शफीकुर्रहमान बर्क साहब के साथ रहकर सियासत की ट्रेनिंग ली है। मेरा विधानसभा या लोकसभा पहुंचने का मकसद जनहित के मुद्दों को, विकास के कार्यों को संसद में उठा सकें और साथ में सरकार कुछ गलत कर रही है तो उसको आइना दिखा सकें। ये हमारी जिम्मेदारी बनती है। दादा से यही सीखा है कि कुछ गलत हो तो उसपर खामोश नहीं रहना चाहिए। यही मेरी राजनीति का वसूल भी है। सवाल : संभल सीओ को एडिशनल एसपी बना दिया, क्या कहेंगे?
जवाब : इसका जवाब सरकार को देना चाहिए कि ये रूटीन की प्रक्रिया है या गलत काम करके उन्होंने जो टारगेट किया है, उसका उन्हें (अनुज चौधरी) इनाम मिला है। रूटीन प्रक्रिया का मुझे ज्यादा हिस्सा नहीं लगता, लेकिन अगर गलत काम करने पर इस तरह से इनाम दिया जाएगा तो कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा होगा। हमारा कहना है कि ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए। लेकिन अगर इनाम दिया जाएगा तो आने वाले समय में अच्छा काम करने वालों का मोराल डाउन होगा और जो अच्छा करते हैं उनका मोराल हाई होगा। सवाल : राजनीति की शुरुआत AIMIM से की, अब उसका क्या भविष्य देखते?
जवाब : देखिए मैंने अपनी राजनीति की शुरुआत एमआईएम के साथ नहीं की थी, अपने दादा के साथ की थी। वो एक अलग इत्तेफाक था कि मैं एआईएमआईएम से चुनाव लड़ा था। हमारा मकसद सिर्फ खासतौर से इस देश के अंदर मुसलमानों के हिफाजत की बात उठाना है। उसके साथ-साथ जो हमारा संविधान भी कहता है और मजहब भी कहता है कि हर वर्ग, हर धर्म और हर बिरादरी के लोगों के हकों की हिफाजत होनी चाहिए। जो इंसाफ है वो मिलना चाहिए। मैं समझ सकता हूं कि आने वाले समय में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी प्रदेश के साथ साथ देश में भी अपना परचम लहराने का काम करेगी। सवाल : AMU छात्रसंघ में काम कर चुके हैं, सियासत में कितना फायदा मिला?
जवाब : देखिए मेरे दादा कहते थे कि पहले की राजनीति में और अब की राजनीति में जमीन आसमान का फर्क है। पहले खिदमत की राजनीति होती थी। अब राजनीति का मकसद बदलता जा रहा है जो कि सही नहीं है। राजनीति का मकसद ये होना चाहिए कि जो लोग अभी अपने देश के अंदर बड़ी संख्या में पिछड़े हुए हैं उनको अच्छी शिक्षा और अच्छा रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इन चीजों पर फोकस करते हुए अपनी बात उठाना चाहिए। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी से मुझे छात्र राजनीति के जरिए बहुत कुछ सीखा। एएमयू के अंदर तालीम के साथ साथ तरबियत भी मिलती है। ऐसे में मुझे इसका बहुत बड़ा लाभ मिला है। सवाल: संभल को धार्मिक टूरिस्ट प्लेस बनाया जा रहा है, क्या कहेंगे?
जवाब : हम तो ये कह रहे हैं कि संभल को जो संभल का हक है वो मिलना चाहिए। हम कब मना करते हैं कि संभल को आप धार्मिक टूरिस्ट बनाइए। हमारा अनुरोध सिर्फ इतना है कि संभल को बांटने का काम ना करें। आप जो बनाना है वो बनाएं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क के क्षेत्र में विकास करें, रोजगार दें। लेकिन संभल को बांटने का काम न करें। सवाल : संभल की हिंसा तुर्क और पठानों की लड़ाई, पुलिस का तर्क कितना सही?
जवाब : ये ऐसा सवाल नहीं है कि इसका जवाब दिया जाए। तुर्क और पठान का रंग दिया गया था। उनकी फिलासफी फेल हो गई। अगर इस घटना को कोई और रंग देने का प्रयास करते तो शायद वो कामयाब हो जाते। लेकिन प्रशासन ने जो रुख देने का प्रयास किया उसको मुस्लिम ही नहीं मैं समझता हूं कि कोई भी भरोसा नहीं कर सकता। मस्जिद अल्लाह का घर होता है किसी एक बिरादरी के लिए नहीं होता। ऐसे में तुर्क और पठान विवाद का रुख देना, मैं समझता हूं कि वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए। इस सवाल का कोई सर पांव नहीं है। अभी तक लड़ाई हिंदू मुस्लिमों को बांटने की थी और अब ये मुस्लिमों को आपस में बांटने का प्रयास कर रहे हैं। आप चाहे जितनी कोशिश कर लो, इस समय मुसलमान अपने एक प्लेट फार्म पर खड़े हैं। सवाल : अवैध निर्माण के मामले में तीसरा नोटिस और कोर्ट का ध्वस्तीकरण का आदेश आया?
जवाब : संभल की जो घटना हुई, उस पर मैंने अपनी बेबाक राय रखी। जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई। सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाया। जिसका मकसद ये था कि जिन लोगों ने गलत किया है उन पर कार्रवाई हो और जिनके साथ गलत हुआ है उन्हें इंसाफ मिल सके। इसीलिए मैंने बढ़ चढ़ कर उसमें हिस्सा लिए। इसका नतीजा सबने देखा। गलत तरीके से मुझे टारगेट किया गया। हम उनमें से नहीं हैं, जो खामोश हो जाएंगे। मुझे खुशी है कि मेरी पार्टी और मेरे नेता अखिलेश यादव ने पूरी मजबूती के साथ मेरा साथ दिया है और सच का साथ दिया है। सवाल : कुंदरकी की बड़ी आबादी मुस्लिमों की है, ये सीट कैसे हार गए?
जवाब : मैं विधानसभा का चुनाव 43 हजार से जीता था। लोकसभा में कुंदरकी से 58 हजार वोटों से जीत हासिल की। मैं इतना ही कहूंगा कि वहां इलेक्शन नहीं, सलेक्शन हुआ। चुनाव आयोग की भूमिका पर जो सवाल खड़े हो रहे हैं, कुंदरकी भी उसी का एक हिस्सा है। सवाल: 2027 में SP की संभावनाएं क्या हैं? संभल से आपकी भूमिका क्या होगी?
जवाब : एक साल 4 महीने बचे हैं चुनाव में। समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में हैं। लोकसभा में हमारी जो परफार्मेंस रही है उससे कहीं बेहतर परफार्मेंस हम 2027 में करके दिखाएंगे। सवाल : खुद पर लगे आरोपों को लेकर कभी प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से बात की है?
जवाब : कहां जाते, हम न्यायालय में अपनी बात लेकर गए। जहां पुलिस प्रशासन अगर सरकार के इशारे पर कार्रवाई कर रहा है, तो हमें इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। हमने वही किया। शुक्र है न्यायालय से रिलीफ मिला भी है। न्यायालय पर पूरा भरोसा है। इंसाफ मिला भी है और आगे भी मिलेगा। सवाल: सूबे में मुस्लिम लीडरशिप हाशिए पर, प्रदेश स्तर का कोई नेता नहीं?
जवाब : देखिए हमारा मकसद खुद को चमकाना नहीं है। यकीनन आजम खां साहब रहे हों, दादा मोहतरम बर्क साहब रहे हों, अहमद हसन साहब रहे हों। जो भी मुस्लिम लीडर रहे हैं। आज का समय थोड़ा अलग है। इस समय अपना मकसद ये नहीं है कि कोई मुसलमान लीडर अपना नाम चमकाए चाहे में हूं या कोई और। अपना मकसद सिर्फ इतना है कि मुस्लिमों के साथ जो ज्यादती हो रही है उसमें सारे रहनुमा जो जनप्रतिनिधि हैं खासकर मुस्लिम। वो तवज्जो देकर के उन लोगों के साथ हो रही ज्यादती के खिलाफ खड़े हों। सवाल: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मुसलमान कन्वर्टेड हैं, क्या कहेंगे?
जियाउर्रहमान: मुसलमानों के इतिहास जानने से पहले वो अपना इतिहास जानें। देश की जब लड़ाई लड़ी जा रही थी पहले उस पर सफाई दें कि उन लोगों ने आजादी की लड़ाई में कितना साथ दिया था? फिर उसके बाद मुसलमानों के इतिहास पर सवाल उठाएंगे। अगर वो मुसलमानों का इतिहास पढ़ेंगे तो फिर शायद वो इस तरह का सवाल ही नहीं उठाएंगे। आपस में जो बांटने की कोशिश कर रहे हैं, वो नहीं करेंगे। ऐसे लोग जो एक विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसी बात करते हैं। जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ेगा और भी बातें सामने आएंगी। हमारी और आपकी जिम्मेदारी बनती है कि इन लोगों को इनके हाल पर छोड़ कर अपने काम पर फोकस करना चाहिए। सवाल: आजम खान की मदद अखिलेश ने की या नहीं, आपको क्या लगता है?
जवाब: आरोप लगाने वाले कौन लोग हैं? देखिए जो कहने वाले लोग हैं वे बताएं कि किस तरह से पैरवी नहीं की। आजम खां साहब एक सीनियर लीडर हैं, मैं भी उनकी इज्जत करता हूं। मैं इतना जानता हूं कि अखिलेश यादव ने आजम खां के लिए बहुत कुछ किया। लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं को भी अगर परेशानी आई है तो उन्होंने आगे बढ़कर मदद करने का प्रयास किया है। सवाल : भाजपा में सबसे ज्यादा संसद में कौन पसंद हैं?
जवाब : मैं क्यों भाजपा के लोगों को पसंद करूंगा। मुझे तो सबसे ज्यादा मेरे नेता अखिलेश यादव पसंद हैं। या फिर मेरे कायद मोहतर बर्क साहब हैं। सवाल : डिंपल मस्जिद गई तो रसीदी ने कमेंट किया, अखिलेश चुप रहे?
जवाब : वो मुद्दा पुराना हो चुका है। वो मुद्दा भाजपा ने बनाने का प्रयास किया था। ऐसा कुछ नहीं था। मस्जिद को देखने के लिए रामपुर के एमपी और मस्जिद के इमाम ने दरख्वास्त की थी अखिलेश जी से। जिसमें अखिलेश यादव ने भी दिलचस्पी दिखाई थी कि उसकी तारीख को जान सकें। इस मकसद से गए थे। भाजपा ने बहुत कोशिश की उसको रंग देने के लिए लेकिन उसमें कामयाब नहीं हो पाई। ………………. ये खबर भी पढ़ें… शाह ने सपा सांसद को बर्थडे विश किया, उनका इंटरव्यू:बोले- जब रेड पड़ी थी, तभी मैं उनकी वाशिंग मशीन में धुल जाता ‘जब मेरे यहां इनकम टैक्स का छापा पड़ा था, तभी भाजपा में चला जाता और वाशिंग मशीन में धुल गया होता। जिसे आज भी झेल रहा हूं। मैं समाजवादी था, हूं और रहूंगा।’ दैनिक भास्कर के भाजपा में शामिल होने की संभावना पर किए गए सवाल पर यह बात सपा के राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय प्रवक्ता और घोसी से सांसद राजीव राय ने कही। राजीव राय के जन्मदिन पर गृहमंत्री अमित शाह ने फोन करके बधाई दी थी। तभी से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…