महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने सपा के वोटबैंक में सेंध लगा दी। मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाके, जहां सपा का वर्चस्व रहता था, AIMIM ने उस किले को भी ध्वस्त कर दिया। महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों और नगर पालिका में पार्टी ने 125 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, समाजवादी पार्टी महज 2 सीटों पर सिमट गई। महाराष्ट्र में सपा क्यों पीछे रह गई? महाराष्ट्र का यह बदलाव यूपी में कितना असर डाल सकता है? AIMIM के पक्ष में जिस तरह से नतीजे आए, वो यूपी में सपा के लिए कैसे खतरे की घंटी हैं? AIMIM ने 2022 और 2024 में यूपी में सपा को कितना नुकसान पहुंचाया था? इन सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर… पहले महाराष्ट्र में सपा की हार और AIMIM की बढ़त के कारण जानिए
बीएमसी में AIMIM ने 8 सीटें जीती हैं। इनमें से ज्यादातर गोवंडी-मानखुर्द क्षेत्र से हैं, जहां सपा के महाराष्ट्र अध्यक्ष और 4 बार के विधायक अबू आसिम आजमी का लंबे समय से दबदबा रहा है। इस चुनाव में गोवंडी, मानखुर्द, शिवाजी नगर और आसपास के वार्डों में AIMIM ने क्लीन स्वीप करते हुए सपा के पारंपरिक गढ़ को छीन लिया। यही वजह है, AIMIM की जीत को सपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम मुस्लिम वोटरों में एक नए विकल्प की तलाश की ओर इशारा कर रहा। ओवैसी की आक्रामक और बेबाक शैली मुस्लिमों को लुभा रही है। अंदरूनी कलह ने सपा को कमजोर किया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा की हार के पीछे एक बड़ा कारण पार्टी की आंतरिक खींचतान भी है। महाराष्ट्र सपा के दो प्रमुख नेताओं प्रदेश अध्यक्ष व मानखुर्द शिवाजी से विधायक अबू आसिम आजमी और भिवंडी से विधायक रईस शेख के बीच टिकट वितरण को लेकर गहरा विवाद रहा। रईस शेख ने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि आजमी ने उनके समर्थकों को टिकट देने से इनकार कर पार्टी को नुकसान पहुंचाया। इस कलह का असर भिवंडी और मुंबई के मदनपुरा जैसे इलाकों में देखा गया, जहां सपा के वोट बिखर गए। कुछ सीटें कांग्रेस को चली गईं। अबू आजमी मुलायम सिंह यादव के दौर से सपा के करीबी रहे। अखिलेश के भी भरोसेमंद माने जाते हैं। उनके क्षेत्र में AIMIM का यह प्रदर्शन सपा के लिए खतरे का सबसे बड़ा संकेत है। आजमी खुद कहते हैं- मुस्लिम युवा ओवैसी भाइयों के भाषणों से प्रभावित हुए। लेकिन यह भी स्वीकार करते हैं कि भाजपा इस जीत का इस्तेमाल हिंदू वोटरों को पोलराइज करने के लिए कर सकती है। चुनाव में ओवैसी ने अखिलेश को सीधे टारगेट किया
ओवैसी ने चुनाव प्रचार के दौरान खुलकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। एक भाषण में उन्होंने कहा- अबू आजमी और अखिलेश यादव को पता है कि जब मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व आगे आएगा, तो अखिलेश की दुकान बंद हो जाएगी। ओवैसी का दावा है कि सपा और कांग्रेस मुस्लिम वोट लेते हैं, लेकिन उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं देते। इसका असर भी मुस्लिम वोटबैंक पर पड़ा। उन्होंने ओवैसी की पार्टी को वोट किया। एक बयान ने बिगाड़ दिया सपा का खेल
वरिष्ठ पत्रकार शबीह अहमद रिजवी कहते हैं- अबू आसिम आजमी को विवादों में रहना पसंद है। वे अपने बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन, इस चुनाव में ओवैसी की पार्टी के नेता इम्तियाज जलील को सीधी चुनौती देना उन्हें भारी पड़ गया। उन्होंने मंच से इम्तियाज जलील को चुनौती देते हुए कहा था- हम यूपी से आते हैं, उठाकर पटक देंगे, बत्तीसी बाहर आ जाएगी। एक एमपी को लेकर दनदनाता फिरता है। हमारे पास 37 एमपी हैं। इतना ही नहीं, अबू आसिम आजमी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान भाजपा और शिवसेना से ज्यादा AIMIM को निशाने पर रखा। AIMIM ने भी अखिलेश यादव और अबू आसिम आजमी पर खुलकर निशाना साधा। ओवैसी ने चुनाव प्रचार में सपा को मुस्लिम विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिमों को सिर्फ वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, सपा ने AIMIM को भाजपा की बी टीम करार दिया। दावा किया कि वह विपक्षी वोटों को बांटकर भाजपा को फायदा पहुंचाती है। शायद यही वजह रही कि मुस्लिम बहुल इलाकों में लड़ाई सपा बनाम AIMIM होकर रह गई। AIMIM ने यहां बढ़त हासिल कर ली। मुंबई के गोवंदी-मानखुर्द जैसे मुस्लिम बहुल वार्डों में AIMIM ने सपा को करारी शिकस्त दी। सभी 6 सीटें जीतीं। बिहार में भी दिखाया था असर
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपना असर दिखाया था। बिहार चुनाव में सीमांचल की 5 सीटों पर AIMIM ने जीत दर्ज की थी, जो राजद का गढ़ माना जाता है। माना जा रहा है, ओवैसी का रुख अब यूपी की ओर होगा। उनका मुख्य फोकस पश्चिमी यूपी होगा, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी है। महाराष्ट्र में ओवैसी की पार्टी की जीत का क्या UP पर असर पड़ेगा?
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- महाराष्ट्र का यह बदलाव यूपी पर भी असर डाल सकता है, जहां सपा का मुस्लिम वोटबैंक मजबूत माना जाता है। अगर ओवैसी की पार्टी यूपी में अपनी उपस्थिति बढ़ाती है। बसपा भी मुस्लिम वोटों पर दावा करती रही, तो अखिलेश यादव के लिए मुस्लिम वोटों में बिखराव बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, ये बात अखिलेश यादव को भी पता है और वह इस डैमेज को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश करेंगे। यूपी में वोट कटवा की भूमिका में रही है AIMIM
AIMIM पहले से ही यूपी में सपा के मुस्लिम वोटबैंक को काट रही है। 2022 विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ये बात अलग है कि उसने कोई सीट नहीं जीती। लेकिन, कई जगह सपा को नुकसान पहुंचाया था। उदाहरण के तौर पर बाराबंकी की कुर्सी विधानसभा सीट सपा 217 वोटों से हारी, जबकि AIMIM को यहां 8,541 वोट मिले थे। इससे भाजपा को फायदा हुआ। 2024 के चुनाव में AIMIM ने यूपी में अपना एक भी प्रत्याशी नहीं उतारा था। सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े। मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं हुआ। शायद यही वजह रही कि सपा ने लोकसभा चुनाव में अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव AIMIM को भाजपा की बी टीम कहते रहे हैं। लेकिन, महाराष्ट्र की कामयाबी के बाद अब ओवैसी की पार्टी यूपी में और आक्रामक हो सकती है। महाराष्ट्र के नतीजे यूपी में मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति करने वाली सपा की चिंता बढ़ाने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकार नावेद शिकोह कहते हैं- यह तय है कि जिस तरह से बिहार और महाराष्ट्र में ओवैसी ने बढ़त हासिल की है, उसे लेकर अखिलेश यादव के अंदर बेचैनी होना स्वाभाविक है। ओवैसी की पार्टी इसका ऐलान भी कर चुकी है कि वो पूरे दमखम के साथ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में लड़ेगी। यूपी में कई ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिमों की निर्णायक भूमिका होती है। ओवैसी बिहार में इस नरेटिव को अपने वोटरों के बीच में सेट करने में कामयाब रहे कि वे इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं। कांग्रेस और राजद उन्हें कम से कम सीट दे, तो भी। ऐसे में उनके लोगों को लगता है कि ओवैसी इंडिया गठबंधन में आना चाहते हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन के लोग उन्हें नहीं आने देना चाहते। अब ओवैसी इसी तरह का ऑफर लेकर यूपी आएंगे और गठबंधन में जगह न मिलने पर उसे चुनावों में प्रचारित करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ‘राजनाथ हम सब में बड़े’…:यूपी में क्षत्रिय राजनीति के समीकरण क्या? उत्तर प्रदेश में कुटुंब परिवार की बैठक। फिर ब्राह्मण विधायकों का सहभोज। और अब अवध में राष्ट्रकथा। तीनों आयोजन देखने में भले ही अलग-अलग लग रहे। लेकिन, सियासी मकसद सिर्फ एक है कि सत्ता कैसे उनके काबू में रहे? प्रदेश में कई बाहुबली क्षत्रियों में इस बात की होड़ है कि कौन सबसे बड़ा? पढ़ें पूरी खबर
बीएमसी में AIMIM ने 8 सीटें जीती हैं। इनमें से ज्यादातर गोवंडी-मानखुर्द क्षेत्र से हैं, जहां सपा के महाराष्ट्र अध्यक्ष और 4 बार के विधायक अबू आसिम आजमी का लंबे समय से दबदबा रहा है। इस चुनाव में गोवंडी, मानखुर्द, शिवाजी नगर और आसपास के वार्डों में AIMIM ने क्लीन स्वीप करते हुए सपा के पारंपरिक गढ़ को छीन लिया। यही वजह है, AIMIM की जीत को सपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम मुस्लिम वोटरों में एक नए विकल्प की तलाश की ओर इशारा कर रहा। ओवैसी की आक्रामक और बेबाक शैली मुस्लिमों को लुभा रही है। अंदरूनी कलह ने सपा को कमजोर किया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा की हार के पीछे एक बड़ा कारण पार्टी की आंतरिक खींचतान भी है। महाराष्ट्र सपा के दो प्रमुख नेताओं प्रदेश अध्यक्ष व मानखुर्द शिवाजी से विधायक अबू आसिम आजमी और भिवंडी से विधायक रईस शेख के बीच टिकट वितरण को लेकर गहरा विवाद रहा। रईस शेख ने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि आजमी ने उनके समर्थकों को टिकट देने से इनकार कर पार्टी को नुकसान पहुंचाया। इस कलह का असर भिवंडी और मुंबई के मदनपुरा जैसे इलाकों में देखा गया, जहां सपा के वोट बिखर गए। कुछ सीटें कांग्रेस को चली गईं। अबू आजमी मुलायम सिंह यादव के दौर से सपा के करीबी रहे। अखिलेश के भी भरोसेमंद माने जाते हैं। उनके क्षेत्र में AIMIM का यह प्रदर्शन सपा के लिए खतरे का सबसे बड़ा संकेत है। आजमी खुद कहते हैं- मुस्लिम युवा ओवैसी भाइयों के भाषणों से प्रभावित हुए। लेकिन यह भी स्वीकार करते हैं कि भाजपा इस जीत का इस्तेमाल हिंदू वोटरों को पोलराइज करने के लिए कर सकती है। चुनाव में ओवैसी ने अखिलेश को सीधे टारगेट किया
ओवैसी ने चुनाव प्रचार के दौरान खुलकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। एक भाषण में उन्होंने कहा- अबू आजमी और अखिलेश यादव को पता है कि जब मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व आगे आएगा, तो अखिलेश की दुकान बंद हो जाएगी। ओवैसी का दावा है कि सपा और कांग्रेस मुस्लिम वोट लेते हैं, लेकिन उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं देते। इसका असर भी मुस्लिम वोटबैंक पर पड़ा। उन्होंने ओवैसी की पार्टी को वोट किया। एक बयान ने बिगाड़ दिया सपा का खेल
वरिष्ठ पत्रकार शबीह अहमद रिजवी कहते हैं- अबू आसिम आजमी को विवादों में रहना पसंद है। वे अपने बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन, इस चुनाव में ओवैसी की पार्टी के नेता इम्तियाज जलील को सीधी चुनौती देना उन्हें भारी पड़ गया। उन्होंने मंच से इम्तियाज जलील को चुनौती देते हुए कहा था- हम यूपी से आते हैं, उठाकर पटक देंगे, बत्तीसी बाहर आ जाएगी। एक एमपी को लेकर दनदनाता फिरता है। हमारे पास 37 एमपी हैं। इतना ही नहीं, अबू आसिम आजमी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान भाजपा और शिवसेना से ज्यादा AIMIM को निशाने पर रखा। AIMIM ने भी अखिलेश यादव और अबू आसिम आजमी पर खुलकर निशाना साधा। ओवैसी ने चुनाव प्रचार में सपा को मुस्लिम विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिमों को सिर्फ वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, सपा ने AIMIM को भाजपा की बी टीम करार दिया। दावा किया कि वह विपक्षी वोटों को बांटकर भाजपा को फायदा पहुंचाती है। शायद यही वजह रही कि मुस्लिम बहुल इलाकों में लड़ाई सपा बनाम AIMIM होकर रह गई। AIMIM ने यहां बढ़त हासिल कर ली। मुंबई के गोवंदी-मानखुर्द जैसे मुस्लिम बहुल वार्डों में AIMIM ने सपा को करारी शिकस्त दी। सभी 6 सीटें जीतीं। बिहार में भी दिखाया था असर
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपना असर दिखाया था। बिहार चुनाव में सीमांचल की 5 सीटों पर AIMIM ने जीत दर्ज की थी, जो राजद का गढ़ माना जाता है। माना जा रहा है, ओवैसी का रुख अब यूपी की ओर होगा। उनका मुख्य फोकस पश्चिमी यूपी होगा, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी है। महाराष्ट्र में ओवैसी की पार्टी की जीत का क्या UP पर असर पड़ेगा?
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- महाराष्ट्र का यह बदलाव यूपी पर भी असर डाल सकता है, जहां सपा का मुस्लिम वोटबैंक मजबूत माना जाता है। अगर ओवैसी की पार्टी यूपी में अपनी उपस्थिति बढ़ाती है। बसपा भी मुस्लिम वोटों पर दावा करती रही, तो अखिलेश यादव के लिए मुस्लिम वोटों में बिखराव बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, ये बात अखिलेश यादव को भी पता है और वह इस डैमेज को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश करेंगे। यूपी में वोट कटवा की भूमिका में रही है AIMIM
AIMIM पहले से ही यूपी में सपा के मुस्लिम वोटबैंक को काट रही है। 2022 विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ये बात अलग है कि उसने कोई सीट नहीं जीती। लेकिन, कई जगह सपा को नुकसान पहुंचाया था। उदाहरण के तौर पर बाराबंकी की कुर्सी विधानसभा सीट सपा 217 वोटों से हारी, जबकि AIMIM को यहां 8,541 वोट मिले थे। इससे भाजपा को फायदा हुआ। 2024 के चुनाव में AIMIM ने यूपी में अपना एक भी प्रत्याशी नहीं उतारा था। सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े। मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं हुआ। शायद यही वजह रही कि सपा ने लोकसभा चुनाव में अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव AIMIM को भाजपा की बी टीम कहते रहे हैं। लेकिन, महाराष्ट्र की कामयाबी के बाद अब ओवैसी की पार्टी यूपी में और आक्रामक हो सकती है। महाराष्ट्र के नतीजे यूपी में मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति करने वाली सपा की चिंता बढ़ाने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकार नावेद शिकोह कहते हैं- यह तय है कि जिस तरह से बिहार और महाराष्ट्र में ओवैसी ने बढ़त हासिल की है, उसे लेकर अखिलेश यादव के अंदर बेचैनी होना स्वाभाविक है। ओवैसी की पार्टी इसका ऐलान भी कर चुकी है कि वो पूरे दमखम के साथ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में लड़ेगी। यूपी में कई ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिमों की निर्णायक भूमिका होती है। ओवैसी बिहार में इस नरेटिव को अपने वोटरों के बीच में सेट करने में कामयाब रहे कि वे इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं। कांग्रेस और राजद उन्हें कम से कम सीट दे, तो भी। ऐसे में उनके लोगों को लगता है कि ओवैसी इंडिया गठबंधन में आना चाहते हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन के लोग उन्हें नहीं आने देना चाहते। अब ओवैसी इसी तरह का ऑफर लेकर यूपी आएंगे और गठबंधन में जगह न मिलने पर उसे चुनावों में प्रचारित करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ‘राजनाथ हम सब में बड़े’…:यूपी में क्षत्रिय राजनीति के समीकरण क्या? उत्तर प्रदेश में कुटुंब परिवार की बैठक। फिर ब्राह्मण विधायकों का सहभोज। और अब अवध में राष्ट्रकथा। तीनों आयोजन देखने में भले ही अलग-अलग लग रहे। लेकिन, सियासी मकसद सिर्फ एक है कि सत्ता कैसे उनके काबू में रहे? प्रदेश में कई बाहुबली क्षत्रियों में इस बात की होड़ है कि कौन सबसे बड़ा? पढ़ें पूरी खबर