केंद्र सरकार के विद्युत (संशोधन) बिल 2025 को लेकर देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियरों का विरोध जारी है। सोमवार को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) सहित सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने एक स्वर में बिल को ‘जनविरोधी, कर्मचारी-विरोधी और निजीकरण का हथियार’ करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल द्वारा बुलाई गई बैठक में AIPEF चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बिल के हर प्रावधान का विरोध किया। दुबे ने कहा, “यह बिल सार्वजनिक क्षेत्र के पावर सेक्टर को पूरी तरह तबाह कर देगा। कंगाल हो जाएंगी वितरण कंपनियां सरकारी डिस्कॉम के नेटवर्क को निजी कंपनियों के हवाले करने से सरकारी वितरण कंपनियां कंगाल हो जाएंगी। निजी प्लेयर सिर्फ मुनाफे वाले बड़े उपभोक्ताओं (उद्योग, रेलवे, मेट्रो) को बिजली देंगे। गरीब, किसान और आम घरेलू उपभोक्ता सरकारी डिस्कॉम के पास छोड़ दिए जाएंगे, जो पहले से घाटे में डूबे हैं। दुबे ने क्रॉस-सब्सिडी खत्म करने के प्रावधान पर सबसे ज्यादा गुस्सा जताया। उन्होंने चेतावनी दी, “उद्योगों-रेलवे के लिए क्रॉस-सब्सिडी खत्म होने से किसानों और गरीबों की बिजली दरें आसमान छू लेंगी। यह प्रावधान डिस्कॉम के साथ-साथ आम आदमी और किसानों के लिए घातक साबित होगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने भी बिल को आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए ‘जहर’ बताया। उन्होंने मांग की कि बिल को फौरन वापस लिया जाए। बिल पास हुआ तो देश भर के बिजली कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स, अखिल भारतीय विद्युत मजदूर संघ (बीएमएस), ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज और देश के दर्जनों राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि) के बिजली इंजीनियर-कर्मचारी संगठनों ने भी एकजुट होकर विरोध दर्ज किया। बिजली निजीकरण के खिलाफ लगातार 411 दिनों से अधिक चल रहे आंदोलन में आज भी देशभर के सभी जनपदों, परियोजनाओं और बिजली घरों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। AIPEF ने चेतावनी दी है कि अगर बिल पास हुआ तो 27 लाख से ज्यादा बिजली कर्मचारी-इंजीनियर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर उतर आएंगे। सरकार का दावा है कि यह बिल बिजली क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, डिस्कॉम के घाटे कम करेगा और रिन्युएबल एनर्जी को बढ़ावा देगा, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे ‘निजी घरानों को मुनाफे का रास्ता साफ करने’ वाला बता रहे हैं।