सलेमपुर में श्रीमद्भागवत कथा संस्कृति सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन एक महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आया। पंडित आशीषानंद जी ने शिव-सती की कथा के माध्यम से जीवन का एक अहम सबक बताया। कथा में बताया गया कि सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में जाने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने भगवान शिव से कहा कि पिता, माता, गुरु और मंदिर में बिना बुलाए जा सकते हैं। भगवान शिव ने सती को समझाया कि जहां जाने से दूसरों के मन में क्रोध या कष्ट हो, वहां नहीं जाना चाहिए। परंतु सती ने शिव की बात नहीं मानी। यज्ञ में जाने पर पिता द्वारा अपमानित होने के बाद उन्होंने अग्नि में प्राण त्याग दिए। कार्यक्रम में पंडित आशीषानंद जी महाराज के साथ अखिलेश कुमार पांडेय, राकेश श्रीवास्तव, धनंजय बर्नवाल और डॉ. पी.के. दूबे उपस्थित थे। आशा गुप्ता, आशा सिंह, आरती पांडेय और अनीता ठाकुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।