साल- 2015, यूपी में सपा की सरकार थी। उस वक्त तक यूपी में कानपुर के ग्रीन पार्क के अलावा कोई स्टेडियम नहीं था। ऐलान हुआ, सैफई में इंटरनेशनल स्टेडियम बनाया जाएगा। लखनऊ में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर सरकार इकाना स्टेडियम बनवा रही थी। सैफई उस वक्त के सीएम अखिलेश यादव का गांव है। इसलिए वहां स्टेडियम का निर्माण तेजी से शुरू हुआ। 2017 तक करीब 90% काम पूरा भी हो गया, लेकिन तभी सपा की सरकार चली गई। बीजेपी सरकार ने 2018 में बचे हुए 10% काम के लिए बजट जारी कर दिया। कुल 350 करोड़ रुपए स्टेडियम पर खर्च हुए। 1 जून, 2018 को यह स्टेडियम इंटरनेशनल मैचों की मेजबानी के लिए तैयार हो गया। इसके बाद पहले मैच की मेजबानी का इंतजार करने लगा। साल बीता, दो साल बीता, 4 साल बीते और अब 7 साल बीत गए हैं। इंटरनेशनल तो छोड़िए, आज तक यहां जिला स्तर का भी मैच नहीं हो सका। दैनिक भास्कर की टीम स्टेडियम का हाल जानने इटावा के सैफई पहुंची। हम स्टेडियम के अंदर गए। ड्रोन कैमरे से ऊपरी हिस्से को देखा। लोगों से बात की, स्टेडियम के मैनेजमेंट से बात की। जानिए स्टेडियम अब किस हाल में है? यहां क्या हो रहा है? मैच क्यों नहीं हो रहे… पुराने स्टेडियम को तोड़कर नया बनाया गया
इटावा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर सैफई है। यह ग्राम पंचायत, ब्लॉक और तहसील भी है। जरूरी बात यह कि ये पूर्व सीएम अखिलेश यादव का गांव है। यहां स्कूल-कॉलेज, हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, अनाज मंडी, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जैसी वो सभी सुविधाएं हैं, जो किसी भी गांव के लिए सपना होती हैं। इसीलिए यह एशिया का सबसे डेवलप गांव माना जाता है। 2015 के अगस्त महीने में यूपी का मानसून सत्र शुरू हुआ। अनुपूरक बजट जारी किया गया। इसमें ऐलान हुआ कि सैफई में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बनाया जाएगा। उस वक्त इसके लिए 260 करोड़ का बजट तय किया गया। जिस जगह पर यह बनाया जाना था, वहां पहले से स्टेडियम था। इसे 2006 में उस वक्त के सीएम मुलायम सिंह यादव ने करीब 15 करोड़ रुपए में बनवाया था। लेकिन वह थोड़ा छोटा था, इसलिए उसे तोड़ दिया गया। फिर नए सैफई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का काम शुरू हुआ। ऑस्ट्रेलिया की बरमूडा घास से मैदान बना
25 मई, 2016 तक सैफई इंटरनेशनल स्टेडियम आधा बनकर तैयार हो गया। उस वक्त तक 163 करोड़ 73 लाख 1 हजार रुपए खर्च हो चुके थे। इसके बाद 120 करोड़ 2 लाख 90 हजार रुपए जारी किए गए। एक तरफ स्टेडियम का निर्माण चल रहा था, दूसरी तरफ मैदान और पिच बनाने का भी काम जारी था। मोहाली स्टेडियम के चीफ पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह की देख-रेख में पिच और मैदान तैयार किए जा रहे थे। क्रिकेट मैच के लिए 7 पिच तैयार की गईं। 2 प्रैक्टिस पिच बनाई गईं। मैदान में ऑस्ट्रेलिया से बरमूडा घास मंगाकर लगाई गई। ड्रेनेज सिस्टम हाई-क्लास का लगवाया गया। इसे आप ऐसा समझिए। अगर 30 मिनट बारिश होकर बंद हुई, तो अगले 7 मिनट में मैदान से पानी गायब हो जाएगा। मैदान में ऊपरी मिट्टी के नीचे बालू-कंकड़ की कई लेयर है, जो पानी को नीचे सोख लेती है। इस मैदान की लंबाई एक बाउंड्री से दूसरी बाउंड्री तक 120 मीटर है। यानी यहां टेस्ट, वनडे और टी-20 के मैच आराम से खेले जा सकते हैं। बाउंड्री बढ़ाई-घटाई जा सकती है। देश का सबसे बड़ा स्कोर बोर्ड यहां लगाया गया है। इसकी लंबाई 17 मीटर और चौड़ाई 9 मीटर है। 10% काम योगी सरकार ने बजट देकर पूरा करवाया
2017 में सैफई के इस स्टेडियम का निर्माण 90% तक हो गया था। करीब 346 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। तभी यूपी में सपा की सरकार चली गई। बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। स्टेडियम का काम रुक गया। करीब एक साल तक स्टेडियम के लिए कोई भी बजट जारी नहीं किया गया। 24 जनवरी, 2018 को योगी सरकार ने 4 करोड़ 48 लाख 84 हजार रुपए जारी कर दिए। इस तरह से 1 जून, 2018 को स्टेडियम पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया। इसके बाद पहले इंटरनेशनल मैच का इंतजार शुरू हुआ। यह सैफई का स्टेडियम मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज में बना है। इस कॉलेज में स्टेडियम के अलावा 8 अन्य खेलों के लिए भी मैदान हैं। एथलीट्स के लिए अलग मैदान है। करीब 200 करोड़ की लागत से वर्ल्ड क्लास स्विमिंग सेंटर बनाया गया है। कुश्ती-कबड्डी, फुटबाल-हॉकी के लिए भी मैदान है। शुरुआत में इस कॉलेज के अंदर स्थानीय लोग जाते थे, टहलते-घूमते और खेलते थे। लेकिन, पिछले एक साल से उनकी एंट्री बंद कर दी गई। जहां से वो लोग आते थे, उस गेट पर भी ताला लगा दिया गया है। हमारी ही जमीन पर बना और हम ही नहीं जा पाते
हमने यहां के कुछ स्थानीय लोगों से बातचीत की। यह समझने की कोशिश की कि स्टेडियम बनने के बाद उन्हें क्या फायदा हुआ? स्थानीय निवासी राज नारायण मिश्रा कहते हैं कि पहले जब स्टेडियम बना था, हम सब सुबह-शाम टहलने जाते थे। लेकिन अब गेट पर ताला लगा दिया गया है। दूसरा रास्ता भी बंद कर दिया गया हैं। शिकायतें कीं, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। हमारी ही जमीन पर बना है, अब हमें ही अंदर नहीं जाने दिया जाता। वहीं, उदय प्रताप कहते हैं कि स्टेडियम बना और यह कॉलेज बना तो हम लोगों को बहुत अच्छा लगा। अब गेट ही बंद कर दिया गया। स्टेडियम के पास रहने वाले रवि कुमार कहते हैं- स्टेडियम की जरूरत थी, इसलिए बनवाया गया। फिर अखिलेश यादव की सरकार चली गई, इसलिए इस पर ताला लगा दिया गया। मोदी-योगी जी जो चाहें, वो करें। स्टेडियम की मौजूदा स्थिति, स्थानीय लोगों को अंदर आने की मनाही और मैच न होने की वजह को समझने के लिए हम स्टेडियम के अंदर पहुंचे। स्टेडियम की स्थिति देखी और उसी स्टेडियम के बीच में प्रिंसिपल से बात की। कोई मैच करवाना चाहे तो हम उसका स्वागत करते हैं
सैफई मेडिकल कॉलेज के सामने मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज का रास्ता है। हम अंदर गए। वहां हमारी मुलाकात कॉलेज के प्रिंसिपल SDM सर्वेंद्र सिंह चौहान से हुई। सर्वेंद्र इटावा में चंदीग्राम में बने स्टेडियम का मैनेजमेंट संभालते हैं। हमने उनसे पहला सवाल यही किया कि स्थानीय लोगों की एंट्री क्यों बंद कर दी गई? सर्वेंद्र कहते हैं- प्रदेश सरकार ने इसे आवासीय परिसर के तौर पर बनाया है। इसमें 8 खेलों के 400 से ज्यादा बच्चे रहते हैं, प्रैक्टिस करते हैं। ये सभी यूपी के अलग-अलग जिलों से सिलेक्ट होकर यहां आए हैं। अगर हम स्थानीय लोगों के लिए इसे खोल देंगे, तो हमारे अपने बच्चे प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। पहले तो लोग गाय-भैंस लेकर आ जाते थे। हमने पूछा कि अब तक यहां कोई मैच क्यों नहीं हुआ? वह कहते हैं- इंटरनेशनल मैच, रणजी या फिर इसके बराबर के घरेलू टूर्नामेंट के आयोजन का फैसला बीसीसीआई, यूपीसीए या फिर एसोसिएशन मिलकर लेता है। यूपीसीए और बीसीसीआई अगर यहां मैच करवाना चाहे, तो उनका मोस्ट वेलकम है। बाकी मैं तो यूपी क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) को भी कहता हूं कि अगर आप टूर्नामेंट करवाना चाहते हैं तो आइए, स्वागत है। स्टेडियम तैयार है हमारा। हमने प्रिंसिपल से पूछा कि क्या वजह है कि यहां 7 साल बीत जाने के बाद भी कोई क्रिकेट मैच नहीं हो सका? सर्वेंद्र कहते हैं- पिच या फिर मैदान में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। मैच न होने के पीछे होटल और एयरपोर्ट भी बड़ी वजह
सैफई के इस मैदान पर मैच न होने की कई वजह निकलकर सामने आई हैं। बड़ी वजह यहां से एयरपोर्ट की दूरी है। नजदीकी एयरपोर्ट आगरा में है। यह सैफई क्रिकेट स्टेडियम से 117 किलोमीटर की दूरी पर है। दूसरा एयरपोर्ट कानपुर में है, जो स्टेडियम से 189 किलोमीटर की दूरी पर है। आगरा और कानपुर से स्टेडियम पहुंचने में 2 से 3 घंटे तक लग जाएंगे। यह इटावा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है। इसलिए सैफई तक जाने में लोकल ट्रांसपोर्ट की भी समस्या आएगी। दूसरी जो सबसे बड़ी वजह है, वह यहां ठहरने की व्यवस्था का न होना। आमतौर पर जहां भी क्रिकेट स्टेडियम होता है, वहां फाइव स्टार या फिर क्वालिटी होटल होते हैं। सैफई में ऐसा नहीं है। इटावा में भी 5 स्टार होटल नहीं है। यह सुविधा भी आगरा और कानपुर में ही मिलेगी। ठहरने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से भी यहां मैच होने में दिक्कत आ रही है। क्या आगे मैच होने की उम्मीद है
जिस वक्त सैफई क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा था, उस वक्त यूपी के अंदर सिर्फ कानपुर में ग्रीन पॉर्क स्टेडियम ही था। लेकिन, उसके बाद लखनऊ में इकाना स्टेडियम बन गया। वाराणसी और गोरखपुर में भी क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा है। 2026 में इन दोनों के बन जाने की संभावना है। नोएडा और गाजियाबाद में भी स्टेडियम का निर्माण चल रहा है। अगले 2 से 3 साल में यूपी के अंदर कई स्टेडियम हो जाएंगे। ऐसे में सैफई में निकट भविष्य में मैच होने की संभावना नजर नहीं आती। सियासी विश्लेषक मैच न होने के पीछे राजनीति को भी एक बड़ी वजह मानते हैं। वो कहते हैं- इस स्टेडियम को अखिलेश यादव ने बनवाया और अपने गांव में बनवाया। मैच होगा तो नाम उनका होगा। इसलिए भी मौजूदा बीजेपी सरकार नहीं चाहती कि यहां मैच हो। ————————— ये खबर भी पढ़ें… मुकदमा रामवीर पर, सजा राजवीर ने काटी, मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर माफी मांगी, फिर गैंगस्टर बनाया था; 17 साल बाद बेगुनाह निकले मैनपुरी के राजवीर यादव। उम्र 55 साल है, लेकिन चेहरे और हाथों की झुर्रियों से 65 साल के लगते हैं। बोलते वक्त जुबान कांपती है। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि उनके पिछले 17 साल कोर्ट-कचहरी में खुद को बेगुनाह साबित करने में बर्बाद हो गए। मानसिक पीड़ा ऐसी कि रातों की नींद गायब हो गई। सामाजिक प्रतिष्ठा इतनी खराब हो गई कि बेटियों के लिए जहां भी रिश्ता देखने गए, गैंगस्टर कहकर ताना मारा गया। बेंगलुरु जाकर काम करना चाहते थे। लेकिन, मुकदमे की तारीख ने उन्हें मैनपुरी छोड़ने का मौका ही नहीं दिया। पढ़िए पूरी खबर…
इटावा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर सैफई है। यह ग्राम पंचायत, ब्लॉक और तहसील भी है। जरूरी बात यह कि ये पूर्व सीएम अखिलेश यादव का गांव है। यहां स्कूल-कॉलेज, हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, अनाज मंडी, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जैसी वो सभी सुविधाएं हैं, जो किसी भी गांव के लिए सपना होती हैं। इसीलिए यह एशिया का सबसे डेवलप गांव माना जाता है। 2015 के अगस्त महीने में यूपी का मानसून सत्र शुरू हुआ। अनुपूरक बजट जारी किया गया। इसमें ऐलान हुआ कि सैफई में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बनाया जाएगा। उस वक्त इसके लिए 260 करोड़ का बजट तय किया गया। जिस जगह पर यह बनाया जाना था, वहां पहले से स्टेडियम था। इसे 2006 में उस वक्त के सीएम मुलायम सिंह यादव ने करीब 15 करोड़ रुपए में बनवाया था। लेकिन वह थोड़ा छोटा था, इसलिए उसे तोड़ दिया गया। फिर नए सैफई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का काम शुरू हुआ। ऑस्ट्रेलिया की बरमूडा घास से मैदान बना
25 मई, 2016 तक सैफई इंटरनेशनल स्टेडियम आधा बनकर तैयार हो गया। उस वक्त तक 163 करोड़ 73 लाख 1 हजार रुपए खर्च हो चुके थे। इसके बाद 120 करोड़ 2 लाख 90 हजार रुपए जारी किए गए। एक तरफ स्टेडियम का निर्माण चल रहा था, दूसरी तरफ मैदान और पिच बनाने का भी काम जारी था। मोहाली स्टेडियम के चीफ पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह की देख-रेख में पिच और मैदान तैयार किए जा रहे थे। क्रिकेट मैच के लिए 7 पिच तैयार की गईं। 2 प्रैक्टिस पिच बनाई गईं। मैदान में ऑस्ट्रेलिया से बरमूडा घास मंगाकर लगाई गई। ड्रेनेज सिस्टम हाई-क्लास का लगवाया गया। इसे आप ऐसा समझिए। अगर 30 मिनट बारिश होकर बंद हुई, तो अगले 7 मिनट में मैदान से पानी गायब हो जाएगा। मैदान में ऊपरी मिट्टी के नीचे बालू-कंकड़ की कई लेयर है, जो पानी को नीचे सोख लेती है। इस मैदान की लंबाई एक बाउंड्री से दूसरी बाउंड्री तक 120 मीटर है। यानी यहां टेस्ट, वनडे और टी-20 के मैच आराम से खेले जा सकते हैं। बाउंड्री बढ़ाई-घटाई जा सकती है। देश का सबसे बड़ा स्कोर बोर्ड यहां लगाया गया है। इसकी लंबाई 17 मीटर और चौड़ाई 9 मीटर है। 10% काम योगी सरकार ने बजट देकर पूरा करवाया
2017 में सैफई के इस स्टेडियम का निर्माण 90% तक हो गया था। करीब 346 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। तभी यूपी में सपा की सरकार चली गई। बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। स्टेडियम का काम रुक गया। करीब एक साल तक स्टेडियम के लिए कोई भी बजट जारी नहीं किया गया। 24 जनवरी, 2018 को योगी सरकार ने 4 करोड़ 48 लाख 84 हजार रुपए जारी कर दिए। इस तरह से 1 जून, 2018 को स्टेडियम पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया। इसके बाद पहले इंटरनेशनल मैच का इंतजार शुरू हुआ। यह सैफई का स्टेडियम मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज में बना है। इस कॉलेज में स्टेडियम के अलावा 8 अन्य खेलों के लिए भी मैदान हैं। एथलीट्स के लिए अलग मैदान है। करीब 200 करोड़ की लागत से वर्ल्ड क्लास स्विमिंग सेंटर बनाया गया है। कुश्ती-कबड्डी, फुटबाल-हॉकी के लिए भी मैदान है। शुरुआत में इस कॉलेज के अंदर स्थानीय लोग जाते थे, टहलते-घूमते और खेलते थे। लेकिन, पिछले एक साल से उनकी एंट्री बंद कर दी गई। जहां से वो लोग आते थे, उस गेट पर भी ताला लगा दिया गया है। हमारी ही जमीन पर बना और हम ही नहीं जा पाते
हमने यहां के कुछ स्थानीय लोगों से बातचीत की। यह समझने की कोशिश की कि स्टेडियम बनने के बाद उन्हें क्या फायदा हुआ? स्थानीय निवासी राज नारायण मिश्रा कहते हैं कि पहले जब स्टेडियम बना था, हम सब सुबह-शाम टहलने जाते थे। लेकिन अब गेट पर ताला लगा दिया गया है। दूसरा रास्ता भी बंद कर दिया गया हैं। शिकायतें कीं, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। हमारी ही जमीन पर बना है, अब हमें ही अंदर नहीं जाने दिया जाता। वहीं, उदय प्रताप कहते हैं कि स्टेडियम बना और यह कॉलेज बना तो हम लोगों को बहुत अच्छा लगा। अब गेट ही बंद कर दिया गया। स्टेडियम के पास रहने वाले रवि कुमार कहते हैं- स्टेडियम की जरूरत थी, इसलिए बनवाया गया। फिर अखिलेश यादव की सरकार चली गई, इसलिए इस पर ताला लगा दिया गया। मोदी-योगी जी जो चाहें, वो करें। स्टेडियम की मौजूदा स्थिति, स्थानीय लोगों को अंदर आने की मनाही और मैच न होने की वजह को समझने के लिए हम स्टेडियम के अंदर पहुंचे। स्टेडियम की स्थिति देखी और उसी स्टेडियम के बीच में प्रिंसिपल से बात की। कोई मैच करवाना चाहे तो हम उसका स्वागत करते हैं
सैफई मेडिकल कॉलेज के सामने मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज का रास्ता है। हम अंदर गए। वहां हमारी मुलाकात कॉलेज के प्रिंसिपल SDM सर्वेंद्र सिंह चौहान से हुई। सर्वेंद्र इटावा में चंदीग्राम में बने स्टेडियम का मैनेजमेंट संभालते हैं। हमने उनसे पहला सवाल यही किया कि स्थानीय लोगों की एंट्री क्यों बंद कर दी गई? सर्वेंद्र कहते हैं- प्रदेश सरकार ने इसे आवासीय परिसर के तौर पर बनाया है। इसमें 8 खेलों के 400 से ज्यादा बच्चे रहते हैं, प्रैक्टिस करते हैं। ये सभी यूपी के अलग-अलग जिलों से सिलेक्ट होकर यहां आए हैं। अगर हम स्थानीय लोगों के लिए इसे खोल देंगे, तो हमारे अपने बच्चे प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। पहले तो लोग गाय-भैंस लेकर आ जाते थे। हमने पूछा कि अब तक यहां कोई मैच क्यों नहीं हुआ? वह कहते हैं- इंटरनेशनल मैच, रणजी या फिर इसके बराबर के घरेलू टूर्नामेंट के आयोजन का फैसला बीसीसीआई, यूपीसीए या फिर एसोसिएशन मिलकर लेता है। यूपीसीए और बीसीसीआई अगर यहां मैच करवाना चाहे, तो उनका मोस्ट वेलकम है। बाकी मैं तो यूपी क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) को भी कहता हूं कि अगर आप टूर्नामेंट करवाना चाहते हैं तो आइए, स्वागत है। स्टेडियम तैयार है हमारा। हमने प्रिंसिपल से पूछा कि क्या वजह है कि यहां 7 साल बीत जाने के बाद भी कोई क्रिकेट मैच नहीं हो सका? सर्वेंद्र कहते हैं- पिच या फिर मैदान में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। मैच न होने के पीछे होटल और एयरपोर्ट भी बड़ी वजह
सैफई के इस मैदान पर मैच न होने की कई वजह निकलकर सामने आई हैं। बड़ी वजह यहां से एयरपोर्ट की दूरी है। नजदीकी एयरपोर्ट आगरा में है। यह सैफई क्रिकेट स्टेडियम से 117 किलोमीटर की दूरी पर है। दूसरा एयरपोर्ट कानपुर में है, जो स्टेडियम से 189 किलोमीटर की दूरी पर है। आगरा और कानपुर से स्टेडियम पहुंचने में 2 से 3 घंटे तक लग जाएंगे। यह इटावा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है। इसलिए सैफई तक जाने में लोकल ट्रांसपोर्ट की भी समस्या आएगी। दूसरी जो सबसे बड़ी वजह है, वह यहां ठहरने की व्यवस्था का न होना। आमतौर पर जहां भी क्रिकेट स्टेडियम होता है, वहां फाइव स्टार या फिर क्वालिटी होटल होते हैं। सैफई में ऐसा नहीं है। इटावा में भी 5 स्टार होटल नहीं है। यह सुविधा भी आगरा और कानपुर में ही मिलेगी। ठहरने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से भी यहां मैच होने में दिक्कत आ रही है। क्या आगे मैच होने की उम्मीद है
जिस वक्त सैफई क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा था, उस वक्त यूपी के अंदर सिर्फ कानपुर में ग्रीन पॉर्क स्टेडियम ही था। लेकिन, उसके बाद लखनऊ में इकाना स्टेडियम बन गया। वाराणसी और गोरखपुर में भी क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा है। 2026 में इन दोनों के बन जाने की संभावना है। नोएडा और गाजियाबाद में भी स्टेडियम का निर्माण चल रहा है। अगले 2 से 3 साल में यूपी के अंदर कई स्टेडियम हो जाएंगे। ऐसे में सैफई में निकट भविष्य में मैच होने की संभावना नजर नहीं आती। सियासी विश्लेषक मैच न होने के पीछे राजनीति को भी एक बड़ी वजह मानते हैं। वो कहते हैं- इस स्टेडियम को अखिलेश यादव ने बनवाया और अपने गांव में बनवाया। मैच होगा तो नाम उनका होगा। इसलिए भी मौजूदा बीजेपी सरकार नहीं चाहती कि यहां मैच हो। ————————— ये खबर भी पढ़ें… मुकदमा रामवीर पर, सजा राजवीर ने काटी, मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर माफी मांगी, फिर गैंगस्टर बनाया था; 17 साल बाद बेगुनाह निकले मैनपुरी के राजवीर यादव। उम्र 55 साल है, लेकिन चेहरे और हाथों की झुर्रियों से 65 साल के लगते हैं। बोलते वक्त जुबान कांपती है। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि उनके पिछले 17 साल कोर्ट-कचहरी में खुद को बेगुनाह साबित करने में बर्बाद हो गए। मानसिक पीड़ा ऐसी कि रातों की नींद गायब हो गई। सामाजिक प्रतिष्ठा इतनी खराब हो गई कि बेटियों के लिए जहां भी रिश्ता देखने गए, गैंगस्टर कहकर ताना मारा गया। बेंगलुरु जाकर काम करना चाहते थे। लेकिन, मुकदमे की तारीख ने उन्हें मैनपुरी छोड़ने का मौका ही नहीं दिया। पढ़िए पूरी खबर…