सोनभद्र में 400 फीट गहरे गड्ढे में दबे 14 मजदूर:खदान में भरा है पानी, 35 घंटे से NDRF-SDRF चला रही रेस्क्यू ऑपरेशन

सोनभद्र में खदान में ड्रिलिंग के दौरान पहाड़ का 100 फीट हिस्सा टूटकर गिर गया। इस हादसे में एक की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 14 मजदूर अभी भी मलबे में दबे हैं। NDRF और SDRF की टीमें पिछले 35 घंटे से रेस्क्यू में जुटी हैं। डॉग स्क्वायड भी दबे लोगों को ढूंढ रही हैं। हालांकि, खदान में पानी भरा होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। हादसा 15 नवंबर (शनिवार) को दोपहर करीब 3 बजे हुआ था। प्रत्यक्षदर्शी राजू यादव ने बताया कि कृष्णा माइनिंग स्टोन की खदान में नौ कंप्रेशर पर कई मजदूर काम कर रहे थे। इसी बीच पहाड़ टूट गया। कुछ मजदूरों ने भागकर जान बचाई तो कुछ मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम पहुंची। रेस्क्यू के लिए बुलडोजर और क्रेन मंगाए गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड को भी बुलाया। अंधेरा होने की वजह से लाइट की व्यवस्था की गई। इसके बाद शनिवार 8 बजे राहत और बचाव कार्य शुरू हो सका। शनिवार को रातभर मलबे को हटाने का काम चलता रहा। इसके बाद रविवार को भी मलबा हटाया गया। लेकिन, अभी तक टीम स्पॉट तक नहीं पहुंच पाई है। मृतक की जेब में मिले मोबाइल फोन के डायल नंबरों पर कॉल करने पर उसकी पहचान परसोई गांव निवासी राजू सिंह के रूप में हुई। खदान ओबरा क्षेत्र की 400 फीट गहरी राशपहरी पहाड़ी में स्थित है। खदान मेसर्स कृष्णा माइनिंग कंपनी को आवंटित थी। हादसे के बाद खदान मालिक समेत 3 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। खदान मालिक फरार है। डीएम ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। 4 तस्वीरें देखिए… डीएम बोले- चट्‌टान हटने पर स्थिति साफ होगी
डीएम बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि 70 से 75 टन वजनी चट्टान को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके हटने के बाद ही मलबे में फंसे अन्य मजदूरों की संख्या और पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। जब तक सभी मजदूर मिल नहीं जाते, तब तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा। बचाव कार्य में NDRF, SDRF, पावर कॉर्पोरेशन की टीमें और खनिज विभाग के अधिकारी जुटे हैं। डीजीएमएस (DGMS) और खनिज विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। प्रभावित परिवारों से लगातार बात की जा रही है। सरकार के स्तर पर सहायता दी जाएगी। वहीं, रेस्क्यू टीम के माइंस एक्सपर्ट ने बताया कि जो मशीन लगी है, वह अच्छा काम कर रही है। दूसरा रास्ता बनाकर अंदर जाने की तैयारी हो रही है। रास्ते में पड़े पत्थर तोड़कर आगे जाने की तैयारी है। अभी रेस्क्यू चल रहा है। तीन-चार घंटे और लग सकते हैं। मशीन से पत्थर खींचने में थोड़ा रिस्क जरूर है, इसलिए ब्रेकर मशीन से तोड़ा जा रहा है।