इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा वृंदावन के ‘उत्तर प्रदेश श्रीबांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश’ को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया है कि राज्य सरकार अध्यादेश के जरिए मंदिर पर कब्जा करना चाहती है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की संवैधानिक वैधता को लेकर यूपी सरकार से जवाब तलब किया है। ये आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने प्रणव गोस्वामी व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। मथुरा के सिविल जज जूनियर डिवीजन को बनाया प्रतिवादी याचिकाकर्ता प्रणव गोस्वामी और अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आर्टिकल 227 के तहत याचिका दाखिल करते हुए मथुरा सिविल जज जूनियर डिवीजन को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में ‘उत्तर प्रदेश श्रीबांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश’ को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि यह अध्यादेश मंदिर के लिए सरकार-नियंत्रित ट्रस्ट बनाने का प्रावधान करता है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने सुनवाई के दौरान अध्यादेश पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025 जारी करने की राज्य की क्षमता पर सवाल उठाए है। यूपी सरकार को जवाब देने की सीमा 30 जुलाई अध्यादेश के अनुसार मथुरा के वृंदावन में श्री बांके बिहारी जी मंदिर का प्रबंधन और भक्तों के लिए सुविधाओं की जिम्मेदारी ‘श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास’ द्वारा संभाली जाएगी।
एमिकस क्यूरी ने कहा कि राज्य सरकार के पास अध्यादेश के जरिए किसी निजी मंदिर का नियंत्रण लेने की शक्ति नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की है। न्याय मित्र बोले- बांके बिहारी मंदिर एक निजी संस्थान सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) संजय गोस्वामी ने कोर्ट में तर्क दिया कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी संस्थान है। जिसका प्रबंधन स्वामी हरिदास जी के वंशज करते रहे है। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश पिछले दरवाजे से मंदिर पर नियंत्रण करने का प्रयास है। संजय गोस्वामी ने अध्यादेश की धारा 5 पर कड़ी आपत्ति जताई, जो बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के गठन से संबंधित है। सभी ट्रस्टी सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य सनातन धर्म के अनुयायी होंगे। पदेन ट्रस्टियों को शामिल करने पर उठाए सवाल कोर्ट में पदेन सात ट्रस्टियों को शामिल करने पर सवाल उठाया गया है। जिनमें मथुरा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ, धर्मार्थ कार्य विभाग का अधिकारी, श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ जैसे अधिकारी शामिल है। न्याय मित्र द्वारा कोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा पदेन ट्रस्टियों की नियुक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह गोस्वामियों द्वारा प्रबंधित है। कहा कि यह निजी मंदिर में राज्य सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से प्रवेश करने के समान होगा। राज्य सरकार प्रबंधन में पिछले दरवाजे से दे रही दखल उनके अनुसार राज्य सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से प्रवेश करना और श्री बांके बिहारी जी मंदिर पर नियंत्रण करना हिंदुओं के अधिकारों का अतिक्रमण है। क्योंकि यह एक निजी मंदिर है और स्वामी हरि दास जी के अनुयायी और उत्तराधिकारी उक्त मंदिर का प्रबंधन कर रहे है। राज्य सरकार अधिक से अधिक भीड़ को प्रबंधित कर सकती है। उसका प्रशासन कर सकती है। मंदिर के बाहर से प्रशासन का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। ट्रस्ट का निर्माण हिंदू धर्म में दखलंदाजी के समान कोर्ट में दलील दी गई है कि इस तरह के ट्रस्ट का निर्माण राज्य सरकार द्वारा हिंदू धर्म में दखलंदाजी के समान है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान राज्य को किसी भी धर्म का पालन करने और किसी भी मंदिर का नियंत्रण लेने का अधिकार नहीं देता है। जबकि राज्य सरकार द्वारा मथुरा के मंदिर पर नियंत्रण लेने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहला मामला है। इसके बाद सरकार, राज्य के अंदर अन्य मंदिरों पर भी नियंत्रण लेने के लिए आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार से मांगा गया जवाब एमिकस क्यूरी ने दलील दी कि तमिलनाडु के मंदिर राज्य सरकार के नियंत्रण में है। संविधान राज्य सरकार द्वारा धर्म के क्षेत्र में अतिक्रमण करने, किसी भी धार्मिक संपत्ति पर नियंत्रण करने या किसी भी धार्मिक प्रथा में हस्तक्षेप करने के इस प्रकार के उपक्रम की मनाही करता है।
कोर्ट को बताया गया कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 29 जुलाई 2025 को सूचीबद्ध है। हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी की दलीलों को सुनने के बाद माना कि ये गंभीर मुद्दे हैं। जिन पर विचार करना जरूरी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी द्वारा उठाए गए तर्क का जवाब देने का निर्देश दिया है और मामले को 30 जुलाई को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। ————— ये खबर भी पढ़िए बांके बिहारी मंदिर का यूपी सरकार ने ट्रस्ट बनाया:पूजा कौन करेगा, मंदिर की व्यवस्था कैसी होगी, ये सब पदाधिकारी देखेंगे मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के लिए यूपी सरकार ने ट्रस्ट बना दिया है। प्रमुख सचिव अतुल श्रीवास्तव ने यह आदेश जारी किया। इस ट्रस्ट के काम भी तय किए गए हैं। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी ही तय करेंगे कि पूजा व्यवस्था कैसी होगी? त्योहारों पर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहेगी? इस ट्रस्ट का कामकाज देखने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को तैनात किया गया है। ट्रस्ट में 18 सदस्य होंगे। अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड में 4 तरह के सदस्य होंगे। पदेन सदस्य के रूप में 7 अधिकारी होंगे। पूरी खबर पढ़िए
एमिकस क्यूरी ने कहा कि राज्य सरकार के पास अध्यादेश के जरिए किसी निजी मंदिर का नियंत्रण लेने की शक्ति नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की है। न्याय मित्र बोले- बांके बिहारी मंदिर एक निजी संस्थान सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) संजय गोस्वामी ने कोर्ट में तर्क दिया कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी संस्थान है। जिसका प्रबंधन स्वामी हरिदास जी के वंशज करते रहे है। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश पिछले दरवाजे से मंदिर पर नियंत्रण करने का प्रयास है। संजय गोस्वामी ने अध्यादेश की धारा 5 पर कड़ी आपत्ति जताई, जो बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के गठन से संबंधित है। सभी ट्रस्टी सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य सनातन धर्म के अनुयायी होंगे। पदेन ट्रस्टियों को शामिल करने पर उठाए सवाल कोर्ट में पदेन सात ट्रस्टियों को शामिल करने पर सवाल उठाया गया है। जिनमें मथुरा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ, धर्मार्थ कार्य विभाग का अधिकारी, श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ जैसे अधिकारी शामिल है। न्याय मित्र द्वारा कोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा पदेन ट्रस्टियों की नियुक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह गोस्वामियों द्वारा प्रबंधित है। कहा कि यह निजी मंदिर में राज्य सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से प्रवेश करने के समान होगा। राज्य सरकार प्रबंधन में पिछले दरवाजे से दे रही दखल उनके अनुसार राज्य सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से प्रवेश करना और श्री बांके बिहारी जी मंदिर पर नियंत्रण करना हिंदुओं के अधिकारों का अतिक्रमण है। क्योंकि यह एक निजी मंदिर है और स्वामी हरि दास जी के अनुयायी और उत्तराधिकारी उक्त मंदिर का प्रबंधन कर रहे है। राज्य सरकार अधिक से अधिक भीड़ को प्रबंधित कर सकती है। उसका प्रशासन कर सकती है। मंदिर के बाहर से प्रशासन का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। ट्रस्ट का निर्माण हिंदू धर्म में दखलंदाजी के समान कोर्ट में दलील दी गई है कि इस तरह के ट्रस्ट का निर्माण राज्य सरकार द्वारा हिंदू धर्म में दखलंदाजी के समान है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान राज्य को किसी भी धर्म का पालन करने और किसी भी मंदिर का नियंत्रण लेने का अधिकार नहीं देता है। जबकि राज्य सरकार द्वारा मथुरा के मंदिर पर नियंत्रण लेने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहला मामला है। इसके बाद सरकार, राज्य के अंदर अन्य मंदिरों पर भी नियंत्रण लेने के लिए आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार से मांगा गया जवाब एमिकस क्यूरी ने दलील दी कि तमिलनाडु के मंदिर राज्य सरकार के नियंत्रण में है। संविधान राज्य सरकार द्वारा धर्म के क्षेत्र में अतिक्रमण करने, किसी भी धार्मिक संपत्ति पर नियंत्रण करने या किसी भी धार्मिक प्रथा में हस्तक्षेप करने के इस प्रकार के उपक्रम की मनाही करता है।
कोर्ट को बताया गया कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 29 जुलाई 2025 को सूचीबद्ध है। हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी की दलीलों को सुनने के बाद माना कि ये गंभीर मुद्दे हैं। जिन पर विचार करना जरूरी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी द्वारा उठाए गए तर्क का जवाब देने का निर्देश दिया है और मामले को 30 जुलाई को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। ————— ये खबर भी पढ़िए बांके बिहारी मंदिर का यूपी सरकार ने ट्रस्ट बनाया:पूजा कौन करेगा, मंदिर की व्यवस्था कैसी होगी, ये सब पदाधिकारी देखेंगे मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के लिए यूपी सरकार ने ट्रस्ट बना दिया है। प्रमुख सचिव अतुल श्रीवास्तव ने यह आदेश जारी किया। इस ट्रस्ट के काम भी तय किए गए हैं। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी ही तय करेंगे कि पूजा व्यवस्था कैसी होगी? त्योहारों पर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहेगी? इस ट्रस्ट का कामकाज देखने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को तैनात किया गया है। ट्रस्ट में 18 सदस्य होंगे। अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड में 4 तरह के सदस्य होंगे। पदेन सदस्य के रूप में 7 अधिकारी होंगे। पूरी खबर पढ़िए