होली में ज्यादा मिठाई खाने से हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। स्वादिष्ट गुझिया खाने से कई लोगों को परेशानी भी हो सकती हैं। हाई शुगर और बीपी के मरीजों के लिए ये बेहद खतरनाक है। एक्सपर्ट्स ऐसे मरीजों को अब संतुलित भोजन करने के साथ ज्यादा अलर्ट रहने पर जोर दे रहे हैं। दैनिक भास्कर ने यूपी के टॉप मेडिकल एक्सपर्ट्स से बात करके फेस्टिव सीजन की सेहत से जुड़ी समस्याओं के बारे में जाना …। हार्ट के मरीजों को रहना होगा अलर्ट सिविल अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.राजेश श्रीवास्तव कहते कि हार्ट पेशेंट के लिए होली में जरूरत से ज्यादा जश्न घातक साबित हो सकता हैं। खुद की सेहत को लेकर लापरवाही ठीक नहीं हैं। यदि दो दिन खानपान में लापरवाही हुई है तो अब सब कुछ कंट्रोल करना होगा। बेहतर होगा कि फोकस डिटॉक्सीफिकेशन पर हो। शरीर को रेस्ट देना भी जरूरी हैं। दवा लेने में कोई गैप न करे। दवा लेने में नहीं करें गैप, बेचैनी होने पर रहें अलर्ट SGPGI के इंडोक्राइनोलॉजी के पूर्व प्रमुख डॉ.सुशील गुप्ता का कहना है कि शुगर पेशेंट के लिए ये थोड़ा रिस्की फेज रहता है। आम तौर पर 70 से 80% डायबिटीज के मरीजों की इस दौरान शुगर इन्टेक बढ़ जाता है। ऐसे में सतर्कता बेहद जरूरी है। किसी भी हालात में जो दवाएं पहले से चल रही हैं, उसमें गैप नहीं करें। परेशानी होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें। इंसुलिन वाले पेशेंट हाई रिस्क कैटेगरी में डॉ.सुशील कहते है कि ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों में शुगर बढ़ने के लक्षण खुद से महसूस होने लगते है। जो रूटीन चैकअप कराते हैं। उन्हें भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। यदि शुगर लेवल चेक न कराया हो तो तत्काल चेक करा लें। रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर से कंसल्ट भी कर सकते हैं। इसके अलावा जो पेशेंट पहले से इन्सुलिन पर चल रहे हैं, उनके लिए तो ये समय पहले से ही ज्यादा सतर्क रहने का है।
शुगर का सबसे बुरा प्रभाव लीवर पर टॉप लीवर एक्सपर्ट और SGPGI लखनऊ के गैस्ट्रो इंट्रोलॉजिस्ट विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. यूसी घोषाल की माने तो मिठाई खाने से लीवर पर सबसे ज्यादा असर पड़ता हैं। ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ता है। सबसे जरूरी है कि होली पर अगर मिठाई ज्यादा खा ली है तो आगे के दिनों में इसका सेवन तत्काल बंद करें। इसके अलावा अब बॉडी के डेटॉक्सिफिकेशन पर फोकस करें। इसके लिए सबसे पहले बाजार की बनी हुई चीजों से दूरी बनाएं। घर का बना खाना ही खाए। इनमें हरी सब्जी, सलाद और फलों के साथ अंकुरित अनाज और दालों का भी सेवन किया जा सकता है। घर की बनी मिठाई ही सेफ डॉ.यूसी घोषाल कहते है कि बाजार की रंग बिरंगी मिठाई खाने से बचना चाहिए। त्योहार पर मिलावटी मिठाइयां ज्यादा बाजार में बिकती हैं। इसके खाने के बाद पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। उल्टी, दस्त अथवा अन्य किसी तरह की बेचैनी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। इस दौरान लापरवाही नहीं करें। इनहेलर में गैप बढ़ा सकता है परेशानी KGMU के रेस्पिरेटरी विभाग के प्रमुख डॉ.संतोष कुमार कहते हैं कि रंगों खेलने के दौरान कुछ लोगों को एलर्जिक अटैक पड़ सकते हैं। ऐसे में सांस के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है।इरिटेशन भी बढ़ सकता हैं। इसके अलावा यदि ब्रीदलेसनेस जैसी समस्या हो तब लापरवाही बरतना ठीक नही हैं। यदि पहले से कोई दवा नहीं ले रहे तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी मेडिसिन नहीं लें। प्राणायाम, अनुलोम और विलोम कर सकते हैं। गीला रंग खेलने से हो सकती हैं कई समस्याएं डॉ. संतोष कहते हैं कि होली के नॉन हर्बल रंगों से दूरी बनानी चाहिए। सांस, हदय, मानसिक रोग के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए ये बेहद नुकसानदेह है। मानसिक रोगियों को भी इससे बेचैनी होती है। सांस के मरीजों का भी दम घुटने लगता है। ऐसे सभी लोगों को अलर्ट रहना जरूरी हैं। ध्यान रहे ये फेस्टिव सीजन में AQI खराब रहता है। इसलिए एक्सरसाइज या वर्क आउट घर के अंदर करें।
शुगर का सबसे बुरा प्रभाव लीवर पर टॉप लीवर एक्सपर्ट और SGPGI लखनऊ के गैस्ट्रो इंट्रोलॉजिस्ट विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. यूसी घोषाल की माने तो मिठाई खाने से लीवर पर सबसे ज्यादा असर पड़ता हैं। ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ता है। सबसे जरूरी है कि होली पर अगर मिठाई ज्यादा खा ली है तो आगे के दिनों में इसका सेवन तत्काल बंद करें। इसके अलावा अब बॉडी के डेटॉक्सिफिकेशन पर फोकस करें। इसके लिए सबसे पहले बाजार की बनी हुई चीजों से दूरी बनाएं। घर का बना खाना ही खाए। इनमें हरी सब्जी, सलाद और फलों के साथ अंकुरित अनाज और दालों का भी सेवन किया जा सकता है। घर की बनी मिठाई ही सेफ डॉ.यूसी घोषाल कहते है कि बाजार की रंग बिरंगी मिठाई खाने से बचना चाहिए। त्योहार पर मिलावटी मिठाइयां ज्यादा बाजार में बिकती हैं। इसके खाने के बाद पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। उल्टी, दस्त अथवा अन्य किसी तरह की बेचैनी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। इस दौरान लापरवाही नहीं करें। इनहेलर में गैप बढ़ा सकता है परेशानी KGMU के रेस्पिरेटरी विभाग के प्रमुख डॉ.संतोष कुमार कहते हैं कि रंगों खेलने के दौरान कुछ लोगों को एलर्जिक अटैक पड़ सकते हैं। ऐसे में सांस के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है।इरिटेशन भी बढ़ सकता हैं। इसके अलावा यदि ब्रीदलेसनेस जैसी समस्या हो तब लापरवाही बरतना ठीक नही हैं। यदि पहले से कोई दवा नहीं ले रहे तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी मेडिसिन नहीं लें। प्राणायाम, अनुलोम और विलोम कर सकते हैं। गीला रंग खेलने से हो सकती हैं कई समस्याएं डॉ. संतोष कहते हैं कि होली के नॉन हर्बल रंगों से दूरी बनानी चाहिए। सांस, हदय, मानसिक रोग के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए ये बेहद नुकसानदेह है। मानसिक रोगियों को भी इससे बेचैनी होती है। सांस के मरीजों का भी दम घुटने लगता है। ऐसे सभी लोगों को अलर्ट रहना जरूरी हैं। ध्यान रहे ये फेस्टिव सीजन में AQI खराब रहता है। इसलिए एक्सरसाइज या वर्क आउट घर के अंदर करें।