‘अभी तक हम लोग इधर-उधर घूम रहे हैं। यह साफ नहीं है कि सीवी (रिज्यूम) आखिर कहां जमा करनी है? प्रक्रिया क्या है? यहां सिर्फ नाम के इंटरव्यू हो रहे हैं, बस नौकरी मिल जाए।’ यह कहना है पिंक रोजगार मेले में आई अंजली चौधरी का। 8 मार्च, 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पिंक रोजगार मेले का आयोजन किया गया। यहां देश की 50 से ज्यादा बड़ी कंपनियां पहुंची थीं। इनमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस, जियो समेत कई लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी शामिल रहीं। ये कंपनियां सेल्स, कस्टमर सर्विस, आईटी सपोर्ट, बैंकिंग और हेल्थकेयर जैसे अलग-अलग सेक्टरों में महिलाओं को रोजगार देने के लिए आईं। महिला दिवस पर लगे इस रोजगार मेले में उम्मीदों का सैलाब उमड़ पड़ा था। दूर-दराज से आई युवतियां और महिलाएं अपने हाथों में फाइल और रिज्यूम लिए लाइन में खड़ी थीं। हर किसी के चेहरे पर नौकरी पाने की उम्मीद झलक रही थी। साथ ही अनिश्चितता के बीच थकान भी साफ दिखाई दे रही थी। तेज धूप और भीड़ के बीच कई महिलाएं पसीने से तरबतर थीं, लेकिन उनके कदम पीछे नहीं हट रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद आज उनकी मेहनत रंग ला दे। दैनिक भास्कर ने यहां मौजूद कुछ युवतियों और महिलाओं से बात की। यह जानने की कोशिश की कि उन्हें नौकरी मिलने की कितनी उम्मीद है? इंटरव्यू का अनुभव कैसा रहा? शिवांगी बोलीं- उम्मीद है नौकरी मिल जाएगी
रोजगार मेले में आईं शिवांगी मौर्या बताती हैं- मैं अभी एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हूं। वहां हर महीने 4-5 हजार रुपए की सैलरी मिलती है। बेहतर रोजगार और ज्यादा सैलरी की उम्मीद में इस मेले में आई हूं। कंपनियों ने मेरा सीवी तो ले लिया है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि आगे क्या प्रक्रिया होगी? मुझसे कहा गया है कि 2 दिन के भीतर कॉल करके आगे की जानकारी दी जाएगी। शिवांगी फिलहाल उम्मीद लगाए हैं कि शायद इस मेले से उन्हें बेहतर नौकरी का मौका मिल जाए। रिचा पाठक ने कहा कि वो यहां रोजगार की तलाश में आई हैं। उनका भी सीवी ले लिया गया है। कहा गया है कि यहां से कॉल करके इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। लखनऊ की रहने वाली संस्तुति मणि त्रिपाठी ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। वह भी इस रोजगार मेले में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने उनका सीवी (रिज्यूम) ले लिया है। कहा गया है कि आगे की प्रक्रिया के लिए फोन कॉल किया जाएगा। आक्षी बोलीं- कई साल से नहीं मिल रही नौकरी
रोजगार मेले में पहुंचीं आक्षी बताती पहैं- यहां आकर मुझे काफी अच्छा लगा। मैंने एमबीए किया है। इसके बावजूद पिछले करीब 3 साल से नौकरी की तलाश में भटक रही हूं। मैंने कई जगह नौकरी के लिए कोशिश की, इंटरव्यू भी दिए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। लंबे समय से बेरोजगारी की इस चिंता के बीच उन्हें रोजगार मेले से एक नई उम्मीद मिली है। शायद यहां से मुझे कोई ऐसा मौका मिल जाए, जिससे मेहनत और पढ़ाई रंग ला सके। 100 किलोमीटर दूर से आई सोनी हुई निराश रोजगार मेले में पहुंचीं सोनी बेगम ने बताया- यहां सिर्फ रिज्यूमे लिया जा रहा है। कहा गया है कि जरूरत पड़ेगी तो हमें कॉल करके बुलाया जाएगा। अभी तो 20-25 प्रतिशत ही उम्मीद लग रही है कि नौकरी मिल पाएगी। इतनी धूप और गर्मी में दूर-दूर से लोग आए हैं। पहले कहा गया था कि 10वीं-12वीं के आधार पर नौकरी मिल जाएगी। लेकिन, यहां आकर बताया जा रहा कि उसके साथ डिप्लोमा भी चाहिए। हमने अपना रिज्यूम रख लिया है और अब वापस जा रहे हैं। सुबह से धूप में खड़े-खड़े बहुत परेशान हो गए, लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई। लखनऊ से आईं अनुश्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की ओर से महिलाओं के लिए इस तरह का रोजगार अवसर दिया जाना अच्छी पहल है। इससे कई युवतियों को अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी पाने का मौका मिल रहा है। ज्योति श्रीवास्तव ने कहा- जिस पोजिशन के लिए हमने आवेदन किया है, अगर कंपनी को हमारा प्रोफाइल सही लगेगा तो ही आगे प्रक्रिया होगी। हालांकि मुझे पूरा भरोसा है कि मेरा सिलेक्शन हो जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिली आर्थिक सहायता कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की गई। सरकार की ओर से बीमा प्रीमियम और साड़ी वर्दी के लिए 3,849 लाख रुपए की धनराशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बैंक खातों में भेजी गई। हालांकि इस दौरान कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परेशान नजर आईं। आगनबाड़ी में कार्यरत लक्ष्मी देवी ने बताया- हमें सैलरी को लेकर उम्मीद थी कि बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कन्या सुमंगला योजना के तहत सीएम योगी ने दिया चेक रोजगार मेले में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत कई बच्चियों को आर्थिक सहायता के चेक भी दिए। इस दौरान क्लास- 2 में पढ़ने वाली अविश्री गुप्ता को भी चेक मिला था। इससे अविश्री और उसके पेरेंट्स काफी खुश नजर आए। नारी शक्ति पुरस्कार से किया सम्मानित
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने शिक्षा, समाज सेवा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर समाज में प्रेरणा का उदाहरण पेश किया है। पुरस्कार पाने वाली महिलाओं ने कहा कि यह सम्मान और अधिक बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा। 5 हजार महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य इस पिंक रोजगार महाकुंभ के माध्यम से लगभग 5,000 महिलाओं और युवतियों को रोजगार के अवसर देना है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… बेसहारा लोगों की अंतिम यात्रा का सहारा बनीं दो महिलाएं, गोरखपुर की ‘अम्मा’, मुजफ्फरनगर की ‘क्रांतिकारी’ बेटों का फर्ज निभा रहीं हर इंसान की तमन्ना होती है कि जब वह इस दुनिया से जाए तो उसे अपनों का कंधा मिले। पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार हो। लेकिन हर किसी की किस्मत में ऐसा नहीं होता…। कई लोग गुमनामी में इस दुनिया से चले जाते हैं, जिनके शवों को लेने वाला तक कोई नहीं होता। ऐसे लावारिस शवों की अंतिम विदाई की जिम्मेदारी उठाती हैं गोरखपुर की पुष्पलता सिंह और मुजफ्फरनगर की शालू सैनी। पढ़िए पूरी खबर…
रोजगार मेले में आईं शिवांगी मौर्या बताती हैं- मैं अभी एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हूं। वहां हर महीने 4-5 हजार रुपए की सैलरी मिलती है। बेहतर रोजगार और ज्यादा सैलरी की उम्मीद में इस मेले में आई हूं। कंपनियों ने मेरा सीवी तो ले लिया है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि आगे क्या प्रक्रिया होगी? मुझसे कहा गया है कि 2 दिन के भीतर कॉल करके आगे की जानकारी दी जाएगी। शिवांगी फिलहाल उम्मीद लगाए हैं कि शायद इस मेले से उन्हें बेहतर नौकरी का मौका मिल जाए। रिचा पाठक ने कहा कि वो यहां रोजगार की तलाश में आई हैं। उनका भी सीवी ले लिया गया है। कहा गया है कि यहां से कॉल करके इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। लखनऊ की रहने वाली संस्तुति मणि त्रिपाठी ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। वह भी इस रोजगार मेले में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने उनका सीवी (रिज्यूम) ले लिया है। कहा गया है कि आगे की प्रक्रिया के लिए फोन कॉल किया जाएगा। आक्षी बोलीं- कई साल से नहीं मिल रही नौकरी
रोजगार मेले में पहुंचीं आक्षी बताती पहैं- यहां आकर मुझे काफी अच्छा लगा। मैंने एमबीए किया है। इसके बावजूद पिछले करीब 3 साल से नौकरी की तलाश में भटक रही हूं। मैंने कई जगह नौकरी के लिए कोशिश की, इंटरव्यू भी दिए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। लंबे समय से बेरोजगारी की इस चिंता के बीच उन्हें रोजगार मेले से एक नई उम्मीद मिली है। शायद यहां से मुझे कोई ऐसा मौका मिल जाए, जिससे मेहनत और पढ़ाई रंग ला सके। 100 किलोमीटर दूर से आई सोनी हुई निराश रोजगार मेले में पहुंचीं सोनी बेगम ने बताया- यहां सिर्फ रिज्यूमे लिया जा रहा है। कहा गया है कि जरूरत पड़ेगी तो हमें कॉल करके बुलाया जाएगा। अभी तो 20-25 प्रतिशत ही उम्मीद लग रही है कि नौकरी मिल पाएगी। इतनी धूप और गर्मी में दूर-दूर से लोग आए हैं। पहले कहा गया था कि 10वीं-12वीं के आधार पर नौकरी मिल जाएगी। लेकिन, यहां आकर बताया जा रहा कि उसके साथ डिप्लोमा भी चाहिए। हमने अपना रिज्यूम रख लिया है और अब वापस जा रहे हैं। सुबह से धूप में खड़े-खड़े बहुत परेशान हो गए, लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई। लखनऊ से आईं अनुश्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की ओर से महिलाओं के लिए इस तरह का रोजगार अवसर दिया जाना अच्छी पहल है। इससे कई युवतियों को अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी पाने का मौका मिल रहा है। ज्योति श्रीवास्तव ने कहा- जिस पोजिशन के लिए हमने आवेदन किया है, अगर कंपनी को हमारा प्रोफाइल सही लगेगा तो ही आगे प्रक्रिया होगी। हालांकि मुझे पूरा भरोसा है कि मेरा सिलेक्शन हो जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिली आर्थिक सहायता कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की गई। सरकार की ओर से बीमा प्रीमियम और साड़ी वर्दी के लिए 3,849 लाख रुपए की धनराशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बैंक खातों में भेजी गई। हालांकि इस दौरान कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परेशान नजर आईं। आगनबाड़ी में कार्यरत लक्ष्मी देवी ने बताया- हमें सैलरी को लेकर उम्मीद थी कि बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कन्या सुमंगला योजना के तहत सीएम योगी ने दिया चेक रोजगार मेले में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत कई बच्चियों को आर्थिक सहायता के चेक भी दिए। इस दौरान क्लास- 2 में पढ़ने वाली अविश्री गुप्ता को भी चेक मिला था। इससे अविश्री और उसके पेरेंट्स काफी खुश नजर आए। नारी शक्ति पुरस्कार से किया सम्मानित
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने शिक्षा, समाज सेवा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर समाज में प्रेरणा का उदाहरण पेश किया है। पुरस्कार पाने वाली महिलाओं ने कहा कि यह सम्मान और अधिक बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा। 5 हजार महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य इस पिंक रोजगार महाकुंभ के माध्यम से लगभग 5,000 महिलाओं और युवतियों को रोजगार के अवसर देना है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… बेसहारा लोगों की अंतिम यात्रा का सहारा बनीं दो महिलाएं, गोरखपुर की ‘अम्मा’, मुजफ्फरनगर की ‘क्रांतिकारी’ बेटों का फर्ज निभा रहीं हर इंसान की तमन्ना होती है कि जब वह इस दुनिया से जाए तो उसे अपनों का कंधा मिले। पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार हो। लेकिन हर किसी की किस्मत में ऐसा नहीं होता…। कई लोग गुमनामी में इस दुनिया से चले जाते हैं, जिनके शवों को लेने वाला तक कोई नहीं होता। ऐसे लावारिस शवों की अंतिम विदाई की जिम्मेदारी उठाती हैं गोरखपुर की पुष्पलता सिंह और मुजफ्फरनगर की शालू सैनी। पढ़िए पूरी खबर…