वाराणसी में एक बेटे ने अपने पिता और बड़ी बहन की हत्या कर दी। वारदात के वक्त बहू भी घर में थी। पुलिस ने उसे आरोपी नहीं बनाया है। इस डबल मर्डर की वजह 6 करोड़ की प्रॉपर्टी है। कातिल राजेश और उसकी पत्नी इंदू ने पुलिस कस्टडी में कई खुलासे किए। राजेश ने हत्या से पहले काशी के एक वकील से भी सलाह ली थी कि अगर कोई पिता को मार दे, तो सजा कितनी होती है? प्रॉपर्टी किसे शिफ्ट होती है? जब उसको ये इत्मीनान हो गया कि जेल से छूटने के बाद भी पिता की प्रॉपर्टी पर हक खत्म नहीं होता, तब उसने मर्डर प्लान किया। जब पुलिस के अफसरों ने राजेश से पूछा- बुजुर्ग पिता को क्यों मारा? सब कुछ तुम्हारा ही तो था। राजेश ने गुस्से में कहा- सब कुछ मेरा ही तो नहीं था। हर महीने बड़ी दीदी उसी वक्त घर आती थीं, जब पापा की पेंशन आनी होती थी। 60 हजार की पेंशन से वो भी एक हिस्सा हर महीने लेती थीं, फिर अपने ससुराल चली जाती थीं। मैं कब तक ये सब देखता रहता, इसलिए तय कर लिया कि इस बार जब दीदी पेंशन के लिए आएंगी, तब आरपार बात होगी। राजेश ने पिता की हत्या करने बाद बहन को मारने दौड़ा, तो वो गिड़गिड़ाने लगी कि मुझे प्रॉपर्टी-पैसा नहीं चाहिए। राजेश ने मुस्कुराते हुए कहा- जब कोई बचेगा नहीं, तो ये सब मेरा ही होगा। फिर उसने बहन को मार डाला। इस डबल मर्डर की पूरी कहानी राजेश के बयानों के मुताबिक पढ़िए…. 7 जुलाई की रात शिवकुमारी मायके पहुंची, झगड़ा हुआ
राजेश ने बताया, इस हत्याकांड की शुरुआत 7 जुलाई को हुई, जब मेरी शिकायत पर काशी वाले मकान की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग की टीम पहुंची। क्योंकि इस मकान का एक हिस्सा पापा पहले ही दीदी के नाम कर चुके थे। कुछ दिन पहले उन्होंने बाकी बचे हिस्से को भी दीदी शिवकुमारी के नाम ट्रांसफर कर दिया। मैंने राजस्व विभाग में इसकी शिकायत कर दी। पापा ने ये बातें दीदी को फोन पर बता दीं। वो शाम को अपनी सुसराल गाजीपुर से हमारे घर आ गईं। कैंट इलाके की प्रतापनगर कॉलोनी में रामदीन परिवार के साथ रहते थे। सबने एक साथ खाना खाया था। उस वक्त पैसे या प्रॉपर्टी को लेकर झगड़ा हुआ। मैंने रात में ही सोच लिया कि ये लोग हमें बर्बाद कर देंगे। इन्हें मारना ही होगा। सुबह राजेश ने कहा- जमीन में दीदी को क्यों हिस्सा दे रहे
मंगलवार सुबह करीब 8.30 बजे सब लोग बरामदे में मौजूद थे। राजेश ने ही सबसे पहले बातचीत शुरू की। कहा, मैं सिर्फ एक मैकेनिक हूं, अगर सारी जायदाद दीदी को दे देंगे, तो हमारी बच्चे कैसे और किसके सहारे जिएंगे। इस पर रामदीन भारद्वाज ने कहा- तुम्हें गांव (गाजीपुर) का मकान दे चुका था, इसलिए कैंट वाली जमीन शिवकुमारी को दी। राजेश ने कहा- तो गांव की जमीन में क्यों हिस्सा दे रहे हैं? वो पेंशन का हिस्सा भी लेकर जाती हैं। रामदीन ने कहा- मेरी मर्जी हैं, किस बच्चे को क्या दूं। इस पर राजेश गुस्सा हो गया। इधर, शिवकुमारी कमरे के अंदर चली गई। राजेश ने आंगन के एक कोने में रखी ईंट को उठा लाया, चिल्लाते हुए कहा- जब कोई रहेगा ही नहीं, तो ये सब दोगे किसको? इसके बाद उसने अपने पिता के सिर पर पहला वार किया। रामदीन भी गुस्से में आंगन के दूसरी तरफ रखी सब्बल (लोहे की छड़) को उठा लाए। वह अपने बेटे की तरफ बढ़े, मगर सिर से तेजी से खून बहने लगा। वह जमीन पर ही बैठ गए। इसके बाद राजेश ने सब्बल उनसे छीन लिया और उसी से 2-3 वार सिर पर किए। आंगन की जमीन पर खून फैल गया। हत्या से पहले शिवकुमारी गिड़गिड़ाई, प्रॉपर्टी नहीं चाहिए…
रामदीन की सिर्फ 1 चीख निकली और उनका शरीर बेजान हो गया। इधर, कमरे के अंदर से चीख सुनकर शिवकुमारी बाहर आई, मगर पिता की लाश देखकर चीख पड़ी। बोली- ये तुमने क्या किया, कोई बचाओ। राजेश ने कहा- ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है, तुम्हें भी देख लेता हूं। खून से सने भाई को अपनी तरफ आता हुआ देखकर शिवकुमारी कमरे में अंदर की तरफ भागी, मगर राजेश ने उसके सिर पर पीछे से वार किया। शिवकुमार जमीन पर गिर पड़ी और अपनी जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाने लगी। बोली- ये सब तुम ही रख लो, बस मुझे जाने दो। मुझे जमीन-मकान कुछ नहीं चाहिए। राजेश से हंसते हुए कहा– नहीं तुम्हें तो सब कुछ चाहिए न। इसके बाद उसने बहन पर भी ताबड़तोड़ वार किए और उसको मार दिया। बहू इंदू ने कहा- हम घबरा गए थे
पुलिस ने राजेश की पत्नी इंदू को डबल मर्डर में आरोपी नहीं बनाया है। मगर उसको देर शाम तक थाने में ही पूछताछ के लिए रखा। पुलिस ने इंदू से पूछा- हत्या के बाद तुम लोग क्या करने वाले थे? इंदू ने कहा- हम घबरा गए थे, एकदम से समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करना है। क्योंकि ये सोचा नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। फिर आप लोग (पुलिस) आ गए, हमें थाने ले आया गया। बता दें कि पुलिस के पहुंचने पर राजेश और इंदू दोनों घर में ही मिले थे। अब रामदीन के पड़ोसियों से हकीकत समझिए पड़ोसी ने कहा- बहू चिल्लाती रही कि मदद करिए
पुलिस की इन्वेस्टिगेशन के साथ डबल मर्डर की हकीकत को समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम रामदीन भारद्वाज के घर पहुंची। पुलिस ने घर के बाहर लाल फीता लगाया हुआ था। यहां हमारी मुलाकात रामदीन के पड़ोसी दिनेश प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू से हुई। रामदीन के मकान से सटा हुआ दिनेश प्रताप सिंह का मकान है। दिनेश प्रताप सिंह ने साल 2007 में अपना मकान यहां बनवाया है। दिनेश ने बताया- जब मै यहां रहने आया तो जलकल में कार्यरत रामदीन भरद्वाज का मकान पहले से था। उनसे जान-पहचान हुई। उन्होंने कहा- रामदीन के घर में रोज ही कुछ न कुछ लड़ाई झगड़े होते रहते थे। इसकी जड़ पुश्तैनी मकान और पेंशन थी। रामदीन ने अपनी जमीन बेटी को दी थी। ये भी हम लोगों को मालूम था कि शिवकुमारी हर महीने घर आकर पेंशन का एक हिस्सा लेकर जाती थी। इसको लेकर छोटा बेटा राजेश और उसकी पत्नी इंदू झगड़ा करते थे। दिनेश ने बताया- आज रामदीन की बहू छत पर खड़े होकर गुहार लगा रही थी। बचा लीजिए…बचा लीजिये। जब हमने झांक कर देखा तो रामदीन के चेहरे से खून निकल रहा था और राजेश उनके बगल में खड़ा था। उसके बाद पुलिस बुलाई गई और अब सब पुलिस की हिरासत में हैं। बड़े बेटे की मौत हुई, तो 2 दिन रखी रही लाश
दिनेश ने बताया- कुछ समय पहले रामदीन के बड़े बेटे की मौत बीमारी से हुई थी। मोहल्ले में किसी को पता नहीं चला। दो दिन बाद जानकारी हुई तो शव रखा हुआ था। जब पेंशन आ गई, तब उसका दाह संस्कार किया गया। इसके बाद ही रामदीन ने बाहर काम करने वाले अपने छोटे बेटे राजेश को अपने साथ रहने के लिए बुला लिया। राजेश के नाम की थी वसीयत, पर बेटी को दे दी प्रॉपर्टी
दिनेश ने बताया- इसके बाद राजेश अपने पिता की सेवा करने लगा। पिता ने उसे हाल ही में एक बाइक भी दिलाई थी। कुछ दिन पहले रामदीन की बेटी घर आई और यहीं काफी दिन तक रही। उस दौरान उसने भी पिता की सेवा की और फिर पिता को 6 महीने के लिए अपने साथ लेकर अपने गाजीपुर स्थित मकान पर ले गई। पिता के पेंशन के पैसे से उसने अपना तीन मंजिला मकान बनवा लिया है। उसकी एक बेटी मानसिक विक्षिप्त है और एक लड़का है। पिता ने खुश होकर मकान कर दिया नाम
दिनेश ने बताया- एक दिन रामदीन मुझे बाहर मिल गए थे तो उन्होंने कहा कि आज दिनेश भाई बड़ा काम कर दिए हैं। अपना मकान बेटी के नाम कर दिए हैं। ये हमने सुना तो कहा कि आपने गलत किया है। बेटा आपकी सेवा कर रहा था। आपने बताया था कि वसीयत की है, फिर ऐसा नहीं करना चाहिए था और यही पर हमारी बात खत्म हो गई। रामदीन की बहू ने दी थी आवाज
दिनेश ने बताया- रोज की तरह मै अपनी बेटी को लेकर स्कूल छोड़ने गया था। वहां से लौटकर आया तो पत्नी ने सब्जी लेने के लिए भेज दिया था। वहां से लौटकर आया और अख़बार पढ़ने लगा तो पत्नी ने नहाने को कहा। नहाने जा ही रहा था कि राजेश की पत्नी इंदू छत से आवाज लगाने लगी। चाचा बचा लीजिए। हमने पूछा क्या हुआ है। तो उसने बस आंगन का इशारा किया पर हम उधर नहीं गए। और अंदर नहाने चले गए। चिल्लाने पर आये बाहर तो मर चुके थे रामदीन
दिनेश ने बताया- हम अंदर गए ही थे कि चिल्लाने की आवाज तेज हो गई। झांक कर देखा तो रामदीन के चेहरे से खून निकल रहा था। इधर मोहल्ले वालों ने पुलिस भी बुला ली थी। पुलिस आयी तो पता चला की एक नहीं, दो मर्डर हुए हैं। उसकी बहन की लाश कमरे में अंदर पड़ी थी। जिसे पुलिस ने बाहर निकलवाया। फिलहाल बेटा, बहू दोनों पुलिस के हिरासत में हैं। ADCP वरुणा जोन नीतू कादियान ने कहा- बेटा हमारी कस्टडी में है। शिवकुमारी की बॉडी को उसके पति के परिवार के सुपुर्द की गई है। दोनों के अंतिम संस्कार के लिए बोल दिया गया है। परिवार की तहरीर पर राजेश के खिलाफ एफआईआर लिख दी गई है। इंदू की भूमिका की भी जांच जारी है। ………….
ये भी पढ़ें : बेटे ने पत्नी के साथ मिलकर पिता-बहन का मर्डर किया:वाराणसी में मरने के बाद भी सिर कूंचता रहा, बहन को जमीन देने से नाराज था वाराणसी में बहन को गांव की जमीन में हिस्सा देने से नाराज बेटे ने पिता और बड़ी बहन की हत्या कर दी। युवक ने पत्नी के साथ मिलकर पिता को पहले लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मार डाला। गुस्सा शांत नहीं हुआ तो सिर और मुंह को ईंट से काफी देर तक कूंचता रहा। चीखें सुनकर बहन घर के आंगन में आई, खून ही खून बिखरा देखकर उसके होश उड़ गए। भाई को रोकने का प्रयास किया, तो उसने बहन पर हमला किया। बहन अंदर कमरे की तरफ भागी, राजेश ने दौड़ाकर उसके सिर पर सिलबट्टा मार दिया। इससे बहन की भी वहीं मौत हो गई। पढ़िए पूरी खबर…
राजेश ने बताया, इस हत्याकांड की शुरुआत 7 जुलाई को हुई, जब मेरी शिकायत पर काशी वाले मकान की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग की टीम पहुंची। क्योंकि इस मकान का एक हिस्सा पापा पहले ही दीदी के नाम कर चुके थे। कुछ दिन पहले उन्होंने बाकी बचे हिस्से को भी दीदी शिवकुमारी के नाम ट्रांसफर कर दिया। मैंने राजस्व विभाग में इसकी शिकायत कर दी। पापा ने ये बातें दीदी को फोन पर बता दीं। वो शाम को अपनी सुसराल गाजीपुर से हमारे घर आ गईं। कैंट इलाके की प्रतापनगर कॉलोनी में रामदीन परिवार के साथ रहते थे। सबने एक साथ खाना खाया था। उस वक्त पैसे या प्रॉपर्टी को लेकर झगड़ा हुआ। मैंने रात में ही सोच लिया कि ये लोग हमें बर्बाद कर देंगे। इन्हें मारना ही होगा। सुबह राजेश ने कहा- जमीन में दीदी को क्यों हिस्सा दे रहे
मंगलवार सुबह करीब 8.30 बजे सब लोग बरामदे में मौजूद थे। राजेश ने ही सबसे पहले बातचीत शुरू की। कहा, मैं सिर्फ एक मैकेनिक हूं, अगर सारी जायदाद दीदी को दे देंगे, तो हमारी बच्चे कैसे और किसके सहारे जिएंगे। इस पर रामदीन भारद्वाज ने कहा- तुम्हें गांव (गाजीपुर) का मकान दे चुका था, इसलिए कैंट वाली जमीन शिवकुमारी को दी। राजेश ने कहा- तो गांव की जमीन में क्यों हिस्सा दे रहे हैं? वो पेंशन का हिस्सा भी लेकर जाती हैं। रामदीन ने कहा- मेरी मर्जी हैं, किस बच्चे को क्या दूं। इस पर राजेश गुस्सा हो गया। इधर, शिवकुमारी कमरे के अंदर चली गई। राजेश ने आंगन के एक कोने में रखी ईंट को उठा लाया, चिल्लाते हुए कहा- जब कोई रहेगा ही नहीं, तो ये सब दोगे किसको? इसके बाद उसने अपने पिता के सिर पर पहला वार किया। रामदीन भी गुस्से में आंगन के दूसरी तरफ रखी सब्बल (लोहे की छड़) को उठा लाए। वह अपने बेटे की तरफ बढ़े, मगर सिर से तेजी से खून बहने लगा। वह जमीन पर ही बैठ गए। इसके बाद राजेश ने सब्बल उनसे छीन लिया और उसी से 2-3 वार सिर पर किए। आंगन की जमीन पर खून फैल गया। हत्या से पहले शिवकुमारी गिड़गिड़ाई, प्रॉपर्टी नहीं चाहिए…
रामदीन की सिर्फ 1 चीख निकली और उनका शरीर बेजान हो गया। इधर, कमरे के अंदर से चीख सुनकर शिवकुमारी बाहर आई, मगर पिता की लाश देखकर चीख पड़ी। बोली- ये तुमने क्या किया, कोई बचाओ। राजेश ने कहा- ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है, तुम्हें भी देख लेता हूं। खून से सने भाई को अपनी तरफ आता हुआ देखकर शिवकुमारी कमरे में अंदर की तरफ भागी, मगर राजेश ने उसके सिर पर पीछे से वार किया। शिवकुमार जमीन पर गिर पड़ी और अपनी जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाने लगी। बोली- ये सब तुम ही रख लो, बस मुझे जाने दो। मुझे जमीन-मकान कुछ नहीं चाहिए। राजेश से हंसते हुए कहा– नहीं तुम्हें तो सब कुछ चाहिए न। इसके बाद उसने बहन पर भी ताबड़तोड़ वार किए और उसको मार दिया। बहू इंदू ने कहा- हम घबरा गए थे
पुलिस ने राजेश की पत्नी इंदू को डबल मर्डर में आरोपी नहीं बनाया है। मगर उसको देर शाम तक थाने में ही पूछताछ के लिए रखा। पुलिस ने इंदू से पूछा- हत्या के बाद तुम लोग क्या करने वाले थे? इंदू ने कहा- हम घबरा गए थे, एकदम से समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करना है। क्योंकि ये सोचा नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। फिर आप लोग (पुलिस) आ गए, हमें थाने ले आया गया। बता दें कि पुलिस के पहुंचने पर राजेश और इंदू दोनों घर में ही मिले थे। अब रामदीन के पड़ोसियों से हकीकत समझिए पड़ोसी ने कहा- बहू चिल्लाती रही कि मदद करिए
पुलिस की इन्वेस्टिगेशन के साथ डबल मर्डर की हकीकत को समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम रामदीन भारद्वाज के घर पहुंची। पुलिस ने घर के बाहर लाल फीता लगाया हुआ था। यहां हमारी मुलाकात रामदीन के पड़ोसी दिनेश प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू से हुई। रामदीन के मकान से सटा हुआ दिनेश प्रताप सिंह का मकान है। दिनेश प्रताप सिंह ने साल 2007 में अपना मकान यहां बनवाया है। दिनेश ने बताया- जब मै यहां रहने आया तो जलकल में कार्यरत रामदीन भरद्वाज का मकान पहले से था। उनसे जान-पहचान हुई। उन्होंने कहा- रामदीन के घर में रोज ही कुछ न कुछ लड़ाई झगड़े होते रहते थे। इसकी जड़ पुश्तैनी मकान और पेंशन थी। रामदीन ने अपनी जमीन बेटी को दी थी। ये भी हम लोगों को मालूम था कि शिवकुमारी हर महीने घर आकर पेंशन का एक हिस्सा लेकर जाती थी। इसको लेकर छोटा बेटा राजेश और उसकी पत्नी इंदू झगड़ा करते थे। दिनेश ने बताया- आज रामदीन की बहू छत पर खड़े होकर गुहार लगा रही थी। बचा लीजिए…बचा लीजिये। जब हमने झांक कर देखा तो रामदीन के चेहरे से खून निकल रहा था और राजेश उनके बगल में खड़ा था। उसके बाद पुलिस बुलाई गई और अब सब पुलिस की हिरासत में हैं। बड़े बेटे की मौत हुई, तो 2 दिन रखी रही लाश
दिनेश ने बताया- कुछ समय पहले रामदीन के बड़े बेटे की मौत बीमारी से हुई थी। मोहल्ले में किसी को पता नहीं चला। दो दिन बाद जानकारी हुई तो शव रखा हुआ था। जब पेंशन आ गई, तब उसका दाह संस्कार किया गया। इसके बाद ही रामदीन ने बाहर काम करने वाले अपने छोटे बेटे राजेश को अपने साथ रहने के लिए बुला लिया। राजेश के नाम की थी वसीयत, पर बेटी को दे दी प्रॉपर्टी
दिनेश ने बताया- इसके बाद राजेश अपने पिता की सेवा करने लगा। पिता ने उसे हाल ही में एक बाइक भी दिलाई थी। कुछ दिन पहले रामदीन की बेटी घर आई और यहीं काफी दिन तक रही। उस दौरान उसने भी पिता की सेवा की और फिर पिता को 6 महीने के लिए अपने साथ लेकर अपने गाजीपुर स्थित मकान पर ले गई। पिता के पेंशन के पैसे से उसने अपना तीन मंजिला मकान बनवा लिया है। उसकी एक बेटी मानसिक विक्षिप्त है और एक लड़का है। पिता ने खुश होकर मकान कर दिया नाम
दिनेश ने बताया- एक दिन रामदीन मुझे बाहर मिल गए थे तो उन्होंने कहा कि आज दिनेश भाई बड़ा काम कर दिए हैं। अपना मकान बेटी के नाम कर दिए हैं। ये हमने सुना तो कहा कि आपने गलत किया है। बेटा आपकी सेवा कर रहा था। आपने बताया था कि वसीयत की है, फिर ऐसा नहीं करना चाहिए था और यही पर हमारी बात खत्म हो गई। रामदीन की बहू ने दी थी आवाज
दिनेश ने बताया- रोज की तरह मै अपनी बेटी को लेकर स्कूल छोड़ने गया था। वहां से लौटकर आया तो पत्नी ने सब्जी लेने के लिए भेज दिया था। वहां से लौटकर आया और अख़बार पढ़ने लगा तो पत्नी ने नहाने को कहा। नहाने जा ही रहा था कि राजेश की पत्नी इंदू छत से आवाज लगाने लगी। चाचा बचा लीजिए। हमने पूछा क्या हुआ है। तो उसने बस आंगन का इशारा किया पर हम उधर नहीं गए। और अंदर नहाने चले गए। चिल्लाने पर आये बाहर तो मर चुके थे रामदीन
दिनेश ने बताया- हम अंदर गए ही थे कि चिल्लाने की आवाज तेज हो गई। झांक कर देखा तो रामदीन के चेहरे से खून निकल रहा था। इधर मोहल्ले वालों ने पुलिस भी बुला ली थी। पुलिस आयी तो पता चला की एक नहीं, दो मर्डर हुए हैं। उसकी बहन की लाश कमरे में अंदर पड़ी थी। जिसे पुलिस ने बाहर निकलवाया। फिलहाल बेटा, बहू दोनों पुलिस के हिरासत में हैं। ADCP वरुणा जोन नीतू कादियान ने कहा- बेटा हमारी कस्टडी में है। शिवकुमारी की बॉडी को उसके पति के परिवार के सुपुर्द की गई है। दोनों के अंतिम संस्कार के लिए बोल दिया गया है। परिवार की तहरीर पर राजेश के खिलाफ एफआईआर लिख दी गई है। इंदू की भूमिका की भी जांच जारी है। ………….
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