कानपुर में सोमवार देर रात पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट पकड़ा है। बिहार के रहने वाले एक 23 साल के एमबीए छात्र से उसकी किडनी 6 लाख रुपए में खरीदी गई। बाद में 30 साल की महिला मरीज को करीब 80 लाख रुपए में बेच दी गई। किडनी देने वाले छात्र ने पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने सोमवार रात में ही शहर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की। मेड लाइफ हॉस्पिटल में किडनी डोनर एमबीए छात्र और मरीज भर्ती मिले। जब ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो अस्पताल कोई वैध कागजात पेश नहीं कर सका। पुलिस ने मंगलवार को आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, डॉ राजेश कुमार, डॉ राम प्रकाश, डॉ नरेंद्र सिंह और दलाल शिवम अग्रवाल को अरेस्ट कर जेल भेज दिया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया, रैकेट से जुड़े 4 डॉक्टरों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच के मुताबिक, शहर के कई प्राइवेट हॉस्पिटल में अब तक लगभग 40 से 50 किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। यह नेटवर्क लखनऊ के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, नेपाल और साउथ अफ्रीका तक फैला हुआ है। 3 तस्वीरें देखिए- जानिए किडनी ट्रांसप्लांट के खेल का कैसे खुलासा हुआ पुलिस के मुताबिक, कल्याणपुर के आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा था। पुलिस पूछताछ में किडनी डोनर आयुष ने बताया- मेरा पैतृक घर बिहार के समस्तीपुर में है। अभी मेरठ में रहता हूं। उत्तराखंड में देहरादून के एक कॉलेज से एमबीए के चौथे सेमेस्टर का छात्र हूं। उसने बताया, किडनी ट्रांसप्लांट कराने का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा है। शिवम ने मुझे एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फंसाया। शिवम ने मुझे कानपुर बुलाया। कल्याणपुर के आवास विकास-3 में बने एक अपार्टमेंट में शिवम अग्रवाल के साथ 6 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। पुलिस के मुताबिक, रविवार को आहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के पति का मेरठ में स्कूल है। पारुल परिवार ने शिवम को 7 लाख रुपए दिए थे। बाकी रुपए बाद में देने को कहा था। शिवम ने 3.50 लाख रुपए आयुष के खाते में डाले। 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे थे। आयुष ने शिवम से बाकी ढाई लाख रुपए मांगे तो विवाद हो गया। सोमवार को आयुष ने फोन पर पुलिस को मामले की जानकारी दे दी। इधर, आहूजा हॉस्पिटल के संचालन को जैसे ही पता चला कि पुलिस को जानकारी हो गई है, तो उसने आयुष को मेड लाइफ हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया, जबकि पारुल तोमर को कल्याणपुर के ही प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया। हालांकि, पुलिस जांच करते हुए दोनों तक पहुंच गई। इसी दौरान किडनी डोनर आयुष की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे हैलट अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस को किडनी देने वाले आयुष के म्यूल अकाउंट मिले
पुलिस की जांच में आयुष के म्यूल अकाउंट मिले हैं। म्यूल अकाउंट (Mule Account) एक ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया जाता है। आयुष के साइबर क्राइम में भी शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया, 3 मार्च को साउथ अफ्रीका की रहने वाली अरबिका का भी ट्रांसप्लांट आहूजा हॉस्पिटल में किया गया था। पूरा गिरोह एक व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा था। 8वीं पास शिवम स्टेथोस्कोप लटका कर घूमता था
गिरोह का एजेंट शिवम अग्रवाल 8वीं पास है। वह एंबुलेंस ड्राइवर है। लोगों को झांसे में लेने के लिए वह एप्रेन और गले में स्टेथोस्कोप लटका कर घूमता था। शिवम डॉ. रोहित उर्फ राहुल, आहूजा हॉस्पिटल की डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत आहूजा के संपर्क में था। पुलिस कमिश्नर ने बताया, 30 साल की पारुल तोमर की दोनों किडनियां खराब हैं, वह करीब 8 साल से डायलिसिस करा रही हैं। पारुल से फरार डॉक्टर अफजल ने ट्रांसप्लांट कराने को कहा था, इसके बाद कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल ने आयुष को 6 लाख में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया था। मामले में डॉक्टर रोहित उर्फ राहुल का नाम आया है, यह डॉक्टर अपनी पूरी टीम के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान फाइल तैयार नहीं की जाती थी। डॉक्टर रोहित फरार है। आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 वह बीएनएस की धारा 143 के तहत कार्रवाई की गई है।
अब जानिए 6 आरोपियों का आपस में कनेक्शन क्या है? एसीएमओ बोले- अस्पतालों को नोटिस जारी, जल्द लाइसेंस होगा निरस्त
अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि कल्याणपुर के कुछ अस्पतालों में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस, विजिलेंस और डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की, जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट की बात सही पाई गई। मेड लाइफ हॉस्पिटल, अहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया है। इन अस्पतालों से पूछा गया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज यहां कैसे पहुंचे, समेत कुल 10 सवालों के जवाब मांगे गए हैं। अस्पतालों के जवाब मिलने के बाद तीनों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अब तक कानपुर में 50 से अधिक लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया है। डॉ. रोहित कानपुर में अन्य जगहों पर भी ऑपरेशन करता रहा है, वह दिल्ली के डॉक्टरों के संपर्क में है। किडनी ट्रांसप्लांट मामले में 7 अस्पताल और रडार में आए है, जिनमें एक लखनऊ और अन्य 6 कानपुर में हैं। जानें क्या हो सकती सजा?
इस मामले में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोप साबित होने पर दोषियों को 10 साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। किडनी क्या काम करती है?
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गन्स में से एक है। ये ब्लड से अपशिष्ट पदार्थ, एक्स्ट्रा पानी, शुगर और हर उस चीज को बाहर निकालने का काम करती है, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं है। ये टॉक्सिन्स ब्लैडर यानी मूत्राशय में जमा हो जाते हैं और फिर पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। अगर किडनी बीमार पड़ जाए तो अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है। दुनियाभर में करोड़ों लोग किडनी से जुड़ी बीमारियों के साथ जी रहे हैं। इनमें से ज्यादातर को तो इस बात की भनक भी नहीं है कि उन्हें किडनी डिजीज है। यही वजह है कि किडनी डिजीज को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। ——————————- अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ————————–
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गिरोह का एजेंट शिवम अग्रवाल 8वीं पास है। वह एंबुलेंस ड्राइवर है। लोगों को झांसे में लेने के लिए वह एप्रेन और गले में स्टेथोस्कोप लटका कर घूमता था। शिवम डॉ. रोहित उर्फ राहुल, आहूजा हॉस्पिटल की डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत आहूजा के संपर्क में था। पुलिस कमिश्नर ने बताया, 30 साल की पारुल तोमर की दोनों किडनियां खराब हैं, वह करीब 8 साल से डायलिसिस करा रही हैं। पारुल से फरार डॉक्टर अफजल ने ट्रांसप्लांट कराने को कहा था, इसके बाद कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल ने आयुष को 6 लाख में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया था। मामले में डॉक्टर रोहित उर्फ राहुल का नाम आया है, यह डॉक्टर अपनी पूरी टीम के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान फाइल तैयार नहीं की जाती थी। डॉक्टर रोहित फरार है। आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 वह बीएनएस की धारा 143 के तहत कार्रवाई की गई है।
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