रक्षा बंधन से पहले बरेली में ‘वीरांगना यूनिट’ की लेडी कमांडों मैदान में उतर गई हैं। यह यूनिट प्रदेश की पहली महिला एसओजी कमांडो यूनिट है। जबकि बरेली प्रदेश का पहला जिला है, जहां महिला SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की तैनाती की गई है। इस यूनिट का नेतृत्व IPS और अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशिका वर्मा कर रही हैं। SSP अनुराग आर्य के निर्देशन में बनी इस स्पेशल यूनिट में आठ प्रशिक्षित महिला कॉन्स्टेबल शामिल हैं। इनका चयन और ट्रेनिंग बेहद सख्त रही है। सभी कमांडो नांचाकु, लाठी कॉम्बैट, हथियार संचालन, सेल्फ डिफेंस और मार्शल आर्ट में निपुण हैं। ये महिलाएं किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हैं। महिला SOG के ट्रेनिंग की 4 तस्वीरें देखिए… वीरांगना यूनिट का उद्देश्य क्या है?
इस यूनिट का शुभारंभ 6 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। वीरांगना यूनिट का मुख्य उद्देश्य जिले में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना, संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग बढ़ाना और महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ये कमांडो न सिर्फ विशेष अभियानों में भाग लेंगी, बल्कि महिला संबंधी अपराधों पर रोक लगाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। यूनिट का मकसद है कि महिलाओं और बेटियों में आत्मविश्वस की भावना बढ़े और उन्हें यह भरोसा मिले सके कि उनकी सुरक्षा के लिए एक समर्पित टीम मौजूद है। जो उनके दर्द और भावनाओं को समझ पाएगी। महिला SOG टीम में ये शामिल एसएसपी बोले- बेटियों के लिए एक प्रेरणा बनेगी
एसएसपी अनुराग आर्य का कहना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह समाज को यह संदेश देता है कि महिलाएं हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। वीरांगना यूनिट जिले की बेटियों के लिए एक प्रेरणा बनेगी और साबित करेगी कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं हर मोर्चे पर सफलता हासिल कर सकती हैं। आने वाले समय में यह टीम कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी अहम योगदान देगी। अंशिका बोलीं- महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा
एएसपी (दक्षिण) अंशिका वर्मा ने बताया- इस यूनिट का गठन महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर किया गया है। सभी महिला कॉन्स्टेबल विभिन्न तरह की कॉम्बैट ट्रेनिंग और हथियार संचालन में दक्ष हैं। उनका लक्ष्य है कि महिला अपराधों पर प्रभावी रोक लगे, संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय गश्त हो और विशेष अभियानों में महिलाएं बराबरी से भाग लें। यह यूनिट न सिर्फ सुरक्षा का भरोसा देगी, बल्कि जिले की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनेंगी। बरेली में इस पहल से उम्मीद है कि महिला सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। शहर में अब महिलाएं जानेंगी कि उनकी सुरक्षा के लिए एक खास टीम दिन-रात तैयार है। यह टीम खुद महिलाएं हैं, जो हर स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। UP पुलिस की तेज-तर्रार अफसर अंशिका वर्मा अंशिका ने 4 साल के करियर में कई बड़े क्राइम केस सॉल्व किए। वीमेंस इम्पावरमेंट के लिए आगरा और गोरखपुर में अभियान चला चुकीं हैं। यूपी के सबसे बड़े स्टांप घोटाले का खुलासा किया, जिसके लिए उन्हें डीजीपी ने सम्मानित भी किया। अंशिका वर्मा ने गोरखपुर के जंगल में महिलाओं के साथ हो रही घटना पर एक्शन लिया। मुख्य आरोपी डायना उर्फ दयानंद उर्फ देवेंद्र को धर दबोचा गया। 2021 बैच की IPS अंशिका वर्मा इस समय बरेली में SP साउथ के पद पर तैनात हैं। पहले मैं सोचती थी कि पढ़-लिखकर बस सरकारी नौकरी करनी है। जॉब क्या करनी है, ये नहीं जानती थी। लेकिन, दिल्ली-NCR के माहौल से मन आहत हुआ। महिलाओं की सेफ्टी बड़ा इश्यू दिखा। फिर UPSC मेरा टारगेट बन गया।- अंशिका वर्मा, IPS अंशिका प्रयागराज की रहने वाली हैं अंशिका संगम नगरी प्रयागराज की रहने वाली हैं। अंशिका के पिता अनिल वर्मा UPPCL (पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम) में चीफ इंजीनियर थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। मां वंदना वर्मा हाउस वाइफ हैं। अंशिका तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। अंशिका बतातीं हैं- मेरे मम्मी-पापा ने मुझे कभी भी जॉब के लिए प्रेशर नहीं डाला। हमारे पेरेंट्स का हम तीनों बहनों की एजुकेशन पर बहुत फोकस रहा। मेरी प्राइमरी एजुकेशन गर्ल्स हाईस्कूल और सेंट मेरी स्कूल से हुई। 2012 में मैंने ICSE बोर्ड से फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल पास किया। 2014 में इंटर। मेरिट में नाम आने पर मम्मी-पापा बहुत खुश होते, तो पढ़ाई के प्रति मेरा जुनून और बढ़ जाता। बीटेक के बाद UPSC की तैयारी
पापा-मम्मी कहते थे कि बेटियां बस वेल क्वालिफाइड हों। मेरी दोनों बड़ी बहनों ने भी इंजीनियर की है। इंटर पास होने के बाद पापा ने मुझे भी इंजीनियरिंग के लिए नोएडा भेज दिया। यहां गलगोटिया कॉलेज से 2018 में मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। अंशिका वर्मा बताती हैं- बीटेक की पढ़ाई करते हुए ही मन बना लिया था कि वीमेंस सेफ्टी के लिए कुछ करना है, यह ऐसे तो हो नहीं सकता। इसलिए मेरा लक्ष्य UPSC बना। मैंने ठान लिया कि IPS बनना है। इसलिए बीटेक के बाद जॉब के लिए नहीं सोची, बस मन में जो ठाना था, वही पूरा करना था। मैं प्रयागराज आ गई। मैंने रूटीन बनाया। इसमें 8 घंटे रेगुलर पढ़ाई शामिल रही। इस बात का जिक्र मैंने किसी से नहीं किया। हां, एक मम्मी को बता दिया था। कोचिंग नहीं, खुद से पढ़ाई की
अंशिका बताती हैं- पहले यूपीएससी के पूरा पैटर्न समझा और टारगेट सेट कर पढ़ाई शुरू की। मैंने सेल्फ स्टडी पर ही फोकस किया। मुझे पूरा यकीन था कि खुद की तैयारी से भी सफलता मिल जाएगी। 2019 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। तभी कोविड शुरू हो गया। मुझे भी कोरोना हो गया। ऐसी स्थिति में और भी परेशानी उठानी पड़ी। घर पर ही आइसोलेट रहना पड़ा। तब भी मैं नोट्स बनाती रही। अपना लिखा रिवाइज करती रही। फिर मेरा मेंस एग्जाम भी क्लियर हो गया। इंटरव्यू के लिए गई। इसके बाद 2020 का वो दिन, मैं कभी नहीं भूलूंगी। पापा को रिटायर हुए कुछ ही दिन हुए थे। रिजल्ट आने वाला था, मुझे विश्वास था कि सबकुछ अच्छे से गया है। लेकिन, रैंक को लेकर थोड़ा नर्वस थी। फिर, रिजल्ट आया। रैंक-136…यह देखते ही मुझे सुकून मिला। मेरा सपना पूरा हो गया था। …………………. ये खबर भी पढ़िए- ऐशन्या बोलीं- आंखों के सामने पति को मारा…दृश्य भूलता नहीं: प्रेमानंद महाराज का जवाब- हर इंसान की उम्र निश्चित, काल ऐसे संयोग बना देता है पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिवार ने मथुरा में प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशन्या ने कहा- महाराज मेरे पति को आंखों के सामने मार दिया गया। मैं उस दृश्य को भूल नहीं पा रही हूं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने ऐशन्या को समझाया। कहा- भगवान का नियम निश्चित होता है। जिसका जब समय तय होता है, वो उतना ही रहता है। पढ़ें पूरी खबर…
इस यूनिट का शुभारंभ 6 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। वीरांगना यूनिट का मुख्य उद्देश्य जिले में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना, संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग बढ़ाना और महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ये कमांडो न सिर्फ विशेष अभियानों में भाग लेंगी, बल्कि महिला संबंधी अपराधों पर रोक लगाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। यूनिट का मकसद है कि महिलाओं और बेटियों में आत्मविश्वस की भावना बढ़े और उन्हें यह भरोसा मिले सके कि उनकी सुरक्षा के लिए एक समर्पित टीम मौजूद है। जो उनके दर्द और भावनाओं को समझ पाएगी। महिला SOG टीम में ये शामिल एसएसपी बोले- बेटियों के लिए एक प्रेरणा बनेगी
एसएसपी अनुराग आर्य का कहना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह समाज को यह संदेश देता है कि महिलाएं हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। वीरांगना यूनिट जिले की बेटियों के लिए एक प्रेरणा बनेगी और साबित करेगी कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं हर मोर्चे पर सफलता हासिल कर सकती हैं। आने वाले समय में यह टीम कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी अहम योगदान देगी। अंशिका बोलीं- महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा
एएसपी (दक्षिण) अंशिका वर्मा ने बताया- इस यूनिट का गठन महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर किया गया है। सभी महिला कॉन्स्टेबल विभिन्न तरह की कॉम्बैट ट्रेनिंग और हथियार संचालन में दक्ष हैं। उनका लक्ष्य है कि महिला अपराधों पर प्रभावी रोक लगे, संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय गश्त हो और विशेष अभियानों में महिलाएं बराबरी से भाग लें। यह यूनिट न सिर्फ सुरक्षा का भरोसा देगी, बल्कि जिले की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनेंगी। बरेली में इस पहल से उम्मीद है कि महिला सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। शहर में अब महिलाएं जानेंगी कि उनकी सुरक्षा के लिए एक खास टीम दिन-रात तैयार है। यह टीम खुद महिलाएं हैं, जो हर स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। UP पुलिस की तेज-तर्रार अफसर अंशिका वर्मा अंशिका ने 4 साल के करियर में कई बड़े क्राइम केस सॉल्व किए। वीमेंस इम्पावरमेंट के लिए आगरा और गोरखपुर में अभियान चला चुकीं हैं। यूपी के सबसे बड़े स्टांप घोटाले का खुलासा किया, जिसके लिए उन्हें डीजीपी ने सम्मानित भी किया। अंशिका वर्मा ने गोरखपुर के जंगल में महिलाओं के साथ हो रही घटना पर एक्शन लिया। मुख्य आरोपी डायना उर्फ दयानंद उर्फ देवेंद्र को धर दबोचा गया। 2021 बैच की IPS अंशिका वर्मा इस समय बरेली में SP साउथ के पद पर तैनात हैं। पहले मैं सोचती थी कि पढ़-लिखकर बस सरकारी नौकरी करनी है। जॉब क्या करनी है, ये नहीं जानती थी। लेकिन, दिल्ली-NCR के माहौल से मन आहत हुआ। महिलाओं की सेफ्टी बड़ा इश्यू दिखा। फिर UPSC मेरा टारगेट बन गया।- अंशिका वर्मा, IPS अंशिका प्रयागराज की रहने वाली हैं अंशिका संगम नगरी प्रयागराज की रहने वाली हैं। अंशिका के पिता अनिल वर्मा UPPCL (पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम) में चीफ इंजीनियर थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। मां वंदना वर्मा हाउस वाइफ हैं। अंशिका तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। अंशिका बतातीं हैं- मेरे मम्मी-पापा ने मुझे कभी भी जॉब के लिए प्रेशर नहीं डाला। हमारे पेरेंट्स का हम तीनों बहनों की एजुकेशन पर बहुत फोकस रहा। मेरी प्राइमरी एजुकेशन गर्ल्स हाईस्कूल और सेंट मेरी स्कूल से हुई। 2012 में मैंने ICSE बोर्ड से फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल पास किया। 2014 में इंटर। मेरिट में नाम आने पर मम्मी-पापा बहुत खुश होते, तो पढ़ाई के प्रति मेरा जुनून और बढ़ जाता। बीटेक के बाद UPSC की तैयारी
पापा-मम्मी कहते थे कि बेटियां बस वेल क्वालिफाइड हों। मेरी दोनों बड़ी बहनों ने भी इंजीनियर की है। इंटर पास होने के बाद पापा ने मुझे भी इंजीनियरिंग के लिए नोएडा भेज दिया। यहां गलगोटिया कॉलेज से 2018 में मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। अंशिका वर्मा बताती हैं- बीटेक की पढ़ाई करते हुए ही मन बना लिया था कि वीमेंस सेफ्टी के लिए कुछ करना है, यह ऐसे तो हो नहीं सकता। इसलिए मेरा लक्ष्य UPSC बना। मैंने ठान लिया कि IPS बनना है। इसलिए बीटेक के बाद जॉब के लिए नहीं सोची, बस मन में जो ठाना था, वही पूरा करना था। मैं प्रयागराज आ गई। मैंने रूटीन बनाया। इसमें 8 घंटे रेगुलर पढ़ाई शामिल रही। इस बात का जिक्र मैंने किसी से नहीं किया। हां, एक मम्मी को बता दिया था। कोचिंग नहीं, खुद से पढ़ाई की
अंशिका बताती हैं- पहले यूपीएससी के पूरा पैटर्न समझा और टारगेट सेट कर पढ़ाई शुरू की। मैंने सेल्फ स्टडी पर ही फोकस किया। मुझे पूरा यकीन था कि खुद की तैयारी से भी सफलता मिल जाएगी। 2019 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। तभी कोविड शुरू हो गया। मुझे भी कोरोना हो गया। ऐसी स्थिति में और भी परेशानी उठानी पड़ी। घर पर ही आइसोलेट रहना पड़ा। तब भी मैं नोट्स बनाती रही। अपना लिखा रिवाइज करती रही। फिर मेरा मेंस एग्जाम भी क्लियर हो गया। इंटरव्यू के लिए गई। इसके बाद 2020 का वो दिन, मैं कभी नहीं भूलूंगी। पापा को रिटायर हुए कुछ ही दिन हुए थे। रिजल्ट आने वाला था, मुझे विश्वास था कि सबकुछ अच्छे से गया है। लेकिन, रैंक को लेकर थोड़ा नर्वस थी। फिर, रिजल्ट आया। रैंक-136…यह देखते ही मुझे सुकून मिला। मेरा सपना पूरा हो गया था। …………………. ये खबर भी पढ़िए- ऐशन्या बोलीं- आंखों के सामने पति को मारा…दृश्य भूलता नहीं: प्रेमानंद महाराज का जवाब- हर इंसान की उम्र निश्चित, काल ऐसे संयोग बना देता है पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिवार ने मथुरा में प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशन्या ने कहा- महाराज मेरे पति को आंखों के सामने मार दिया गया। मैं उस दृश्य को भूल नहीं पा रही हूं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने ऐशन्या को समझाया। कहा- भगवान का नियम निश्चित होता है। जिसका जब समय तय होता है, वो उतना ही रहता है। पढ़ें पूरी खबर…