यूपी के DGP रहे IPS प्रशांत कुमार ने गुरुवार को मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। प्रशांत कुमार के साथ उनकी IAS पत्नी डिंपल वर्मा और बेटी भी थीं। प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार से कहा- आपने देश और प्रदेश की सेवा की है। अब आप रिटायर हो चुके हैं। समाज की सेवा कर चुके हैं। अब भगवान का स्मरण कीजिए। ऐसे कर्म करिए कि अगले जन्म में फिर मनुष्य बनें। भगवान का स्मरण सभी विपत्तियों से बचा लेता है। अब आप ईश्वर का सुमिरन करते रहिएगा। 84 लाख योनि हैं, तो मनुष्य जन्म से नीचे न गिरें। ऐसे कर्म करें। वहीं, डिंपल वर्मा ने संत प्रेमानंद से कहा- परिवार है, बेटी है। बेटी का विवाह भी करना है। महाराज ने कहा, ये सेवा भी भगवान की सेवा है। भगवान ही परिवार की सेवा के रूप में आए हुए हैं। ऐसा मान करके प्रयास करो। 2 मिनट 33 सेकेंड की मुलाकात में प्रशांत कुमार और उनकी पत्नी-बेटी हाथ जोड़कर खड़े रहे। प्रेमानंद महाराज की सीख- जब शरीर छूटे तो वह भगवान की स्मृति में छूटे प्रशांत कुमार 31 मई, 2025 को यूपी DGP पद से रिटायर हुए। गुरुवार को वे परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर मथुरा पहुंचे। यहां उन्होंने वृंदावन के अलग-अलग मंदिरों में दर्शन किए। इसके बाद परिवार के सदस्यों के साथ संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलि कुंज पहुंचे। जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। संत प्रेमानंद महाराज के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहे। प्रेमानंद महाराज ने कहा- हमारे मनुष्य जीवन का जो अंतिम फल है। वह यह है कि जब हमारा शरीर छूटे तो वह भगवान की स्मृति में छूटे। ऐसे कर्म करें कि अगला जन्म फिर मनुष्य बनें
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा- पूर्व में ऐसे कर्म किए, जिससे इस जन्म में मानव देह मिला। आपने देश और समाज की सेवा की। अब हमारा अगला जन्म हो तो हम फिर मनुष्य जन्म में जन्में। ऐसा कर्म करें कि जिससे अपने देश को सुख प्रदान करें। अपने समाज को सुख प्रदान करें। संत प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार से कहा- भगवान ने आपको सब कुछ दिया है, अब एकांत में भगवान का चिंतन जितना कर सकें, उतना श्रेष्ठ रहेगा। बिहार के रहने वाले हैं प्रशांत कुमार
प्रशांत कुमार का जन्म बिहार के सीवान में हुआ था। IPS अफसर बनने से पहले प्रशांत कुमार ने MSc, MPhil और MBA भी किया था। बतौर IPS प्रशांत कुमार का जब चयन हुआ था, तो उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था। हालांकि, 1994 में यूपी कैडर की IAS डिंपल वर्मा से उन्होंने शादी की। इसके बाद प्रशांत कुमार ने यूपी कैडर में ट्रांसफर ले लिया। वह इसी साल 31 मई को रिटायर हुए। अब संत प्रेमानंद महाराज को जानिए… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद जी महाराज ने घर छोड़ दिया था कानपुर जिले का नरवल तहसील का अखरी गांव। ये जगह है, जहां प्रेमानंद महाराज का जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। वो बताते हैं कि प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दिन देर रात खाना खाया और रोज की तरह छत पर बने कच्चे कमरे में जाकर सो गए। अगली सुबह जब बड़े भाई ने जगाने के लिए आवाज लगाई, कमरे से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ऊपर जाकर देखा तो अनिरुद्ध कमरे में नहीं थे। खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-खुची मोह माया भी छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। प्रेमानंद जी के वृंदावन पहुंचने की कहानी प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला को देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा, आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। यहां खुद को राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। फिलहाल वह वृंदावन के मधुकरी में रहते हैं। …………….. ये खबर भी पढ़िए- संत प्रेमानंद का सेलिब्रिटी पर जादू, मुस्लिम भी फैन:प्रमोशन पाकर अनुज चौधरी ने समझा पाप-पुण्य, VIDEO में पूरी बातचीत संत प्रेमानंद महाराज के विराट-अनुष्का समेत तमाम सेलिब्रिटी भक्त हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी आशीर्वाद पा चुके हैं। प्रेमानंद महाराज का व्यक्तित्व ऐसा है कि मुस्लिम भी उनके फैन हैं। पाकिस्तान में भी लोग उन्हें सुनते हैं। पढ़ें पूरी खबर
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा- पूर्व में ऐसे कर्म किए, जिससे इस जन्म में मानव देह मिला। आपने देश और समाज की सेवा की। अब हमारा अगला जन्म हो तो हम फिर मनुष्य जन्म में जन्में। ऐसा कर्म करें कि जिससे अपने देश को सुख प्रदान करें। अपने समाज को सुख प्रदान करें। संत प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार से कहा- भगवान ने आपको सब कुछ दिया है, अब एकांत में भगवान का चिंतन जितना कर सकें, उतना श्रेष्ठ रहेगा। बिहार के रहने वाले हैं प्रशांत कुमार
प्रशांत कुमार का जन्म बिहार के सीवान में हुआ था। IPS अफसर बनने से पहले प्रशांत कुमार ने MSc, MPhil और MBA भी किया था। बतौर IPS प्रशांत कुमार का जब चयन हुआ था, तो उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था। हालांकि, 1994 में यूपी कैडर की IAS डिंपल वर्मा से उन्होंने शादी की। इसके बाद प्रशांत कुमार ने यूपी कैडर में ट्रांसफर ले लिया। वह इसी साल 31 मई को रिटायर हुए। अब संत प्रेमानंद महाराज को जानिए… 13 साल की उम्र में प्रेमानंद जी महाराज ने घर छोड़ दिया था कानपुर जिले का नरवल तहसील का अखरी गांव। ये जगह है, जहां प्रेमानंद महाराज का जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। वो बताते हैं कि प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दिन देर रात खाना खाया और रोज की तरह छत पर बने कच्चे कमरे में जाकर सो गए। अगली सुबह जब बड़े भाई ने जगाने के लिए आवाज लगाई, कमरे से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ऊपर जाकर देखा तो अनिरुद्ध कमरे में नहीं थे। खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-खुची मोह माया भी छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। प्रेमानंद जी के वृंदावन पहुंचने की कहानी प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला को देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा, आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। यहां खुद को राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। फिलहाल वह वृंदावन के मधुकरी में रहते हैं। …………….. ये खबर भी पढ़िए- संत प्रेमानंद का सेलिब्रिटी पर जादू, मुस्लिम भी फैन:प्रमोशन पाकर अनुज चौधरी ने समझा पाप-पुण्य, VIDEO में पूरी बातचीत संत प्रेमानंद महाराज के विराट-अनुष्का समेत तमाम सेलिब्रिटी भक्त हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी आशीर्वाद पा चुके हैं। प्रेमानंद महाराज का व्यक्तित्व ऐसा है कि मुस्लिम भी उनके फैन हैं। पाकिस्तान में भी लोग उन्हें सुनते हैं। पढ़ें पूरी खबर