प्रयागराज के BJP नेता रणधीर यादव की किडनैपिंग और हत्या की कहानी दिल दहला देने वाली है। डॉ. उदय यादव को शक था कि उसकी बीवी अंजली से रणधीर का अफेयर है। इसलिए 2 महीने पहले नैनीताल घूमने का प्लान बनाया। वहां होटल में तीनों के लिए 1 ही रूम बुक करवाया था। हत्या में शामिल राम सिंह के मुताबिक, वहीं पर उदय ने अपनी पत्नी के साथ रणधीर को संबंध बनाते देख लिया था। इसके बाद डॉ. उदय ने तय कर लिया था कि रणधीर को मार देंगे। मगर उससे पहले 11 जुलाई, 2025 को उसकी बीवी की घर में लाश मिली। आशंका है कि डॉ. उदय ने पहला कत्ल अपनी बीवी का किया था। मगर, उस वक्त पुलिस के इन्वॉल्व होने से पहले बॉडी का दाह संस्कार करके मामला रफा-दफा कर दिया। अब पुलिस अंजली की मौत को मर्डर केस मानते हुए नए सिरे से जांच शुरू करने जा रही है। रणधीर के मर्डर केस में पुलिस ने राम सिंह को पकड़ा है। कस्टडी में कत्ल की जो कहानी सामने आई है, वो होश उड़ाने वाली है। पढ़िए रिपोर्ट… राम सिंह बोला- हत्या से पहले रणधीर को खतरे का अंदाजा हो गया था
पुलिस ने राम सिंह से पूछा- रणधीर को इतना तड़पा कर क्यों मारा? राम सिंह ने कहा- उदय को लगता था कि रणधीर ने दोस्ती में दगा किया है। उसकी बीवी के साथ अफेयर की बात खुल ही चुकी थी। दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था। रणधीर ने भी धमकाया था कि वह उदय को नहीं छोड़ेगा। इसलिए उदय ने उसका मर्डर प्लान कर लिया। पुलिस ने पूछा- फिर रणधीर को कैसे मारा? राम सिंह ने कहा- रणधीर हमारा ज्यादा विरोध न कर सके, इसके लिए पहले हमने मिलकर शराब पीने का प्लान किया। 22 अगस्त की शाम को करीब 5.30 बजे रणधीर को बुलाया था। पुलिस ने पूछा- रणधीर को क्या कहकर बुलाया था? राम सिंह ने कहा- हम लोगों ने कहा था कि चित्रकूट चलकर पार्टी करनी है। यह भी कहा कि किसी को कुछ बताना नहीं, वहां सारे इंतजाम हैं। इसके बाद रास्ते में मिठाई, नमकीन खरीदी। हथिगहां से आगे बढ़ते ही स्कॉर्पियो में उदय और उसके साथी भी सवार हो गए। प्लान के तहत उदय का चचेरा भाई विजय दूसरी स्कॉर्पियो से उसी रूट पर पीछे चलता रहा। हमने कई बोतल शराब और बीयर ली। स्कॉर्पियो में शराब पीने का दौर शुरू हुआ। जानबूझकर उदय रणधीर को जल्दी जल्दी पैक बनाकर देते रहे। जब रणधीर पर नशा हावी हो गया तो उसे खतरे का कुछ एहसास भी हुआ। वो अचानक कहने लगा कि मैं चित्रकूट नहीं जाऊंगा। हमने उसको समझाया, मगर वो मान नहीं रहा था। पहले सिर पर रॉड मारी, फिर मैंने और उदय ने गला घोंटा
पुलिस ने पूछा- फिर तुम लोगों ने क्या किया? राम सिंह ने कहा- ऐसे में उदय ने प्लान बदला और उसके सिर पर एक रॉड से वार कर दिया। चूंकि गाड़ी प्रयागराज कौशांबी रूट पर अंधेरे में चल रही थी, ऐसे में सबने मिलकर रणधीर को पकड़ लिया। मैं और उदय रणधीर का गला घोंटने लगे, 2 मिनट तड़पने के बाद उसकी बॉडी शांत हो गई। रणधीर की लाश को पीछे की सीट पर डाल स्कॉर्पियो मैं चलाने लगा। पुलिस ने पूछा- फिर क्या किया, कहां गए? राम सिंह ने कहा- इसके बाद हमने कहीं भी गाड़ी को रोका नहीं, करीब 1 घंटे तक स्कॉर्पियो में लाश लेकर सड़क पर गाड़ी दौड़ाते रहे। सब लोग बची हुई शराब पीने लगे। इधर उदय का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था। वो लाश को भी थप्पड़ मार रहा था। गालियां दे रहा था। ये सब होते-होते हम लोग पूरामुफ्ती इलाके में पड़ने वाली बमरौली रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंच गए। गाड़ी को पटरी के बगल में लगाकर लाश को बाहर निकाला। एक बार लाश कटने के बाद फिर टुकड़ों को पटरी पर रखा
सूबेदारगंज स्टेशन जाने वाली रेलवे पटरी पर लाश रख दी और वहीं बैठकर ट्रेन आने का इंतजार करने लगे। हम चाहते थे कि लाश के चिथड़े उड़ जाएं। पटरी पर लाश यूं रखी कि गर्दन, हाथ, पैर और धड़ सब अलग हो जाएं। सिर तक चकनाचूर हो ताकि पहचान ही मिट जाए। रात करीब 11.45 बजे उस ट्रैक पर डिब्रूगढ़ राजधानी गुजरी। जब ट्रेन गुजर गई। हम पटरी पर पहुंचे, मोबाइल की लाइट में देखा कि रणधीर की लाश के टुकड़े इधर-उधर बिखर गए थे। इतने से भी उदय का दिल नहीं भरा। शरीर का धड़ जो सबसे बड़ा हिस्सा दिख रहा था, उसे और कुछ और लाश के टुकड़ों को फिर से पटरी पर लाकर रखा। ताकि दूसरी ट्रेनों के गुजरने पर लाश पूरी तरह से मिट ही जाए। पुलिस के मुताबिक, यह रेलवे ट्रैक कानपुर दिल्ली रूट है। इस पर 24 घंटे में 240 ट्रेनें गुजरती हैं। गाड़ी फंस गई, इसलिए स्कॉर्पियो को जला नहीं सके
पुलिस ने पूछा- फिर तुम लोग चित्रकूट क्यों गए? राम सिंह ने कहा- अब हमें ये लगा कि लाश को ठिकाने लगा चुके हैं। स्कॉर्पियो का क्या करें? अब हम स्कॉर्पियो को चित्रकूट ले गए ताकि वहां जंगल में जला देंगे। विजय जो गाड़ी लेकर आया था, उसी से सब वापस आ जाएंगे। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। पहाड़ी रास्तों पर एक जगह रणधीर वाली स्कॉर्पियो फंस गई। ऐसे में गाड़ी को पूरी तरह से जलाने का प्लान बदल गया। उस गाड़ी को वहीं छोड़ हम सभी दूसरी स्कॉर्पियो से प्रयागराज लौट आए। नैनीताल में रणधीर को अपनी पत्नी से संबंध बनाते देखा
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि रणधीर और डॉ. उदय की पांच साल से गहरी दोस्ती हो गई थी। रणधीर का उदय यादव की पत्नी अंजली से अफेयर हो गया था। करीब 2 महीने पहले उदय अपनी पत्नी अंजली और रणधीर के साथ नैनीताल घूमने गया था। तब अंजली के कहने पर होटल में एक ही कमरा बुक किया गया था। पूछताछ में सामने आया है कि नैनीताल में ही उदय ने अपनी पत्नी अंजली और रणधीर को सेक्स करते देख लिया था। नैनीताल से वापस आने के बाद अंजली अपने मायके उमरपुर नींवा धूमनगंज चली गई थी। वहां भी अंजली और रणधीर की लगातार बातचीत होती रही थी। 11 जुलाई को अंजली की बॉडी मिली
अंजली यादव की बॉडी उसके ही घर में 11 जुलाई, 2025 को मिली थी। ये मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। कहा जा रहा है कि उसे जहर दिया गया। हालांकि उस वक्त शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ था। इसके बाद अंजली और रणधीर के रिश्तों की बात फैल गई थी। सोशल मीडिया अकाउंट पर भी टिप्पणी होने लगी थी। इसके बाद समाज में शर्मिदगी के कारण उदय बदला लेने की प्लानिंग करने लगा। उसने भाई विजय यादव और अपनी सास लीला यादव को भी पूरी बात बताई। फिर अपने दोस्त राम सिंह को भी विश्वास में ले लिया था। उदय की लास्ट लोकेशन चित्रकूट में, कानपुर में दबिश देने गई टीम
इस पूरे मामले में DCP यमुनानगर कुलदीप सिंह गुणावत कहते हैं – उदय समेत अन्य आरोपियों की तलाश में 3 टीमें लगाई गईं हैं। उदय की लास्ट लोकेशन चित्रकूट मिली थी। उसके बाद से मोबाइल ट्रेस नहीं हुआ। कानपुर के रिश्तेदार के यहां टीम गई, वहां भी नहीं मिला। परिवार और रिश्तेदार भागे हैं, प्रयागराज में एक दोस्त से सुराग मिला है, टीम गई है। अब जानिए पूरा मामला… 22 अगस्त को लापता हुए, 2 दिन बाद चित्रकूट में स्कॉर्पियो मिली
प्रयागराज से पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता रणधीर यादव मोहम्मदपुर हथिगंहा के रहने वाले थे। उनके पिता राम अभिलाष यादव सूबेदार रह चुके हैं। पत्नी बबली यादव वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। 22 अगस्त (शुक्रवार) की रात रणधीर यादव नवाबगंज बाजार में एक ढाबे पर देखे गए थे। उसके बाद से वह लापता हो गए थे। जिला पंचायत सदस्य बबली यादव ने पति रणधीर यादव के अपहरण की FIR करते हुए 2 लोगों को नामजद किया था। इसमें एक नाम राम सिंह और दूसरा डॉ. उदय (कंपाउंडर) का था। शक की सुई इन्हीं दोनों पर थी। रणधीर यादव की तलाश के दौरान पुलिस को पता चला था कि उनका जानने वाला राम सिंह भी लापता है। राम सिंह PWD का कर्मचारी है। 24 अगस्त को रणधीर यादव की स्कॉर्पियो चित्रकूट के देवांगना के पास लावारिस हालत में मिली थी। स्कॉर्पियो से नंबर प्लेट गायब थी, लेकिन कागजात मिल गए थे। राम सिंह के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ कि अंजली की मौत जहर खाने से हुई थी। लेकिन इसकी सूचना उन लोगों ने पुलिस को नहीं दी और अंतिम संस्कार कर दिया। —————————– ‘आखिरी वक्त में पति का चेहरा भी नहीं देख पाई’:पत्नी बोलीं- 6 दिन तक तलाश में भटकती रही; भाजपा नेता को 8 टुकड़ों में काटकर फेंका मैं आखिरी वक्त में अपने पति का चेहरा तक नहीं देख सकी। ये कैसा इंसाफ है। 6 दिन से मैं अपने पति की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रही थी। ये कहना है पूर्व जिला पंचायत सदस्त रणधीर यादव की पत्नी बबली यादव का। बता दें पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव (40) की 8 टुकड़ों में काटकर पूरामुफ्ती में रेलवे ट्रैक पर फेंक दी गई थी। वह 22 अगस्त से लापता थे। पढ़िए पूरी खबर…
पुलिस ने राम सिंह से पूछा- रणधीर को इतना तड़पा कर क्यों मारा? राम सिंह ने कहा- उदय को लगता था कि रणधीर ने दोस्ती में दगा किया है। उसकी बीवी के साथ अफेयर की बात खुल ही चुकी थी। दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था। रणधीर ने भी धमकाया था कि वह उदय को नहीं छोड़ेगा। इसलिए उदय ने उसका मर्डर प्लान कर लिया। पुलिस ने पूछा- फिर रणधीर को कैसे मारा? राम सिंह ने कहा- रणधीर हमारा ज्यादा विरोध न कर सके, इसके लिए पहले हमने मिलकर शराब पीने का प्लान किया। 22 अगस्त की शाम को करीब 5.30 बजे रणधीर को बुलाया था। पुलिस ने पूछा- रणधीर को क्या कहकर बुलाया था? राम सिंह ने कहा- हम लोगों ने कहा था कि चित्रकूट चलकर पार्टी करनी है। यह भी कहा कि किसी को कुछ बताना नहीं, वहां सारे इंतजाम हैं। इसके बाद रास्ते में मिठाई, नमकीन खरीदी। हथिगहां से आगे बढ़ते ही स्कॉर्पियो में उदय और उसके साथी भी सवार हो गए। प्लान के तहत उदय का चचेरा भाई विजय दूसरी स्कॉर्पियो से उसी रूट पर पीछे चलता रहा। हमने कई बोतल शराब और बीयर ली। स्कॉर्पियो में शराब पीने का दौर शुरू हुआ। जानबूझकर उदय रणधीर को जल्दी जल्दी पैक बनाकर देते रहे। जब रणधीर पर नशा हावी हो गया तो उसे खतरे का कुछ एहसास भी हुआ। वो अचानक कहने लगा कि मैं चित्रकूट नहीं जाऊंगा। हमने उसको समझाया, मगर वो मान नहीं रहा था। पहले सिर पर रॉड मारी, फिर मैंने और उदय ने गला घोंटा
पुलिस ने पूछा- फिर तुम लोगों ने क्या किया? राम सिंह ने कहा- ऐसे में उदय ने प्लान बदला और उसके सिर पर एक रॉड से वार कर दिया। चूंकि गाड़ी प्रयागराज कौशांबी रूट पर अंधेरे में चल रही थी, ऐसे में सबने मिलकर रणधीर को पकड़ लिया। मैं और उदय रणधीर का गला घोंटने लगे, 2 मिनट तड़पने के बाद उसकी बॉडी शांत हो गई। रणधीर की लाश को पीछे की सीट पर डाल स्कॉर्पियो मैं चलाने लगा। पुलिस ने पूछा- फिर क्या किया, कहां गए? राम सिंह ने कहा- इसके बाद हमने कहीं भी गाड़ी को रोका नहीं, करीब 1 घंटे तक स्कॉर्पियो में लाश लेकर सड़क पर गाड़ी दौड़ाते रहे। सब लोग बची हुई शराब पीने लगे। इधर उदय का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था। वो लाश को भी थप्पड़ मार रहा था। गालियां दे रहा था। ये सब होते-होते हम लोग पूरामुफ्ती इलाके में पड़ने वाली बमरौली रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंच गए। गाड़ी को पटरी के बगल में लगाकर लाश को बाहर निकाला। एक बार लाश कटने के बाद फिर टुकड़ों को पटरी पर रखा
सूबेदारगंज स्टेशन जाने वाली रेलवे पटरी पर लाश रख दी और वहीं बैठकर ट्रेन आने का इंतजार करने लगे। हम चाहते थे कि लाश के चिथड़े उड़ जाएं। पटरी पर लाश यूं रखी कि गर्दन, हाथ, पैर और धड़ सब अलग हो जाएं। सिर तक चकनाचूर हो ताकि पहचान ही मिट जाए। रात करीब 11.45 बजे उस ट्रैक पर डिब्रूगढ़ राजधानी गुजरी। जब ट्रेन गुजर गई। हम पटरी पर पहुंचे, मोबाइल की लाइट में देखा कि रणधीर की लाश के टुकड़े इधर-उधर बिखर गए थे। इतने से भी उदय का दिल नहीं भरा। शरीर का धड़ जो सबसे बड़ा हिस्सा दिख रहा था, उसे और कुछ और लाश के टुकड़ों को फिर से पटरी पर लाकर रखा। ताकि दूसरी ट्रेनों के गुजरने पर लाश पूरी तरह से मिट ही जाए। पुलिस के मुताबिक, यह रेलवे ट्रैक कानपुर दिल्ली रूट है। इस पर 24 घंटे में 240 ट्रेनें गुजरती हैं। गाड़ी फंस गई, इसलिए स्कॉर्पियो को जला नहीं सके
पुलिस ने पूछा- फिर तुम लोग चित्रकूट क्यों गए? राम सिंह ने कहा- अब हमें ये लगा कि लाश को ठिकाने लगा चुके हैं। स्कॉर्पियो का क्या करें? अब हम स्कॉर्पियो को चित्रकूट ले गए ताकि वहां जंगल में जला देंगे। विजय जो गाड़ी लेकर आया था, उसी से सब वापस आ जाएंगे। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। पहाड़ी रास्तों पर एक जगह रणधीर वाली स्कॉर्पियो फंस गई। ऐसे में गाड़ी को पूरी तरह से जलाने का प्लान बदल गया। उस गाड़ी को वहीं छोड़ हम सभी दूसरी स्कॉर्पियो से प्रयागराज लौट आए। नैनीताल में रणधीर को अपनी पत्नी से संबंध बनाते देखा
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि रणधीर और डॉ. उदय की पांच साल से गहरी दोस्ती हो गई थी। रणधीर का उदय यादव की पत्नी अंजली से अफेयर हो गया था। करीब 2 महीने पहले उदय अपनी पत्नी अंजली और रणधीर के साथ नैनीताल घूमने गया था। तब अंजली के कहने पर होटल में एक ही कमरा बुक किया गया था। पूछताछ में सामने आया है कि नैनीताल में ही उदय ने अपनी पत्नी अंजली और रणधीर को सेक्स करते देख लिया था। नैनीताल से वापस आने के बाद अंजली अपने मायके उमरपुर नींवा धूमनगंज चली गई थी। वहां भी अंजली और रणधीर की लगातार बातचीत होती रही थी। 11 जुलाई को अंजली की बॉडी मिली
अंजली यादव की बॉडी उसके ही घर में 11 जुलाई, 2025 को मिली थी। ये मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। कहा जा रहा है कि उसे जहर दिया गया। हालांकि उस वक्त शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ था। इसके बाद अंजली और रणधीर के रिश्तों की बात फैल गई थी। सोशल मीडिया अकाउंट पर भी टिप्पणी होने लगी थी। इसके बाद समाज में शर्मिदगी के कारण उदय बदला लेने की प्लानिंग करने लगा। उसने भाई विजय यादव और अपनी सास लीला यादव को भी पूरी बात बताई। फिर अपने दोस्त राम सिंह को भी विश्वास में ले लिया था। उदय की लास्ट लोकेशन चित्रकूट में, कानपुर में दबिश देने गई टीम
इस पूरे मामले में DCP यमुनानगर कुलदीप सिंह गुणावत कहते हैं – उदय समेत अन्य आरोपियों की तलाश में 3 टीमें लगाई गईं हैं। उदय की लास्ट लोकेशन चित्रकूट मिली थी। उसके बाद से मोबाइल ट्रेस नहीं हुआ। कानपुर के रिश्तेदार के यहां टीम गई, वहां भी नहीं मिला। परिवार और रिश्तेदार भागे हैं, प्रयागराज में एक दोस्त से सुराग मिला है, टीम गई है। अब जानिए पूरा मामला… 22 अगस्त को लापता हुए, 2 दिन बाद चित्रकूट में स्कॉर्पियो मिली
प्रयागराज से पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता रणधीर यादव मोहम्मदपुर हथिगंहा के रहने वाले थे। उनके पिता राम अभिलाष यादव सूबेदार रह चुके हैं। पत्नी बबली यादव वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। 22 अगस्त (शुक्रवार) की रात रणधीर यादव नवाबगंज बाजार में एक ढाबे पर देखे गए थे। उसके बाद से वह लापता हो गए थे। जिला पंचायत सदस्य बबली यादव ने पति रणधीर यादव के अपहरण की FIR करते हुए 2 लोगों को नामजद किया था। इसमें एक नाम राम सिंह और दूसरा डॉ. उदय (कंपाउंडर) का था। शक की सुई इन्हीं दोनों पर थी। रणधीर यादव की तलाश के दौरान पुलिस को पता चला था कि उनका जानने वाला राम सिंह भी लापता है। राम सिंह PWD का कर्मचारी है। 24 अगस्त को रणधीर यादव की स्कॉर्पियो चित्रकूट के देवांगना के पास लावारिस हालत में मिली थी। स्कॉर्पियो से नंबर प्लेट गायब थी, लेकिन कागजात मिल गए थे। राम सिंह के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ कि अंजली की मौत जहर खाने से हुई थी। लेकिन इसकी सूचना उन लोगों ने पुलिस को नहीं दी और अंतिम संस्कार कर दिया। —————————– ‘आखिरी वक्त में पति का चेहरा भी नहीं देख पाई’:पत्नी बोलीं- 6 दिन तक तलाश में भटकती रही; भाजपा नेता को 8 टुकड़ों में काटकर फेंका मैं आखिरी वक्त में अपने पति का चेहरा तक नहीं देख सकी। ये कैसा इंसाफ है। 6 दिन से मैं अपने पति की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रही थी। ये कहना है पूर्व जिला पंचायत सदस्त रणधीर यादव की पत्नी बबली यादव का। बता दें पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव (40) की 8 टुकड़ों में काटकर पूरामुफ्ती में रेलवे ट्रैक पर फेंक दी गई थी। वह 22 अगस्त से लापता थे। पढ़िए पूरी खबर…