‘पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था। भाजपा के एक नेता चंद्रशेखर के गले लगते हुए कह रहे थे कि ये हमारा हनुमान है। क्या ये जनता नहीं समझ रही कि किस हनुमान को लोग तैयार कर रहे हैं, हमारी लंका जलाने के लिए। एक बार भी आवाज नहीं आई कि मैं आपका हनुमान नहीं, रावण हूं।’ बसपा के लगातार दूसरी बार अध्यक्ष मनोनीत किए गए विश्वनाथ पाल ने यह बात कही। दैनिक भास्कर डिजिटल से खास बातचीत में उन्होंने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं नगीना लोकसभा से सांसद चंद्रशेखर, सपा से निष्कासित पूजा पाल, सपा के PDA नारे और आकाश आनंद को लेकर हर मुद्दे पर खुलकर बात की। पढ़िए हूबहू पूरी बातचीत… सवाल : नगीना से सांसद चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी बसपा के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?
विश्वनाथ पाल : 2007 में जब हमारी यूपी में बहुमत से सरकार बनी, तो हमारे कार्यकर्ताओं ने नारा दिया कि यूपी हुई हमारी है, अब दिल्ली की बारी है। इसी के बाद बसपा को कमजोर करने की साजिश शुरू हुई। एससी, ओबीसी समाज में कई दल तैयार किए गए। अब समाज इस बात को समझ चुका है कि इन लोगों को कहां से प्रायोजित कर भेजा गया है। पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें भाजपा के नेता चंद्रशेखर के गले लग रहे थे। कह रहे थे, ये हमारा हनुमान है। ये जनता नहीं समझ रही है कि किस हनुमान को लोग तैयार कर रहे है, हमारी लंका जलाने के लिए। एक बार भी आवाज नहीं आई कि मैं हनुमान नहीं, रावण हूं। बोलना चाहिए था कि मैं आपका हनुमान नहीं, मैं रावण हूं। नहीं बोले, ये जनता देख रही है। चाहे जितने दल बना लिए जाए, जनता सभी को पहचान गई है। सवाल: सपा के पीडीए में डी का मतलब दलित है। क्या दलित समाज बसपा से दूर हो रहा?
विश्वनाथ पाल: सपा ने पीडीए का नारा 2024 लोकसभा चुनाव से देना शुरू किया। तब से अभी तक सरकार तो बनी नहीं। लेकिन, सपा के पास एक पद लोकसभा में नेता विरोधी दल का था। अगर पी का मतलब पिछड़ा, डी का मतलब दलित और ए का मतलब अल्पसंख्यक है, तो क्यों नहीं किसी पिछड़े, ओबीसी या अल्पसंख्यक को नेता विरोधी दल बनाया। तमाम पीडीए के लोग आशा लगाए बैठे थे। क्या सिर्फ पीडीए का नारा देने से विकास होगा? क्या लोकसभा में परिवार से बाहर किसी यादव को टिकट मिला? आजमगढ़ जो पूर्वांचल में पड़ता है, वहां कोई स्थानीय यादव नहीं मिला। घर से वहां यादव प्रत्याशी भेजना पड़ा। पहले मुलायम सिंह, फिर अखिलेश यादव, अब भाई को भेज दिया। कल को भतीजे या बेटे को वहां से प्रत्याशी बना देंगे। बसपा ने 1989 में आजमगढ़ से सबसे पहले रामकृष्ण यादव को सांसद बनाया था। सपा ने पाल, चौहान, प्रजापति, चौरसिया जैसे पिछड़े समाज में किसी को लोकसभा नहीं लड़ाया। सपा का पीडीए मतलब परिवार दल अलायंस है। सवाल : सपा ने प्रदेश अध्यक्ष पाल समाज से बनाया तो है?
विश्वनाथ पाल : कब बनाया? जब वोटिंग की तारीख में तीन-चार दिन बचे थे और उनके परिवार की लोकसभा की सीटें फंसी थीं। बसपा ने तो बहुत पहले भागवत पाल, दयाराम पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। 3 साल मैं विश्वनाथ पाल अध्यक्ष हूं। दोबारा फिर मौका दिया है। पर सपा ने क्या किया? पाल समाज के एक बेटे राजाराम पाल को अकबरपुर लोकसभा सीट से लड़ाया था। सपा तो लोकसभा में 28 दलों के गठबंधन के साथ लड़ रही थी, तो राजराम पाल कैसे हार गए? इसका जवाब सपा को देना होगा। जबकि, वह बसपा और कांग्रेस से दो बार सांसद रह चुके हैं। सवाल : पूजा पाल को सपा ने योगी की तारीफ करने पर निकाल दिया?
विश्वनाथ पाल : जब बसपा से राजू पाल विधायक बने थे, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। 11 सीटों पर चुनाव हो रहे थे। 2 सीटें बसपा जीती थी। 9 सीटें सपा जीती थी। बसपा से राजू पाल के अलावा दूसरी सीट से मुकुल उपाध्याय जीते थे। लेकिन, ये सपा को बर्दाश्त नहीं हुई कि गड़रिया पाल कैसे जीत गया? उनकी सरकार में उनके ही नेताओं के द्वारा राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या हो गई। हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती तुरंत इलाहाबाद पहुंचीं। पहली बार उनकी आंखों में आंसू देखे। पूजा पाल को गले से लगाते हुए उन्होंने कहा कि बेटी तुम चिंता मत करो। फिर उपचुनाव लड़ाया, लेकिन सपा की सरकार में वो हार गईं। फिर चुनाव आया, तो पूजा पाल को लड़ाया और पैसा भी दिया। 2 बार विधायक का चुनाव लड़ी। लेकिन, पूजा पाल के मन में क्या विचार आया कि वो सपा में गईं। वहां तो उनकी जगह थी ही नहीं। क्यों गईं, वो जानें और ये पूजा पाल बताएं। क्यों निकाली गईं, ये पूजा पाल या अखिलेश यादव बताएं। लेकिन, सच ये है कि बसपा नहीं होती, तो राजू पाल न तो विधायक बनते और न ही आज पूजा पाल विधायक होतीं। खासकर जितने भी नेता पाल समाज या पिछड़े समाज के विभिन्न दलों में दिख रहे हैं, उसमें 90% लीडर इसी बहुजन समाज पार्टी रूपी नर्सरी से तैयार होकर निकले हैं। जब इस नर्सरी से तैयार होकर गए हैं, तो वे चाहे जहां भटकें, पर जनता देख रही है कि वो बेटी-बेटा के चक्कर में दूसरे दलों में गए हैं। आज वो समाज फिर बसपा की कमजोर हुई नर्सरी को मजबूत करने में जुटा है। फिर इसी बहुजन समाज पार्टी की नर्सरी में हर समाज के लीडर तैयार होंगे। आपके सामने मैं विश्वनाथ पाल उसका उदाहरण हूं। हमारे समाज में जो भी लीडर तैयार हुए थे, वो आज दूसरे दलों में हैं। सवाल : बिहार में एसआईआर को लेकर कांग्रेस और राजद आवाज उठा रहे हैं। क्या मानते हैं?
विश्वनाथ पाल : देखिए, ये तो बहुत पहले से हो रहा है। पहली बार बाबा साहेब चुनाव लड़े थे, तो इन कांग्रेसियों ने नारायण सादोबा काजरोलकर को चुनाव लड़ाया था। बाबा साहेब चुनाव जीत रहे थे। करीब 78 हजार वोटों की बेईमानी कर उन्हें 15 हजार वोटों से हरा दिया गया। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया तो हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सबसे पहले दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ईवीएम से बड़ी धांधली हुई है। पूरे देश में ईवीएम के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर आंदोलन किया था। लेकिन, उस समय यही सपा-कांग्रेस के लोग बगल में खड़े होकर मजा ले रहे थे। साथ नहीं खड़े हुए। बहनजी अकेले लड़ाई लड़ रही थीं। पिछले साल जब यूपी में उपचुनाव हुआ और 9 सीटों का रिजल्ट आया तो उन्होंने एक बार फिर कहा चुनाव आयोग ईवीएम की बेईमानी को रोक सकता। अगर सरकार और उसके अधिकारियों की बेईमानी को चुनाव आयोग संज्ञान नहीं लेता है, तो मैं अब कोई उपचुनाव नहीं लड़ूंगी। ये बात उन्होंने कोई शौक से नहीं कही थी। यूपी के मिल्कीपुर में फिर एक उपचुनाव हुआ। बहनजी ने चुनाव का बहिष्कार किया। तब भी सारे विपक्षी दलों ने मिलकर विरोध किया होता और ये मांग की होती कि ये उपचुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए। नहीं तो हम चुनाव नहीं लड़ेंगे। तो हम भी देखते कि चुनाव आयोग क्या निर्णय लेता है? बहनजी अपनी हर लड़ाई अपने तरीके से लड़ती हैं, किसी की नकल नहीं करतीं। सवाल: बसपा को पहले सपा, भाजपा, कांग्रेस समेत दूसरे दलों से गठबंधन से कितना फायदा हुआ?
विश्वनाथ पाल : 1992 में सपा से गठबंधन पर 67 सीटें मिलीं। 96 में कांग्रेस से गठबंधन में चुनाव लड़ा, तो फिर 67 मिलीं। 2002 में अकेले लड़े तो 100 सीटें मिलीं। 2007 में अकेले लड़े तो 206 सीटें मिलीं। इससे साफ है कि जब भी हम लोग बिना गठबंधन के चुनाव लड़े, तो बेहतर रिजल्ट मिला। बहुजन समाज के हित में जब उन्हें लगता है कि गठबंधन जरूरी है, तो करती हैं। लेकिन, जब-जब उन्हें लगा है कि गठबंधन से बहुजन समाज का नुकसान हो रहा है, तो बिना किसी देरी के गठबंधन तोड़ने का काम किया। 2027 में हमारी तैयारी है कि बिना किसी गठबंधन के जनता के गठबंधन से हम चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। सवाल : बसपा की 2027 को लेकर किस तरह की तैयारियां चल रही हैं?
विश्वनाथ पाल : बसपा अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर हम लोग 2 मार्च से बूथ सेक्टर कमेटियों का गठन कर रहे थे। ये पूरा हो चुका है। इस बार बसपा बिना किसी दल के गठबंधन किए यूपी में चुनाव लड़ेगी। 2007 की तर्ज पर हम भाईचारा बनाकर जनता का गठबंधन तैयार करेंगे। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी मुस्लिम और न्याय पसंद ब्राह्मण-क्षत्रीय-वैश्य समाज के लोग होंगे। सवाल : 2007 में सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बाद के चुनाव में बीएसपी क्यों नहीं दोहरा पाई?
विश्वनाथ पाल : 2007 के पहले बसपा का कैडर नारा लगाता था कि यूपी की मजबूरी है, बहन मायावती जरूरी हैं। 4 बार बसपा की सरकार बनी। 3 बार गठबंधन में सरकार तो चल रही थी। अच्छा काम भी हो रहा था, लेकिन सरकार गिरा दी जाती थी। 2007 में जनता ने बहुमत से सरकार बनाई। हमारे वर्कर जो नारा लगाते थे, वो बदल दिया। कहा कि यूपी हुई हमारी है, अब दिल्ली की बारी है। इस नारे के बाद दिल्ली में बैठे लोग चिंता में आ गए। जनता के गठबंधन में बसपा का मूलमंत्र था कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। इसी सिद्धांत के तहत अलग-अलग समाज के लीडर तैयार किया गया था। पर बसपा की ये मजबूती दूसरे दलों को पसंद नहीं आया। उन्होंने साजिश करके बसपा की नर्सरी से सर्वसमाज के जो लीडर तैयार हुए थे। उन लोगों के माध्यम से फूट पैदा कर अलग-अलग समाज की पार्टी तैयार कराई गई। उसी का नतीजा है कि आज एससी, एसटी, ओबीसी समाज के कई दल बन चुके हैं। लेकिन, जनता अब समझ चुकी है। वह देख रही है कि जो लोग जाति के नाम पर दल बनाकर बसपा से अलग हुए थे, वो हमें कुछ नहीं दे पा रहे। वे वहीं जाकर सेट हो गए, जहां से हमें खतरा था। सवाल : बसपा क्या एमएलसी और पंचायत चुनाव भी लड़ेगी?
विश्वनाथ पाल : बसपा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। ये सारे चुनाव भी उसी तैयारी से लड़े जाएंगे। हालांकि कौन-सा चुनाव बसपा लड़ेगी और कौन-सा नहीं, ये निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी करेंगी। पर जो समाज को गुमराह कर लोगों ने अलग-अलग दिनों में सरकार बनाई थी, उसकी सच्चाई सामने आ चुकी है। आज आम जनता सपा, बसपा और भाजपा की सरकारों की तुलना कर रही है। चर्चा कर रही कि बसपा के समय में जो कानून व्यवस्था था, शिक्षा, किसानों के गन्ने के दाम और नौजवानों को रोजगार मिला था, आज वो नहीं हो रहा है। आज नौजवान फॉर्म भरते हैं, परीक्षा देते हैं। फिर पता चलता है कि पेपर लीक हो गया। 2027 में एक बार फिर जनता ने बहन मायावती को सीएम बनाने का मन बना लिया है। सवाल : बसपा ने आकाश को नेशनल संयोजक बनाया है। इसको कैसे देखते हैं?
विश्वनाथ पाल : निश्चित रूप से आकाश को नेशनल संयोजक बनाए जाने से आज पूरे देश के नौजवानों में एक उत्साह आया है। आकाश नौजवानों के लीडर बनकर उभरे हैं। बाकी तो देश में 55 और 53 साल वाले भी खुद को नौजवान बता रहे हैं। अब देश देख रहा है कि 29 साल वाला नौजवान है या 55-53 वाला। आकाश को नेशनल संयोजक बनाने से हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा। सवाल: आकाश आनंद में क्या भविष्य दिख रहा?
विश्वनाथ पाल : आकाश आनंद बहुत योग्य है। उनके अंदर राजनीति करने की क्षमता बहुत अच्छी है। हर समाज को जोड़ने की क्षमता है। नौजवानों और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की क्षमता है। बहुत ही व्यवहार कुशल हैं। नेतृत्वकर्ता के रूप में जो काबिलियत होनी चाहिए, वो आकाश में है। सवाल : बसपा हर चुनाव से बहुत पहले प्रत्याशी घोषित कर देती है। इस बार भी ऐसा होगा?
विश्वनाथ पाल : प्रत्याशी घोषित करने का निर्णय हमारी अध्यक्ष मायावती करेंगी। चुनाव जीतने के लिए जो भी बेहतर रणनीति होगी, वो मायावती करेंगी। सवाल : बसपा से निकले कई नेता फिर से वापसी करना चाहते हैं?
विश्वनाथ पाल : वो निर्णय तो मायावती जी करेंगी। कौन नेता वापस लिया जाएगा और किसके लिए बसपा के द्वार बंद रहेंगे। सवाल : क्या विश्वनाथ पाल 2027 में चुनाव लड़ेंगे?
विश्वनाथ पाल : मेरी तो इच्छा ये है कि मैं पूरे प्रदेश में रात-दिन मेहनत कर कार्यकर्ताओं को साथ लेकर मायावती को सीएम बनाऊं। यही मेरा लक्ष्य भी है। सवाल : सत्ता पक्ष के विधायकों का रोना रहता है कि नौकरशाही उनकी बात नहीं सुन रही है?
विश्वनाथ पाल : अगर प्रदेश की आम जनता से वो चाहे किसी भी दल से जुड़ा हो, अकेले से पूछेंगे कि सबसे अच्छा सीएम कौन हो सकता है? तो वे सब दबी जुबान से कहेंगे कि बहनजी को आना चाहिए। बहनजी की सरकार के समय नौकरशाही पर अंकुश था। वे टाइम पर दफ्तर पहुंच जाते थे। नौकरशाही अपने काम को काम समझती थी। उसे लगता था कि कोई हमारा सीएम है। आज दिनदहाड़े हत्या और बेटियों से रेप हो रहा है। अभी मैं गोंडा गया था। वहां दिन के 11 बजे एक बिटिया का अपहरण कर रेप किया गया और फिर हत्या कर दी गई। फिरोजाबाद में सुबह 8 बजे बकरी चरा रही बेटी की लाश मिली। आखिर यूपी में कैसी सरकार चल रही है? बांदा में निषाद समाज की 3 साल बेटी के साथ रेप कर हत्या कर दी गई। बलिया में चौहान की बेटी के साथ रेप कर पेड़ से लटका दिया गया। उसके दोनों हाथ पीछे से बंधे थे। पूरे प्रदेश में खासकर गरीबों के साथ अत्याचार हो रहा है। एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम समाज के लोग न्याय के लिए तरस रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें- रामभद्राचार्य बोले- बगैर पढ़े सब वेदव्यास-वाल्मीकि बनना चाहते हैं, मोदी एक बार और PM बनेंगे संत प्रेमानंदजी के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की लोगों ने काफी आलोचना की। इस पर ‘दैनिक भास्कर’ ने रामभद्राचार्य जी से उनके चित्रकूट आश्रम में खास बातचीत की। उन्होंने संस्कृत से लेकर अहंकारी होने जैसे सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए पूरी खबर…
विश्वनाथ पाल : 2007 में जब हमारी यूपी में बहुमत से सरकार बनी, तो हमारे कार्यकर्ताओं ने नारा दिया कि यूपी हुई हमारी है, अब दिल्ली की बारी है। इसी के बाद बसपा को कमजोर करने की साजिश शुरू हुई। एससी, ओबीसी समाज में कई दल तैयार किए गए। अब समाज इस बात को समझ चुका है कि इन लोगों को कहां से प्रायोजित कर भेजा गया है। पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें भाजपा के नेता चंद्रशेखर के गले लग रहे थे। कह रहे थे, ये हमारा हनुमान है। ये जनता नहीं समझ रही है कि किस हनुमान को लोग तैयार कर रहे है, हमारी लंका जलाने के लिए। एक बार भी आवाज नहीं आई कि मैं हनुमान नहीं, रावण हूं। बोलना चाहिए था कि मैं आपका हनुमान नहीं, मैं रावण हूं। नहीं बोले, ये जनता देख रही है। चाहे जितने दल बना लिए जाए, जनता सभी को पहचान गई है। सवाल: सपा के पीडीए में डी का मतलब दलित है। क्या दलित समाज बसपा से दूर हो रहा?
विश्वनाथ पाल: सपा ने पीडीए का नारा 2024 लोकसभा चुनाव से देना शुरू किया। तब से अभी तक सरकार तो बनी नहीं। लेकिन, सपा के पास एक पद लोकसभा में नेता विरोधी दल का था। अगर पी का मतलब पिछड़ा, डी का मतलब दलित और ए का मतलब अल्पसंख्यक है, तो क्यों नहीं किसी पिछड़े, ओबीसी या अल्पसंख्यक को नेता विरोधी दल बनाया। तमाम पीडीए के लोग आशा लगाए बैठे थे। क्या सिर्फ पीडीए का नारा देने से विकास होगा? क्या लोकसभा में परिवार से बाहर किसी यादव को टिकट मिला? आजमगढ़ जो पूर्वांचल में पड़ता है, वहां कोई स्थानीय यादव नहीं मिला। घर से वहां यादव प्रत्याशी भेजना पड़ा। पहले मुलायम सिंह, फिर अखिलेश यादव, अब भाई को भेज दिया। कल को भतीजे या बेटे को वहां से प्रत्याशी बना देंगे। बसपा ने 1989 में आजमगढ़ से सबसे पहले रामकृष्ण यादव को सांसद बनाया था। सपा ने पाल, चौहान, प्रजापति, चौरसिया जैसे पिछड़े समाज में किसी को लोकसभा नहीं लड़ाया। सपा का पीडीए मतलब परिवार दल अलायंस है। सवाल : सपा ने प्रदेश अध्यक्ष पाल समाज से बनाया तो है?
विश्वनाथ पाल : कब बनाया? जब वोटिंग की तारीख में तीन-चार दिन बचे थे और उनके परिवार की लोकसभा की सीटें फंसी थीं। बसपा ने तो बहुत पहले भागवत पाल, दयाराम पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। 3 साल मैं विश्वनाथ पाल अध्यक्ष हूं। दोबारा फिर मौका दिया है। पर सपा ने क्या किया? पाल समाज के एक बेटे राजाराम पाल को अकबरपुर लोकसभा सीट से लड़ाया था। सपा तो लोकसभा में 28 दलों के गठबंधन के साथ लड़ रही थी, तो राजराम पाल कैसे हार गए? इसका जवाब सपा को देना होगा। जबकि, वह बसपा और कांग्रेस से दो बार सांसद रह चुके हैं। सवाल : पूजा पाल को सपा ने योगी की तारीफ करने पर निकाल दिया?
विश्वनाथ पाल : जब बसपा से राजू पाल विधायक बने थे, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। 11 सीटों पर चुनाव हो रहे थे। 2 सीटें बसपा जीती थी। 9 सीटें सपा जीती थी। बसपा से राजू पाल के अलावा दूसरी सीट से मुकुल उपाध्याय जीते थे। लेकिन, ये सपा को बर्दाश्त नहीं हुई कि गड़रिया पाल कैसे जीत गया? उनकी सरकार में उनके ही नेताओं के द्वारा राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या हो गई। हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती तुरंत इलाहाबाद पहुंचीं। पहली बार उनकी आंखों में आंसू देखे। पूजा पाल को गले से लगाते हुए उन्होंने कहा कि बेटी तुम चिंता मत करो। फिर उपचुनाव लड़ाया, लेकिन सपा की सरकार में वो हार गईं। फिर चुनाव आया, तो पूजा पाल को लड़ाया और पैसा भी दिया। 2 बार विधायक का चुनाव लड़ी। लेकिन, पूजा पाल के मन में क्या विचार आया कि वो सपा में गईं। वहां तो उनकी जगह थी ही नहीं। क्यों गईं, वो जानें और ये पूजा पाल बताएं। क्यों निकाली गईं, ये पूजा पाल या अखिलेश यादव बताएं। लेकिन, सच ये है कि बसपा नहीं होती, तो राजू पाल न तो विधायक बनते और न ही आज पूजा पाल विधायक होतीं। खासकर जितने भी नेता पाल समाज या पिछड़े समाज के विभिन्न दलों में दिख रहे हैं, उसमें 90% लीडर इसी बहुजन समाज पार्टी रूपी नर्सरी से तैयार होकर निकले हैं। जब इस नर्सरी से तैयार होकर गए हैं, तो वे चाहे जहां भटकें, पर जनता देख रही है कि वो बेटी-बेटा के चक्कर में दूसरे दलों में गए हैं। आज वो समाज फिर बसपा की कमजोर हुई नर्सरी को मजबूत करने में जुटा है। फिर इसी बहुजन समाज पार्टी की नर्सरी में हर समाज के लीडर तैयार होंगे। आपके सामने मैं विश्वनाथ पाल उसका उदाहरण हूं। हमारे समाज में जो भी लीडर तैयार हुए थे, वो आज दूसरे दलों में हैं। सवाल : बिहार में एसआईआर को लेकर कांग्रेस और राजद आवाज उठा रहे हैं। क्या मानते हैं?
विश्वनाथ पाल : देखिए, ये तो बहुत पहले से हो रहा है। पहली बार बाबा साहेब चुनाव लड़े थे, तो इन कांग्रेसियों ने नारायण सादोबा काजरोलकर को चुनाव लड़ाया था। बाबा साहेब चुनाव जीत रहे थे। करीब 78 हजार वोटों की बेईमानी कर उन्हें 15 हजार वोटों से हरा दिया गया। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया तो हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सबसे पहले दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ईवीएम से बड़ी धांधली हुई है। पूरे देश में ईवीएम के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर आंदोलन किया था। लेकिन, उस समय यही सपा-कांग्रेस के लोग बगल में खड़े होकर मजा ले रहे थे। साथ नहीं खड़े हुए। बहनजी अकेले लड़ाई लड़ रही थीं। पिछले साल जब यूपी में उपचुनाव हुआ और 9 सीटों का रिजल्ट आया तो उन्होंने एक बार फिर कहा चुनाव आयोग ईवीएम की बेईमानी को रोक सकता। अगर सरकार और उसके अधिकारियों की बेईमानी को चुनाव आयोग संज्ञान नहीं लेता है, तो मैं अब कोई उपचुनाव नहीं लड़ूंगी। ये बात उन्होंने कोई शौक से नहीं कही थी। यूपी के मिल्कीपुर में फिर एक उपचुनाव हुआ। बहनजी ने चुनाव का बहिष्कार किया। तब भी सारे विपक्षी दलों ने मिलकर विरोध किया होता और ये मांग की होती कि ये उपचुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए। नहीं तो हम चुनाव नहीं लड़ेंगे। तो हम भी देखते कि चुनाव आयोग क्या निर्णय लेता है? बहनजी अपनी हर लड़ाई अपने तरीके से लड़ती हैं, किसी की नकल नहीं करतीं। सवाल: बसपा को पहले सपा, भाजपा, कांग्रेस समेत दूसरे दलों से गठबंधन से कितना फायदा हुआ?
विश्वनाथ पाल : 1992 में सपा से गठबंधन पर 67 सीटें मिलीं। 96 में कांग्रेस से गठबंधन में चुनाव लड़ा, तो फिर 67 मिलीं। 2002 में अकेले लड़े तो 100 सीटें मिलीं। 2007 में अकेले लड़े तो 206 सीटें मिलीं। इससे साफ है कि जब भी हम लोग बिना गठबंधन के चुनाव लड़े, तो बेहतर रिजल्ट मिला। बहुजन समाज के हित में जब उन्हें लगता है कि गठबंधन जरूरी है, तो करती हैं। लेकिन, जब-जब उन्हें लगा है कि गठबंधन से बहुजन समाज का नुकसान हो रहा है, तो बिना किसी देरी के गठबंधन तोड़ने का काम किया। 2027 में हमारी तैयारी है कि बिना किसी गठबंधन के जनता के गठबंधन से हम चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। सवाल : बसपा की 2027 को लेकर किस तरह की तैयारियां चल रही हैं?
विश्वनाथ पाल : बसपा अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर हम लोग 2 मार्च से बूथ सेक्टर कमेटियों का गठन कर रहे थे। ये पूरा हो चुका है। इस बार बसपा बिना किसी दल के गठबंधन किए यूपी में चुनाव लड़ेगी। 2007 की तर्ज पर हम भाईचारा बनाकर जनता का गठबंधन तैयार करेंगे। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी मुस्लिम और न्याय पसंद ब्राह्मण-क्षत्रीय-वैश्य समाज के लोग होंगे। सवाल : 2007 में सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बाद के चुनाव में बीएसपी क्यों नहीं दोहरा पाई?
विश्वनाथ पाल : 2007 के पहले बसपा का कैडर नारा लगाता था कि यूपी की मजबूरी है, बहन मायावती जरूरी हैं। 4 बार बसपा की सरकार बनी। 3 बार गठबंधन में सरकार तो चल रही थी। अच्छा काम भी हो रहा था, लेकिन सरकार गिरा दी जाती थी। 2007 में जनता ने बहुमत से सरकार बनाई। हमारे वर्कर जो नारा लगाते थे, वो बदल दिया। कहा कि यूपी हुई हमारी है, अब दिल्ली की बारी है। इस नारे के बाद दिल्ली में बैठे लोग चिंता में आ गए। जनता के गठबंधन में बसपा का मूलमंत्र था कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। इसी सिद्धांत के तहत अलग-अलग समाज के लीडर तैयार किया गया था। पर बसपा की ये मजबूती दूसरे दलों को पसंद नहीं आया। उन्होंने साजिश करके बसपा की नर्सरी से सर्वसमाज के जो लीडर तैयार हुए थे। उन लोगों के माध्यम से फूट पैदा कर अलग-अलग समाज की पार्टी तैयार कराई गई। उसी का नतीजा है कि आज एससी, एसटी, ओबीसी समाज के कई दल बन चुके हैं। लेकिन, जनता अब समझ चुकी है। वह देख रही है कि जो लोग जाति के नाम पर दल बनाकर बसपा से अलग हुए थे, वो हमें कुछ नहीं दे पा रहे। वे वहीं जाकर सेट हो गए, जहां से हमें खतरा था। सवाल : बसपा क्या एमएलसी और पंचायत चुनाव भी लड़ेगी?
विश्वनाथ पाल : बसपा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। ये सारे चुनाव भी उसी तैयारी से लड़े जाएंगे। हालांकि कौन-सा चुनाव बसपा लड़ेगी और कौन-सा नहीं, ये निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी करेंगी। पर जो समाज को गुमराह कर लोगों ने अलग-अलग दिनों में सरकार बनाई थी, उसकी सच्चाई सामने आ चुकी है। आज आम जनता सपा, बसपा और भाजपा की सरकारों की तुलना कर रही है। चर्चा कर रही कि बसपा के समय में जो कानून व्यवस्था था, शिक्षा, किसानों के गन्ने के दाम और नौजवानों को रोजगार मिला था, आज वो नहीं हो रहा है। आज नौजवान फॉर्म भरते हैं, परीक्षा देते हैं। फिर पता चलता है कि पेपर लीक हो गया। 2027 में एक बार फिर जनता ने बहन मायावती को सीएम बनाने का मन बना लिया है। सवाल : बसपा ने आकाश को नेशनल संयोजक बनाया है। इसको कैसे देखते हैं?
विश्वनाथ पाल : निश्चित रूप से आकाश को नेशनल संयोजक बनाए जाने से आज पूरे देश के नौजवानों में एक उत्साह आया है। आकाश नौजवानों के लीडर बनकर उभरे हैं। बाकी तो देश में 55 और 53 साल वाले भी खुद को नौजवान बता रहे हैं। अब देश देख रहा है कि 29 साल वाला नौजवान है या 55-53 वाला। आकाश को नेशनल संयोजक बनाने से हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा। सवाल: आकाश आनंद में क्या भविष्य दिख रहा?
विश्वनाथ पाल : आकाश आनंद बहुत योग्य है। उनके अंदर राजनीति करने की क्षमता बहुत अच्छी है। हर समाज को जोड़ने की क्षमता है। नौजवानों और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की क्षमता है। बहुत ही व्यवहार कुशल हैं। नेतृत्वकर्ता के रूप में जो काबिलियत होनी चाहिए, वो आकाश में है। सवाल : बसपा हर चुनाव से बहुत पहले प्रत्याशी घोषित कर देती है। इस बार भी ऐसा होगा?
विश्वनाथ पाल : प्रत्याशी घोषित करने का निर्णय हमारी अध्यक्ष मायावती करेंगी। चुनाव जीतने के लिए जो भी बेहतर रणनीति होगी, वो मायावती करेंगी। सवाल : बसपा से निकले कई नेता फिर से वापसी करना चाहते हैं?
विश्वनाथ पाल : वो निर्णय तो मायावती जी करेंगी। कौन नेता वापस लिया जाएगा और किसके लिए बसपा के द्वार बंद रहेंगे। सवाल : क्या विश्वनाथ पाल 2027 में चुनाव लड़ेंगे?
विश्वनाथ पाल : मेरी तो इच्छा ये है कि मैं पूरे प्रदेश में रात-दिन मेहनत कर कार्यकर्ताओं को साथ लेकर मायावती को सीएम बनाऊं। यही मेरा लक्ष्य भी है। सवाल : सत्ता पक्ष के विधायकों का रोना रहता है कि नौकरशाही उनकी बात नहीं सुन रही है?
विश्वनाथ पाल : अगर प्रदेश की आम जनता से वो चाहे किसी भी दल से जुड़ा हो, अकेले से पूछेंगे कि सबसे अच्छा सीएम कौन हो सकता है? तो वे सब दबी जुबान से कहेंगे कि बहनजी को आना चाहिए। बहनजी की सरकार के समय नौकरशाही पर अंकुश था। वे टाइम पर दफ्तर पहुंच जाते थे। नौकरशाही अपने काम को काम समझती थी। उसे लगता था कि कोई हमारा सीएम है। आज दिनदहाड़े हत्या और बेटियों से रेप हो रहा है। अभी मैं गोंडा गया था। वहां दिन के 11 बजे एक बिटिया का अपहरण कर रेप किया गया और फिर हत्या कर दी गई। फिरोजाबाद में सुबह 8 बजे बकरी चरा रही बेटी की लाश मिली। आखिर यूपी में कैसी सरकार चल रही है? बांदा में निषाद समाज की 3 साल बेटी के साथ रेप कर हत्या कर दी गई। बलिया में चौहान की बेटी के साथ रेप कर पेड़ से लटका दिया गया। उसके दोनों हाथ पीछे से बंधे थे। पूरे प्रदेश में खासकर गरीबों के साथ अत्याचार हो रहा है। एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम समाज के लोग न्याय के लिए तरस रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें- रामभद्राचार्य बोले- बगैर पढ़े सब वेदव्यास-वाल्मीकि बनना चाहते हैं, मोदी एक बार और PM बनेंगे संत प्रेमानंदजी के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की लोगों ने काफी आलोचना की। इस पर ‘दैनिक भास्कर’ ने रामभद्राचार्य जी से उनके चित्रकूट आश्रम में खास बातचीत की। उन्होंने संस्कृत से लेकर अहंकारी होने जैसे सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए पूरी खबर…