लखनऊ से 2 बच्चों का अपहरण कर उनके परिजनों से 10-10 लाख रुपए की फिरौती मांगने वाला युवक स्टार्टअप खोलने वाला था। वह चप्पल बनाने की फैक्ट्री खोलने के लिए जल्दी पैसे इकट्ठा करना चाहता था। यही वजह थी कि उसने 2 बच्चों का अपहरण कर लिया। किडनैपिंग के आरोपी विजय ने पुलिस की पूछताछ में बताया है कि उसके स्टार्टअप में उसका एक दोस्त भी साथ देता। आरोपी ने बच्चों का अपहरण कर कुछ दूर बस से गया। उसके बाद एक ट्रक में लिफ्ट ली। उसके ड्राइवर का फोन लेकर उसने फिरौती वाला मैसेज किया। किडनैपिंग से पहले वह 3 दोस्तों के साथ पुणे नौकरी करने गया था। वहां अच्छी सैलरी न मिलने की वजह से एक दोस्त के साथ यह वापस आ गया। पुलिस आरोपी के उस दोस्त की तलाश में भी जुट गई है जो बच्चों के अपहरण की साजिश में शामिल था। गौरतलब है कि 11 सितंबर को आलमबाग थाना क्षेत्र की बीजी कॉलोनी से 2 बच्चे लापता हो गए थे। बच्चों को छुड़ाने के लिए अगली सुबह किडनैपिंग का मैसेज आया था। पहले पूरा मामला पढ़िए… लखनऊ के आलमबाग की बीजी कॉलोनी के दो बच्चे अर्जुन सिंह (12) और प्रद्युम्न यादव (8) अचानक लापता हो गए। दोनों साइकिल से खेलने निकले थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई। अगले दिन सुबह अर्जुन के पिता के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। लिखा था- बच्चे को वापस चाहिए तो 10 लाख रुपए दो। साथ ही परिवार की पूरी जानकारी भेजी गई थी। मैसेज पढ़ते ही परिवार के लोग सन्न रह गए। पुलिस ने केस दर्ज कर बच्चों की तलाश में 5 टीमें लगा दीं। 12 सितंबर को दोनों बच्चों को लखीमपुर के गोला गोकर्णनाथ इलाके से सकुशल बरामद कर लिया गया। साथ ही अपहरण करने वाले युवक विजय शर्मा को भी गिरफ्तार किया। अब पढ़िए आरोपी ने पुलिस से जो कुछ बताया बच्चों के परिवार के बारे में जानकारी इकट्ठा की थी बच्चों को किडनैप करने का आरोपी विजय मवैया आलमबाग में किराए पर रह रहा था। वह मूलरूप से सीतापुर के सुजाबलपुर मंगलपुरवा का रहने वाला है। बीजी कॉलोनी में किराए पर रहने वाले अपने दोस्त सूरज के घर पहुंचा, लेकिन वह नहीं मिला। विजय बच्चों को अपने झांसे में लेकर साथ ले गया। बच्चों की पहले से रेकी कर रहा था कि वे रोजाना उसी जगह पर आते-जाते हैं। बाकी पारिवारिक बैकग्राउंड बहुत ज्यादा नहीं पता था। उसने दोनों बच्चों से उनके पिता के बारे में जानकारी इकट्ठा की। अर्जुन के पिता मैकेनिक हैं, जबकि प्रद्युम्न के पिता ऑटो चालक हैं। प्रद्युम्न के चाचा रेलवे में हैं इसलिए उसके साथ रेलवे क्वार्टर में रहते हैं। विजय ने बताया कि वह तीन-चार दोस्तों के साथ पुणे नौकरी करने गया था, लेकिन अच्छी नौकरी न मिलने से फैक्ट्री खोलने की योजना बनाई थी। ट्रक में ली थी लिफ्ट, ड्राइवर के नंबर से मांगी फिरौती पुलिस के मुताबिक, विजय ने कैसरबाग से बस पकड़ी और फिर हरिद्वार जा रहे एक ट्रक से लिफ्ट ली। रास्ते में उसने ट्रक ड्राइवर का फोन लेकर उसमें दूसरा सिम डालकर वॉट्सऐप एक्टिव किया और उसी से फिरौती मांगी। जांच में पता चला कि मोबाइल हरिद्वार निवासी ट्रक ड्राइवर रामकिशन का था। डीसीपी मध्य आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों ने रास्ते में विरोध किया तो विजय ने उन्हें डांटकर चुप करा दिया। उसके साथ मौजूद दोस्त ने बच्चों से कोई बातचीत नहीं की ताकि पहचान न हो सके। बच्चे दूसरे आरोपी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। 24 घंटे में बरामद हुए दोनों बच्चे 11 सितंबर को आलमबाग की बीजी कॉलोनी से दोनों बच्चों का अपहरण हुआ था। किडनैपर उन्हें स्ट्रॉन्ग ड्रिंक पिलाने के बहाने ले गया। शुक्रवार सुबह फिरौती मांगे जाने के बाद पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और लखीमपुर के गोला से विजय को गिरफ्तार कर लिया। दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर परिवार को सौंप दिया गया। ————————– ये खबर भी पढ़िए… ‘मम्मी पैसे दे दो, वरना ये मार देंगे’:लखनऊ से 2 बच्चों को किडनैप किया; रास्ते में चाट खिलाई, मंदिर घुमाया लखनऊ में 2 बच्चों का अपहरण करने वाला किडनैपर कुछ दिन पहले ही पुणे से नौकरी छोड़कर आया था। उसने साइकिल चला रहे दोनों बच्चों से दोस्ती का नाटक खेला। उन्हें बहलाते हुए बोला कि अगर तुम लोग मेरे साथ स्टिंग (स्ट्रॉन्ग ड्रिंक) पीओगे तो ₹50-₹50 दूंगा। दोनों बच्चे किडनैपर के झांसे में आ गए। किडनैपर ने दोनों को एक ही साइकिल से घुमाते हुए चारबाग पहुंचा। यहां उसने स्टिंग पिलाई, चाट खिलाई। इससे भी ज्यादा घुमाने की बात कहकर बस से दोनों बच्चों को लखीमपुर खीरी लेकर पहुंच गया। (पूरी खबर पढ़िए)