कानपुर में भाजपा नेता रवि सतीजा ही नहीं, एक और भाजपा नेता मनोज सिंह भी अखिलेश दुबे के सताए हैं। अखिलेश दुबे ने उनकी भी करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए पत्नी पर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया था। भास्कर से बातचीत में पीड़ित मनोज सिंह ने कहा- प्लॉट हड़पने के लिए अखिलेश ने जान से मारने की धमकी दी। पुरानी सरकारों ने अखिलेश दुबे को पाला-पोसा था। उन्होंने कहा- एक सिपाही का बेटा आज अरबों का मालिक बनकर बैठा है। ऐसे अपराधियों की संपत्ति पर जल्द से जल्द बुलडोजर चलना चाहिए। अखिलेश दुबे एक ऐसा माफिया है जो कानपुर में FIR उद्योग चलाता था। FIR की इंडस्ट्री उसके पास थी। अब तो प्रश्न इस बात का है कि पहले की सरकारों में पुलिस क्या करती रही? इतना बड़ा माफिया पनपता रहा। अखिलेश दुबे ने तमाम पार्कों में कब्जा और सरकारी जमीनों पर कब्जा किया, लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। बदले में जो शिकायत करता, उसके खिलाफ झूठी FIR दर्ज करवाकर जेल भिजवा देता था। ये FIR रेप और छेड़खानी की होती थी। अखिलेश दुबे ने कई विषकन्याएं पाल रखी थीं। वह लोगों को बर्बाद कर देता था। पढ़िए भाजपा नेता और एडवोकेट मनोज सिंह से बातचीत… सवाल : अखिलेश के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए?
जवाब : इसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके ऊपर ही नहीं पूरे गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अखिलेश दुबे का बहुत बड़ा गैंग है। लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बार मुझे ऐसा लगता है और भरोसा है कि अब जनता जाग चुकी है। कार्रवाई जरूर होगी। पीड़ित एकजुट होकर दुबे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पैरवी कर रहे हैं। सवाल : झूठे मुकदमें में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा?
जवाब : चार बार केस की जांच हुई। एक बार तो एक एसीपी ने जांच के बाद क्लीनचिट दी। इसके बाद थानेदार और दरोगाओं ने जांच की और क्लीनचिट देते रहे। ये अगर आदमी उनके पैरों में नहीं गिरता और टूटता तो बार-बार आदेश कराकर मानसिक दबाव बनाते हैं। ये तो अलग तरह का माफिया है। ये तो एफआईआर भी करवाता है, गोली भी मरवाता है। लोगों का चरित्र हनन करता है। ये तो अलग टाइप का माफिया है। इसके सिंडीकेट में पत्रकार, पुलिस, अपराधी और वकीलों का बहुत बड़ा नेक्सेस है। यूपी ही नहीं यूपी के बाहर भी उसका सिंडीकेट सक्रिय है। इसके सिंडीकेट में शूटर टायशन, चांद बाबा जैसे लोग भी हैं। मुझे भरोसा है कि एफआईआर होगी। एसआईटी जांच कर रही है। जिस भी तहरीर में साक्ष्य मिलेंगे, सत्यता होगी दुबे के खिलाफ उन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज होगी। मुझे कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार पर पूरा भरोसा है। सवाल : टायशन, चांदबाबा और तनवीर ये कौन हैं?
जवाब : ये कानपुर शहर के बड़े अपराधी हैं। इन सभी ने मिलकर ही पिंटू सेंगर मर्डर केस को अंजाम दिया था। ये सभी अखिलेश दुबे के लिए काम करते हैं। अखिलेश दुबे तो कई तरीके से लोगों पर हमला करता है। शूटरों से भी मरवा देता है, गोली मरवा देता है। पुलिस से फंसवा भी देता है। मानसिक दबाव बनाने के लिए कुछ भी करता है। तो ये बड़ा खतरनाक है और इसके कई तरह के अपराध हैं। अभी तक विभिन्न सरकारें पालती-पोषती रहीं। सवाल : सिपाही का लड़क अरबों का मालिक कैसे बन गया?
जवाब : इसका साम्राज्य बहुत बड़ा है, दो से ढाई हजार करोड़ की संपत्तियां हैं इसके पास। अभी तो तमाम गुमनामी संपत्तियां होगी। इसकी पूरे देश में संपत्तियां हैं। गोवा में इसकी बिल्डिंगें बन रही हैं। पूणे में इसका कारोबार है। छत्तीसगढ़ में इसका होटल है। उत्तराखंड भीमताल में सौ कमरों का रिसॉर्ट है। जाने कहां-कहां इसकी संपत्तियां फैली पड़ी हैं। एक्साइज में सिपाही का लड़का अरबों का मालिक कैसे बन गया ये बड़ा सवाल है। ये अपने आप को वकील बताता है, आप ई-कोर्ट पर जाकर देख लीजिए इसका एक भी वकालतनामा दाखिल नहीं मिलेगा। जिस वकील की कोई प्रैक्टिस नहीं है, कोई वकालतनामा दाखिल नहीं है तो इतना पैसा आया कहां से…? ये पुलिस और माफिया की साझा डकैती का परिणाम है कि ये इतना बड़ा पैसे वाला बन गया। कुछ और बड़ी बातें तो मनोज सिंह ने कहीं, पढ़िए– नोएडा के बिल्डर पर झूठी FIR और 9 करोड़ वसूला
मनोज सिंह ने बताया कि अभी मैं आपको कानपुर के किदवई नगर थाने की एक एफआईआर दिखा रहा हूं। बिल्डर के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करके नोएडा से उठाया जाता है। उसके खिलाफ लूट, डकैती, अपहरण समेत अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसके बाद उससे 9 करोड़ रुपए की वसूली होती है। वसूली होने के बाद उसे छोड़ दिया जाता है। वादी का अता-पता नहीं है। 3 फरवरी 2022 को एफआईआर नंबर-30 किदवई नगर में दर्ज होती है। इस एफआईआर की जांच हो जाए तो वादी का पता भी नहीं चलेगा। गाजियाबाद के एक अस्पताल में वादी का मेडिकल दिखाकर झूठी एफआईआर दर्ज करके वसूली की गई थी। इसके बाद वसूली पूरी होते ही वादी गायब हो जाती है। ये पुलिस और माफियाओं की साझा डकैती है। इस सरकार में ही ये कार्रवाई संभव थी। अखिल कुमार जैसा ईमानदार पुलिस कमिश्नर के रहने पर ही ये कार्रवाई संभव थी। कब कोई ईमानदार अधिकारी आएगा और कब योगी जी की सरकार आएगी…? ऊपर से प्रेशर इतना होता कि ये कार्रवाई ही संभव नहीं थी। अगर कार्रवाई संभव थी तो बीते 40 सालों में हो चुकी होती न। अब तो प्रश्न इस बात का है कि तमाम सरकारें और अधिकारी कठघरे में खड़े हैं कि अभी तक कार्रवाई हुई क्यों नहीं। इसने तो ऐसे भी लोग पाल रखे हैं जो शिकायत करने वालों के खिलाफ सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक झूठे मैसेज वायरल करके बदनाम करने का काम शुरू कर देते हैं। केडीए वीसी और डीएम को भी कड़ा एक्शन लेना चाहिए
डीएम और केडीए वीसी की तरफ से भी मामले में पुलिस की तरह सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी। कोई रसूख और दहशत नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में कोई भी माफिया बच नहीं पाएगा। पुलिस की तरह अन्य अफसरों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की तरह अन्य अफसरों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। मुझे लगता है कि केडीए और डीएम उस तरह से कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। एमपी एमएलए दुबे के खिलाफ हैं। कोई दुबे के पक्ष में नहीं खड़ा है। कोई सोशल प्लेटफॉर्म पर तो नहीं बताएगा। एमपी एमएलए बस थाेड़ा सा हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए कोई खुलकर नहीं बोल रहा है। इस माफिया की बदमाशी अब जनता जान चुकी है। अगर कार्रवाई नहीं होगी तो जनता सड़क पर आ जाएगी। अब कार्रवाई रोकने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता है।
जवाब : इसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके ऊपर ही नहीं पूरे गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अखिलेश दुबे का बहुत बड़ा गैंग है। लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बार मुझे ऐसा लगता है और भरोसा है कि अब जनता जाग चुकी है। कार्रवाई जरूर होगी। पीड़ित एकजुट होकर दुबे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पैरवी कर रहे हैं। सवाल : झूठे मुकदमें में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा?
जवाब : चार बार केस की जांच हुई। एक बार तो एक एसीपी ने जांच के बाद क्लीनचिट दी। इसके बाद थानेदार और दरोगाओं ने जांच की और क्लीनचिट देते रहे। ये अगर आदमी उनके पैरों में नहीं गिरता और टूटता तो बार-बार आदेश कराकर मानसिक दबाव बनाते हैं। ये तो अलग तरह का माफिया है। ये तो एफआईआर भी करवाता है, गोली भी मरवाता है। लोगों का चरित्र हनन करता है। ये तो अलग टाइप का माफिया है। इसके सिंडीकेट में पत्रकार, पुलिस, अपराधी और वकीलों का बहुत बड़ा नेक्सेस है। यूपी ही नहीं यूपी के बाहर भी उसका सिंडीकेट सक्रिय है। इसके सिंडीकेट में शूटर टायशन, चांद बाबा जैसे लोग भी हैं। मुझे भरोसा है कि एफआईआर होगी। एसआईटी जांच कर रही है। जिस भी तहरीर में साक्ष्य मिलेंगे, सत्यता होगी दुबे के खिलाफ उन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज होगी। मुझे कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार पर पूरा भरोसा है। सवाल : टायशन, चांदबाबा और तनवीर ये कौन हैं?
जवाब : ये कानपुर शहर के बड़े अपराधी हैं। इन सभी ने मिलकर ही पिंटू सेंगर मर्डर केस को अंजाम दिया था। ये सभी अखिलेश दुबे के लिए काम करते हैं। अखिलेश दुबे तो कई तरीके से लोगों पर हमला करता है। शूटरों से भी मरवा देता है, गोली मरवा देता है। पुलिस से फंसवा भी देता है। मानसिक दबाव बनाने के लिए कुछ भी करता है। तो ये बड़ा खतरनाक है और इसके कई तरह के अपराध हैं। अभी तक विभिन्न सरकारें पालती-पोषती रहीं। सवाल : सिपाही का लड़क अरबों का मालिक कैसे बन गया?
जवाब : इसका साम्राज्य बहुत बड़ा है, दो से ढाई हजार करोड़ की संपत्तियां हैं इसके पास। अभी तो तमाम गुमनामी संपत्तियां होगी। इसकी पूरे देश में संपत्तियां हैं। गोवा में इसकी बिल्डिंगें बन रही हैं। पूणे में इसका कारोबार है। छत्तीसगढ़ में इसका होटल है। उत्तराखंड भीमताल में सौ कमरों का रिसॉर्ट है। जाने कहां-कहां इसकी संपत्तियां फैली पड़ी हैं। एक्साइज में सिपाही का लड़का अरबों का मालिक कैसे बन गया ये बड़ा सवाल है। ये अपने आप को वकील बताता है, आप ई-कोर्ट पर जाकर देख लीजिए इसका एक भी वकालतनामा दाखिल नहीं मिलेगा। जिस वकील की कोई प्रैक्टिस नहीं है, कोई वकालतनामा दाखिल नहीं है तो इतना पैसा आया कहां से…? ये पुलिस और माफिया की साझा डकैती का परिणाम है कि ये इतना बड़ा पैसे वाला बन गया। कुछ और बड़ी बातें तो मनोज सिंह ने कहीं, पढ़िए– नोएडा के बिल्डर पर झूठी FIR और 9 करोड़ वसूला
मनोज सिंह ने बताया कि अभी मैं आपको कानपुर के किदवई नगर थाने की एक एफआईआर दिखा रहा हूं। बिल्डर के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करके नोएडा से उठाया जाता है। उसके खिलाफ लूट, डकैती, अपहरण समेत अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसके बाद उससे 9 करोड़ रुपए की वसूली होती है। वसूली होने के बाद उसे छोड़ दिया जाता है। वादी का अता-पता नहीं है। 3 फरवरी 2022 को एफआईआर नंबर-30 किदवई नगर में दर्ज होती है। इस एफआईआर की जांच हो जाए तो वादी का पता भी नहीं चलेगा। गाजियाबाद के एक अस्पताल में वादी का मेडिकल दिखाकर झूठी एफआईआर दर्ज करके वसूली की गई थी। इसके बाद वसूली पूरी होते ही वादी गायब हो जाती है। ये पुलिस और माफियाओं की साझा डकैती है। इस सरकार में ही ये कार्रवाई संभव थी। अखिल कुमार जैसा ईमानदार पुलिस कमिश्नर के रहने पर ही ये कार्रवाई संभव थी। कब कोई ईमानदार अधिकारी आएगा और कब योगी जी की सरकार आएगी…? ऊपर से प्रेशर इतना होता कि ये कार्रवाई ही संभव नहीं थी। अगर कार्रवाई संभव थी तो बीते 40 सालों में हो चुकी होती न। अब तो प्रश्न इस बात का है कि तमाम सरकारें और अधिकारी कठघरे में खड़े हैं कि अभी तक कार्रवाई हुई क्यों नहीं। इसने तो ऐसे भी लोग पाल रखे हैं जो शिकायत करने वालों के खिलाफ सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक झूठे मैसेज वायरल करके बदनाम करने का काम शुरू कर देते हैं। केडीए वीसी और डीएम को भी कड़ा एक्शन लेना चाहिए
डीएम और केडीए वीसी की तरफ से भी मामले में पुलिस की तरह सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी। कोई रसूख और दहशत नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में कोई भी माफिया बच नहीं पाएगा। पुलिस की तरह अन्य अफसरों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की तरह अन्य अफसरों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। मुझे लगता है कि केडीए और डीएम उस तरह से कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। एमपी एमएलए दुबे के खिलाफ हैं। कोई दुबे के पक्ष में नहीं खड़ा है। कोई सोशल प्लेटफॉर्म पर तो नहीं बताएगा। एमपी एमएलए बस थाेड़ा सा हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए कोई खुलकर नहीं बोल रहा है। इस माफिया की बदमाशी अब जनता जान चुकी है। अगर कार्रवाई नहीं होगी तो जनता सड़क पर आ जाएगी। अब कार्रवाई रोकने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता है।