योगी सरकार मंत्रियों-विधायकों की नाराजगी दूर करेगी:कर्मचारियों को मिलेंगे फायदे; 5 पॉइंट में भाजपा की 16 महीने की तैयारी

यूपी में योगी सरकार 2.0 के साढ़े 3 साल का कार्यकाल कल पूरा हो रहा है। अब चुनाव होने में करीब 16 महीने का समय बाकी है। ऐसे में योगी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनाकर खुद के नाम एक बड़ा रिकार्ड दर्ज कराना चाहेंगे। दरअसल, भाजपा ने साल-2017 में योगी आदित्यनाथ को सरकार की कमान सौंपी थी। 2022 में फिर प्रदेश की जनता और भाजपा नेतृत्व ने योगी पर भरोसा जताया। अब योगी के सामने संगठन और जनता की कसौटी पर खरा उतरते हुए तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाना चुनौती है। इस चुनौती को पूरा करने के लिए सरकार अब मिशन इलेक्शन शुरू करेगी। पहले जानिए क्या है प्लानिंग राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं, पंचायत और राज्यसभा चुनाव में बढ़त हासिल कर योगी सरकार यूपी में भगवा चुनावी माहौल तैयार करेगी। उसके बाद विधान परिषद में स्नातक और शिक्षक की सीटों पर होने वाले चुनाव के परिणाम भी भाजपा को माहौल बनाने में मदद कर सकते हैं। 5 पॉइंट में जानिए कैसे बनेगा रोडमैप 1- कानून व्यवस्था पर काम जरूरी
सरकार के एक सेवानिवृत्त प्रमुख सचिव नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं- योगी सरकार 1.0 में कानून व्यवस्था में इतना सुधार हुआ था कि वह 2022 के चुनाव में भाजपा का सबसे बड़ा मुद्दा था। लेकिन, योगी सरकार 2.0 में आए दिन हो रही घटनाओं से जनता में गलत संदेश जा रहा है। गाजीपुर में पुलिस कस्टडी में हुई मौत जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विधायकों और मंत्रियों को पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतरना पड़ रहा। इसलिए सरकार को कानून व्यवस्था के मोर्चे पर काम करना होगा। 2- चुनावी बजट पेश करेगी सरकार
योगी सरकार का 2026 का बजट चुनावी होगा। इसमें सरकार महिलाओं, किसानों, नौजवानों और पिछड़े वर्ग के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकती है। प्रदेश सरकार पर मध्यप्रदेश की तरह लाड़ली बहना जैसी कोई योजना लागू करने का दबाव है। लेकिन, योगी इससे अलग भी कोई योजना लागू कर सकते हैं। सरकार और संगठन ऐसी कोई योजना लागू करना चाहते है, जो चुनाव में गेम चेंजर साबित हो। 3- कर्मचारियों के लिए सरकार खोलेगी पिटारा
सरकार ने लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा की हार के कारणों से सबक लेते हुए बीते सवा साल में उनमें सुधार किया है। लोकसभा चुनाव में आउटसोर्सिंग भर्तियों को भाजपा की हार की बड़ी वजह माना गया था। सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्ती निगम का गठन करते हुए इनमें भी एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण देने की घोषणा की है। वहीं उन्हें भी ईपीएफ, ईएसआई और प्रसूति छुट्‌टी जैसी सुविधाएं देने का ऐलान किया है। उधर, सीएम योगी ने सभी विभागों में रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती के लिए प्रस्ताव शासन के जरिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और यूपी लोकसेवा आयोग को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। शिक्षक दिवस (5 सितंबर) के दिन सरकार ने शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की थी। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को बीटीसी अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर योगी सरकार रिवीजन भी दाखिल करने जा रही है। इसके जरिए भी सरकार संदेश देना चाहती है कि वह कर्मचारियों के साथ है। 4- संघ भी भाजपा के लिए सक्रिय हुआ
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी यूपी में चुनाव के लिहाज से सक्रिय हो गया है। बीते दिनों संघ के 3 शीर्ष पदाधिकारियों ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के साथ अनुषांगिक संगठनों को भी संदेश दिया। कहा कि योगी सरकार के कामकाज को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई शिकायत नहीं करें। जो बात करना है, संगठन और सरकार में उचित मंच पर करें। उधर, सरकार को भी संदेश है कि वह अनुषांगिक संगठनों के साथ समन्वय बनाकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। 5- संकल्प पत्र की घोषणाएं पूरी होंगी
योगी सरकार ने साढ़े तीन साल में भाजपा के संकल्प पत्र- 2022 की 131 में से 120 घोषणाएं पूरी कर दी है। बेटियों को स्कूटी देने की बड़ी घोषणा को भी इस साल बजट में शामिल किया गया है। पुरोहित कल्याण बोर्ड सहित अन्य करीब 11 घोषणाएं भी सरकार आगामी बजट में घोषित कर सकती है। अब जानिए क्या क्या कहते हैं राजनीतिक एक्सपर्ट संगठन को भी लगानी होगी ताकत
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं, सरकार तो अपना काम कर रही है। सरकार के कामकाज को जनता के बीच पहुंचाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को भी मेहनत करनी होगी। नेताओं और कार्यकर्ताओं को 2027 में फिर से सरकार बनाने के लिए अपने व्यक्तिगत हित और नाराजगी को छोड़कर चुनाव जीतने के लिए काम करना होगा। भाजपा आलाकमान को अपने कार्यकर्ताओं को इसके लिए तैयार करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आनंद राय मानते हैं- सरकार के सामने पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव कराना लक्ष्य है। भाजपा सरकार के लिए पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास होगा। जैसे केंद्र सरकार ने जीएसटी में बदलाव किया है। वैसे ही तमाम लोकलुभावन मामले सामने आएंगे। सरकार की नीतियों और फैसलों में बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार रियायतें देकर और योजनाएं चलाकर माहौल बनाने की कोशिश करेगी। चुनाव में सरकार के साथ संगठन की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। सरकार और संगठन मिलकर काम करें वह जनता को दिखना भी चाहिए। सरकार विकास पर फोकस करेगी। —————————- ये खबर भी पढ़ें… क्या गानों से भी हटेंगे ठाकुर-ब्राह्मण और यादव, यूपी में कितना खतरनाक है जाति का जहर यूपी सरकार ने जातीय भेदभाव रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब पुलिस रिकॉर्ड, नोटिस बोर्ड और गिरफ्तारी मेमो में आरोपी की जाति नहीं लिखी जाएगी, बल्कि पिता के साथ मां का नाम दर्ज होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जारी इस फैसले के तहत वाहनों पर जाति लिखने, स्टिकर-नारे लगाने और जाति आधारित रैलियों पर भी रोक रहेगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या नए आदेश के तहत जाति आधारित गानों और नारों पर भी रोक लगेगी? पुलिस रिकॉर्ड, गिरफ्तारी मेमो और नोटिस बोर्ड से जाति हटाने का क्या मतलब है? क्या इससे जातीय पहचान के आधार पर होने वाले भेदभाव में कमी आएगी? पुलिस और प्रशासन पर क्या असर होगा? पढ़िए पूरी खबर…