सबसे पहले ये 2 बयान पढ़िए… 21 सितंबर 2016: ‘मुझे इस देश का प्रधानमंत्री बना दो, मैं दिखा दूंगा कि देश कैसे चलाया जाता है। मुझमें प्रधानमंत्री बनने के सारे गुण हैं- राजनीतिक अनुभव है, शिक्षा है। सिर्फ एक कमी है कि मैं मुसलमान हूं, इसके अलावा मुझमें कोई कमी नहीं।’ सपा सरकार में मंत्री रहते हुए आजम खान ने ये बात कही थी। ठीक 9 साल बाद 23 सितंबर 2025: ‘पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है। अब अपनी सेहत पर ध्यान देंगे और बुरे दौर को कभी नहीं भूलेंगे।’ 23 महीने जेल में बिताने के बाद जमानत पर बाहर आए आजम ने ये बयान दिया। कभी प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले आजम खान के इन 2 बयानों में उनकी ताकत से लेकर बेबसी तक का सफर साफ दिखाई देता है। यूपी सरकार में कभी कैबिनेट मंत्री रहे आजम ने बीते 5 सालों में अपनी जिंदगी के 50 महीने जेल में काटे। योगी सरकार आने के बाद वो 2 बार जेल गए। पहली बार फरवरी 2020 से मई 2022 तक और फिर अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 तक जेल में रहे। कैद में रहते हुए आजम की करोड़ों की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चला और स्कूल बंद कर दिए गए। हमसफर रिसॉर्ट से लेकर उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी में हॉस्टल घोटाला सामने आने पर बड़ी बदनामी हुई। सत्ता से बाहर होने के बाद आजम के साम्राज्य पर कितनी चोट पहुंची? जिन प्रॉपर्टीज पर कार्रवाई हुई, वो अब किस हालत में हैं? कभी ‘रामपुर का शेर’ कहे जाने वाले आजम का सियासी रसूख अब कितना बचा है? इन सवालों के जवाब जानने हम रामपुर पहुंचे। शुरुआत आजम के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी से 2003 की बात है, आजम खान मुलायम सरकार में संसदीय मामलों, शहरी विकास, रोजगार, जल आपूर्ति और गरीबी उन्मूलन के मंत्री बनाए गए। ये वो दौर था जब असल मायने में रामपुर में आजम के दबदबे की शुरुआत हुई। इसी साल सपा नेता ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट में आजम खान समेत उनके परिवार के लोग भी सदस्य बनाए गए। जौहर यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े मामलों को लगातार कवर कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता बताते हैं, ‘2005 में आजम खान ने जौहर ट्रस्ट के अधीन मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी बनाने का फैसला किया। आजम इसे यूपी का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान बनाना चाहते थे। इसे ऐसे देखा जा सकता है कि तब CM रहे मुलायम सिंह यादव पूरी कैबिनेट के साथ 18 सितंबर, 2005 को रामपुर आए और जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई।‘ जौहर यूनिवर्सिटी बननी शुरू हुई, तो इसके साथ विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया। यूनिवर्सिटी बनाने के लिए रामपुर के आलियागंज गांव के 26 किसानों से 35 बीघा जमीन बिना सहमति के औने-पौने दाम देकर खरीद ली गई। ‘ये सब पहले मुलायम सरकार में 2005 से 2007 तक और फिर अखिलेश सरकार में 2012 से 2015 के बीच हुआ। जब लोगों ने विरोध किया तो उन पर यूनिवर्सिटी में सरिया-सीमेंट चोरी और दीवार तोड़ने जैसे झूठे केस लगाकर जेल में डाल दिया गया।‘ 2017 तक यूनिवर्सिटी में बीए, बीएससी, बीटेक, बी फार्मा समेत 25 कोर्स की पढ़ाई शुरू हो गई। इन कोर्सेज के लिए यूनिवर्सिटी में 58 अलग-अलग आलीशान इमारतें बनाई गईं। सपा शासनकाल में श्रम विभाग ने इनकी लागत लगभग 2000 करोड़ बताई थी। 2017 में सपा सरकार जाते जौहर यूनिवर्सिटी के बुरे दिन शुरू हो गए
मार्च 2017 में अखिलेश सरकार की विदाई हो गई। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। BJP की सरकार बनते ही आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के बुरे दिन शुरू हो गए। हालत ये हो गई कि रामपुर में आजम पर दर्ज किए गए 90 मामलों में अकेले 30 जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े केस हैं। यूनिवर्सिटी करीब 1500 बीघे में बनी है। इसके लिए जो जमीनें खरीदी गईं, उसे लेकर आज तक मुकदमेबाजी चल रही है। जौहर यूनिवर्सिटी पर बीते 5 साल से लगातार कार्रवाई हो रही है। इससे कॉलेज के स्टूडेंट्स भी परेशान हैं। आए दिन पुलिस की दखल और जांच एजेंसियों की छापेमारी से उनकी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है। यूनिवर्सिटी में बी फार्मा की पढ़ाई कर रहे मो. आफताब कहते हैं, ‘चांसलर सर (आजम खान) जब तक यूनिवर्सिटी में नहीं थे। यहां कई बार पुलिस आई। कुछ दिनों के लिए यहां का मेडिकल कॉलेज भी बंद कर दिया गया था, जिससे मेडिकल और बी फार्मा वाले स्टूडेंट्स का बहुत नुकसान हुआ।‘ ‘कॉलेज में स्टूडेंट्स के लिए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी था। जहां हम लोग हॉकी सीखते और खेलते थे। अब स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है। वो कब खुलेगा, इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पाता।‘ आजम के ‘हमसफर रिसॉर्ट’ पर आज भी बुलडोजर एक्शन के निशान
जौहर यूनिवर्सिटी से बाहर आकर हम पसियापुर शुमाली गांव पहुंचे। यहीं आजम का आलीशान ‘हमसफर’ रिसॉर्ट है। आजम परिवार का ये रिसॉर्ट कभी बड़े-बड़े नेताओं और विदेशी मेहमानों का वेलकम करता था। मौजूदा वक्त में ये सुनसान पड़ा है। जुलाई 2024 में इस पर रामपुर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की थी, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं। जुलाई 2024 में रामपुर शहर से MLA आकाश सक्सेना ने आजम खान परिवार पर 0.038 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से हमसफर रिसॉर्ट की बाउंड्री वॉल और कमरे बनाने का मुकदमा दर्ज करवाया। इस पर SDM सदर मोनिका सिंह और CO रवि खोखर भारी पुलिस बल के साथ रिसॉर्ट पहुंचे। जांच के बाद खुलासा हुआ कि रिसॉर्ट की बाहरी दीवार और कमरे खाद के गड्ढों के लिए तय सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाए गए थे। रामपुर जिला प्रशासन ने 9 जुलाई 2024 को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हमसफर रिसॉर्ट के अवैध हिस्से को ढहा दिया। रिसॉर्ट के जिस हिस्से पर कार्रवाई हुई, वो लगभग 380 वर्ग मीटर क्षेत्र में था। इसकी कीमत रामपुर में जमीनों के सर्किल रेट के मुताबिक, 45 लाख से 1.5 करोड़ रुपए है। आजम का रामपुर पब्लिक स्कूल वीरान पड़ा, प्रॉपर्टी पर अब सरकार का हक
आजम खान के ट्रस्ट के पास रामपुर में RPS नाम से टोटल 3 स्कूल थे। पहला- जिला कारागार के नजदीक रामपुर पब्लिक स्कूल, दूसरा- तोपखाना रोड पर RPS गर्ल्स विंग और तीसरा- पानदरीबा इलाके में RPS किड्स स्कूल था। ये सभी CBSE बोर्ड से जुड़े थे। फिलहाल किड्स स्कूल को छोड़कर बाकी दोनों स्कूल सील कर दिए गए हैं। बीते 51 साल से रामपुर में काम कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट फजल शाह फजल कहते हैं, ’रामपुर के तोपखाना रोड पर पहले मुर्तजा स्कूल चलता था। सपा सरकार में 2014 के दरमियान इस बिल्डिंग में रामपुर पब्लिक स्कूल खोल दिया गया। उस वक्त डिंपल यादव ने स्कूल का उद्घाटन किया था। आजम खान तब कैबिनेट मंत्री थे, ऐसे में जौहर ट्रस्ट को ये बिल्डिंग 100 रुपए सालाना की दर से 30 साल के लिए लीज पर मिली थी। ’2014 से पहले मुर्तजा स्कूल की बिल्डिंग बहुत जर्जर थी। RPS को इसका हैंडओवर मिलने के बाद आजम खान ने इसकी मरम्मत करवाई। नए कमरे बनवाए। इस काम में करीब 1 करोड़ रुपए का खर्च आया था। नंवबर 2023 में यूपी सरकार ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। जुलाई 2024 में आजम खान के कब्जे से खाली कराए गए RPS में खुर्शीद कन्या इंटर कॉलेज शिफ्ट कर दिया गया। यहां तक कि स्कूल के बगल में बना सपा दफ्तर भी सील कर दिया गया।’ आजम परिवार के RPS गर्ल्स विंग के अलावा रामपुर जिला कारागार के पास जौहर रिसर्च इंस्टीट्यूट में बने रामपुर पब्लिक स्कूल की दूसरी ब्रांच भी जिला प्रशासन ने मार्च 2023 में सील कर दी। दरअसल, सपा सरकार में आजम खान ने जौहर शोध संस्थान के नाम पर ये इमारत 100 रुपए सालाना की लीज पर ली थी। 31 जनवरी 2023 को योगी सरकार ने इसकी लीज खत्म कर दी। सरकार ने आजम खान को परिसर खाली कराने का नोटिस भी जारी किया। तय समय पर स्कूल न खाली कराए जाने पर इसे सील कर दिया गया। बीते 2 साल से ये बिल्डिंग वीरान पड़ी है। सितंबर 2023 में ED ने खुलासा किया कि आजम खान के परिवार ने रामपुर पब्लिक स्कूल में आने वाली फीस के जरिए 2021-22 में 3.51 करोड़ रुपए की इनकम हासिल की। दो साल से ये स्कूल सील है यानी आजम को सीधे-सीधे 7 करोड़ का नुकसान हुआ। आजम के रिश्तेदार बोले- जब हुकूमत ही दलील और वकील, तो जो चाहे वो करे
रामपुर में आजम खान से जुड़ी प्रॉपर्टीज पर हुई कार्रवाई को लेकर हमने उनके करीबी रिश्तेदारों से बात की। आसिम खान उन लोगों में से एक हैं, जो 23 सितंबर को आजम खान को लेने सीतापुर जेल तक गए थे। सपा नेता की प्रॉपर्टीज और उनके स्कूलों पर लगातार हो रही कार्रवाई पर आसिम कहते हैं, ‘जिन इमारतों को सील किया गया, उनमें आजम खान का कोई अजीज नहीं रहता था। न ही उसमें उनके घरवाले रहते थे। उसमें तो बच्चों की तालीम के लिए स्कूल खोले गए थे। आज भी सरकार न जाने कितनों को जमीनें लीज पर दे रही है। ऐसे में आजम खान ही क्यों टारगेट बना दिए गए।‘ ‘आजम खान को लीज पर जो जमीनें दी गईं, उनमें रामपुर के हजारों बच्चे पढ़ते थे। मौजूदा सरकार ने उनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया बल्कि राजनीतिक नफरत की भावना से उन जमीनों को जबरदस्ती छीन लिया। ये तो सरकार का मनमाना रवैया है कि उसने आजम साहब के दफ्तरों को सरकारी बताकर बंद करवा दिया।‘ एक्सपर्ट बोले- जौहर यूनिवर्सिटी की बदनामी आजम का सबसे बड़ा पर्सनल लॉस
सीनियर जर्नलिस्ट फजल शाह फजल बताते हैं, ‘यूपी में सरकार बदलने के बाद आजम ने तकरीबन 50 महीने जेल में बिताए हैं। ये सजा सही थी या नहीं, ये तो अदालत तय करेगी। जेल में रहते हुए आजम का जो सबसे बड़ा पर्सनल नुकसान हुआ, वो कार्रवाइयों के कारण जौहर यूनिवर्सिटी का बदनाम होना था। बाकी व्यक्तिगत तौर पर उनका कोई बड़ा लॉस नजर नहीं आता।‘ ‘रही बात रामपुर पब्लिक स्कूलों की तो RPS-बॉयज वक्फ की बिल्डिंग में चल रहा था। रामपुर गर्ल्स स्कूल एक पुराने प्राइवेट स्कूल की जगह शुरू हुआ। आजम जेल जाने से पहले यतीमखाने में एक प्राइमरी स्कूल खोलना चाहते थे, लेकिन अभी वो बिल्डिंग अधूरी है। उस पर मुकदमे चल रहे हैं और कोर्ट में वो मामला विचाराधीन है।‘ ‘ऐसे में RPS स्कूलों पर कार्रवाई होने से उनको कोई बड़ा झटका नहीं लगा। इसमें दो राय नहीं है कि आजम पर हुई कार्रवाइयां सियासी रंजिश का हिस्सा थीं क्योंकि उन पर हेट स्पीच जैसे केस तो पहले ही चल रहे थे।‘ ‘आजम फैमिली का राजनीतिक रसूख भी दांव पर’
रामपुर के इतिहास और आजम की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘2012 से 2017 तक रामपुर में आजम के नाम का सिक्का चलता था। मुलायम के करीबी होने के नाते उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स सरकार की मदद से भी हासिल किए। वो 9 बार विधायक और 2 बार सांसद भी रहे। दिल्ली से लेकर यूपी की सियासत में उन्होंने बड़ा नाम कमाया, लेकिन 2017 के बाद से वो राजनीतिक तौर पर पिछड़ने लगे।‘ ‘भड़काऊ भाषण के मामले में 2022 में आजम को सजा हुई और उनकी विधायकी चली गई। फिलहाल वो 2028 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में उनका 2027 का चुनाव लड़ना नामुमकिन है। यही हाल आजम के बेटे अब्दुल्ला का भी है। 2023 में अब्दुल्ला की विधायकी चली गई। वो स्वार सीट से विधायक थे। वो भी 2029 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि आर्थिक के साथ-साथ आजम परिवार का राजनीतिक रसूख भी दांव पर है।‘ …………….
ये खबर भी पढ़ें… पिटवाया, घर तोड़ा, गोली चलवाई; अब आजम खान रिहा रामपुर के रहने वाले फैसल लाला का परिवार 19 साल से आजम खान के खिलाफ केस लड़ रहा है। वो दावा करते हैं कि आजम के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें 3 बार झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा गया। बरेली गेट पर उनकी 40 दुकानें तोड़ दी गईं। उनके करीबियों को डराया-धमकाया गया, यहां तक कि उनके घर की बिजली भी काट दी गई। 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा होकर सपा नेता आजम खान रामपुर पहुंचे। आजम की रिहाई के बाद एक तबका डरा-सहमा है। पढ़िए पूरी खबर…
मार्च 2017 में अखिलेश सरकार की विदाई हो गई। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। BJP की सरकार बनते ही आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के बुरे दिन शुरू हो गए। हालत ये हो गई कि रामपुर में आजम पर दर्ज किए गए 90 मामलों में अकेले 30 जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े केस हैं। यूनिवर्सिटी करीब 1500 बीघे में बनी है। इसके लिए जो जमीनें खरीदी गईं, उसे लेकर आज तक मुकदमेबाजी चल रही है। जौहर यूनिवर्सिटी पर बीते 5 साल से लगातार कार्रवाई हो रही है। इससे कॉलेज के स्टूडेंट्स भी परेशान हैं। आए दिन पुलिस की दखल और जांच एजेंसियों की छापेमारी से उनकी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है। यूनिवर्सिटी में बी फार्मा की पढ़ाई कर रहे मो. आफताब कहते हैं, ‘चांसलर सर (आजम खान) जब तक यूनिवर्सिटी में नहीं थे। यहां कई बार पुलिस आई। कुछ दिनों के लिए यहां का मेडिकल कॉलेज भी बंद कर दिया गया था, जिससे मेडिकल और बी फार्मा वाले स्टूडेंट्स का बहुत नुकसान हुआ।‘ ‘कॉलेज में स्टूडेंट्स के लिए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी था। जहां हम लोग हॉकी सीखते और खेलते थे। अब स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है। वो कब खुलेगा, इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पाता।‘ आजम के ‘हमसफर रिसॉर्ट’ पर आज भी बुलडोजर एक्शन के निशान
जौहर यूनिवर्सिटी से बाहर आकर हम पसियापुर शुमाली गांव पहुंचे। यहीं आजम का आलीशान ‘हमसफर’ रिसॉर्ट है। आजम परिवार का ये रिसॉर्ट कभी बड़े-बड़े नेताओं और विदेशी मेहमानों का वेलकम करता था। मौजूदा वक्त में ये सुनसान पड़ा है। जुलाई 2024 में इस पर रामपुर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की थी, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं। जुलाई 2024 में रामपुर शहर से MLA आकाश सक्सेना ने आजम खान परिवार पर 0.038 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से हमसफर रिसॉर्ट की बाउंड्री वॉल और कमरे बनाने का मुकदमा दर्ज करवाया। इस पर SDM सदर मोनिका सिंह और CO रवि खोखर भारी पुलिस बल के साथ रिसॉर्ट पहुंचे। जांच के बाद खुलासा हुआ कि रिसॉर्ट की बाहरी दीवार और कमरे खाद के गड्ढों के लिए तय सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाए गए थे। रामपुर जिला प्रशासन ने 9 जुलाई 2024 को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हमसफर रिसॉर्ट के अवैध हिस्से को ढहा दिया। रिसॉर्ट के जिस हिस्से पर कार्रवाई हुई, वो लगभग 380 वर्ग मीटर क्षेत्र में था। इसकी कीमत रामपुर में जमीनों के सर्किल रेट के मुताबिक, 45 लाख से 1.5 करोड़ रुपए है। आजम का रामपुर पब्लिक स्कूल वीरान पड़ा, प्रॉपर्टी पर अब सरकार का हक
आजम खान के ट्रस्ट के पास रामपुर में RPS नाम से टोटल 3 स्कूल थे। पहला- जिला कारागार के नजदीक रामपुर पब्लिक स्कूल, दूसरा- तोपखाना रोड पर RPS गर्ल्स विंग और तीसरा- पानदरीबा इलाके में RPS किड्स स्कूल था। ये सभी CBSE बोर्ड से जुड़े थे। फिलहाल किड्स स्कूल को छोड़कर बाकी दोनों स्कूल सील कर दिए गए हैं। बीते 51 साल से रामपुर में काम कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट फजल शाह फजल कहते हैं, ’रामपुर के तोपखाना रोड पर पहले मुर्तजा स्कूल चलता था। सपा सरकार में 2014 के दरमियान इस बिल्डिंग में रामपुर पब्लिक स्कूल खोल दिया गया। उस वक्त डिंपल यादव ने स्कूल का उद्घाटन किया था। आजम खान तब कैबिनेट मंत्री थे, ऐसे में जौहर ट्रस्ट को ये बिल्डिंग 100 रुपए सालाना की दर से 30 साल के लिए लीज पर मिली थी। ’2014 से पहले मुर्तजा स्कूल की बिल्डिंग बहुत जर्जर थी। RPS को इसका हैंडओवर मिलने के बाद आजम खान ने इसकी मरम्मत करवाई। नए कमरे बनवाए। इस काम में करीब 1 करोड़ रुपए का खर्च आया था। नंवबर 2023 में यूपी सरकार ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। जुलाई 2024 में आजम खान के कब्जे से खाली कराए गए RPS में खुर्शीद कन्या इंटर कॉलेज शिफ्ट कर दिया गया। यहां तक कि स्कूल के बगल में बना सपा दफ्तर भी सील कर दिया गया।’ आजम परिवार के RPS गर्ल्स विंग के अलावा रामपुर जिला कारागार के पास जौहर रिसर्च इंस्टीट्यूट में बने रामपुर पब्लिक स्कूल की दूसरी ब्रांच भी जिला प्रशासन ने मार्च 2023 में सील कर दी। दरअसल, सपा सरकार में आजम खान ने जौहर शोध संस्थान के नाम पर ये इमारत 100 रुपए सालाना की लीज पर ली थी। 31 जनवरी 2023 को योगी सरकार ने इसकी लीज खत्म कर दी। सरकार ने आजम खान को परिसर खाली कराने का नोटिस भी जारी किया। तय समय पर स्कूल न खाली कराए जाने पर इसे सील कर दिया गया। बीते 2 साल से ये बिल्डिंग वीरान पड़ी है। सितंबर 2023 में ED ने खुलासा किया कि आजम खान के परिवार ने रामपुर पब्लिक स्कूल में आने वाली फीस के जरिए 2021-22 में 3.51 करोड़ रुपए की इनकम हासिल की। दो साल से ये स्कूल सील है यानी आजम को सीधे-सीधे 7 करोड़ का नुकसान हुआ। आजम के रिश्तेदार बोले- जब हुकूमत ही दलील और वकील, तो जो चाहे वो करे
रामपुर में आजम खान से जुड़ी प्रॉपर्टीज पर हुई कार्रवाई को लेकर हमने उनके करीबी रिश्तेदारों से बात की। आसिम खान उन लोगों में से एक हैं, जो 23 सितंबर को आजम खान को लेने सीतापुर जेल तक गए थे। सपा नेता की प्रॉपर्टीज और उनके स्कूलों पर लगातार हो रही कार्रवाई पर आसिम कहते हैं, ‘जिन इमारतों को सील किया गया, उनमें आजम खान का कोई अजीज नहीं रहता था। न ही उसमें उनके घरवाले रहते थे। उसमें तो बच्चों की तालीम के लिए स्कूल खोले गए थे। आज भी सरकार न जाने कितनों को जमीनें लीज पर दे रही है। ऐसे में आजम खान ही क्यों टारगेट बना दिए गए।‘ ‘आजम खान को लीज पर जो जमीनें दी गईं, उनमें रामपुर के हजारों बच्चे पढ़ते थे। मौजूदा सरकार ने उनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया बल्कि राजनीतिक नफरत की भावना से उन जमीनों को जबरदस्ती छीन लिया। ये तो सरकार का मनमाना रवैया है कि उसने आजम साहब के दफ्तरों को सरकारी बताकर बंद करवा दिया।‘ एक्सपर्ट बोले- जौहर यूनिवर्सिटी की बदनामी आजम का सबसे बड़ा पर्सनल लॉस
सीनियर जर्नलिस्ट फजल शाह फजल बताते हैं, ‘यूपी में सरकार बदलने के बाद आजम ने तकरीबन 50 महीने जेल में बिताए हैं। ये सजा सही थी या नहीं, ये तो अदालत तय करेगी। जेल में रहते हुए आजम का जो सबसे बड़ा पर्सनल नुकसान हुआ, वो कार्रवाइयों के कारण जौहर यूनिवर्सिटी का बदनाम होना था। बाकी व्यक्तिगत तौर पर उनका कोई बड़ा लॉस नजर नहीं आता।‘ ‘रही बात रामपुर पब्लिक स्कूलों की तो RPS-बॉयज वक्फ की बिल्डिंग में चल रहा था। रामपुर गर्ल्स स्कूल एक पुराने प्राइवेट स्कूल की जगह शुरू हुआ। आजम जेल जाने से पहले यतीमखाने में एक प्राइमरी स्कूल खोलना चाहते थे, लेकिन अभी वो बिल्डिंग अधूरी है। उस पर मुकदमे चल रहे हैं और कोर्ट में वो मामला विचाराधीन है।‘ ‘ऐसे में RPS स्कूलों पर कार्रवाई होने से उनको कोई बड़ा झटका नहीं लगा। इसमें दो राय नहीं है कि आजम पर हुई कार्रवाइयां सियासी रंजिश का हिस्सा थीं क्योंकि उन पर हेट स्पीच जैसे केस तो पहले ही चल रहे थे।‘ ‘आजम फैमिली का राजनीतिक रसूख भी दांव पर’
रामपुर के इतिहास और आजम की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘2012 से 2017 तक रामपुर में आजम के नाम का सिक्का चलता था। मुलायम के करीबी होने के नाते उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स सरकार की मदद से भी हासिल किए। वो 9 बार विधायक और 2 बार सांसद भी रहे। दिल्ली से लेकर यूपी की सियासत में उन्होंने बड़ा नाम कमाया, लेकिन 2017 के बाद से वो राजनीतिक तौर पर पिछड़ने लगे।‘ ‘भड़काऊ भाषण के मामले में 2022 में आजम को सजा हुई और उनकी विधायकी चली गई। फिलहाल वो 2028 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में उनका 2027 का चुनाव लड़ना नामुमकिन है। यही हाल आजम के बेटे अब्दुल्ला का भी है। 2023 में अब्दुल्ला की विधायकी चली गई। वो स्वार सीट से विधायक थे। वो भी 2029 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि आर्थिक के साथ-साथ आजम परिवार का राजनीतिक रसूख भी दांव पर है।‘ …………….
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