सांसद चंद्रशेखर ने गुरुवार को मेरठ में कहा- सपा सांसद इकरा हसन मेरी मासूम छोटी बहन हैं। मैं उसके साथ खड़ा हूं। उसके खिलाफ जो बयानबाजी हुई है, वह गलत है। दरअसल, इकरा हसन बुधवार को सहारनपुर में भावुक हो उठी थीं। उन्होंने भाजपा के पूर्व सांसद प्रदीप कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। इकरा ने कहा था कि उन्हें मुल्ली और आतंकी कहा गया। पिता और भाई को गालियां दी गईं। चंद्रशेखर आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में बोल रहे थे। इस दौरान चंद्रशेखर ने गैंगस्टर बदर अली और उनके करीब 2 हजार मुस्लिम कार्यकर्ताओं को आजाद समाज पार्टी जॉइन कराई। बदर अली के खिलाफ गैंगस्टर समेत 22 मुकदमे दर्ज हैं। 2019 में बदर अली ने बिना अनुमति जुलूस निकाला था, दंगा होते-होते बचा था। बदर अली का अस्पताल प्रशासन ने ध्वस्त किया था। अब चंद्रशेखर की बड़ी बातें जानिए… इससे पहले कार्यकर्ताओं ने चंद्रशेखर आजाद को नीली पगड़ी पहनाई और केतली भेंट की। गुर्जर महापंचायत के दौरान जेल के रविंद्र भाटी ने सांसद को सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा भेंट की। सम्मेलन में एक 80 साल के बुजुर्ग महर्षि वाल्मीकि की फोटो लेकर आए थे। चंद्रशेखर ने उन्हें मंच पर बुलाकर अपने बगल में बिठाया। 3 तस्वीरें देखिए… बसपा के समीकरण में सेंधमारी
पश्चिमी यूपी में बसपा की जीत का सबसे बड़ा गणित दलित और मुस्लिम गठजोड़ का समीकरण रहा है। आजाद समाज पार्टी बसपा के इसी पुराने समीकरण को फॉलो कर उसे अपनी जीत का आधार बनाना चाहती है। आसपा भी मायावती के रास्ते पर चलते हुए दलित, मुस्लिम वोटों का गठजोड़ करने की जुगत में है। चंद्रशेखर और आसपा नेताओं का मानना है कि दलितों का यूथ वोट उनके साथ है। अब मुस्लिम युवाओं को पार्टी अपने साथ जोड़ना चाहती है। जो नए युवा वोटर हैं उनका वोट हासिल कर मुसलमानों को अपनों साथ लाए। इसलिए आजाद समाज पार्टी का फोकस मुस्लिम युवा वोटर हैं। पार्टी मुसलमानों ने युवा नेताओं को जोड़कर चल रही है। इसके तहत ही मेरठ में मुस्लिम युवाओं को ज्वाइनिंग कराई जा रही है। जो पार्टी को नई धार दें। पश्चिमी यूपी के पुराने चुनावों में बसपा की जीत के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो हमेशा मुस्लिम, दलित का समीकरण सफल रहा है। टिकट की कतार में बदर अली
बदर अली काफी समय से बिरादरी के कामों में सक्रिय है। दूसरी पार्टियों में अपनी किस्मत आजमा चुके बदर 2027 का विधायकी चुनाव लड़ना चाहते हैं। सपा, बसपा सहित अन्य दलों में टिकटों की संभावना नहीं है, ऐसे में अपने पॉलिटिकल करियर को धार देने के लिए बदर ने आसपा को चुना है। कार्यक्रम से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
पश्चिमी यूपी में बसपा की जीत का सबसे बड़ा गणित दलित और मुस्लिम गठजोड़ का समीकरण रहा है। आजाद समाज पार्टी बसपा के इसी पुराने समीकरण को फॉलो कर उसे अपनी जीत का आधार बनाना चाहती है। आसपा भी मायावती के रास्ते पर चलते हुए दलित, मुस्लिम वोटों का गठजोड़ करने की जुगत में है। चंद्रशेखर और आसपा नेताओं का मानना है कि दलितों का यूथ वोट उनके साथ है। अब मुस्लिम युवाओं को पार्टी अपने साथ जोड़ना चाहती है। जो नए युवा वोटर हैं उनका वोट हासिल कर मुसलमानों को अपनों साथ लाए। इसलिए आजाद समाज पार्टी का फोकस मुस्लिम युवा वोटर हैं। पार्टी मुसलमानों ने युवा नेताओं को जोड़कर चल रही है। इसके तहत ही मेरठ में मुस्लिम युवाओं को ज्वाइनिंग कराई जा रही है। जो पार्टी को नई धार दें। पश्चिमी यूपी के पुराने चुनावों में बसपा की जीत के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो हमेशा मुस्लिम, दलित का समीकरण सफल रहा है। टिकट की कतार में बदर अली
बदर अली काफी समय से बिरादरी के कामों में सक्रिय है। दूसरी पार्टियों में अपनी किस्मत आजमा चुके बदर 2027 का विधायकी चुनाव लड़ना चाहते हैं। सपा, बसपा सहित अन्य दलों में टिकटों की संभावना नहीं है, ऐसे में अपने पॉलिटिकल करियर को धार देने के लिए बदर ने आसपा को चुना है। कार्यक्रम से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…