यूपी के शाहजहांपुर में 23 अक्टूबर को चाइनीज मांझे से गला कटने से एक युवक की मौत हो गई। भाईदूज पर वह पत्नी के साथ बाइक से ससुराल जा रहा था। रास्ते में चाइनीज मांझे से गला कट गया। दोनों सड़क पर गिर गए। युवक खून से लथपथ हो गया। सड़क पर तड़पता रहा। फिर कुछ देर बाद बेसुध हो गया। पत्नी, पति की बचाने के लिए चीखती रही। चाइनीज मांझा कैसे बनता है? यह क्यों खतरनाक है? लोग चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाना क्यों पसंद करते हैं? चाइनीज मांझा बेचने या खरीदने को लेकर क्या नियम हैं? भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए सारे सवालों के जवाब… पहले पढ़िए ये दो केस पुलिस की तरफ से अनऑफिशियल मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल यूपी में अब तक 24 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें चाइनीज मांझे से दुर्घटनाग्रस्त होकर पीड़ित की या तो मौत हो गई या फिर उसे लंबे समय तक भर्ती रहकर जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ा। सवाल: लोग चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाना क्यों पसंद करते हैं?
जवाब: पतंग उड़ाने के शौकीन लोग इसे मुकाबले की तरह लेते हैं। कुछ राज्यों में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। इसमें ज्यादा-से-ज्यादा दूसरों की पतंग काटने की होड़ होती है। सूत का मांझा कमजोर होता है। वह इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। जबकि चाइनीज मांझा बहुत मजबूत होता है, जो आसानी से नहीं टूटता। यही वजह है, चाइनीज मांझा पतंग उड़ाने के लिए लोगों की पहली पसंद है। इसके अलावा सामान्य मांझे की अपेक्षा यह सस्ता होता है। इसलिए लोग बैन होने के बाद भी इसे चोरी-छिपे खरीदते हैं। सवाल: यूपी में ये कब से बैन है?
जवाब: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2017 में देश भर में नायलॉन या चाइनीज मांझे की खरीद, बिक्री, स्टोरेज और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई थी। रिटायर्ड IPS, राजेश पांडेय का कहना है कि NGT के बैन के बाद से ही यूपी में भी चाइनीज मांझा बैन है। इसके बावजूद बहुत से लोग इसे खरीदते-बेचते हैं। इस वजह से अक्सर हादसे होते हैं। सवाल: चाइनीज मांझा क्यों खतरनाक है?
जवाब: यह सामान्य मांझे की तुलना में कई गुना धारदार होता है। यह आसानी से टूटता नहीं और सामान्य मांझे से कई गुना तीखा होता है। इसकी वजह से पतंगबाजों की पतंगें आसानी से कट जाती हैं। लेकिन, इंसानों या जानवरों के हाथ-पैर पर लगने पर गंभीर चोटें आ सकती हैं। यह मांझा अक्सर गर्दन या हाथ पर लगने पर घाव कर सकता है। गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। अगर यह बिजली के तारों से टकरा जाए, तो करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल: चाइनीज मांझा कैसे बनता है?
जवाब: चीनी मांझा दरअसल चीन से नहीं आता। इसे प्लास्टिक मांझा भी कहा जाता है। चाइनीज मांझा सामान्य मांझे की तरह केवल धागों से नहीं बनाया जाता। इसे नायलॉन और मेटेलिक पाउडर से तैयार करते हैं। इसके बाद इस मांझे पर कांच या लोहे के चूरे से धार भी लगाई जाती है। जिससे ये मांझा और भी घातक हो जाता है। ये साधारण मांझे से काफी अलग होता है। जब इस मांझे से पतंग उड़ाई जाती है, तो इसमें कुछ अलग कंपन पैदा होता है। सवाल: चाइनीज मांझा बनाने-बेचने पर कितनी सजा का प्रावधान है?
जवाब: मांझा बनाने-बेचने और इससे पतंग उड़ाने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत 5 साल तक की सजा और 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसे मामलों में कई बार जमानत भी नहीं मिलती। कुछ मामलों में इसे बेचने वालों की दुकान को भी सील कर दिया जाता है। अगर वह मांझा किसी की मौत का कारण बना, तो सजा और गंभीर हो सकती है। सवाल: अब तक क्या कार्रवाई हुईं? कितने छापे और गिरफ्तारियां हुईं?
जवाब: वाराणसी, बरेली और मेरठ में चाइनीज मांझे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। वाराणसी में अक्सर कई मामले सामने आते रहते हैं। बीच-बीच में पुलिस भी भारी मात्रा में मांझा बरामद करती रहती है। जनवरी में वाराणसी पुलिस ने 1.5 करोड़ का मांझा बरामद किया था। ये पुलिस की बड़ी कार्रवाई थी। हालांकि चाइनीज मांझा बनाने-बेचने को लेकर प्रदेशभर में कितनी गिरफ्तारियां हुईं, इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह बताते हैं कि बैन के बावजूद चीनी मांझा की बिक्री और उपलब्धता गंभीर सवाल खड़े कर रही है। चिंता इस बात की है कि भारत सरकार के स्तर पर भी इसमें उचित नियंत्रण नहीं हो रहा। सवाल: कागजों में प्रतिबंधित, पुलिस-प्रशासन क्यों नहीं रोक पा रहा?
जवाब: चाइनीज मांझा बरेली, मेरठ, दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से छोटे शहरों तक पहुंचता है। दुकानदार इसे छुपाकर बेचते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने इसे और आसान कर दिया है। लखनऊ हाईकोर्ट के वकील नीरज श्रीवास्तव बताते हैं- असलियत यह है कि पुलिस और प्रशासन की छापेमारी महज औपचारिकता बनकर रह गई है। दुकानों पर दबिश पड़ती है, लेकिन असली खतरनाक मांझा पहले ही हटा दिया जाता है। दुकानदार केवल उन्हीं ग्राहकों को मांझा बेचते हैं, जिनसे उनकी सेटिंग रहती है। नए ग्राहकों को साफ मना कर देते हैं। यही वजह है कि बैन होने के बाद भी धड़ल्ले से चाइनीज मांझा बिक रहा है और लोगों की जान जा रही है। इस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए गंभीरता से विचार करना चाहिए। सवाल: किन-किन राज्यों में चाइनीज मांझा बैन है?
जवाब: भारत में चीनी मांझा की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से मानव और पशु सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। दिल्ली में भी 2017 से चीनी मांझे पर बैन है। उसके बावजूद भी धड़ल्ले से बिक्री होती है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पूर्व DGP के बेटे को जो बीमारी, वो कितनी खतरनाक, हाथरस में 11 साल के लड़के के मर्डर की वजह यही यूपी में सहारनपुर के रहने वाले पंजाब के पूर्व DGP मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील की 16 अक्टूबर की देर रात पंचकुला में मौत हो गई। तब परिवार ने कहा था- दवाओं के ओवरडोज से मौत हुई। मौत के दो दिन बाद बेटे का वीडियो सामने आया, जिसमें उसने कहा कि मेरी पत्नी मेरी नहीं है, मेरे डैडी की है। अब पूर्व DGP मोहम्मद मुस्तफा का कहना है कि मेरे बेटे अकील को करीब 18 साल से साइकोटिक डिसऑर्डर था। वो नशा भी करता था। 2007 में उसकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी। पढ़िए पूरी खबर…
जवाब: पतंग उड़ाने के शौकीन लोग इसे मुकाबले की तरह लेते हैं। कुछ राज्यों में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। इसमें ज्यादा-से-ज्यादा दूसरों की पतंग काटने की होड़ होती है। सूत का मांझा कमजोर होता है। वह इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। जबकि चाइनीज मांझा बहुत मजबूत होता है, जो आसानी से नहीं टूटता। यही वजह है, चाइनीज मांझा पतंग उड़ाने के लिए लोगों की पहली पसंद है। इसके अलावा सामान्य मांझे की अपेक्षा यह सस्ता होता है। इसलिए लोग बैन होने के बाद भी इसे चोरी-छिपे खरीदते हैं। सवाल: यूपी में ये कब से बैन है?
जवाब: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2017 में देश भर में नायलॉन या चाइनीज मांझे की खरीद, बिक्री, स्टोरेज और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई थी। रिटायर्ड IPS, राजेश पांडेय का कहना है कि NGT के बैन के बाद से ही यूपी में भी चाइनीज मांझा बैन है। इसके बावजूद बहुत से लोग इसे खरीदते-बेचते हैं। इस वजह से अक्सर हादसे होते हैं। सवाल: चाइनीज मांझा क्यों खतरनाक है?
जवाब: यह सामान्य मांझे की तुलना में कई गुना धारदार होता है। यह आसानी से टूटता नहीं और सामान्य मांझे से कई गुना तीखा होता है। इसकी वजह से पतंगबाजों की पतंगें आसानी से कट जाती हैं। लेकिन, इंसानों या जानवरों के हाथ-पैर पर लगने पर गंभीर चोटें आ सकती हैं। यह मांझा अक्सर गर्दन या हाथ पर लगने पर घाव कर सकता है। गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। अगर यह बिजली के तारों से टकरा जाए, तो करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल: चाइनीज मांझा कैसे बनता है?
जवाब: चीनी मांझा दरअसल चीन से नहीं आता। इसे प्लास्टिक मांझा भी कहा जाता है। चाइनीज मांझा सामान्य मांझे की तरह केवल धागों से नहीं बनाया जाता। इसे नायलॉन और मेटेलिक पाउडर से तैयार करते हैं। इसके बाद इस मांझे पर कांच या लोहे के चूरे से धार भी लगाई जाती है। जिससे ये मांझा और भी घातक हो जाता है। ये साधारण मांझे से काफी अलग होता है। जब इस मांझे से पतंग उड़ाई जाती है, तो इसमें कुछ अलग कंपन पैदा होता है। सवाल: चाइनीज मांझा बनाने-बेचने पर कितनी सजा का प्रावधान है?
जवाब: मांझा बनाने-बेचने और इससे पतंग उड़ाने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत 5 साल तक की सजा और 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसे मामलों में कई बार जमानत भी नहीं मिलती। कुछ मामलों में इसे बेचने वालों की दुकान को भी सील कर दिया जाता है। अगर वह मांझा किसी की मौत का कारण बना, तो सजा और गंभीर हो सकती है। सवाल: अब तक क्या कार्रवाई हुईं? कितने छापे और गिरफ्तारियां हुईं?
जवाब: वाराणसी, बरेली और मेरठ में चाइनीज मांझे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। वाराणसी में अक्सर कई मामले सामने आते रहते हैं। बीच-बीच में पुलिस भी भारी मात्रा में मांझा बरामद करती रहती है। जनवरी में वाराणसी पुलिस ने 1.5 करोड़ का मांझा बरामद किया था। ये पुलिस की बड़ी कार्रवाई थी। हालांकि चाइनीज मांझा बनाने-बेचने को लेकर प्रदेशभर में कितनी गिरफ्तारियां हुईं, इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह बताते हैं कि बैन के बावजूद चीनी मांझा की बिक्री और उपलब्धता गंभीर सवाल खड़े कर रही है। चिंता इस बात की है कि भारत सरकार के स्तर पर भी इसमें उचित नियंत्रण नहीं हो रहा। सवाल: कागजों में प्रतिबंधित, पुलिस-प्रशासन क्यों नहीं रोक पा रहा?
जवाब: चाइनीज मांझा बरेली, मेरठ, दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से छोटे शहरों तक पहुंचता है। दुकानदार इसे छुपाकर बेचते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने इसे और आसान कर दिया है। लखनऊ हाईकोर्ट के वकील नीरज श्रीवास्तव बताते हैं- असलियत यह है कि पुलिस और प्रशासन की छापेमारी महज औपचारिकता बनकर रह गई है। दुकानों पर दबिश पड़ती है, लेकिन असली खतरनाक मांझा पहले ही हटा दिया जाता है। दुकानदार केवल उन्हीं ग्राहकों को मांझा बेचते हैं, जिनसे उनकी सेटिंग रहती है। नए ग्राहकों को साफ मना कर देते हैं। यही वजह है कि बैन होने के बाद भी धड़ल्ले से चाइनीज मांझा बिक रहा है और लोगों की जान जा रही है। इस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए गंभीरता से विचार करना चाहिए। सवाल: किन-किन राज्यों में चाइनीज मांझा बैन है?
जवाब: भारत में चीनी मांझा की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से मानव और पशु सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। दिल्ली में भी 2017 से चीनी मांझे पर बैन है। उसके बावजूद भी धड़ल्ले से बिक्री होती है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पूर्व DGP के बेटे को जो बीमारी, वो कितनी खतरनाक, हाथरस में 11 साल के लड़के के मर्डर की वजह यही यूपी में सहारनपुर के रहने वाले पंजाब के पूर्व DGP मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील की 16 अक्टूबर की देर रात पंचकुला में मौत हो गई। तब परिवार ने कहा था- दवाओं के ओवरडोज से मौत हुई। मौत के दो दिन बाद बेटे का वीडियो सामने आया, जिसमें उसने कहा कि मेरी पत्नी मेरी नहीं है, मेरे डैडी की है। अब पूर्व DGP मोहम्मद मुस्तफा का कहना है कि मेरे बेटे अकील को करीब 18 साल से साइकोटिक डिसऑर्डर था। वो नशा भी करता था। 2007 में उसकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी। पढ़िए पूरी खबर…