यूपी पुलिस ढूंढ रही अलीगढ़ का ‘लापता’ इंस्पेक्टर:50 हजार इनाम के पोस्टर लगे; मां बोलीं- बेटे को पुलिस वाले ही ले गए

यूपी पुलिस का इंस्पेक्टर 83 दिन से ‘लापता’ है। अलीगढ़ से लेकर गाजियाबाद तक पुलिस सर्च ऑपरेशन चला रही है। आखिरी बार इंस्पेक्टर अनुज को उस वक्त देखा गया, जब 17 सितंबर को उनके घर पर अलीगढ़ के CO सेकेंड की टीम पहुंची थी। इंस्पेक्टर की मां ने आरोप लगाए- महुआखेड़ा थाने की पुलिस घर से बेटे अनुज को अपने साथ ले गई। तब से वह घर वापस नहीं लौटा। थाने, चौकी पर बेटे की गुमशुदगी तक नहीं लिखी गई। DIG, SSP यहीं कहते रहे कि आपके बेटे को ढूंढ रहे हैं। हाईकोर्ट ने अलीगढ़ SSP को तलब किया, तब शहर में पोस्टर चस्पा हुए। 50 हजार का इनाम रखा गया। हमें अलीगढ़ पुलिस पर भरोसा नहीं। इस मामले की जांच हाथरस जिले के सिकंदराराऊ CO को सौंपी गई है। उन्होंने गाजियाबाद में पूछताछ की। अब यूपी के सभी थानों को इंस्पेक्टर अनुज की डिटेल शेयर की गई हैं। 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। इंस्पेक्टर के अचानक गायब होने के पीछे क्या कारण हैं? परिवार के क्या आरोप हैं? पुलिस की जांच में क्या-क्या फैक्ट सामने आए? पढ़िए रिपोर्ट… इंस्पेक्टर अनुज अलीगढ़ के महुआखेड़ा इलाके की प्रभातनगर कॉलोनी में पत्नी मनीता के साथ रहते थे। उनकी तैनाती अलीगढ़ पुलिस लाइन में थी। हम उनके घर पर पहुंचे, यहां ताला बंद था। पड़ोसियों ने बिना कैमरे पर आए, हमें बताया- 17 सितंबर की रात को ही आखिरी बार इंस्पेक्टर को देखा गया था, जब उनके घर पुलिस आई थी। यहां बातचीत के बाद जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत इंस्पेक्टर के गायब से 4 दिन पहले शुरू हुई थी। जब पति और पत्नी के बीच घर में झगड़ा हुआ था। अब डेट-वार पूरा घटनाक्रम पढ़िए… 13 सितंबर: झगड़े के बाद पत्नी ने पुलिस बुलाई 13 सितंबर की रात इंस्पेक्टर अनुज का अपनी पत्नी मनीता से झगड़ा हुआ था। पत्नी ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस बुला ली। दरोगा बृजेंद्र सिंह उनके घर पहुंचे। उनके मुताबिक, अनुज ने शराब पी रखी थी। उन्हें घर से बाहर आने को कहा गया। मगर, उन्होंने मना कर दिया। खिड़की पर खड़े होकर ही बात की थी। अनुज की तैनाती अलीगढ़ की पुलिस लाइन में थी। बाद में उनकी पत्नी मनीता ने SSP अलीगढ़ से शिकायत की। इसकी जांच CO द्वितीय कमलेश कुमार को सौंपी गई। CO ने अनुज को बयान के लिए बुलाया, मगर वह नहीं आए। इस दौरान पत्नी अपने मायके चली गईं, जोकि सहारनपुर के लखनौटी थाना के गांव पनाहपुर में है। 15 सितंबर: अधिकारियों से अभद्रता की मेरठ PAC की 44 बटालियन में तैनात इंस्पेक्टर अनुज के मामा सुशील कुमार कहते हैं- मुझे जितने फैक्ट पता चले, उसके मुताबिक जांच और बयान के दबाव में 15 सितंबर को अनुज ने डिपार्टमेंट के अधिकारियों से अभद्रता कर दी थी। पुलिस विभाग के सोर्स कहते हैं- इंस्पेक्टर अनुज ने अधिकारी से कह दिया कि पुलिस लाइन में सुबह की गणना से छूट मिलनी चाहिए। अगर ऐसा करते हैं, तो मैं आपके (सीओ) सामने पेश हो जाऊंगा। हालांकि, इंस्पेक्टर की तरफ से रखी गई इस कंडिशन की पुष्टि अधिकारियों ने नहीं की। 17 सितंबर: पुलिस अनुज को साथ ले गई
परिवार के मुताबिक, पुलिस 17 सितंबर की रात दोबारा अनुज के घर पहुंची। पुलिस वालों ने पहले ही अनुज का मोबाइल छीन लिया। फिर पुलिस वाले बाहर आ गए। जब अनुज ने मोबाइल वापस मांगा तो कहा गया कि गाड़ी में है, नीचे आकर ले लो। नीचे आने पर थोड़ी बातचीत हुई और पुलिस उन्हें साथ लेकर चली गई। इसके बाद से वह ‘लापता’ हैं। इस दौरान के VIDEO पड़ोसियों ने बना लिए थे। 19 सितंबर: इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया
मामा सुशील कुमार कहते हैं- 21 सितंबर को गाजियाबाद स्थित घर पर एक सिपाही निलंबन आदेश लेकर पहुंचा था। इसमें उच्च अधिकारियों से अभद्रता का जिक्र था। परिजनों ने कहा कि जो कागज उन्हें दिए गए, उनमें इंस्पेक्टर को 13 सितंबर से गैरहाजिर दर्ज कर दिया गया। 19 सितंबर से सस्पेंड दिखाया गया, जबकि 17 सितंबर से वह पुलिस के ले जाने के बाद से लापता हैं। इसके बाद अनुज की मां सुशीला देवी ने फोन किया तो स्विच ऑफ बता रहा था। परिजन जब अलीगढ़ आए तो अपार्टमेंट के लोगों ने बताया कि 17 तारीख को पुलिस उन्हें ले गई थी, तब से नहीं लौटे। अब मां की बात मेरी गुमशुदगी तक दर्ज नहीं की, नहीं पता बेटा किस हाल में है…
अनुज की मां सुशील देवी पहले चौकी और उसके बाद महुआखेड़ा थाने पहुंचीं। यहां पर पुलिस वालों ने उनसे कहा कि आपको सीओ द्वितीय कमलेश के ऑफिस में जाना चाहिए। जब वह सीओ द्वितीय के पास पहुंचीं, तो ऑफिस में बैठे पुलिस वालों ने कहा कि आपको SSP से मिलना चाहिए। सुशील कुमार ने बताया कि पूरा घटनाक्रम SSP संजीव सुमन के समय हुआ था, लेकिन उनका ट्रांसफर हो गया था। 26 सितंबर को हम लोग नए SSP नीरज कुमार जादौन से मिले। मां कहती हैं- इतने दिन हो गए, नहीं पता मेरा बेटा किस हाल में है। SSP ने कहा- लापता इंस्पेक्टर को हम खोज लेंगे। आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके बाद परिवार के लोग घर लौट आए। मगर, अनुज का कुछ पता नहीं चला। इसके बाद मां सुशीला देवी DIG प्रभाकर चौधरी से मिलीं। फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर भेजे। कोर्ट में प्रमुख सचिव, पुलिस कमिश्नर और SSP आरोपी एक महीना गुजरने के बाद सुशीला देवी ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस दायर की। इसमें 2 आरोप लगाए गए- इसमें प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस कमिश्नर (गाजियाबाद), एसएसपी अलीगढ़, थानाध्यक्ष महुआखेड़ा को आरोपी बनाया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले को सुना। फिर इंस्पेक्टर को अवैध तरीके से घर से लेकर जाने के मामले को गंभीर माना। SSP अलीगढ़ को तलब कर लिया। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अलीगढ़ पुलिस ने 18 अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज की। पुलिस ने CM हेल्पलाइन पर जनसुनवाई प्रार्थनापत्र के जवाब में यह जानकारी दी। अब मामा के आरोप 3 पॉइंट में समझिए… 1. 14 अक्टूबर को पुलिस ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से अनुज की पत्नी को प्रभातनगर स्थित उसके मकान पर बुलाया। 2. अनुज के मोबाइल पुलिस के पास ही थे, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंचने के कारण उन्होंने कमरे में मोबाइल रखवाए और अनुज की पत्नी से ही बरामद दिखा दिए। 3. अनुज की कार से ही उसकी पत्नी को मायके भेजा गया। लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया और पुलिस की लगातार मौजूदगी पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट के दबाव में 50 हजार का इनाम रखा
भाई अमित कुमार पेशे से शिक्षक हैं। वह कहते हैं- मेरा भाई अनुज 17 सितंबर से ही लापता था, उनको 19 सितंबर को सस्पेंड किया गया। अब 4 नवंबर को उसी लापता इंस्पेक्टर को बहाल कर दिया गया है। हाईकोर्ट में 10 दिसंबर सुनवाई तय हुई तो पुलिस ने 25 नवंबर को लापता पोस्टर चिपकाए, 50 हजार इनाम की घोषणा की। जांच अफसर ने गाजियाबाद में लाशों की तस्वीर दिखाई
मामले की जांच हाथरस जिले के सीओ सिकंदराराऊ जेएस अस्थाना कर रहे हैं। वह 3 दिसंबर को गाजियाबाद पहुंचे, जहां सुशीला देवी से बयान दर्ज किए। परिजन ने कहा कि हमें उम्मीद नहीं कि अलीगढ़ पुलिस से हमें न्याय मिल सकेगा। 4 दिसंबर को बन्नादेवी थाने के पुलिसकर्मी पहुंचे और लावारिश शवों के फोटो दिखाने लगे। अमित कुमार और सुशील कुमार ने अनुज कुमार के साथ अनहोनी की आशंका जाहिर की। उनका कहना है कि लावारिश शवों फोटो दिखाने पर पुलिस की भूमिका पर संदेह हो रहा है। वैसे ही वह इंस्पेक्टर हैं, पुलिस को उनके बारे में पता न हो यह संभव नहीं है। मामला छुपाया जा रहा है। इस मामले में CO सिकंदराराऊ का कहना है- अनुज की मां और परिजन के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा अलीगढ़ कंट्रोल रूप से लावारिश शवों की जानकारी भी मांगी गई थी। इस मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामला स्पष्ट हो सकेगा। ………………… ये भी पढ़ें – राजनाथ सिंह बोले- वंदे मातरम् का उत्सव दिखावे का नहीं:अखिलेश ने कहा- हम बच्चों को पढ़ाते हैं, तो मुकदमा होता है; संसद में हुई बहस संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा हुई। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा- ‘वंदे मातरम्’ कोई दिखावा नहीं, कोई राजनीति का भी विषय नहीं। इनके भाषण और विचार सुनते हैं, तो लगता है कि इन्होंने ही इस गीत को बनवाया है। ये राष्ट्रवादी नहीं, राष्ट्र-विवादी लोग हैं। दरारवादी लोग हैं। पढ़िए पूरी खबर…