यूपी के नए BJP अध्यक्ष ‘पिंकी बाबू’ की कहानी:AC कार में पढ़ने जाते थे, भाई के कहने पर नेता बने, पंचायत के माहिर खिलाड़ी

पंकज चौधरी यूपी BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं। पूर्वांचल में कुर्मी समाज के बड़े चेहरे पंकज को लोग अखिलेश के PDA की काट मान रहे हैं। 7 बार के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। ये वही पंकज चौधरी है, जिनके घर तक PM नरेंद्र मोदी 200 मीटर पैदल चलकर गए थे। वह आयुर्वेदिक तेल राहत रूह बनाने वाली कंपनी हरबंशराम भगवानदास के मालिक भी हैं। 36 साल के सियासी सफर में पंकज चौधरी पार्षद से सांसद तक का सफर तय कर चुके हैं। पंकज चौधरी पूर्वांचल का कद्दावर चेहरा बनकर उभरे हैं। परिवार के लोग और दोस्त उन्हें प्यार से ‘पिंकी बाबू’ कहकर बुलाते हैं। भाजपा के यूपी अध्यक्ष बनने की भूमिका तक पहुंचने के पीछे पंकज चौधरी की कहानी को हमने उनके करीबियों से जाना। पढ़िए रिपोर्ट… पहले शुरुआती जिंदगी पंकज के पैदा होते ही परिवार में खुशी का माहौल पंकज चौधरी के परदादा भगवानदास जौनपुर के रहने वाले थे। बिजनेस को बढ़ाने के लिए वह 1880 में गोरखपुर आ गए। 1881 में उन्होंने आयुर्वेदिक प्रोडक्ट का बिजनेस शुरू किया। वह ठंडा तेल बनाने लगे। पंकज के पिता भगवती प्रसाद ने जब बिजनेस संभाला, तो ठंडे तेल को ब्रांड की तरह पहचान दिलाई। तेल का नाम रखा ‘राहत रूह’। इस वक्त तक चौधरी परिवार की गिनती गोरखपुर के जाने-माने परिवारों में होने लगी थी। 15 नवंबर, 1964 को भगवती प्रसाद के घर में एक बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा गया पंकज। इससे पहले बड़ा बेटा प्रदीप भी था। पंकज के पैदा होने के बाद घर एक अलग ही खुशी का माहौल था। परिवार के लोग उन्हें प्यार से पिंकी बुलाते, जब पंकज थोड़ा बड़े हुए तो दोस्त भी उन्हें ‘पिंकी बाबू’ कहकर पुकारने लगे। बचपन से मिली लग्जरी लाइफ, AC कार से स्कूल जाते पढ़ाई की उम्र होते ही पंकज का एडमिशन पिता ने कार्मल हाईस्कूल में करा दिया। 12वीं की पढ़ाई एमपी इंटर कॉलेज से हुई। वह पढ़ाई में काफी होशियार थे। ग्रेजुएशन के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दाखिला कराया गया। चौधरी परिवार के नजदीकी गोविंद जी श्रीवास्तव बताते हैं- उस जमाने में पंकज AC कार से चलते थे। उस वक्त ऐसी गाड़ियां बहुत कम लोगों के यहां हुआ करती थीं। पढ़ाई पूरी होने के बाद पंकज के बड़े भाई प्रदीप चौधरी ने 1989 में हरवंश राम भगवान दास आयुर्वेदिक संस्थान प्राइवेट लिमिटेड उर्दू बाजार के रूप में कंपनी रजिस्टर्ड कराई। पंकज को शुरुआती दिनों में पॉलिटिक्स से कोई लगाव नहीं था। सोशल वर्क करते थे। लेकिन, उन्हें घूमने का बहुत शौक था। वो अक्सर महराजगंज के सोहागीबरवा के जंगल में घूमने चले जाते थे। गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार दीप्त भानु डे बताते हैं- पंकज और उनके बड़े भाई का व्यवहार शुरू से काफी सौम्य रहा। दोनों की जोड़ी राम-लक्ष्मण की तरह थी। पंकज शुरू से ही काफी मुखर रहे। छात्र जीवन में वह चुनाव तो नहीं लड़े। लेकिन उनकी मां उज्जवल चौधरी पॉलिटिक्स में एक्टिव थीं। वह महराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी थीं। अब पंकज के पार्षद बनने की कहानी भाई राजनीति में लाए, बोले- समाज सेवा के लिए राजनीति में आओ
वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि पंकज के बड़े भाई प्रदीप चौधरी ने ही उन्हें राजनीति में एंट्री कराई। प्रदीप महराजगंज के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। वह हमेशा पंकज से हमेशा कहते कि तुम्हें अगर लोगों की सेवा करनी है, तो पॉलिटिक्स में आना होगा। पंकज के सोशल वर्क को देखते हुए उनके दोस्तों ने भी कहा कि तुम्हें पार्षद का चुनाव लड़ना चाहिए। यह साल था 1980। पंकज चुनावी मैदान में उतरे। संपन्न घर से थे, इसलिए उन्होंने चुनाव कुछ अलग ही अंदाज में लड़ा। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. सैय्यद जमाल बताते हैं- पंकज के सामने जो कैंडिडेट खड़े थे, वो वादा करते घूम रहे थे कि हम जीतेंगे, तो आपकी सड़क बनवा देंगे, नाली बनवा देंगे। वहीं, पंकज चौधरी ने चुनाव जीतने से पहले ही ये काम करवाने शुरू कर दिए। वार्ड में कई स्थानों पर अपने पैसे से हैंडपंप लगवाया। लोगों की सुविधा से जुड़े और काम भी किए। नतीजा ये रहा कि चुनाव आसानी से जीत गए। उस वक्त उनकी उम्र महज 25 साल थी। संचार मंत्री बोले- जो काम चुनाव जीतने के बाद होते हैं, वो पहले ही कर दिए
डॉ. जमाल बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह उस समय केंद्र में संचार मंत्री थे। गोरखपुर के नगर निकाय चुनाव की जिम्मेदारी उनके पास थी। तब नगर महापालिका हुआ करता था और आज के महापौर को नगर प्रमुख कहते थे। पवन बथवाल कांग्रेस के नगर प्रमुख के प्रत्याशी थे। तब पार्षद ही नगर प्रमुख का चुनाव करते थे। इसके लिए सभी पार्षदों से संपर्क किया गया। डॉ. जमाल ने बताया कि वह निर्दलीय पार्षद रहे पंकज चौधरी से मिलने पहुंचे। उन्हें वीर बहादुर सिंह के गोलघर स्थित आवास पर आने का निमंत्रण दिया। यहां वीर बहादुर सिंह से उनकी मुलाकात हुई। वीर बहादुर सिंह ने पंकज चौधरी से उस समय कहा था कि जो काम लोग चुनाव जीतने के बाद करते हैं, वो आपने पहले ही कर दिया। पंकज चौधरी उप नगर प्रमुख का चुनाव लड़े। उन्होंने निर्दलीय पार्षदों की टीम बना ली थी और अपने प्रयास से उप नगर प्रमुख यानी डिप्टी मेयर बनने में सफल रहे। वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि पंकज के सौम्य व्यवहार से उनको लोग पसंद करते थे। यही कारण था कि पार्षद बनने के एक साल बाद ही वह डिप्टी मेयर बन गए। इसी साल वह भाजपा की कार्यसमिति में शामिल हुए। अब शादी और BJP जॉइन करने की कहानी 1990 में भाग्यश्री से शादी, बेटा-बेटी हुए पॉलिटिकल लाइफ शुरू होने के बाद पंकज पर फैमिली प्रेशर बना कि अब शादी कर लो। 11 जून, 1990 को उनकी भाग्यश्री से शादी हुई। भाग्यश्री भी अपने पति की तरह सोशल वर्क में एक्टिव हो गईं। समय के साथ पंकज-भाग्यश्री को बेटा रोहन और बेटी श्रुति हुईं। पंकज को अपने जीवन में धक्का तब लगा, जब उनके बड़े भाई प्रदीप की बीमारी से मौत हो गई। पंकज की बहन साधना चौधरी सिद्धार्थनगर से जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। इसके अलावा पंकज चौधरी की 2 और बहनें, नीलम और सपना चौधरी हैं। लालकृष्ण आडवाणी ने BJP जॉइन कराई लालकृष्ण आडवाणी 1990 में गोरखपुर आए थे। उस समय डिप्टी मेयर बनने के बाद पंकज चौधरी का नाम चर्चा में था। भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी डॉ. रमापति राम त्रिपाठी भी गोरखपुर के रहने वाले हैं। डा. त्रिपाठी चौधरी परिवार को बखूबी जानते थे। जब आडवाणी गोरखपुर आए तो डा. रमापति उन्हें लेकर पंकज चौधरी के घर पहुंचे। वहां पंकज, लालकृष्ण आडवाणी के कहने पर 1990 में भाजपा में शामिल हुए। इस तरह से डॉ. त्रिपाठी उनके राजनीतिक गुरु बने। 1991 में कुर्मी बहुल महराजगंज सीट से भाजपा ने पंकज चौधरी को टिकट दिया। महराजगंज 1989 में गोरखपुर से अलग होकर नया जिला बना था। उस वक्त राम मंदिर की लहर थी। अपनी बिरादरी के बड़े वोट बैंक का साथ पंकज को मिला। और वह चुनाव जीतने में सफल रहे। यहां से उनकी जीत का सिलसिला रुका ही नहीं। पंकज के इर्द-गिर्द घूमती रही महराजगंज की पॉलिटिक्स सांसद बनने के बाद महराजगंज की राजनीति पर पंकज ने अपनी छाप छोड़ दी। वरिष्ठ पत्रकार दीप्त भानु डे बताते हैं कि पंकज चौधरी के राजनीतिक रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महराजगंज जिला बनने के बाद से अब तक वहां भाजपा का ही जिला पंचायत अध्यक्ष बना। यह चुनाव आमतौर पर सत्ता से प्रभावित रहता है, लेकिन महराजगंज में पंकज चौधरी की ही चलती रही। पंकज चौधरी का सत्ता के अलावा विपक्ष के लोगों से भी अच्छा जुड़ाव रहता है। राजनीति में पंकज चौधरी का कोई दुश्मन नहीं आमतौर पर जब आदमी आगे बढ़ता है, तो उसके दुश्मन भी पैदा होते जाते हैं, लेकिन पंकज के पास राजनीति में केवल दोस्त हैं। वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि यह पंकज की खूबी है कि उनका कोई दुश्मन नहीं है। जो पंकज के प्रतिद्वंद्वी रहे, समय आने पर उन्होंने उनका भी साथ पा लिया। सौम्य छवि और किसी को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी न करना उनकी खूबी है। पंकज के बेटे रोहन भी पॉलिटिक्स में एक्टिव हैं। उनके बड़े भाई प्रदीप के 3 बच्चे हैं। बेटा राहुल व दो बेटियां शिल्पी और स्वाति चौधरी। पंकज के बारे में हर चुनाव में यह चर्चा होती रहती है कि उनका डाउन फॉल आ रहा है, लेकिन हर बार वह और मजबूत होकर उभरते हैं। ——————- यूपी के नए बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी से जुड़ी ये खबर पढ़ें… यूपी BJP अध्यक्ष के ऐलान से पहले जश्न, अयोध्या सांसद का तंज- एक चौधरी गए, दूसरे आ गए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी यूपी भाजपा के नए अध्यक्ष होंगे। उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। थोड़ी देर में लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल उनके नाम का औपचारिक ऐलान करेंगे। दैनिक भास्कर ने शुक्रवार को ही बता दिया था कि पंकज चौधरी ही यूपी भाजपा के नए अध्यक्ष होंगे। पढ़िए पूरी खबर…