हरिद्वार के लक्सर इलाके में 24 दिसंबर को कोर्ट में पेशी के दौरान ले जाते समय पुलिस कस्टडी में हुए हमले में गंभीर रूप से घायल मेरठ के हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी की एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान शनिवार सुबह मौत हो गई। इसके साथ ही उससे जुड़े कई राज भी दफन हो गए। पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुख्यात बदमाश विनय त्यागी पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और डकैती सहित करीब 64 मुकदमे दर्ज थे, जिनमें से 38 मामले अभी विचाराधीन थे। हैरानी की बात यह है कि 30 सितंबर को उसे देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने से महज चोरी के एक मामले में जेल भेजा गया था। सूत्रों के अनुसार, तभी से उसे अपनी मौत का डर सता रहा था। शायद इसी कारण उसने जेल को सबसे सुरक्षित जगह माना था। लेकिन 89 दिन बाद ऋषिकेश एम्स में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। विनय की बेटी तन्वी भारद्वाज का दावा है कि ठेकेदार सुभाष त्यागी ने उसके पिता पर हमला कराया। आइए जानते हैं क्या था चोरी का मामला… 15 सितंबर को देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में अशोक विहार निवासी प्रमोद त्यागी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके घर के बाहर खड़ी कार से नकदी और सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने 30 सितंबर को आशारोड़ी टनल के पास से कुख्यात बदमाश विनय त्यागी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 15 हजार रुपये नकद, करीब चार लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के सिक्के और घटना में प्रयुक्त फोर्ड एंडेवर कार बरामद की गई। लोगों के गले नहीं उतरी थी पुलिस की कहानी नेहरू कॉलोनी थाने से चोरी के मामले में विनय त्यागी का जेल जाना शुरू से ही लोगों के गले नहीं उतर रहा था। घटना के बाद से इसे लेन-देन से जुड़ा मामला बताया जा रहा था। यह भी चर्चा में था कि शिकायतकर्ता प्रमोद त्यागी, विनय का करीबी है। बताया जाता है कि जेल जाने से पहले विनय उसी के घर में छिपा था। प्रमोद पूर्व में देहरादून के आराघर क्षेत्र में क्लिनिक चलाता था और पेशे से चिकित्सक है। जनवरी 2018 में उसके क्लिनिक पर हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और दून जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापा मारकर भ्रूण लिंग परीक्षण का मामला पकड़ा था। इसके बाद क्लिनिक सील कर दिया गया और चिकित्सक पहले भी जेल जा चुका है। क्या पूरा घटनाक्रम था नाटकीय? जागृति विहार मेरठ निवासी विनय त्यागी मूल रूप से मुजफ्फरनगर के पुरकाजी थाना क्षेत्र के खाईखेड़ी गांव का रहने वाला था। सूत्रों की मानें तो पूरा मामला गाजियाबाद के इंदिरापुरम के एक माफिया से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि यह माफिया अपने पार्टनर के नाम से कंपनी चलाता है, लेकिन पूरा नियंत्रण उसी का है। माफिया की उत्तराखंड के पुलिस-प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में गहरी पकड़ बताई जा रही है। शिकायतकर्ता चिकित्सक के भी माफिया के पार्टनर से करीबी संबंध बताए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, माफिया के पार्टनर ने करोड़ों रुपए नकद और लाखों के जेवरात से लदी कार कुछ दिन चिकित्सक के पास रखवाई थी, क्योंकि उसे ईडी की कार्रवाई का डर था। इसी दौरान कार को लेकर चोरी की कहानी गढ़ी गई, हालांकि अब तक पुलिस जांच में इसकी असल सच्चाई सामने नहीं आई है। STF के डर से छिप रहा था विनय सूत्र बताते हैं कि यूपी एसटीएफ लंबे समय से विनय त्यागी की तलाश में थी। उसे एनकाउंटर का डर था, इसलिए वह देहरादून के अशोक विहार स्थित परिचित चिकित्सक के घर छिपा रहा। इसके बाद चोरी का नाटकीय मामला रचकर खुद को जेल में सुरक्षित करने की कोशिश की गई। बाइक बोट घोटाले का मुख्य आरोपी था विनय दून पुलिस ने जिस विनय त्यागी को साधारण चोरी के मामले में जेल भेजा, वह 42 हजार करोड़ रुपए के बहुचर्चित बाइक बोट घोटाले का मुख्य आरोपी था। गाजियाबाद स्थित गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी के जरिए निवेशकों से ठगी की गई थी। विनय की पत्नी यूपी में ब्लॉक प्रमुख भी रह चुकी है। मरने से पहले ठेकेदार सुभाष त्यागी का लिया नाम विनय त्यागी ने मरने से पहले अपने ऊपर हुए हमले के लिए ठेकेदार सुभाष त्यागी को जिम्मेदार ठहराया। विनय की बेटी ने बताया कि घटना के 8 घंटे बाद वे अस्पताल पहुंचे। ऑपरेशन करीब 12 घंटे बाद किया गया। उन्होंने बताया कि मैंने पापा से पूछा कि यह किसने किया, तो उन्होंने साफ कहा कि यह हमला सुभाष त्यागी ठेकेदार ने कराया है। इसके बाद मुझे आईसीयू में मिलने नहीं दिया गया