यूप में SIR की ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी को जारी हो चुकी है। प्रदेश में औसतन 18.70 फीसदी वोट कटे हैं। सबसे ज्यादा शहरी सीटों के राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाए हैं। प्रदेश के सीएम योगी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और 13 मंत्रियों की विधानसभाओं में औसतन 97 हजार वोट घटे हैं। जबकि ग्रामीण सीटों पर औसतन 62 हजार वोट कटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि शहरी सीटों पर SIR के बाद सबसे मुश्किल में भाजपा होगी। 106 शहरी सीटों में 84 पर भाजपा तो 2 पर सहयोगी दलों का कब्जा है। वहीं, सपा 20 सीटों पर काबिज है। सिलसिलेवार पढ़ते हैं कि शहरी सीटों में कहां सबसे अधिक वोट कटे हैं? ग्रामीण सीटों पर कहां सबसे अधिक वोट कटे हैं? यूपी की 403 सीटों पर SIR का कितना असर
प्रदेश की 403 सीटों में भाजपा 255, सपा 106, अपना दल 13, रालोद 9, सुभासपा 6, निषाद पार्टी 5, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक व कांग्रेस 2-2, बसपा 1 सीट पर काबिज हैं। SIR के बाद प्रदेश में 2.88 करोड़ वोटर घटे हैं। शहर की 106 सीटों में सपा 20 पर तो अन्य पर एनडीए का कब्जा है। शहरी सीटों पर 9 से 41 फीसदी तक एनडीए विधायकों वाली सीटों पर वोट कटे हैं। यानी 39 हजार से लेकर 4 लाख तक भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर SIR के बाद वोट कटे हैं। जबकि, सपा के कब्जे वाली सीटों पर 43 हजार से 1.82 लाख तक वोट कटे हैं। इसी तरह ग्रामीण की 297 सीटों की बात करें तो भाजपा के कब्जे वाली 173 सीटों पर 22 हजार से लेकर 1.29 लाख तक वोट कटे हैं। सपा के कब्जे वाली 86 सीटों पर 26 हजार से लेकर 90 हजार तक वोट कटे हैं। वहीं अपना दल की 13 सीटों पर 40 से लेकर 88 हजार तक, सुभासपा की 5 सीटों पर 50 से 71 हजार तक, निषाद की 5 सीटों पर 52 से 81 हजार तक, रालोद की 8 सीटों पर 46 से 64 हजार तक, जनसत्ता दल की दो सीटों पर 68 से 80 हजार तक, कांग्रेस की दो सीटों पर 52 से 56 हजार और बसपा की इकलौती सीट पर 51 हजार वोट कटे हैं। राजनीतिक जानकार हेमंत तिवारी कहते हैं- तात्कालिक रूप से देखें तो सत्तारूढ़ दल को सीधा नुकसान होता दिख रहा। अगर आप दो चुनावों को देखें 2017 के चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में हार-जीत का मार्जिन काफी कम रहा। यही वजह रही कि भाजपाई 60 से अधिक सीटें 10 हजार से भी कम अंतर से जीती थी। शहरी सीटों में लखनऊ मध्य में सबसे ज्यादा 43% वोट कटे
प्रदेश में टॉप-10 शहरी सीटों की बात करें, तो लखनऊ मध्य नंबर वन है। यहां करीब 43 फीसदी वोट कटे हैं। जबकि यहां जीत-हार का अंतर 2022 के विधानसभा चुनाव में महज 5 फीसदी था। इस सीट पर सपा के रविदास मेहरोत्रा विधायक हैं। टॉप-10 सीटों में एक साहिबाबाद की सीट है, जिसके विधायक सुनील शर्मा को SIR के बाद घटे 38 फीसदी वोटों की तुलना में 2022 के विधानसभा चुनाव में 45 फीसदी वोटों के मार्जिन से जीत मिली थी। इस सीट पर SIR के बाद सबसे अधिक लगभग 4 लाख वोटर कम हुए हैं। इस पर SIR से पहले 10.54 लाख वोटर थे। टॉप-10 की अन्य 9 सीटों पर जीत-हार का मार्जिन SIR में कम हुए वोटों से काफी कम है। मतलब यहां 2027 में जीत-हार का समीकरण बदल सकता है। शहरी सीटों में झांसी नगर में सबसे कम वोट कटे
प्रदेश की 106 शहरी सीटों में सबसे कम वोट झांसी नगर में कटे। यहां 39 हजार 553 वोटर कम हुए हैं। ये कुल वोटों का लगभग 9 फीसदी है। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रवि शर्मा ने ये सीट 76 हजार 353 (30 प्रतिशत) वोटों के मार्जिन से जीती थी। शहरी क्षेत्र की सबसे कम वोटर कटने वाली सीट में सीएम योगी की सीट गोरखपुर शहर भी शामिल है। SIR के बाद यहां 62 हजार 152 वोटर कम हो चुके हैं। जबकि 2022 में यूपी के सीएम योगी ने ये सीट 1 लाख 3 हजार 390 वोटों के अंतर से जीती थी। कुंदरकी सीट पर 2022 के चुनाव में सपा का कब्जा था, लेकिन 2024 के उपचुनाव में ये सीट अब भाजपा के कब्जे में है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भाजपा की जीत ने सभी को चौंकाया था। ग्रामीण विधानसभाओं में औसत 62 हजार मतदाता घटे
प्रदेश की 297 ग्रामीण विधानसभाओं में औसतन 62 (16.73%) हजार वोट कटे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 173 पर भाजपा, 86 पर सपा, 13 पर अपना दल, 8 पर रालोद, 5-5 पर सुभासपा व निषाद पार्टी, 2-2 पर कांग्रेस व जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और 1 सीट पर बसपा का कब्जा है। ग्रामीण क्षेत्रों की 10 विधानसभाओं में जहां सबसे अधिक वोट कटे हैं, वहां मौजूदा समय में भाजपा और सहयोगी दल के विधायक हैं। ग्रामीण क्षेत्र की टॉप-10 सीट, जहां सबसे अधिक वोट कटे हैं, वहां 9 पर भाजपा तो 1 पर अपना दल का कब्जा है। इन टॉप-10 सीटों पर औसतन 1 लाख वोट कटे हैं। ग्रामीण की इन सीटों में महाराजपुर से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, छिबरामऊ से अर्चना पांडे, चंदौसी से गुलाब देवी और आगरा ग्रामीण से बेबी रानी मौर्या विधायक हैं। 2022 में इन 10 सीटों पर जीत-हार के अंतर से अधिक वोट SIR में कट चुके हैं। इसी तरह ग्रामीण की वो 10 सीटें जहां सबसे कम वोटर कटे हैं, वहां भी 9 पर एनडीए के विधायक हैं। महज 1 सीट पर सपा का कब्जा है। सबसे कम वोट कटने वाली 10 सीटों में तीन ऐसी हैं, जहां जीत-हार के अंतर से अधिक वोट कट चुके हैं। तीनों सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। सियासी जानकार कहते हैं कि यहां 2027 के चुनाव में राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… न जेपी न राज नारायण, कलाम भी गायब, सपा PDA पंचांग में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का भी जिक्र नहीं नए साल के मौके पर सपा प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने समाजवादी पीडीए पंचांग जारी किया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर इसका विमोचन किया। बताया गया कि इसमें तमाम महापुरुषों के जन्मदिन-पुण्यतिथि, समाजवादी विचारधारा और पीडीए से संबंध रखने वालों के जन्मदिन-पुण्यतिथि मौजूद है। इसे लेकर भाजपा ने सपा पर हमला किया कि इस पंचांग में 22 जनवरी की जिक्र नहीं है, जब 2024 में अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। पंचांग में मुस्लिम तुष्टीकरण किया गया है। पढ़ें पूरी खबर
प्रदेश की 403 सीटों में भाजपा 255, सपा 106, अपना दल 13, रालोद 9, सुभासपा 6, निषाद पार्टी 5, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक व कांग्रेस 2-2, बसपा 1 सीट पर काबिज हैं। SIR के बाद प्रदेश में 2.88 करोड़ वोटर घटे हैं। शहर की 106 सीटों में सपा 20 पर तो अन्य पर एनडीए का कब्जा है। शहरी सीटों पर 9 से 41 फीसदी तक एनडीए विधायकों वाली सीटों पर वोट कटे हैं। यानी 39 हजार से लेकर 4 लाख तक भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर SIR के बाद वोट कटे हैं। जबकि, सपा के कब्जे वाली सीटों पर 43 हजार से 1.82 लाख तक वोट कटे हैं। इसी तरह ग्रामीण की 297 सीटों की बात करें तो भाजपा के कब्जे वाली 173 सीटों पर 22 हजार से लेकर 1.29 लाख तक वोट कटे हैं। सपा के कब्जे वाली 86 सीटों पर 26 हजार से लेकर 90 हजार तक वोट कटे हैं। वहीं अपना दल की 13 सीटों पर 40 से लेकर 88 हजार तक, सुभासपा की 5 सीटों पर 50 से 71 हजार तक, निषाद की 5 सीटों पर 52 से 81 हजार तक, रालोद की 8 सीटों पर 46 से 64 हजार तक, जनसत्ता दल की दो सीटों पर 68 से 80 हजार तक, कांग्रेस की दो सीटों पर 52 से 56 हजार और बसपा की इकलौती सीट पर 51 हजार वोट कटे हैं। राजनीतिक जानकार हेमंत तिवारी कहते हैं- तात्कालिक रूप से देखें तो सत्तारूढ़ दल को सीधा नुकसान होता दिख रहा। अगर आप दो चुनावों को देखें 2017 के चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में हार-जीत का मार्जिन काफी कम रहा। यही वजह रही कि भाजपाई 60 से अधिक सीटें 10 हजार से भी कम अंतर से जीती थी। शहरी सीटों में लखनऊ मध्य में सबसे ज्यादा 43% वोट कटे
प्रदेश में टॉप-10 शहरी सीटों की बात करें, तो लखनऊ मध्य नंबर वन है। यहां करीब 43 फीसदी वोट कटे हैं। जबकि यहां जीत-हार का अंतर 2022 के विधानसभा चुनाव में महज 5 फीसदी था। इस सीट पर सपा के रविदास मेहरोत्रा विधायक हैं। टॉप-10 सीटों में एक साहिबाबाद की सीट है, जिसके विधायक सुनील शर्मा को SIR के बाद घटे 38 फीसदी वोटों की तुलना में 2022 के विधानसभा चुनाव में 45 फीसदी वोटों के मार्जिन से जीत मिली थी। इस सीट पर SIR के बाद सबसे अधिक लगभग 4 लाख वोटर कम हुए हैं। इस पर SIR से पहले 10.54 लाख वोटर थे। टॉप-10 की अन्य 9 सीटों पर जीत-हार का मार्जिन SIR में कम हुए वोटों से काफी कम है। मतलब यहां 2027 में जीत-हार का समीकरण बदल सकता है। शहरी सीटों में झांसी नगर में सबसे कम वोट कटे
प्रदेश की 106 शहरी सीटों में सबसे कम वोट झांसी नगर में कटे। यहां 39 हजार 553 वोटर कम हुए हैं। ये कुल वोटों का लगभग 9 फीसदी है। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रवि शर्मा ने ये सीट 76 हजार 353 (30 प्रतिशत) वोटों के मार्जिन से जीती थी। शहरी क्षेत्र की सबसे कम वोटर कटने वाली सीट में सीएम योगी की सीट गोरखपुर शहर भी शामिल है। SIR के बाद यहां 62 हजार 152 वोटर कम हो चुके हैं। जबकि 2022 में यूपी के सीएम योगी ने ये सीट 1 लाख 3 हजार 390 वोटों के अंतर से जीती थी। कुंदरकी सीट पर 2022 के चुनाव में सपा का कब्जा था, लेकिन 2024 के उपचुनाव में ये सीट अब भाजपा के कब्जे में है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भाजपा की जीत ने सभी को चौंकाया था। ग्रामीण विधानसभाओं में औसत 62 हजार मतदाता घटे
प्रदेश की 297 ग्रामीण विधानसभाओं में औसतन 62 (16.73%) हजार वोट कटे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 173 पर भाजपा, 86 पर सपा, 13 पर अपना दल, 8 पर रालोद, 5-5 पर सुभासपा व निषाद पार्टी, 2-2 पर कांग्रेस व जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और 1 सीट पर बसपा का कब्जा है। ग्रामीण क्षेत्रों की 10 विधानसभाओं में जहां सबसे अधिक वोट कटे हैं, वहां मौजूदा समय में भाजपा और सहयोगी दल के विधायक हैं। ग्रामीण क्षेत्र की टॉप-10 सीट, जहां सबसे अधिक वोट कटे हैं, वहां 9 पर भाजपा तो 1 पर अपना दल का कब्जा है। इन टॉप-10 सीटों पर औसतन 1 लाख वोट कटे हैं। ग्रामीण की इन सीटों में महाराजपुर से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, छिबरामऊ से अर्चना पांडे, चंदौसी से गुलाब देवी और आगरा ग्रामीण से बेबी रानी मौर्या विधायक हैं। 2022 में इन 10 सीटों पर जीत-हार के अंतर से अधिक वोट SIR में कट चुके हैं। इसी तरह ग्रामीण की वो 10 सीटें जहां सबसे कम वोटर कटे हैं, वहां भी 9 पर एनडीए के विधायक हैं। महज 1 सीट पर सपा का कब्जा है। सबसे कम वोट कटने वाली 10 सीटों में तीन ऐसी हैं, जहां जीत-हार के अंतर से अधिक वोट कट चुके हैं। तीनों सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। सियासी जानकार कहते हैं कि यहां 2027 के चुनाव में राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… न जेपी न राज नारायण, कलाम भी गायब, सपा PDA पंचांग में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का भी जिक्र नहीं नए साल के मौके पर सपा प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने समाजवादी पीडीए पंचांग जारी किया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर इसका विमोचन किया। बताया गया कि इसमें तमाम महापुरुषों के जन्मदिन-पुण्यतिथि, समाजवादी विचारधारा और पीडीए से संबंध रखने वालों के जन्मदिन-पुण्यतिथि मौजूद है। इसे लेकर भाजपा ने सपा पर हमला किया कि इस पंचांग में 22 जनवरी की जिक्र नहीं है, जब 2024 में अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। पंचांग में मुस्लिम तुष्टीकरण किया गया है। पढ़ें पूरी खबर