माघ मेले में कमाई और वायरल होने पहुंचे युवा:गिटार के साथ फोटो खिंचवाने को रोजगार बनाया, कोई पुष्पा बना

प्रयागराज में महाकुंभ- 2025 से पहले जो माघ मेला होता था, उसकी पहचान धार्मिक थी। महाकुंभ ने रोजगार और बहुत सारे लोगों को पहचान दी। अब इसका असर माघ मेला- 2026 में नजर आ रहा। बहुत सारे नौजवान रोजगार की तलाश में माघ मेले में आ गए। कुछ कमा रहे, तो कुछ अभी संघर्ष कर रहे। इसी तरह से कई ऐसे नौजवान हैं, जो अपने अंदर की योग्यता से पॉपुलर होना चाहते हैं। दैनिक भास्कर ने ऐसे ही नौजवानों से बात की। उनके बिजनेस आइडिया को देखा। पहचान स्थापित करने के प्रयासों को समझा। उन्होंने माघ मेले को ही क्यों चुना, यह भी जाना। यहां की चुनौतियों के बारे में भी बात की…पढ़िए मोबाइल से आइडिया आया, गिटार लेकर आ गया
प्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत हुई। प्रशासन के मुताबिक, 9 करोड़ से ज्यादा लोग इस 45 दिन के मेले में शामिल होंगे। यही चीज लोगों को मोटिवेट करती है कि अगर इतने लोग आएंगे तो रोजगार के अवसर बनेंगे। अच्छी कमाई की जा सकती है। महाकुंभ में ऐसा ही कुछ हुआ था। इसी चीज को देखते हुए कानपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले शिवम अपना गिटार लेकर प्रयागराज आ गए। शिवम ने गिटार के साथ एक पंपलेट लगवा रखा है। उस पर लिखा है- गिटार के साथ फोटो खिंचवाएं मात्र 5 रुपए में। हमने शिवम से इस आइडिया को लेकर बात की। वह कहते हैं- मैं यहां से जुड़े वीडियो लगातार देख रहा था। कोई दातून बेच रहा, तो कोई कुछ और। सभी अच्छा पैसा कमाने की बात कहते। इसलिए हमारे दिमाग में भी आइडिया आया कि क्यों न माघ मेला चलते हैं? हम यहां आए, पहले दिन बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला, करीब एक हजार रुपए की कमाई हुई। मैं कानपुर में ग्रुप-डी की तैयारी करता हूं। अगर यहां मेले में ऐसा ही रिस्पॉन्स मिलता रहा तो रुका रहूंगा। प्रयाग की मिट्टी में बहुत लोग सोना बने, इसलिए आया
वीआईपी घाट पर हमारी मुलाकात एक ऐसे नौजवान से हुई, जो पुष्पा का रूप धरकर घूम रहा था। हमने बातचीत की। पुष्पा कहता है- मेरा असली नाम रविकिशन मिश्रा है। मैं मध्यप्रदेश के कटनी जिले के कैमूर गांव का हूं। मैं यहां पहली बार आया हूं। मैंने सुना है प्रयाग की मिट्टी का यह प्रभाव है कि यहां मिट्टी भी सोना हो जाती है, बस यही सोचकर मैं आ गया। पुष्पा का रूप धारण किया। अभी तक तो खूब रिस्पॉन्स मिल रहा है। आगे देखता हूं। रवि कहते हैं- मैं गरीब घर का हूं। एक्टिंग पसंद है मुझे। मैं इसी लाइन में जाना चाहता हूं। एक बार पुष्पा बनकर वाराणसी गया था। वहां भी खूब लोगों ने सराहा था। स्कूल के दिनों में अनपढ़ विधायक का इंटरव्यू वाला रोल किया था। तभी से ख्याल आया था कि एक्टिंग में जाना है। रवि पूरे दिन पुष्पा का रूप धारण किए उसकी स्टाइल में डॉयलाग बोलते रहते हैं। आसपास भीड़ लगी रहती है, लोग साथ में फोटो खिंचवा रहे हैं। इत्र और दातून बेचने का धंधा नहीं चल पाया
22 साल के आशीष लैब टेक्नीशियन का कोर्स कर रहे हैं। प्रयागराज में ही रहते हैं। मेले में कमाई के उद्देश्य से पहुंचे और इत्र बेचने लगे। आशीष कहते हैं- यह आइडिया मुझे महाकुंभ से आया था। इसीलिए मैं यहां इत्र बेचने आया, लेकिन अभी तक कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा। कोई भी नहीं खरीद रहा। 2-3 दिन से ऐसी ही स्थिति है। अगर ऐसे ही रहा तो वापस घर चला जाऊंगा। कोई और काम नहीं करूंगा। सोनभद्र से अवध कुमार यादव आए हैं। संगम घाट पर दातून बेचने का काम करते हैं। कहते हैं- लोगों के वीडियो देखकर घर से दातून लेकर आ गया। एक हफ्ते हुए, लेकिन कोई पूछ नहीं रहा। घाट पर दातून का कोई नाम ही नहीं ले रहा। अगर ऐसा ही रहा, तो जल्द ही वापस चले जाएंगे। इसके बाद अवध कुमार ने प्रयागराज से जुड़ा एक गाना सुनाया। कहा कि गाना मेरा शौक है, मैं चाहता हूं कि मुझे इसके जरिए लोग जानें। चंदन टीका के बिजनेस में कमाई, पुलिस रोक रही
कुंभ मेले में युवाओं की सबसे ज्यादा कमाई चंदन-टीका लगाकर हुई थी। बस इसीलिए सबसे ज्यादा संख्या में नौजवान माघ मेले में पहुंच गए। दीपक मिश्रा प्रयागराज के ही मांडा से आए हैं। कहते हैं- चंदन-टीका में तो अच्छी कमाई है, लेकिन प्रशासन रोक रहा। वह एक जगह खड़े ही नहीं होने देते। कोई 500 रुपए, कोई 1 हजार तो कोई प्रमुख स्नान वाले दिन 2500 रुपए तक कमा लेता है। परमहंस तिवारी प्रयागराज के ही सैदाबाद से आए हैं। कहते हैं- इसी साल आया हूं। पिताजी पहले यही काम करते थे, अब मैं कर रहा हूं। फायदा तो है। सुबह 8 बजे आता हूं, फिर चंदन-टीका लगाने का काम करता हूं। मेरे पास जो झोला है, जब वह भर जाता है, तो इसे लेकर वापस चला जाता हूं। चंदन लगाने का ही काम करने मेजा से अभिषेक उपाध्याय आए हैं, लेकिन अभी तक वह कमाई नहीं कर पा रहे। जहां गाड़ियां प्रतिबंधित, वहां बाइक चला रहे युवा
कुंभ मेले की तरह ही माघ मेले में भी विशेष स्नान दिनों पर मेला क्षेत्र और आसपास के क्षेत्र में गाड़ियां प्रतिबंधित रहती हैं। बाइक से लोग आ-जा सकते हैं। शहर में तैयारी करने वाले कई युवाओं ने ऐसे वक्त में बाइक के जरिए लोगों को लाने- ले जाने का काम शुरू कर दिया। इसके जरिए भी वह दिन में 500 रुपए से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। हालांकि कुंभ के मुकाबले इस बार बाइकर्स की संख्या कम है। लेकिन, आने वाले दिनों में बढ़ने की संभावना है। मेले में गोरखपुर से खेसारी नाम का एक नौजवान आया है। वह भोजपुरी फिल्म स्टार खेसारी लाल की आवाज निकालकर लोगों का मनोरंजन कर रहा। खेसारी की आवाज ऐसी है कि लोग सुनने के बाद चौंक जा रहे। खेसारी, पवन सिंह की भी आवाज निकाल लेते हैं। मेले से 3 हजार करोड़ रुपए के रोजगार का अनुमान
माघ मेला कुल 44 दिन चलेगा। इस मेले में 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है। अनुमान के मुताबिक, 3 हजार करोड़ रुपए के कारोबार की संभावना है। कुल 5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा। इसमें टेंट, पंडाल, होटल, धर्मशाला, ट्रैवल ऑपरेटर, रेस्टोरेंट, ढाबा, फल-सब्जी, फूल-माला, पूजा सामग्री, मिठाई नमकीन, पानी और पेय पदार्थ, हस्तशिल्प कारीगर, नाविक, चंदन-टीका जैसे रोजगार शामिल हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, महाकुंभ-2025 में तीन लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। CAIT के महासचिव खंडेलवाल ने बताया था कि कुल 66 करोड़ लोग आए थे। 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला था। ———————– ये खबर भी पढ़ें… एक रुपए के 100 नोट 2700 में, यूपी में फ्रेश नोटों का भौकाल, दुकानदार बोला- बैंक से ब्लैक में खरीदते हैं जो फ्रेश नोट आपको बैंकों से मिलने चाहिए, वे बैंक से ब्लैक होने के बाद यूपी की सड़कों पर बिक रहे हैं। इसका सेंटर पॉइंट है कानपुर का घंटाघर एरिया। यहां 1 रुपए के 100 फ्रेश नोट की गड्‌डी 2700 रुपए में बेची जा रही है। पढ़ें पूरी खबर