प्रयागराज के माघ मेला में रविवार को मौनी अमावस्या का स्नान था। साढ़े 4 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगाने पहुंचे। जाहिर-सी बात है, मेला क्षेत्र में व्यापार कर रहे लोगों की भी आमदनी बढ़ी। शायद अभी तक की एक दिन में सबसे ज्यादा कमाई हुई। मेले में सिर्फ दातून-इत्र बेचने वाले या चंदन का टीका लगाने वाले लोग ही नहीं हैं। अच्छी-खासी पढ़ाई करने के बाद लोग नौकरी न करके खुद का करियर संवार रहे हैं। इन पढ़े-लिखे युवाओं के लिए सबसे बड़ा अट्रैक्शन है चाय की दुकान। एमटेक, बीटेक और ग्रेजुएट कर चुके युवाओं ने संगम के घाट पर खुद के टी स्टॉल खोल रहे हैं। ये कहते हैं- खुद का बिजनेस बेहतर है। भले ही छोटा है, मगर अपना काम है। इसमें जॉब से ज्यादा सिक्योरिटी है। दैनिक भास्कर ने 3 ऐसे युवाओं को खोजा, जो डिग्री से इंजीनियर से लेकर ग्रेजुएट तक हैं। लेकिन, माघ मेला में चाय बेचकर हर दिन अच्छी कमाई कर रहे। ये लोग चाय भी बेच रहे हैं और दूध की सप्लाई भी कर रहे। पढ़िए तीनों की कहानी… 1. संदीप, एमटेक दो भाई पुलिस में, एक इंजीनियर, बोले- नौकरी पसंद नहीं आई
हम माघ मेला क्षेत्र में संगम थाने के सामने एक चाय की दुकान पर पहुंचे। यहीं हमारी मुलाकात संदीप से हुई। बातचीत में पता चला कि संदीप प्रयागराज के नैनी के शुआट्स एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एमटेक कर चुके हैं। माघ मेला में आने वाले बड़ी संख्या में लोग इनके सप्लाई किए दूध से बनी चाय पीते हैं। संदीप बताते हैं- मैं अंबेडकरनगर का रहने वाला हूं। हम 4 भाई हैं। मेरे 2 भाई दिल्ली पुलिस में हैं, जबकि तीसरा भाई इंजीनियर है। वो आगे बताते हैं- पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए ऑफर तो आए, लेकिन मुझे नौकरी करना अच्छा नहीं लगा। पिता की डेढ़ साल पहले डेथ हो गई थी। इसके बाद मैंने खुद का बिजनेस शुरू करने का प्लान बनाया। एक दोस्त हैं, जिनकी डेयरी है। बस वहीं से दूध की सप्लाई का काम शुरू किया। लेकिन मैं माघ मेले में सिर्फ दूध की सप्लाई करने नहीं, बल्कि सेवाभाव के साथ आया हूं। 2. मोहित, बीटेक बीटेक के बाद मोहित बना चाय वाला
मोहित जौनपुर के रहने वाले हैं। वो बताते हैं- मैंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से बीटेक किया है। कोरोना काल में कोई काम नहीं सूझा, तो चाय का काम शुरू कर दिया। हम गुड़ वाली स्पेशल चाय बनाने लगे। यह चाय लोगों को पसंद आ गई। जौनपुर, प्रयागराज के कौड़िहार और आजमगढ़ में हमने चाय के ठेले लगाए। अब माघ मेले में हमने पहली बार यह शुरुआत की है। उन्होंने कहा- हमारे देश में इंजीनियर की कमी तो है। इसलिए हमने बीटेक भी किया था, लेकिन बाद में नौकरी करने का इरादा बदल गया। चाय के काम में हमारे साथ 22 लड़के जुड़े हैं। उनके परिवार भी इसी काम से चल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस चाय को एक ब्रांड बनाने का टारगेट लेकर काम कर रहे हैं। 3. पूनम, ग्रेजुएट बोर्ड लगाया ग्रेजुएट चाय वाली, कहा- सेवाभाव से कर रही
दो लोगों से बातचीत करते हुए हमारी टीम माघ मेला क्षेत्र में ओल्ड जीटी रोड पर पहुंची। यहां लिखा था ‘ग्रेजुएट चाय वाली’। इस चाय की दुकान पर काम कर रही लड़की का नाम पूनम है। पूनम ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। कहती हैं- 3 महीने पहले ही मेरे पति की मौत हो गई थी। मेरे दो बच्चे हैं। माघ मेला लगा तो हमें लगा यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। क्यों न यहीं से किसी काम की शुरुआत की जाए। बस, इसके बाद मैंने चाय की दुकान खोल दी। पूनम कहती हैं- माघ मेले में सेवा का भाव लेकर आई हूं। गंगा मैया की गोद में रहकर कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। हमने पूछा- आप लड़की है, ये काम करने में दिक्कत नहीं हुई? वह कहती हैं- चाय की दुकान शुरू करने पर सगे-संबंधियों ने पहले मना किया। लेकिन, हमने इस काम को करने का फैसला कर लिया था। हालांकि, बाद में समझाने पर सब लोग राजी हो गए। तब यह काम शुरू कर सकी हूं। चाय का नाम ग्रेजुएट चाय वाली.. क्यों रखा? इस पर पूनम कहती हैं कि यह नाम थोड़ा यूनीक लगा। इसके साथ ही लोगों को यह पता चलेगा कि मैं ग्रेजुएट भी हूं, जिससे लोग अच्छे से पेश आएं। साथ ही मैंने क्वालिटी भी मेनटेन की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई सनातनी दुकान
माघ मेले एक बार फिर से सनातनी चाय की दुकान लगाई गई है। यह महाकुंभ में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल चाय की दुकान थी। इस चाय की दुकान पर एडिशनल शुगर के रूप में गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। यहां कई तरह से फ्लेवर वाली चाय तैयार कर लोगों को परोसी जाती है। सोनम पश्चिम बंगाल से आकर बेच रहीं चाय
संगम तट पर इन दिनों सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनी हैं सोनम। माघ मेले में वह चाय का कंटेनर लेकर घूमती रहती हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रहने वाली सोनम अपने पति के साथ चाय और पानी का कारोबार करने आए हैं। सोनम के पति पानी बेचते हैं, जबकि वह खुद चाय बेचती हैं। सोनम कहती हैं- मैं पिछले साल कुंभ में आई थी। तभी यहां चाय बेचने का प्लान बनाया था। मेरे परिवार वाले हमसे नाराज हैं, लेकिन मैं उन्हें मना लूंगी। ———————–
ये खबर भी पढ़ें माघ मेले में कमाई और वायरल होने पहुंचे युवा:गिटार के साथ फोटो खिंचवाने को रोजगार बनाया, कोई पुष्पा बना प्रयागराज में महाकुंभ- 2025 से पहले जो माघ मेला होता था, उसकी पहचान धार्मिक थी। महाकुंभ ने रोजगार और बहुत सारे लोगों को पहचान दी। अब इसका असर माघ मेला- 2026 में नजर आ रहा। बहुत सारे नौजवान रोजगार की तलाश में माघ मेले में आ गए। कुछ कमा रहे, तो कुछ अभी संघर्ष कर रहे। इसी तरह से कई ऐसे नौजवान हैं, जो अपने अंदर की योग्यता से पॉपुलर होना चाहते हैं। पढ़िए पूरी खबर
हम माघ मेला क्षेत्र में संगम थाने के सामने एक चाय की दुकान पर पहुंचे। यहीं हमारी मुलाकात संदीप से हुई। बातचीत में पता चला कि संदीप प्रयागराज के नैनी के शुआट्स एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एमटेक कर चुके हैं। माघ मेला में आने वाले बड़ी संख्या में लोग इनके सप्लाई किए दूध से बनी चाय पीते हैं। संदीप बताते हैं- मैं अंबेडकरनगर का रहने वाला हूं। हम 4 भाई हैं। मेरे 2 भाई दिल्ली पुलिस में हैं, जबकि तीसरा भाई इंजीनियर है। वो आगे बताते हैं- पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए ऑफर तो आए, लेकिन मुझे नौकरी करना अच्छा नहीं लगा। पिता की डेढ़ साल पहले डेथ हो गई थी। इसके बाद मैंने खुद का बिजनेस शुरू करने का प्लान बनाया। एक दोस्त हैं, जिनकी डेयरी है। बस वहीं से दूध की सप्लाई का काम शुरू किया। लेकिन मैं माघ मेले में सिर्फ दूध की सप्लाई करने नहीं, बल्कि सेवाभाव के साथ आया हूं। 2. मोहित, बीटेक बीटेक के बाद मोहित बना चाय वाला
मोहित जौनपुर के रहने वाले हैं। वो बताते हैं- मैंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से बीटेक किया है। कोरोना काल में कोई काम नहीं सूझा, तो चाय का काम शुरू कर दिया। हम गुड़ वाली स्पेशल चाय बनाने लगे। यह चाय लोगों को पसंद आ गई। जौनपुर, प्रयागराज के कौड़िहार और आजमगढ़ में हमने चाय के ठेले लगाए। अब माघ मेले में हमने पहली बार यह शुरुआत की है। उन्होंने कहा- हमारे देश में इंजीनियर की कमी तो है। इसलिए हमने बीटेक भी किया था, लेकिन बाद में नौकरी करने का इरादा बदल गया। चाय के काम में हमारे साथ 22 लड़के जुड़े हैं। उनके परिवार भी इसी काम से चल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस चाय को एक ब्रांड बनाने का टारगेट लेकर काम कर रहे हैं। 3. पूनम, ग्रेजुएट बोर्ड लगाया ग्रेजुएट चाय वाली, कहा- सेवाभाव से कर रही
दो लोगों से बातचीत करते हुए हमारी टीम माघ मेला क्षेत्र में ओल्ड जीटी रोड पर पहुंची। यहां लिखा था ‘ग्रेजुएट चाय वाली’। इस चाय की दुकान पर काम कर रही लड़की का नाम पूनम है। पूनम ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। कहती हैं- 3 महीने पहले ही मेरे पति की मौत हो गई थी। मेरे दो बच्चे हैं। माघ मेला लगा तो हमें लगा यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। क्यों न यहीं से किसी काम की शुरुआत की जाए। बस, इसके बाद मैंने चाय की दुकान खोल दी। पूनम कहती हैं- माघ मेले में सेवा का भाव लेकर आई हूं। गंगा मैया की गोद में रहकर कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। हमने पूछा- आप लड़की है, ये काम करने में दिक्कत नहीं हुई? वह कहती हैं- चाय की दुकान शुरू करने पर सगे-संबंधियों ने पहले मना किया। लेकिन, हमने इस काम को करने का फैसला कर लिया था। हालांकि, बाद में समझाने पर सब लोग राजी हो गए। तब यह काम शुरू कर सकी हूं। चाय का नाम ग्रेजुएट चाय वाली.. क्यों रखा? इस पर पूनम कहती हैं कि यह नाम थोड़ा यूनीक लगा। इसके साथ ही लोगों को यह पता चलेगा कि मैं ग्रेजुएट भी हूं, जिससे लोग अच्छे से पेश आएं। साथ ही मैंने क्वालिटी भी मेनटेन की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई सनातनी दुकान
माघ मेले एक बार फिर से सनातनी चाय की दुकान लगाई गई है। यह महाकुंभ में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल चाय की दुकान थी। इस चाय की दुकान पर एडिशनल शुगर के रूप में गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। यहां कई तरह से फ्लेवर वाली चाय तैयार कर लोगों को परोसी जाती है। सोनम पश्चिम बंगाल से आकर बेच रहीं चाय
संगम तट पर इन दिनों सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनी हैं सोनम। माघ मेले में वह चाय का कंटेनर लेकर घूमती रहती हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रहने वाली सोनम अपने पति के साथ चाय और पानी का कारोबार करने आए हैं। सोनम के पति पानी बेचते हैं, जबकि वह खुद चाय बेचती हैं। सोनम कहती हैं- मैं पिछले साल कुंभ में आई थी। तभी यहां चाय बेचने का प्लान बनाया था। मेरे परिवार वाले हमसे नाराज हैं, लेकिन मैं उन्हें मना लूंगी। ———————–
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