‘मैं रचिता को बेटी की तरह मानती थी। कुछ भी खाना बनाती थी तो रचिता को जरूर बुलाती थी। होली के समय मैंने उसे अपने घर में 4 दिन रखा था। मुझे क्या पता था कि जिसे मैं खाना बना-बनाकर खिला रही हूं, वही रचिता एक दिन मेरे बेटे को मार डालेगी। उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगी। मेरा बेटा उसे गुरु मानता था। उसने जरा भी मेरे बेटे के बारे में नहीं सोचा। उसने टीचर के रिश्ते को कलंकित किया। मुझे डर लगता था कि कहीं ये लोग मेरे अन्य दोनों बच्चों को न मार दें। इसलिए मैंने कानपुर छोड़ दिया। मैं सूरत चली गई। मैं अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए 1196 किलोमीटर दूर से कानपुर छोटी बेटी को साथ आती थी।’ ये कहना है कुशाग्र की मां मां सोनिया कनोडिया का। बताया कि मेरा बेटा मुझे बहुत याद आता है। मैं जब तक जिंदा हूं। तब तक उसे नहीं भूला सकती। मुझे रचिता से नफरत हो गई है। उसे और उसके साथियों को फांसी होनी चाहिए। 30 अक्टूबर 2023 को हाईस्कूल के छात्र कुशाग्र कनोडिया की कोचिंग जाते समय अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और सहयोगी शिवा गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह की अदालत ने तय किया कि ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त आर्यन ने मिलकर कुशाग्र की हत्या की थी। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए । 13 जनवरी को आखिरी सुनवाई हुई थी। अब 22 जनवरी को कोर्ट फैसला सुनाएगी। मां बोली- हत्यारों को जब फांसी होगी, तभी आत्मा को शांति मिलेगी कुशाग्र के हत्यारों को दोषी करार देने के बाद कुशाग्र की मां ने दैनिक भास्कर ऐप की टीम से बात की। उन्होंने कहा- हत्यारों को फांसी हो, तभी बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। उस दिन (30 अक्टूबर 2023) मेरा बेटा ट्यूशन पढ़ने गया था। रास्ते से प्रभात ने उसे किडनैप कर लिया। वो ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का बॉयफ्रेंड था, इसलिए मेरा बच्चा उसे भी अपना गुरु मानता था। इसलिए मेरा बेटा प्रभात के साथ चला गया। वहां मेरे बच्चे को मार डाला। रचिता भी वहीं मौजूद थी। मेरा बेटा साढ़े सात से 8 बजे तक घर आ जाता था। मगर उस दिन नहीं आया। मैंने उसको कॉल किया, तो उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था। मैंने दो से तीन बार कॉल की। मगर उसका फोन बंद ही आया। मैं घबरा गई। तब मेरे छोटे बेटे ने मुझे समझाया कि मम्मा हो सकता है, कि भइया ने मोबाइल बंद कर दिया हो। थोड़ी देर रुक जाओ। मगर मेरा मन नहीं माना, मैंने तुरंत कोचिंग में फोन किया। पता चला कि मेरा बेटा कोचिंग पहुंचा ही नहीं था। कुछ देर बाद मेरे घर फिरौती का लेटर आया। गार्ड ने बताया कि रचिता की स्कूटी से कोई लेटर फेंक कर गया है। रचिता हर 10 मिनट में फोन कर कुशाग्र के बारे में पूछ रही थी
इसके बाद मैंने रचिता को फोन किया। उससे पूछा कि तुम्हारी स्कूटी कहां है? वह बोली- क्या हुआ भाभी? मेरी स्कूटी तो मेरे पास है। मैंने उसे बताया कि कुशाग्र घर नहीं आया। इसके बाद रचिता हर 10 मिनट में मुझे फोन कर पूछ रही थी। क्या हुआ भाभी? कुशाग्र का कुछ पता चला क्या? फिर मैं रचिता के घर पहुंची। मैंने उससे कहा कि स्कूटी कहां है तुम्हारी तो वह बोली कि भाभी उसे तो प्रभात लेकर गया है। उसे समय वह घबराई हुई थी। वहां से हम प्रभात के घर गए। वहां मुझे स्कूटी मिली। मैंने प्रभात से पूछा तो उसने कुछ भी जानकारी होने से इनकार कर दिया। मगर मुझे उस पर शक हो गया। हम लोगों ने पुलिस को जानकारी देकर सब बता दिया। पुलिस ने पूछताछ की तो प्रभात और रचिता ने सच कबूल दिया। रात करीब 2:30 बजे मुझे पुलिस ने बताया कि रचिता ने अपने बॉयफ्रेंड और एक लड़के के साथ मिलकर मेरे बेटे को मार डाला है। मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे
सोनिया ने बताया कि जब हम लोग प्रभात के घर पहुंचे थे वह मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे। अगर हम लोग सही समय पर नहीं पहुंचते तो मेरे बच्चे की लाश तक नहीं मिलती। सोनिया ने बताया कि प्रभात ने पुलिस को बताया था कि घटना वाले दिन प्रभात मेरे बेटे को अपने घर के पास ले गया। उसने मेरे बेटे से कहा कि हम लोग तो गरीब आदमी हैं, तुम तो मेरे घर का पानी भी नहीं पियोगे? जिस पर मेरे बेटे ने कहा कि ऐसी बात नहीं है अंकल। लाइए मैं पानी पी लूंगा। फिर प्रभात मेरे बेटे कुशाग्र को अंदर ले गया। उसे पानी दिया। मेरा बेटा जब पानी पीकर बाहर निकलने लगा तो हत्यारों ने गला दबाकर मेरे बेटे को मार डाला। कुशाग्र के मर्डर की योजना पहले ही बना ली थी। 29 अक्टूबर को ही उसने फिरौती का लेटर लिख लिया था। प्रभात ने अपने बयान में बताया था कि फिरौती लेने के बाद वह मेरे बच्चे को काट कर गंगा में फेंकने वाले थे। 600 पेज की चार्जशीट, 240 पेज की हुई जिरह
मंगलवार को कुशाग्र हत्याकांड के आरोपी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके साथी आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा को एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट ने दोषी ठहराया। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि पुलिस की ओर से मामले में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए थे। ट्रायल के दौरान 240 पेज की जिरह हुई, कोर्ट में 42 कागजात साबित कराए गए थे। साथ ही घटना से जुड़ी हुई 112 वस्तुएं पुलिस ने बरामद कराई थी। सीसीटीवी कोर्ट में दिखाए गए, जिसमें प्रभात और कुशाग्र कमरे में जाते दिखे थे। 30 लाख फिरौती का पत्र डालते हुए प्रभात और शिवा कैद हुए थे, जबकि घटना के समय प्रभात के घर के बाहर शिवा टहलते हुए दिखा था। 313 के बयान में रचिता ने प्रभात को और प्रभात ने भी रचिता को अपना प्रेमी बताया था। कोर्ट ने अपहरण और हत्या में तीन आरोपियों को और कुशाग्र को अपहरण व हत्या में दोषी ठहराया गया। इस्कॉन से पहुंचे पुजारी, कहा- सजा दिलाने के लिए की प्रार्थना
कुशाग्र की हत्या का फैसला आने के जानकारी पर बिठूर स्थित इस्कॉन मंदिर से पुजारी चंदन कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कुशाग्र बहुत ही अच्छा बच्चा था, वह त्योहार में मंदिर आता था। बहुत दिल से सेवाएं करता था। बहुत ही प्रेम से जुड़ा हुआ था, उसके साथ ऐसा हुआ तो हम लोगों को बहुत ही कष्ट हुआ। हम लोग शुरुआत से ही इस केस से जुड़े हुए थे, उसके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। अब सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम पढ़िए- कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या की गई थी
कानपुर शहर में आचार्य नगर निवासी मनीष कनोडिया कपड़ा कारोबारी हैं। उनका बेटा कुशाग्र जयपुरिया स्कूल में 10वीं का छात्र था। 30 अक्टूबर की शाम 4 बजे कुशाग्र स्कूटी से कोचिंग के लिए निकला। रास्ते में उसे ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का प्रेमी प्रभात मिल गया। वह उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद दोनों ओमनगर में इंद्र कुटी हाता स्थित प्रभात के घर पहुंचे। प्रभात आगे-आगे चल रहा था, उसके पीछे-पीछे हेलमेट पहने कुशाग्र जा रहा था। इसी के बगल वाले कमरे में रचिता रुकी थी, जब कुशाग्र प्रभात के घर पहुंचा, तो रचिता भी वहां आ गई। फिर प्रभात शुक्ला कुशाग्र को एक स्टोरनुमा कमरे में बहाने से लेकर गए और प्रभात की गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले को डायवर्ट करने के लिए लेटर में लिखा- ‘अल्लाह हू अकबर’
हत्या के दौरान प्रभात का दोस्त आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा कमरे के बाहर खड़ा था। कुशाग्र की हत्या के बाद प्रभात और शिवा रचिता की स्कूटी लेकर कुशाग्र के घर पहुंचे। कुशाग्र के किडनैप होने और 30 लाख की फिरौती का लेटर लिखा। साथ ही मामले को डायवर्ट करने के लिए ‘अल्लाह हू अकबर’ भी लिख दिया। इसके बाद वह लेटर कुशाग्र के घर में फेंक आया था। लेटर फेंकने के दौरान फ्लैट के गार्ड राजेंद्र को स्कूटी पहचानी हुई लगी, उसने पास जाकर देखा तो स्कूटी के नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। नंबर प्लेट में काले टेप से F को E बनाया गया था। स्कूटी रचिता की थी, घर पहुंचे कुशाग्र के परिजन
गार्ड राजेंद्र ने कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया को बताया कि स्कूटी रचिता की थी, जिस पर परिजन रचिता के घर पहुंचे, जहां वो घबराई हुई बाहर आई। बोली कि मैंने कुछ नहीं किया भाभी… इस पर परिजनों ने स्कूटी के बारे में पूछा। रचिता ने कहा- मेरी स्कूटी प्रभात लेकर गया था। परिजन पुलिस के साथ इंद्रकुटी हाता पहुंचे, तलाशी ली गई, जहां प्रभात के घर के बाहर बने कमरे से कुशाग्र की डेड बॉडी बरामद की गई थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को लेकर सख्ती से पूछताछ की। रचिता ने बताया कि उसे प्रभात से शादी करनी थी। पैसों की जरूरत थी, जिस कारण उसने कुशाग्र के अपहरण की योजना बनाई थी। अपहरण की फिरौती से अमीर बनना था। पुलिस ने प्रभात को बनाया था गैंग का लीडर
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने प्रभात की निशानदेही पर कुशाग्र का शव प्रभात शुक्ला के घर के बाहर बने कमरे से बरामद किया था। 31 मार्च 2024 को तीनों आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की थी। पुलिस ने गैंग का लीडर प्रभात शुक्ला को बनाया था। मुकदमा एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट में ट्रायल पर था। ADGC भास्कर मिश्रा ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पूरी घटना को कोर्ट में साबित किया। मामले में 14 गवाह पेश किए गए थे। इसके साथ ही CCTV, सबूत, कुशाग्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा और अन्य दस्तावेजों के बारे में बताया। ADGC ने बताया कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसले की तारीख 20 जनवरी तय की है। अब हूबहू पढ़िए फिरौती के लेटर में क्या लिखा था? पहला पेजः अल्लाह पर भरोसा रखो…
मैं नहीं चाहता कि आपका त्योहार बर्बाद हो, आप मेरे हाथ में पैसे रखो और लड़का 1 घंटे बाद आपके पास होगा। अल्लाह हू अकबर… इस लड़के की गाड़ी और मोबाइल दोनों आपके घर के पास होटल सिटी क्लब के सामने खड़ी है। मैं आपका नुकसान नहीं चाहता। आपसे बार-बार बोल रहा हूं कि घबराओ नहीं अल्लाह पर भरोसा रखो। दूसरा पेजः पैसे का इंतजाम होते ही घर पर पूजन वाले झंडे लगा देना
आपसे निवेदन है कि आप ये बात पुलिस, न ही अपनी लखनऊ वाली फैमिली, न ही अपने अगल-बगल किसी को न बताएं कि हमने कुशाग्र को किडनैप कर लिया है। आपके पास दो या तीन दिन का समय है। आप जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम कर लो। अगर ये बात कहीं फैली तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम करो और अपना बच्चा 1 घंटे बाद घर में देखो, और पैसे लेकर रात में 2 बजे कोकाकोला चौराहे पर मिलो। मैं पैसे लेने आऊंगा, जैसे ही पैसे मेरे पास आएंगे उसके ठीक 1 घंटे बाद लड़का आपके पास होगा। और पैसे का इंतजाम हो जाए तो घर पर चारो तरफ पूजन वाले झंडे लगा देना। मैं देख लूंगा इसके बाद आपको फोन करूंगा और कोई भी होशियारी हुई तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। मेरी नजर आपके घर पर ही होगी, कोई भी बात बाहर पता चली तो आप ध्यान रखना, और आप बिल्कुल भी घबराओ नहीं, आपका लड़का बिल्कुल सही सलामत घर पहुंच जाएगा। उसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर है। कुशाग्र के बर्थडे से शुरू हुई अपहरण-हत्याकांड की प्लानिंग
कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया ने अपने बयान में बताया था- 13 अक्टूबर 2021 को मेरे बेटे कुशाग्र का जन्मदिन था। उसमें रचिता अपने प्रेमी प्रभात शुक्ला को लेकर मेरे घर आई थी। प्रभात उस दिन पहली बार मेरे घर आया था। रचिता ने प्रभात को अपना ब्वॉयफ्रेंड बताकर हमसे मिलवाया था। इस दौरान प्रभात ने कुशाग्र से कोचिंग जाने का समय, किस रास्ते से स्कूल और कोचिंग जाता है और कब आता है यह सारी जानकारियां ले ली थी। उसी दिन चकाचौंध देख प्रभात और रचिता ने अपहरण करने का प्लान तैयार कर लिया था। फिरौती वसूलने के बाद प्रभात और रचिता हिमाचल प्रदेश में बसने वाले थे। अपहरण से पहले कराई थी नई कार की बुकिंग
रचिता और प्रभात से पूछताछ मं यह भी सामने आया था कि दोनों ने प्लानिंग इस कदर तक कर ली थी, कि जरीब चौकी स्थित कार के शोरूम में दोनों कार पसंद करने गए थे, एक कार को फाइनल भी कर दिया था। बस फिरौती की रकम मिलते ही उसका एडवांस पेमेंट करके कार उठानी थी। इसके लिए सभी दस्तावेज शोरूम में जमा करा दिए थे। एक घंटे में 8 बार रचिता ने प्रभात को की थी कॉल
ADGC ने बताया कि हत्या के बाद प्रभात शुक्ला मृतक कुशाग्र का मोबाइल लेकर जरीब चौकी गया था, जिसे पुलिस ने तेजाब मिल कैंपस से बरामद किया। हत्याकांड के बाद जब शिवा, कुशाग्र के घर फिरौती का लेटर डालने गया था, तब रचिता ने एक घंटे के भीतर प्रभात को 7 से 8 बार कॉल किया था। घटना में तीनों आरोपियों की मिलीभगत साबित करते हुए अभियोजन ने कोर्ट को बताया था कि घटना के 15 दिन पहले प्रभात और रचिता कुशाग्र के घर गए, जहां उसकी कोचिंग के बारे में जानकारी ली। इसके बाद 14, 15 और 15 अक्टूबर को प्रभात और शिवा करीब 6 से 7 बार लंबी बातचीत हुई थी।
इसके बाद मैंने रचिता को फोन किया। उससे पूछा कि तुम्हारी स्कूटी कहां है? वह बोली- क्या हुआ भाभी? मेरी स्कूटी तो मेरे पास है। मैंने उसे बताया कि कुशाग्र घर नहीं आया। इसके बाद रचिता हर 10 मिनट में मुझे फोन कर पूछ रही थी। क्या हुआ भाभी? कुशाग्र का कुछ पता चला क्या? फिर मैं रचिता के घर पहुंची। मैंने उससे कहा कि स्कूटी कहां है तुम्हारी तो वह बोली कि भाभी उसे तो प्रभात लेकर गया है। उसे समय वह घबराई हुई थी। वहां से हम प्रभात के घर गए। वहां मुझे स्कूटी मिली। मैंने प्रभात से पूछा तो उसने कुछ भी जानकारी होने से इनकार कर दिया। मगर मुझे उस पर शक हो गया। हम लोगों ने पुलिस को जानकारी देकर सब बता दिया। पुलिस ने पूछताछ की तो प्रभात और रचिता ने सच कबूल दिया। रात करीब 2:30 बजे मुझे पुलिस ने बताया कि रचिता ने अपने बॉयफ्रेंड और एक लड़के के साथ मिलकर मेरे बेटे को मार डाला है। मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे
सोनिया ने बताया कि जब हम लोग प्रभात के घर पहुंचे थे वह मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे। अगर हम लोग सही समय पर नहीं पहुंचते तो मेरे बच्चे की लाश तक नहीं मिलती। सोनिया ने बताया कि प्रभात ने पुलिस को बताया था कि घटना वाले दिन प्रभात मेरे बेटे को अपने घर के पास ले गया। उसने मेरे बेटे से कहा कि हम लोग तो गरीब आदमी हैं, तुम तो मेरे घर का पानी भी नहीं पियोगे? जिस पर मेरे बेटे ने कहा कि ऐसी बात नहीं है अंकल। लाइए मैं पानी पी लूंगा। फिर प्रभात मेरे बेटे कुशाग्र को अंदर ले गया। उसे पानी दिया। मेरा बेटा जब पानी पीकर बाहर निकलने लगा तो हत्यारों ने गला दबाकर मेरे बेटे को मार डाला। कुशाग्र के मर्डर की योजना पहले ही बना ली थी। 29 अक्टूबर को ही उसने फिरौती का लेटर लिख लिया था। प्रभात ने अपने बयान में बताया था कि फिरौती लेने के बाद वह मेरे बच्चे को काट कर गंगा में फेंकने वाले थे। 600 पेज की चार्जशीट, 240 पेज की हुई जिरह
मंगलवार को कुशाग्र हत्याकांड के आरोपी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके साथी आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा को एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट ने दोषी ठहराया। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि पुलिस की ओर से मामले में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए थे। ट्रायल के दौरान 240 पेज की जिरह हुई, कोर्ट में 42 कागजात साबित कराए गए थे। साथ ही घटना से जुड़ी हुई 112 वस्तुएं पुलिस ने बरामद कराई थी। सीसीटीवी कोर्ट में दिखाए गए, जिसमें प्रभात और कुशाग्र कमरे में जाते दिखे थे। 30 लाख फिरौती का पत्र डालते हुए प्रभात और शिवा कैद हुए थे, जबकि घटना के समय प्रभात के घर के बाहर शिवा टहलते हुए दिखा था। 313 के बयान में रचिता ने प्रभात को और प्रभात ने भी रचिता को अपना प्रेमी बताया था। कोर्ट ने अपहरण और हत्या में तीन आरोपियों को और कुशाग्र को अपहरण व हत्या में दोषी ठहराया गया। इस्कॉन से पहुंचे पुजारी, कहा- सजा दिलाने के लिए की प्रार्थना
कुशाग्र की हत्या का फैसला आने के जानकारी पर बिठूर स्थित इस्कॉन मंदिर से पुजारी चंदन कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कुशाग्र बहुत ही अच्छा बच्चा था, वह त्योहार में मंदिर आता था। बहुत दिल से सेवाएं करता था। बहुत ही प्रेम से जुड़ा हुआ था, उसके साथ ऐसा हुआ तो हम लोगों को बहुत ही कष्ट हुआ। हम लोग शुरुआत से ही इस केस से जुड़े हुए थे, उसके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। अब सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम पढ़िए- कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या की गई थी
कानपुर शहर में आचार्य नगर निवासी मनीष कनोडिया कपड़ा कारोबारी हैं। उनका बेटा कुशाग्र जयपुरिया स्कूल में 10वीं का छात्र था। 30 अक्टूबर की शाम 4 बजे कुशाग्र स्कूटी से कोचिंग के लिए निकला। रास्ते में उसे ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का प्रेमी प्रभात मिल गया। वह उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद दोनों ओमनगर में इंद्र कुटी हाता स्थित प्रभात के घर पहुंचे। प्रभात आगे-आगे चल रहा था, उसके पीछे-पीछे हेलमेट पहने कुशाग्र जा रहा था। इसी के बगल वाले कमरे में रचिता रुकी थी, जब कुशाग्र प्रभात के घर पहुंचा, तो रचिता भी वहां आ गई। फिर प्रभात शुक्ला कुशाग्र को एक स्टोरनुमा कमरे में बहाने से लेकर गए और प्रभात की गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले को डायवर्ट करने के लिए लेटर में लिखा- ‘अल्लाह हू अकबर’
हत्या के दौरान प्रभात का दोस्त आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा कमरे के बाहर खड़ा था। कुशाग्र की हत्या के बाद प्रभात और शिवा रचिता की स्कूटी लेकर कुशाग्र के घर पहुंचे। कुशाग्र के किडनैप होने और 30 लाख की फिरौती का लेटर लिखा। साथ ही मामले को डायवर्ट करने के लिए ‘अल्लाह हू अकबर’ भी लिख दिया। इसके बाद वह लेटर कुशाग्र के घर में फेंक आया था। लेटर फेंकने के दौरान फ्लैट के गार्ड राजेंद्र को स्कूटी पहचानी हुई लगी, उसने पास जाकर देखा तो स्कूटी के नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। नंबर प्लेट में काले टेप से F को E बनाया गया था। स्कूटी रचिता की थी, घर पहुंचे कुशाग्र के परिजन
गार्ड राजेंद्र ने कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया को बताया कि स्कूटी रचिता की थी, जिस पर परिजन रचिता के घर पहुंचे, जहां वो घबराई हुई बाहर आई। बोली कि मैंने कुछ नहीं किया भाभी… इस पर परिजनों ने स्कूटी के बारे में पूछा। रचिता ने कहा- मेरी स्कूटी प्रभात लेकर गया था। परिजन पुलिस के साथ इंद्रकुटी हाता पहुंचे, तलाशी ली गई, जहां प्रभात के घर के बाहर बने कमरे से कुशाग्र की डेड बॉडी बरामद की गई थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को लेकर सख्ती से पूछताछ की। रचिता ने बताया कि उसे प्रभात से शादी करनी थी। पैसों की जरूरत थी, जिस कारण उसने कुशाग्र के अपहरण की योजना बनाई थी। अपहरण की फिरौती से अमीर बनना था। पुलिस ने प्रभात को बनाया था गैंग का लीडर
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने प्रभात की निशानदेही पर कुशाग्र का शव प्रभात शुक्ला के घर के बाहर बने कमरे से बरामद किया था। 31 मार्च 2024 को तीनों आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की थी। पुलिस ने गैंग का लीडर प्रभात शुक्ला को बनाया था। मुकदमा एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट में ट्रायल पर था। ADGC भास्कर मिश्रा ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पूरी घटना को कोर्ट में साबित किया। मामले में 14 गवाह पेश किए गए थे। इसके साथ ही CCTV, सबूत, कुशाग्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा और अन्य दस्तावेजों के बारे में बताया। ADGC ने बताया कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसले की तारीख 20 जनवरी तय की है। अब हूबहू पढ़िए फिरौती के लेटर में क्या लिखा था? पहला पेजः अल्लाह पर भरोसा रखो…
मैं नहीं चाहता कि आपका त्योहार बर्बाद हो, आप मेरे हाथ में पैसे रखो और लड़का 1 घंटे बाद आपके पास होगा। अल्लाह हू अकबर… इस लड़के की गाड़ी और मोबाइल दोनों आपके घर के पास होटल सिटी क्लब के सामने खड़ी है। मैं आपका नुकसान नहीं चाहता। आपसे बार-बार बोल रहा हूं कि घबराओ नहीं अल्लाह पर भरोसा रखो। दूसरा पेजः पैसे का इंतजाम होते ही घर पर पूजन वाले झंडे लगा देना
आपसे निवेदन है कि आप ये बात पुलिस, न ही अपनी लखनऊ वाली फैमिली, न ही अपने अगल-बगल किसी को न बताएं कि हमने कुशाग्र को किडनैप कर लिया है। आपके पास दो या तीन दिन का समय है। आप जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम कर लो। अगर ये बात कहीं फैली तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम करो और अपना बच्चा 1 घंटे बाद घर में देखो, और पैसे लेकर रात में 2 बजे कोकाकोला चौराहे पर मिलो। मैं पैसे लेने आऊंगा, जैसे ही पैसे मेरे पास आएंगे उसके ठीक 1 घंटे बाद लड़का आपके पास होगा। और पैसे का इंतजाम हो जाए तो घर पर चारो तरफ पूजन वाले झंडे लगा देना। मैं देख लूंगा इसके बाद आपको फोन करूंगा और कोई भी होशियारी हुई तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। मेरी नजर आपके घर पर ही होगी, कोई भी बात बाहर पता चली तो आप ध्यान रखना, और आप बिल्कुल भी घबराओ नहीं, आपका लड़का बिल्कुल सही सलामत घर पहुंच जाएगा। उसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर है। कुशाग्र के बर्थडे से शुरू हुई अपहरण-हत्याकांड की प्लानिंग
कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया ने अपने बयान में बताया था- 13 अक्टूबर 2021 को मेरे बेटे कुशाग्र का जन्मदिन था। उसमें रचिता अपने प्रेमी प्रभात शुक्ला को लेकर मेरे घर आई थी। प्रभात उस दिन पहली बार मेरे घर आया था। रचिता ने प्रभात को अपना ब्वॉयफ्रेंड बताकर हमसे मिलवाया था। इस दौरान प्रभात ने कुशाग्र से कोचिंग जाने का समय, किस रास्ते से स्कूल और कोचिंग जाता है और कब आता है यह सारी जानकारियां ले ली थी। उसी दिन चकाचौंध देख प्रभात और रचिता ने अपहरण करने का प्लान तैयार कर लिया था। फिरौती वसूलने के बाद प्रभात और रचिता हिमाचल प्रदेश में बसने वाले थे। अपहरण से पहले कराई थी नई कार की बुकिंग
रचिता और प्रभात से पूछताछ मं यह भी सामने आया था कि दोनों ने प्लानिंग इस कदर तक कर ली थी, कि जरीब चौकी स्थित कार के शोरूम में दोनों कार पसंद करने गए थे, एक कार को फाइनल भी कर दिया था। बस फिरौती की रकम मिलते ही उसका एडवांस पेमेंट करके कार उठानी थी। इसके लिए सभी दस्तावेज शोरूम में जमा करा दिए थे। एक घंटे में 8 बार रचिता ने प्रभात को की थी कॉल
ADGC ने बताया कि हत्या के बाद प्रभात शुक्ला मृतक कुशाग्र का मोबाइल लेकर जरीब चौकी गया था, जिसे पुलिस ने तेजाब मिल कैंपस से बरामद किया। हत्याकांड के बाद जब शिवा, कुशाग्र के घर फिरौती का लेटर डालने गया था, तब रचिता ने एक घंटे के भीतर प्रभात को 7 से 8 बार कॉल किया था। घटना में तीनों आरोपियों की मिलीभगत साबित करते हुए अभियोजन ने कोर्ट को बताया था कि घटना के 15 दिन पहले प्रभात और रचिता कुशाग्र के घर गए, जहां उसकी कोचिंग के बारे में जानकारी ली। इसके बाद 14, 15 और 15 अक्टूबर को प्रभात और शिवा करीब 6 से 7 बार लंबी बातचीत हुई थी।