‘ए गाड़ी वाले भइया। ए बाबू जी। आप अपनी गाड़ी पीछे मोड़ के ले आइए। उधर कहां लेकर जा रहे हैं। आप तो पढ़े-लिखे समझदार हैं बाबू जी। गाड़ी पीछे मोड़ लीजिए। आ जाइए। आपकी सेवा में वाहन स्टैंड बना है।’ प्रयागराज माघ मेले में लाउडस्पीकर के जरिए ये जो आवाज आपके पास आती है, इसके पीछे होमगार्ड विमल कुमार शर्मा हैं। इसके अलावा दिन भर यह भी आवाज आप सुनते ही होंगे- फला व्यक्ति खो गए हैं, जहां भी हों आप संगम टावर के पास आ जाइए। आपके भाई इंतजार कर रहे हैं। विमल कुमार शर्मा ये काम पिछले 23 साल से कर रहे। अब तक मेले में 2 लाख से ज्यादा बिछड़े लोगों को अपनों से मिला चुके हैं। उनके साथ दो अन्य होमगार्ड भी अनाउंसमेंट का यह काम करते हैं। लेकिन, अधिकारियों की पहली पसंद आज भी विमल ही हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने उनसे बात की। आइए जानते हैं… 23 साल पहले की थी शुरुआत
विमल कुमार शर्मा इस वक्त 56 साल के हैं। प्रयागराज के ही मेजा इलाके के सोनाई गांव के रहने वाले हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गेट नंबर 4-5 पर ड्यूटी करते हैं। माघ मेला शुरू होते ही यहां आ जाते हैं। विमल कहते हैं- 2003 में पहली बार मेरी बातचीत और भाषा को पसंद करते हुए मुझे अनाउंसमेंट के लिए बुलाया गया। मेरी बोली-भाषा लोगों को पसंद आई। इसके बाद मैं अधिकारियों का पसंद बन गया। जब भी मेला शुरू होता है, अधिकारी बोलते हैं- विमल कुमार अपनी जगह पर पहुंच आइए। विमल कहते हैं- मैं यहां अनाउंसमेंट करके लोगों को मिलाने को अपना सौभाग्य समझता हूं। यह गंगा मइया का आशीर्वाद ही है, जो इतने वक्त से यह कर रहा हूं। 4-5 साल की नौकरी और बची है। इस दौरान तो करूंगा ही, आगे जब रिटायर हो जाऊंगा तब भी मैं निस्वार्थ भाव (फ्री) से यहां आऊंगा। लगातार अनाउंसमेंट का काम करता रहूंगा। इस काम से मुझे सुकून मिलता है। मौनी अमावस्या पर 8-9 हजार लोगों को मिलवाया
माघ मेले में सामान्य दिनों में लोगों के अपनों से बिछड़ने वालों की संख्या कम होती है। लेकिन जब प्रमुख स्नान होता है, उस दिन इतने ज्यादा लोग बिछड़ते हैं। हर मिनट 10 से ज्यादा लोगों के नाम पुकारे जाते हैं। विमल बताते हैं- मौनी अमावस्या पर भोर के 3 बजे से अनाउंसमेंट शुरू हो गया था। रात 11 बजे तक यह क्रम चलता रहा। उस दिन 8 से 9 हजार लोगों को मिलवाया गया। हां, 100-200 लोग ऐसे भी थे, जिनके लोग उनसे मिलने नहीं आए। उन्हें हमारी ही टीम हनुमान मंदिर के पास बने भूले-भटके शिविर में छोड़कर आई। विमल से हमने पूछा कि क्या इसके लिए आपको कोई अलग से पैसा मिलता है? वह कहते हैं- नहीं, इसके लिए हमें कोई पैसा नहीं मिलता। लेकिन, इस काम को करने में बहुत सुकून मिलता है। कई बार छोटे बच्चे अपनों से बिछड़ जाते हैं, उन्हें यहीं नाश्ता-पानी करवाया जाता है। जब कोई नहीं आता तो भूले-भटके शिविर पहुंचा दिया जाता है। वहां के लोग उनके वहीं रहने की व्यवस्था करते हैं। फिर भी कोई नहीं आता, तो उसे उसके घर जाने वाली बस-ट्रेन पर टिकट देकर बैठा देते हैं। बस वाले को भी कह देते हैं कि इन्हें वहीं उतार दे। दो अन्य लोग भी साथ में जिम्मेदारी निभाते हैं
विमल के अलावा दो और लोग अनाउंसमेंट का काम करते हैं। इनमें एक होमगार्ड जगन्नाथ पटेल हैं, दूसरे सुरेश चंद्र भारती। जगन्नाथ का घर भी विमल के ही पास है। सुरेश चंद्र भी मेजा साइड के हैं। उनकी इस वक्त ड्यूटी मेजा थाने में है। पिछले 4 सालों से वह अनाउंसमेंट के लिए आ रहे और विमल से सीख रहे हैं। विमल कहते हैं- दोनों ही हमारे शिष्य हैं। दोनों ही अब अच्छे से सीख गए हैं और अनाउंसमेंट का काम करते हैं। विमल से हमने पूछा कि कई बार आप लोगों को गाड़ी हटाने, उधर से भागने की बात कहते हैं। क्या कोई बुरा नहीं मानता? विमल कहते हैं- मेरी आवाज ही ऐसी है कि कोई बुरा नहीं मानता। लहजा हमेशा नम्र रखते हैं। कई बार तो लोग गाड़ी पीछे मोड़ते हैं और फिर सॉरी-सॉरी बोलते हुए गाड़ी पीछे लेकर चले जाते हैं। कई बार तो अधिकारियों को भी टोक दिया। वो भी बुरा नहीं मानते, तुरंत ही गाड़ी पीछे घुमा लेते हैं। विमल के पास कोई ऐसा आंकड़ा तो नहीं है कि वह यह बता पाएं कि अब तक कितने लोगों को मिलवाया। लेकिन, वह दावा करते हैं कि 2 लाख से ज्यादा लोगों को संगम पर मिलवा चुका हूं। विमल जिस तरह से काम कर रहे, उससे तो यही लगता है कि पिछले 23 सालों में उन्होंने इससे ज्यादा लोगों को मिलवाया है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… हिंदू लड़कियां अब्दुल के चक्कर में क्यों पड़े, हर्षा रिछारिया बोलीं- डंडे से समझाने की जरूरत प्रयागराज में संगम में स्नान करके श्रद्धालु लौट रहे हैं। सामने 3 लोग चार्ट लेकर खड़े हैं। किसी में लिखा है- अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ तो किसी में लिखा है कब तक हिंदू कटता रहेगा? ये बैनर लेकर खड़े लोग कहते हैं कि लोगों को हम लव जिहाद को लेकर जागरूक कर रहे। पढ़ें पूरी खबर
विमल कुमार शर्मा इस वक्त 56 साल के हैं। प्रयागराज के ही मेजा इलाके के सोनाई गांव के रहने वाले हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गेट नंबर 4-5 पर ड्यूटी करते हैं। माघ मेला शुरू होते ही यहां आ जाते हैं। विमल कहते हैं- 2003 में पहली बार मेरी बातचीत और भाषा को पसंद करते हुए मुझे अनाउंसमेंट के लिए बुलाया गया। मेरी बोली-भाषा लोगों को पसंद आई। इसके बाद मैं अधिकारियों का पसंद बन गया। जब भी मेला शुरू होता है, अधिकारी बोलते हैं- विमल कुमार अपनी जगह पर पहुंच आइए। विमल कहते हैं- मैं यहां अनाउंसमेंट करके लोगों को मिलाने को अपना सौभाग्य समझता हूं। यह गंगा मइया का आशीर्वाद ही है, जो इतने वक्त से यह कर रहा हूं। 4-5 साल की नौकरी और बची है। इस दौरान तो करूंगा ही, आगे जब रिटायर हो जाऊंगा तब भी मैं निस्वार्थ भाव (फ्री) से यहां आऊंगा। लगातार अनाउंसमेंट का काम करता रहूंगा। इस काम से मुझे सुकून मिलता है। मौनी अमावस्या पर 8-9 हजार लोगों को मिलवाया
माघ मेले में सामान्य दिनों में लोगों के अपनों से बिछड़ने वालों की संख्या कम होती है। लेकिन जब प्रमुख स्नान होता है, उस दिन इतने ज्यादा लोग बिछड़ते हैं। हर मिनट 10 से ज्यादा लोगों के नाम पुकारे जाते हैं। विमल बताते हैं- मौनी अमावस्या पर भोर के 3 बजे से अनाउंसमेंट शुरू हो गया था। रात 11 बजे तक यह क्रम चलता रहा। उस दिन 8 से 9 हजार लोगों को मिलवाया गया। हां, 100-200 लोग ऐसे भी थे, जिनके लोग उनसे मिलने नहीं आए। उन्हें हमारी ही टीम हनुमान मंदिर के पास बने भूले-भटके शिविर में छोड़कर आई। विमल से हमने पूछा कि क्या इसके लिए आपको कोई अलग से पैसा मिलता है? वह कहते हैं- नहीं, इसके लिए हमें कोई पैसा नहीं मिलता। लेकिन, इस काम को करने में बहुत सुकून मिलता है। कई बार छोटे बच्चे अपनों से बिछड़ जाते हैं, उन्हें यहीं नाश्ता-पानी करवाया जाता है। जब कोई नहीं आता तो भूले-भटके शिविर पहुंचा दिया जाता है। वहां के लोग उनके वहीं रहने की व्यवस्था करते हैं। फिर भी कोई नहीं आता, तो उसे उसके घर जाने वाली बस-ट्रेन पर टिकट देकर बैठा देते हैं। बस वाले को भी कह देते हैं कि इन्हें वहीं उतार दे। दो अन्य लोग भी साथ में जिम्मेदारी निभाते हैं
विमल के अलावा दो और लोग अनाउंसमेंट का काम करते हैं। इनमें एक होमगार्ड जगन्नाथ पटेल हैं, दूसरे सुरेश चंद्र भारती। जगन्नाथ का घर भी विमल के ही पास है। सुरेश चंद्र भी मेजा साइड के हैं। उनकी इस वक्त ड्यूटी मेजा थाने में है। पिछले 4 सालों से वह अनाउंसमेंट के लिए आ रहे और विमल से सीख रहे हैं। विमल कहते हैं- दोनों ही हमारे शिष्य हैं। दोनों ही अब अच्छे से सीख गए हैं और अनाउंसमेंट का काम करते हैं। विमल से हमने पूछा कि कई बार आप लोगों को गाड़ी हटाने, उधर से भागने की बात कहते हैं। क्या कोई बुरा नहीं मानता? विमल कहते हैं- मेरी आवाज ही ऐसी है कि कोई बुरा नहीं मानता। लहजा हमेशा नम्र रखते हैं। कई बार तो लोग गाड़ी पीछे मोड़ते हैं और फिर सॉरी-सॉरी बोलते हुए गाड़ी पीछे लेकर चले जाते हैं। कई बार तो अधिकारियों को भी टोक दिया। वो भी बुरा नहीं मानते, तुरंत ही गाड़ी पीछे घुमा लेते हैं। विमल के पास कोई ऐसा आंकड़ा तो नहीं है कि वह यह बता पाएं कि अब तक कितने लोगों को मिलवाया। लेकिन, वह दावा करते हैं कि 2 लाख से ज्यादा लोगों को संगम पर मिलवा चुका हूं। विमल जिस तरह से काम कर रहे, उससे तो यही लगता है कि पिछले 23 सालों में उन्होंने इससे ज्यादा लोगों को मिलवाया है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… हिंदू लड़कियां अब्दुल के चक्कर में क्यों पड़े, हर्षा रिछारिया बोलीं- डंडे से समझाने की जरूरत प्रयागराज में संगम में स्नान करके श्रद्धालु लौट रहे हैं। सामने 3 लोग चार्ट लेकर खड़े हैं। किसी में लिखा है- अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ तो किसी में लिखा है कब तक हिंदू कटता रहेगा? ये बैनर लेकर खड़े लोग कहते हैं कि लोगों को हम लव जिहाद को लेकर जागरूक कर रहे। पढ़ें पूरी खबर