मायावती भतीजे को फ्रंटलाइन पर रखकर युवाओं को साधेंगी:मिशन- 2027 में जुटी बसपा, आकाश UP के 75 जिलों में करेंगे रोड-शो

बहुजन समाज पार्टी यूपी फतह करने के लिए हर जिले में रोड-शो और सभा करने की रणनीति बना रही है। पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद इस रणनीति में फ्रंट पर भूमिका निभाएंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी पूरे प्रदेश में माहौल बनाने की तैयारी कर रही है। इस दौरान आकाश हर जिले में जाएंगे। वहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगों से संवाद करेंगे। इस दौरान दूसरी पार्टी के बड़े नेताओं को बसपा की सदस्यता भी दिलाई जाएगी। आकाश आनंद कब से हर जिले में निकलेंगे? विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी आकाश को पूरे यूपी में घुमाकर क्या संदेश देना चाहती है? क्या 2027 विधानसभा में आकाश ही होंगे यूपी में पार्टी का चेहरा? पढ़िए पूरी खबर… मायावती के भतीजे आकाश आनंद अब यूपी में जोर-शोर से सक्रिय होंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आकाश फरवरी के आखिर या मार्च के पहले सप्ताह से यूपी के सभी 75 जिलों में रैली के लिए निकलेंगे। पार्टी स्तर पर इसकी गुपचुप तैयारी शुरू कर दी गई है। 2027 विधानसभा से पहले मायावती आकाश को पूरे प्रदेश में घुमाकर राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती हैं। खासकर आकाश के माध्यम से वह युवाओं को पार्टी के पाले में लाना चाहती हैं, जो चंद्रशेखर आजाद के साथ चले गए हैं। आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री
आकाश पहली बार 2017 में सहारनपुर की एक जनसभा में मायावती के साथ दिखे थे। इसके बाद से वह लगातार पार्टी का काम कर रहे थे। 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। यह फैसला तब लिया गया, जब सपा और बसपा का गठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद टूटा। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में आया था। आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है। उनकी शादी बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा से हुई है। आकाश पर क्यों दांव लगा रही बसपा वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं- आकाश की उम्र 30 के करीब है। वह युवा हैं। बसपा प्रमुख मायावती की अपीलिंग प्रदेश में सबसे अधिक है। लेकिन, उनके बाद आकाश को बसपा के कार्यकर्ता देखना-सुनना चाहते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में आकाश की सभाओं में भारी भीड़ उमड़ती थी। लेकिन, पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी के चलते मायावती ने उनके पर कतर दिए। इसका असर ये रहा कि बसपा के कोर वोटर में ये गलतफहमी पैदा हो गई कि मायावती भाजपा के दबाव में निर्णय ले रहीं। बसपा को इसका तिहरा नुकसान हुआ। पहला- दलितों का एक बड़ा वोट बैंक पीडीए का नारा लगा रही सपा-कांग्रेस के महागठबंधन की ओर चला गया। दूसरा- बसपा लोकसभा में यूपी से अपना खाता तक नहीं खोल पाई, जबकि 2019 के लोकसभा में उसके 10 सांसद थे। तीसरा- आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद नगीना सीट से जीतने में सफल रहे। पश्चिमी यूपी में दलितों के एक नए चेहरे के उभार के बाद बसपा को समझ में आया कि उससे क्या गलती हुई? इसी गलती को अब मायावती ठीक करने में जुटी हैं। यही वजह है कि मायावती न सिर्फ अपनी भतीजे को पार्टी में वापस लाईं, बल्कि अब उन्हें पार्टी में अघोषित तौर पर नंबर-2 की पोजिशन पर भी बैठा दिया। मायावती भतीजे आकाश आनंद के सहारे चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता पर ब्रेक लगाना चाहती हैं। दूसरी ओर, वह आकाश को सक्रिय करके बसपा कार्यकर्ताओं में उनकी स्वीकार्यता मजबूत करना चाहती हैं। इसका फायदा ये हाेगा कि जब कभी मायावती आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित करेंगी, तो कोई विरोध नहीं होगा। क्या 2027 में आकाश होंगे पार्टी का चेहरा? वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं- आकाश चेहरा रहेंगे, लेकिन मुख्य चेहरा मायावती ही होंगी। खुद मायावती अपने जन्मदिन पर पत्रकारों से बता चुकी हैं कि बसपा कार्यकर्ता उन्हें 5वीं बार यूपी का सीएम बनाने का मन बना चुके हैं। इससे साफ है, अभी मायावती के हाथ ही में संगठन और सत्ता मिलने पर सरकार की कमान रहेगी। हां, मायावती सरकार बनने पर भतीजे आकाश को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर अपनी देख-रेख में उनकी राजनीति को और निखारेंगी। बसपा में 1 से 10 नंबर तक मायावती ही चेहरा हैं। इसके बाद किसी दूसरे नेता का नंबर आता है। ये छवि पार्टी की कमजोरी भी साबित हुई। पहले बसपा में मायावती के बाद कई ऐसे नेता थे, जिन्हें महत्वपूर्ण माना जाता था। लेकिन, समय के साथ सभी को मायावती पार्टी से किनारे लगा चुकी हैं। ऐसे में अब उनके पास भतीजे आकाश के अलावा कोई दमदार चेहरा नहीं बचा है। अब आकाश ग्राउंड में उतरकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएंगे और मायावती बीच-बीच में जाकर इस माहौल को और गरमाएंगी। यूपी के हर जिले में रैली, रोड शो और जनसभाएं
बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- आकाश होली के बाद यूपी के दौरे पर निकलेंगे। इसकी पूरी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। बसपा ने 9 अक्टूबर, 2025 के बाद अपना ऐसा कार्यक्रम तैयार किया है कि हर महीने कोई न कोई महत्वपूर्ण आयोजन से पार्टी चर्चा में बनी रहे। मायावती का जन्मदिन का आयोजन भी निकल चुका है। फरवरी में धार्मिक आयोजन और होली के बीच एसआईआर को लेकर पार्टी का पूरा फोकस रहेगा। मार्च से पार्टी आकाश के जरिए पूरे यूपी में बसपा के पक्ष में एक जनसमर्थन वाला माहौल बनाना चाहती है। आकाश प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाएंगे। हर जिले में रैली से ग्राउंड लेवल पर कार्यकर्ताओं में जोश भरा जाएगा। युवाओं को बसपा की तरफ आकर्षित किया जाएगा। बिहार की युवा अधिकार यात्रा की तर्ज पर यूपी में भी इसी तरह की जागरूकता रैली सीरीज चलाई जाएगी। बसपा की इन रैलियों में दलित, मुस्लिम, पिछड़े और ब्राह्मणों को जोड़ने पर फोकस रहेगा। पार्टी की रैली और सभाओं को सफल बनाने की जिम्मेदारी जिला संगठन के साथ सभी भाईचारा कमेटियां और बीएस-4 के लोगों को भी सौंपी गई है। आकाश कार्यकर्ताओं के साथ ही रात्रि विश्राम भी करेंगे, उनसे चर्चा करेंगे। मायावती 9 अक्टूबर, 2025 में लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित लाखों की रैली में पहले ही आकाश को लेकर अपील कर चुकी हैं कि ’जैसे मेरे साथ खड़े रहे, वैसे ही आकाश के साथ खड़े रहें।’ मायावती के जन्मदिन के बाद से सक्रिय हैं आकाश
आकाश आनंद 15 जनवरी को मायावती के जन्मदिन अवसर पर लखनऊ में थे। इसके बाद वे दिल्ली चले गए। वहां उन्होंने पार्टी का संगठन मजबूत करने पर फोकस बढ़ा दिया। पिछले दिनों आकाश ने राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब सहित 8 राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के साथ बैठक की। उनके साथ पिता आनंद कुमार भी मौजूद रहे। आकाश ने चुनावी राज्यों में पार्टी संगठन के विस्तार को लेकर अलग से बात की। इसके पहले बिहार चुनाव में उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में लगातार प्रचार किया था। अब यूपी में आकाश पूरी तरह से सक्रिय होंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते और ओबीसी चेहरे के तौर पर उनके साथ विश्वनाथ पाल भी इन रैलियों और सभाओं में नजर आ सकते हैं। पश्चिम से शुरू हो सकती है रैली और सभाएं
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आकाश की रैली और सभाएं पश्चिमी यूपी से शुरू होगी। पार्टी का कोर जाटव वोटर पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा है। पश्चिमी यूपी में ही चंद्रशेखर भी सक्रिय हैं। हालांकि किस जिले में आकाश सबसे पहले जाएंगे, इसका चयन अभी नहीं हुआ है। सैय्यद कासिम कहते हैं- पश्चिम में जाटव और मुस्लिम के समीकरण को साधने के लिए भी पार्टी आकाश की रैली और सभाओं को वहां से शुरू कराना चाहती है। इसके बाद पार्टी का फोकस पूर्वांचल के जिले होंगे। यहां ब्राह्मणों को साधने के लिए आकाश की मौजूदगी में कई स्थानीय ब्राह्मण नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की तैयारी है। मायावती 2007 की तरह ही पिछड़ों, ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को साधकर सोशल इंजीनियरिंग का एक गुलदस्ता तैयार करना चाहती है। जिसके जरिए उन्हें 2027 विधानसभा को फतह करने में आसानी हो। 206 से 1 विधानसभा सीट पर सिमटी बसपा
2007 में 206 विधानसभा सीटें जीतने वाली बसपा की अब हालत ये है कि विधानसभा में सिर्फ एक विधायक है। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 15.2 करोड़ वोटर में से 12.9 फीसदी वोट बसपा को मिला। उसे कुल एक करोड़ 18 लाख 73 हजार 137 वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा की स्थिति नहीं सुधरी। 2019 के लोकसभा में 10 सीटें जीतने वाली बसपा इस बार खाता भी नहीं खोल पाई। उसका वोट प्रतिशत 2019 में 19.43% से गिरकर 9.35% रह गया। ये विधानसभा चुनाव से भी लगभग 3 प्रतिशत कम था। ————————- ये खबर भी पढ़ें- अपर्णा की खासियत मुलायम परिवार की बहू होना, तलाक हुआ तो BJP कितना साथ देगी भाजपा नेता अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की शादी टूटने की कगार पर है। प्रतीक ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल घूमने लगे हैं। अगर अपर्णा का रिश्ता टूटता है, तो भाजपा का क्या रुख होगा? पढ़ें पूरी खबर