यूपी में पुलिस विभाग में अफसरों के प्रमोशन हुए एक महीना 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं। इसके बाद भी अफसरों को नई तैनाती नहीं मिली है। आईजी, डीआईजी की कुर्सी पर एडीजी और एडीजी की कुर्सी पर अब भी डीजी बैठे हैं। कई जिलों के एसएसपी डीआईजी हो चुके हैं, लेकिन वे अब भी जिले के कप्तान का काम देख रहे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रमोशन के बाद भी अफसरों को अब तक नई तैनाती क्यों नहीं मिली? क्या अफसरों की आपसी रस्साकशी की वजह से फैसले नहीं हो पा रहे? ऐसे कौन-कौन से अफसर हैं, जो लंबे समय से एक ही जगह पर टिके हैं? ऐसे कौन से अफसर हैं, जिनके पास फिलहाल कोई काम नहीं? ऐसे कौन कौन से अफसर हैं, जिनके पास दोहरी जिम्मेदारी है? आइए इन सवालों के जवाब तलाशते हैं… सबसे पहले बात DG रैंक के अफसर की… डेढ़ महीने बाद भी एडीजी की कुर्सी पर डीजी
लखनऊ जोन के एडीजी सुजीत पांडेय 1 दिसंबर, 2025 को प्रमोशन पाकर डीजी बन गए थे। 1994 बैच के आईपीएस सुजीत पांडेय की गिनती तेज-तर्रार अफसरों में होती है। उनका प्रमोशन डीजी रैंक की अफसर तिलोत्मा वर्मा के रिटायरमेंट के बाद हुआ था। उसके बाद से वे तबादले की टकटकी लगाए बैठे हैं। 2 साल से बिना काम के हैं रेणुका मिश्रा
रेणुका मिश्रा 1990 बैच की आईपीएस अफसर हैं। यूपी में आईपीएस अफसरों की सीनियारिटी लिस्ट में वे दूसरे नंबर पर हैं। 5 मार्च, 2024 को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन के पद से हटाकर वेटिंग में डाला गया था। उसके बाद से उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। हालांकि 18 जुलाई, 2024 को उन्हें वेटिंग से निकालकर डीजी ऑफिस में अटैच कर दिया गया था। अब तक भुगत रहीं पेपर लीक होने का खामियाजा
रेणुका मिश्रा के समय में यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड का पेपर लीक हुआ था। इसके बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसी के बाद रेणुका मिश्रा को भर्ती बोर्ड से हटाकर वेटिंग में डाला गया था। मौजूदा समय में डीजी राजीव कृष्ण उनसे जूनियर हैं, जिनके साथ उन्हें अटैच किया गया है। आमतौर पर डीजीपी ऑफिस में एसपी या उससे निचली रैंक के अफसरों को अटैच किया जाता रहा है। कई अफसरों के पास है दोहरी जिम्मेदारी कई ऐसे अफसर हैं, जिनके पास दोहरी जिम्मेदारी है। डीजीपी राजीव कृष्ण के पास खुद इस पद के अलावा विजिलेंस की भी जिम्मेदारी है। डीजी रैंक के अफसर बीके सिंह के पास भी सीबीसीआईडी के साथ साइबर क्राइम के डीजी की भी जिम्मेदारी है। डीजी रैंक की एक अन्य अधिकारी नीरा रावत के पास मौजूदा समय में ईओडब्ल्यू के साथ यूपी- 112 की भी जिम्मेदारी है। इसी तरह सिविल डिफेंस के डीजी डीके ठाकुर के पास स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स की भी जिम्मेदारी है। बात अगर एडीजी रैंक के अफसरों की करें, तो एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश के पास एसटीएफ और एटीएस के एडीजी की जिम्मेदारी है। 1998 बैच की आईपीएस पद्मजा चौहान के पास भी दोहरी जिम्मेदारी है। वे एडीजी फायर सर्विस के साथ महिला एवं बाल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। रेणुका मिश्रा के अलावा दो और अफसर ऐसे हैं, जो महीनों से डीजीपी मुख्यालय से अटैच हैं। इसमें आजमगढ़ से एसपी के पद से हटाए गए हेमराज मीणा (अब DIG) और एसपी सतीश कुमार का नाम शामिल है। एक अफसर 6 साल से सस्पेंड यूपी पुलिस में एक अफसर सबसे लंबे समय तक सस्पेंड रहने का रिकार्ड बना रहा है। 14 फरवरी, 2019 को निलंबित हुए जसवीर सिंह अब तक न तो बहाल हुए हैं और न ही उनको बर्खास्त किया गया है। उक्त अफसर अब नियमों के तहत 90 प्रतिशत वेतन भी ले रहा है। यानी बिना नौकरी किए ही 90 प्रतिशत वेतन मिल रहा है। जसवीर सिंह 1992 बैच के आईपीएस अफसर हैं। अखिल भारतीय पुलिस सेवा नियमावली के उल्लंघन के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। बताया जाता है कि जसवीर सिंह को बर्खास्त करने के लिए केंद्र को पत्रावली भेजी गई थी। लेकिन, केंद्र ने उक्त फाइल पर कोई निर्णय नहीं लिया। लंबे समय से एक ही पोस्ट पर तैनात हैं कई अफसर तबादले का इंतजार उन अफसरों को भी है, जो लंबे समय से एक ही पोस्ट पर तैनात हैं। इनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह 28 नवंबर, 2022 को बतौर पुलिस कमिश्नर तैनाती हुई। उस समय वो आईजी के रूप में तैनात हुई थीं। यानी करीब सवा तीन साल से वह पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर के पद पर पोस्टेड हैं। पिछले साल 1 जनवरी, 2025 को उनका प्रमोशन आईजी से एडीजी रैंक में हो गया था। इस साल प्रमोशन पाए अफसरों को भी तैनाती का इंतजार
इस साल के शुरुआत में बड़े पैमाने पर अफसरों के प्रमोशन हुए। इसमें अयोध्या के आईजी प्रवीण कुमार भी एडीजी हो चुके हैं, लेकिन अब भी आईजी रेंज के पद पर तैनात हैं। इसके अलावा 2012 बैच के आईपीएस अफसरों को एसपी से डीआईजी की रैंक में प्रमोशन हुआ। इसमें 6 जिले के पुलिस कप्तान भी डीआईजी हो गए। इनमें मेरठ के एसएसपी विपिन टाडा, सहारनपुर के एसएसपी आशीष तिवारी, लखीमपुर खीरी के एसपी संकल्प शर्मा, पीलीभीत के एसपी अभिषेक यादव, गोरखपुर के एसएसपी राजकरन नय्यर और मिर्जापुर के एसपी सोमेन बर्मा भी अपने तबादले का इंतजार कर रहे हैं। इनके अलावा पुलिस कमिश्नरेट में तैनात कई डीसीपी भी प्रमोशन पा चुके हैं, उन्हें भी तबादले का इंतजार है। क्या अफसरों की खींचतान की वजह से नहीं हो पा रहे तबादले?
एक सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर तबादले हो क्यों नहीं रहे? इसमें जानकारों का कहना है कि अफसरों की आपसी खींचतान की वजह से तबादले नहीं हो पा रहे। जिन अफसरों का प्रमोशन हुआ है, खासकर एसपी से डीआईजी के रूप में वे फील्ड में ही जाना चाहते हैं। जबकि फील्ड में एक से बढ़कर एक धुरंधर अफसर पहले से जमे हैं। वहीं, सीनियर लेवल पर भी अफसरों की अपनी-अपनी पसंद है। ऐसे में कौन कहां जाएगा, इसे लेकर खींचतान की भी अटकलें हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह कहते हैं- सरकार को पक्ष नहीं बनना चाहिए। मामलों को कोर्ट-कचहरी में नहीं उलझाना चाहिए। इसी तरह किसी के पास दो-दो चार्ज और किसी के पास कोई काम नहीं। रेणुका मिश्रा को हैरेस किया जा रहा। इसी तरह एक और अफसर आशीष गुप्ता के साथ हुआ था, जिसके बाद उन्होंने वीआरएस ले लिया था। ————————– ये खबर भी पढ़ें… अपर्णा की खासियत मुलायम परिवार की बहू होना, तलाक हुआ तो BJP कितना साथ देगी भाजपा नेता अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की शादी टूटने की कगार पर है। प्रतीक ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल घूमने लगे हैं। अगर अपर्णा का रिश्ता टूटता है, तो भाजपा का क्या रुख होगा? पढ़ें पूरी खबर
लखनऊ जोन के एडीजी सुजीत पांडेय 1 दिसंबर, 2025 को प्रमोशन पाकर डीजी बन गए थे। 1994 बैच के आईपीएस सुजीत पांडेय की गिनती तेज-तर्रार अफसरों में होती है। उनका प्रमोशन डीजी रैंक की अफसर तिलोत्मा वर्मा के रिटायरमेंट के बाद हुआ था। उसके बाद से वे तबादले की टकटकी लगाए बैठे हैं। 2 साल से बिना काम के हैं रेणुका मिश्रा
रेणुका मिश्रा 1990 बैच की आईपीएस अफसर हैं। यूपी में आईपीएस अफसरों की सीनियारिटी लिस्ट में वे दूसरे नंबर पर हैं। 5 मार्च, 2024 को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन के पद से हटाकर वेटिंग में डाला गया था। उसके बाद से उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। हालांकि 18 जुलाई, 2024 को उन्हें वेटिंग से निकालकर डीजी ऑफिस में अटैच कर दिया गया था। अब तक भुगत रहीं पेपर लीक होने का खामियाजा
रेणुका मिश्रा के समय में यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड का पेपर लीक हुआ था। इसके बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसी के बाद रेणुका मिश्रा को भर्ती बोर्ड से हटाकर वेटिंग में डाला गया था। मौजूदा समय में डीजी राजीव कृष्ण उनसे जूनियर हैं, जिनके साथ उन्हें अटैच किया गया है। आमतौर पर डीजीपी ऑफिस में एसपी या उससे निचली रैंक के अफसरों को अटैच किया जाता रहा है। कई अफसरों के पास है दोहरी जिम्मेदारी कई ऐसे अफसर हैं, जिनके पास दोहरी जिम्मेदारी है। डीजीपी राजीव कृष्ण के पास खुद इस पद के अलावा विजिलेंस की भी जिम्मेदारी है। डीजी रैंक के अफसर बीके सिंह के पास भी सीबीसीआईडी के साथ साइबर क्राइम के डीजी की भी जिम्मेदारी है। डीजी रैंक की एक अन्य अधिकारी नीरा रावत के पास मौजूदा समय में ईओडब्ल्यू के साथ यूपी- 112 की भी जिम्मेदारी है। इसी तरह सिविल डिफेंस के डीजी डीके ठाकुर के पास स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स की भी जिम्मेदारी है। बात अगर एडीजी रैंक के अफसरों की करें, तो एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश के पास एसटीएफ और एटीएस के एडीजी की जिम्मेदारी है। 1998 बैच की आईपीएस पद्मजा चौहान के पास भी दोहरी जिम्मेदारी है। वे एडीजी फायर सर्विस के साथ महिला एवं बाल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। रेणुका मिश्रा के अलावा दो और अफसर ऐसे हैं, जो महीनों से डीजीपी मुख्यालय से अटैच हैं। इसमें आजमगढ़ से एसपी के पद से हटाए गए हेमराज मीणा (अब DIG) और एसपी सतीश कुमार का नाम शामिल है। एक अफसर 6 साल से सस्पेंड यूपी पुलिस में एक अफसर सबसे लंबे समय तक सस्पेंड रहने का रिकार्ड बना रहा है। 14 फरवरी, 2019 को निलंबित हुए जसवीर सिंह अब तक न तो बहाल हुए हैं और न ही उनको बर्खास्त किया गया है। उक्त अफसर अब नियमों के तहत 90 प्रतिशत वेतन भी ले रहा है। यानी बिना नौकरी किए ही 90 प्रतिशत वेतन मिल रहा है। जसवीर सिंह 1992 बैच के आईपीएस अफसर हैं। अखिल भारतीय पुलिस सेवा नियमावली के उल्लंघन के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। बताया जाता है कि जसवीर सिंह को बर्खास्त करने के लिए केंद्र को पत्रावली भेजी गई थी। लेकिन, केंद्र ने उक्त फाइल पर कोई निर्णय नहीं लिया। लंबे समय से एक ही पोस्ट पर तैनात हैं कई अफसर तबादले का इंतजार उन अफसरों को भी है, जो लंबे समय से एक ही पोस्ट पर तैनात हैं। इनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह 28 नवंबर, 2022 को बतौर पुलिस कमिश्नर तैनाती हुई। उस समय वो आईजी के रूप में तैनात हुई थीं। यानी करीब सवा तीन साल से वह पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर के पद पर पोस्टेड हैं। पिछले साल 1 जनवरी, 2025 को उनका प्रमोशन आईजी से एडीजी रैंक में हो गया था। इस साल प्रमोशन पाए अफसरों को भी तैनाती का इंतजार
इस साल के शुरुआत में बड़े पैमाने पर अफसरों के प्रमोशन हुए। इसमें अयोध्या के आईजी प्रवीण कुमार भी एडीजी हो चुके हैं, लेकिन अब भी आईजी रेंज के पद पर तैनात हैं। इसके अलावा 2012 बैच के आईपीएस अफसरों को एसपी से डीआईजी की रैंक में प्रमोशन हुआ। इसमें 6 जिले के पुलिस कप्तान भी डीआईजी हो गए। इनमें मेरठ के एसएसपी विपिन टाडा, सहारनपुर के एसएसपी आशीष तिवारी, लखीमपुर खीरी के एसपी संकल्प शर्मा, पीलीभीत के एसपी अभिषेक यादव, गोरखपुर के एसएसपी राजकरन नय्यर और मिर्जापुर के एसपी सोमेन बर्मा भी अपने तबादले का इंतजार कर रहे हैं। इनके अलावा पुलिस कमिश्नरेट में तैनात कई डीसीपी भी प्रमोशन पा चुके हैं, उन्हें भी तबादले का इंतजार है। क्या अफसरों की खींचतान की वजह से नहीं हो पा रहे तबादले?
एक सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर तबादले हो क्यों नहीं रहे? इसमें जानकारों का कहना है कि अफसरों की आपसी खींचतान की वजह से तबादले नहीं हो पा रहे। जिन अफसरों का प्रमोशन हुआ है, खासकर एसपी से डीआईजी के रूप में वे फील्ड में ही जाना चाहते हैं। जबकि फील्ड में एक से बढ़कर एक धुरंधर अफसर पहले से जमे हैं। वहीं, सीनियर लेवल पर भी अफसरों की अपनी-अपनी पसंद है। ऐसे में कौन कहां जाएगा, इसे लेकर खींचतान की भी अटकलें हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह कहते हैं- सरकार को पक्ष नहीं बनना चाहिए। मामलों को कोर्ट-कचहरी में नहीं उलझाना चाहिए। इसी तरह किसी के पास दो-दो चार्ज और किसी के पास कोई काम नहीं। रेणुका मिश्रा को हैरेस किया जा रहा। इसी तरह एक और अफसर आशीष गुप्ता के साथ हुआ था, जिसके बाद उन्होंने वीआरएस ले लिया था। ————————– ये खबर भी पढ़ें… अपर्णा की खासियत मुलायम परिवार की बहू होना, तलाक हुआ तो BJP कितना साथ देगी भाजपा नेता अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की शादी टूटने की कगार पर है। प्रतीक ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल घूमने लगे हैं। अगर अपर्णा का रिश्ता टूटता है, तो भाजपा का क्या रुख होगा? पढ़ें पूरी खबर