लखनऊ की सड़कों पर रविवार को विंटेज कारें दौड़ीं। इस रैली में 100 साल पुरानी 22 विंटेज कार शामिल रहीं। इस दौरान सड़क पर बेहद शानदार नजारा देखने को मिला। इनमें एक कार ऐसी थी, जिस पर अभिनेता अमरीश पुरी फिल्म ‘गदर’ की शूटिंग के दौरान बैठे थे। विंटेज कार रैली अवध हेरिटेज क्लब की ओर से गोमती नगर स्थित लोहिया पार्क से निशातगंज मेट्रो सिटी तक निकाली गई। विंटेज कार का कनेक्शन इमोशन से होता है
रैली में शामिल हुए सीनियर सिटीजन एपी माहेश्वरी बताते हैं- विंटेज कार का कनेक्शन इमोशन से होता है। ये सभी गाड़ियां 100 साल पुरानी हैं, जिनका अपना इतिहास है। कुछ कारें ऐसी हैं, जो फर्स्ट और सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बीच की हैं। फिल्म गदर की शूटिंग में अमरीश पुरी जिस गाड़ी में बैठे थे, वह भी इस विंटेज रैली का हिस्सा बनी। कई कारें ऐसी हैं, जो यहां शामिल लोगों की थर्ड जेनरेशन की हैं। इनमें उनके ग्रैंड फादर (नाना-दादा) घूमते थे। इन विंटेज कारों का मेंटेनेंस बहुत महंगा है। कई बार पार्ट्स इंडिया में नहीं मिलते। इन्हें इंग्लैंड से मंगाना पड़ता है। विंटेज कारों में 104 साल पुरानी बेबी ऑस्टिन और 1927 की फोर्ड काफी चर्चित है। वर्ल्ड वॉर फर्स्ट और सेकेंड के बीच की है कार
एपी माहेश्वरी के पास साल- 1923 की बेबी ऑस्टिन कार है। यह विश्व युद्ध फर्स्ट और सेकेंड के बीच की कार है। उस समय से एपी माहेश्वरी इस कार को संभाल कर रखे हैं। माहेश्वरी ने बताया- हमारे ब्रदर इन लॉ आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वह इसे मेंटेन रखने में मदद करते हैं। अक्सर इसके पार्ट्स नहीं मिलते, तो हम उसे बनवाते हैं या फिर विदेश से लाते हैं। हम लोग इसे समय-समय पर निकालते रहते हैं, जो इसकी मेंटेनेंस के लिए जरूरी है। पिताजी ने 21वें बर्थडे पर गिफ्ट की थी कार केशव माथुर ने बताया- उनका जब 21वां बर्थडे आया तो उनके पिताजी 21वें बर्थडे पर कार गिफ्ट की थी। इसे राजा सलीमपुर से उन्होंने खरीदा था। यह 1939 की कार है। इन कारों को देखकर लोग भौचक्के रह जाते हैं। मैं कल पेट्रोल डलवाने गया था तो लोग इसे देखकर दंग रह गए। इंग्लैंड से आते हैं कार के पार्ट्स
रैली में शामिल हुए अमित गुजराल बताते हैं कि उनकी ऑस्टिन कार 1922 की हैं। इसको मेंटेन रखने में काफी एफर्ट लगाना पड़ता है। इसके अधिकतर पार्ट्स ओरिजिनल हैं। कई बार कार के पार्ट्स जब लखनऊ समेत पूरे देश में कहीं नहीं मिलते, तो हम लोग उन्हें इंग्लैंड से मंगवाते हैं। अमित गुजराल ने बताया- पहले इस गाड़ी चक्के की तरह हैंडल से घुमाकर स्टार्ट किया जाता था। लेकिन, बाद में इसे सेल्फ स्टार्ट वाला बनवा दिया। इसकी देखभाल के लिए 2 लोग लगे रहते हैं। विंटेज रैली में निकालने के लिए 6 महीने पहले से इसे तैयार किया जा रहा था। इस कार से हम लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यह कार हमारे फैमिली मेंबर्स की तरह है। अब रैली में शामिल कारों की 3 तस्वीरें देखिए… ———————— ये खबर भी पढ़िए… UP में पीड़ित बोली-बच गई, वरना 35 टुकड़ों में मिलती, मुस्लिम बनाना चाहती थीं सहेलियां मेरा नसीब शायद अच्छा था। मेरी आंख जल्दी खुल गई। वरना शायद मैं भी 35 टुकड़ों में कहीं पड़ी मिलती। मेरी मुस्लिम सहेलियां मुझे लगातार इस्लाम अपनाने के लिए उकसा रही थीं। वो कहती थीं, इस्लाम बहुत अच्छा है। वो मुझे मीट खाने के लिए कहती थीं। बुर्का पहनाती थीं। धीरे-धीरे मुझे उनकी हर बात अच्छी लगने लगी। मानो उन्होंने मेरे ऊपर कोई तंत्र मंत्र किया हो, मुझे हिपनोटाइज कर लिया हो। वो मुझे खाने में कुछ मिलाकर देती थीं। (पूरी खबर पढ़िए)
रैली में शामिल हुए सीनियर सिटीजन एपी माहेश्वरी बताते हैं- विंटेज कार का कनेक्शन इमोशन से होता है। ये सभी गाड़ियां 100 साल पुरानी हैं, जिनका अपना इतिहास है। कुछ कारें ऐसी हैं, जो फर्स्ट और सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बीच की हैं। फिल्म गदर की शूटिंग में अमरीश पुरी जिस गाड़ी में बैठे थे, वह भी इस विंटेज रैली का हिस्सा बनी। कई कारें ऐसी हैं, जो यहां शामिल लोगों की थर्ड जेनरेशन की हैं। इनमें उनके ग्रैंड फादर (नाना-दादा) घूमते थे। इन विंटेज कारों का मेंटेनेंस बहुत महंगा है। कई बार पार्ट्स इंडिया में नहीं मिलते। इन्हें इंग्लैंड से मंगाना पड़ता है। विंटेज कारों में 104 साल पुरानी बेबी ऑस्टिन और 1927 की फोर्ड काफी चर्चित है। वर्ल्ड वॉर फर्स्ट और सेकेंड के बीच की है कार
एपी माहेश्वरी के पास साल- 1923 की बेबी ऑस्टिन कार है। यह विश्व युद्ध फर्स्ट और सेकेंड के बीच की कार है। उस समय से एपी माहेश्वरी इस कार को संभाल कर रखे हैं। माहेश्वरी ने बताया- हमारे ब्रदर इन लॉ आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वह इसे मेंटेन रखने में मदद करते हैं। अक्सर इसके पार्ट्स नहीं मिलते, तो हम उसे बनवाते हैं या फिर विदेश से लाते हैं। हम लोग इसे समय-समय पर निकालते रहते हैं, जो इसकी मेंटेनेंस के लिए जरूरी है। पिताजी ने 21वें बर्थडे पर गिफ्ट की थी कार केशव माथुर ने बताया- उनका जब 21वां बर्थडे आया तो उनके पिताजी 21वें बर्थडे पर कार गिफ्ट की थी। इसे राजा सलीमपुर से उन्होंने खरीदा था। यह 1939 की कार है। इन कारों को देखकर लोग भौचक्के रह जाते हैं। मैं कल पेट्रोल डलवाने गया था तो लोग इसे देखकर दंग रह गए। इंग्लैंड से आते हैं कार के पार्ट्स
रैली में शामिल हुए अमित गुजराल बताते हैं कि उनकी ऑस्टिन कार 1922 की हैं। इसको मेंटेन रखने में काफी एफर्ट लगाना पड़ता है। इसके अधिकतर पार्ट्स ओरिजिनल हैं। कई बार कार के पार्ट्स जब लखनऊ समेत पूरे देश में कहीं नहीं मिलते, तो हम लोग उन्हें इंग्लैंड से मंगवाते हैं। अमित गुजराल ने बताया- पहले इस गाड़ी चक्के की तरह हैंडल से घुमाकर स्टार्ट किया जाता था। लेकिन, बाद में इसे सेल्फ स्टार्ट वाला बनवा दिया। इसकी देखभाल के लिए 2 लोग लगे रहते हैं। विंटेज रैली में निकालने के लिए 6 महीने पहले से इसे तैयार किया जा रहा था। इस कार से हम लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यह कार हमारे फैमिली मेंबर्स की तरह है। अब रैली में शामिल कारों की 3 तस्वीरें देखिए… ———————— ये खबर भी पढ़िए… UP में पीड़ित बोली-बच गई, वरना 35 टुकड़ों में मिलती, मुस्लिम बनाना चाहती थीं सहेलियां मेरा नसीब शायद अच्छा था। मेरी आंख जल्दी खुल गई। वरना शायद मैं भी 35 टुकड़ों में कहीं पड़ी मिलती। मेरी मुस्लिम सहेलियां मुझे लगातार इस्लाम अपनाने के लिए उकसा रही थीं। वो कहती थीं, इस्लाम बहुत अच्छा है। वो मुझे मीट खाने के लिए कहती थीं। बुर्का पहनाती थीं। धीरे-धीरे मुझे उनकी हर बात अच्छी लगने लगी। मानो उन्होंने मेरे ऊपर कोई तंत्र मंत्र किया हो, मुझे हिपनोटाइज कर लिया हो। वो मुझे खाने में कुछ मिलाकर देती थीं। (पूरी खबर पढ़िए)