2027 चुनाव से पहले अखिलेश की सॉफ्ट पॉलिटिक्स:सीएम के करीबी के घर पहुंचे, वाघेला-पटनायक से मुलाकात-शंकराचार्य से बात; मायने क्या?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव की हाल के दिनों की एक्टिविटी सियासत के गलियारों में चर्चा का विषय बनी है। मुख्यमंत्री के सबसे करीबी विनोद कुमार शाही के बेटे के निधन पर उनके घर जाना हो या फिर बिकरू कांड में आरोपी बनी नई नवेली दुल्हन की मां का इलाज का मामला। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला से मुलाकात हो या फिर आमतौर पर भाजपा का साथ देने वाले नवीन पटनायक से भुवनेश्वर में उनके घर पर मुलाकात। जानकार इसे राजनीति में अखिलेश के बड़े होते चेहरे के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या अखिलेश यादव अपने पारंपरिक ढर्रे को बदल रहे? या फिर 2027 के चुनाव को लेकर ये उनकी रणनीति है? क्या अखिलेश यादव पीडीए के इतर भी अपना वोटबैंक मजबूत करना चाहते हैं? भाजपा को सॉफ्ट पॉलिटिक्स के जरिए कोई संदेश देना चाहते हैं? ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को लेकर क्या रुख है? कांग्रेस को लेकर क्या रुख है? वे अपने नेताओं को क्या नसीहत दे रहे? इस खास खबर में इन सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे… पहले अखिलेश की कुछ गतिविधियों पर एक नजर मुख्यमंत्री के करीबी के घर सांत्वना देने पहुंचे
अखिलेश यादव बीते दिनों अदालतों में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने वाले वरिष्ठ वकील एएजी विनोद शाही के घर सांत्वना देने पहुंचे। विनोद शाही के 27 साल के बेटे का निधन हो गया था। अखिलेश के इस कदम ने लोगों को चौंका दिया। इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। इससे जो अखिलेश यादव की आलोचना भी करते हैं, वे भी उनकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। विकास दुबे की समधन का इलाज कराया
बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे की मां के इलाज में अखिलेश सक्रिय दिखे। खुशी दुबे, गैंगस्टर विकास दुबे की बहू है। खुशी की मां गंभीर बीमार थीं, इलाज के लिए पैसे की कमी थी। अखिलेश ने सर्जरी के लिए फंडिंग की और मदद उपलब्ध कराई। खुशी दुबे ने खुद वीडियो जारी कर अखिलेश का धन्यवाद किया। यह कदम ब्राह्मण समुदाय में सपा की इमेज सुधारने का प्रयास माना जा रहा है। शंकराचार्य से फोन पर बात की
माघ मेले में मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उपजे विवाद पर अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के साथ दिखे। साथ ही फोन पर बात कर उन्हें भरोसा भी दिलाया। इसी तरह मणिकर्णिका घाट को लेकर भी अखिलेश यादव मुख्यमंत्री पर सीधा हमला करते नजर आए। टिकट को लेकर साफ संकेत दिए
अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए टिकट मांगने वालों को भी साफ संदेश देने से नहीं बच रहे। रोज-रोज पार्टी दफ्तर आने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन किया जा रहा है। अखिलेश यादव को पता है कि कौन क्षेत्र में मेहनत कर रहा है और कौन सिर्फ पार्टी दफ्तर के चक्कर लगा रहा? बीते दिनों ऐसे ही एक नेता की अखिलेश यादव ने जमकर क्लास लगाई थी। रिकॉर्ड मंगाया गया तो पता चला कि महीने के 17 दिन वे पार्टी ऑफिस में ही थे। ऐसे ही पूर्वांचल के एक नेता अपने सांसद को लेकर टिकट की पैरवी के लिए पहुंचे, तो उन्होंने एसआईआर को लेकर सीधा सवाल कर दिया। नेता जी बगले झांकने लगे। अखिलेश ने कहा कि सरकार तब बनेगी, जब विधायक जीतकर आएंगे। विधायक वही बनेगा, जो क्षेत्र में लोगों के बीच होगा। जो क्षेत्र में रहकर पार्टी का काम कर रहा होगा। टिकट भी उन्हें ही मिलेगा। कई राजनीतिक मुलाकात भी चर्चा में रहीं, मायने क्या?
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- अखिलेश यादव ने बीते कुछ दिनों में अपने तौर-तरीके में बड़ा बदलाव किया है। अब वे तंज कसने के बजाय दो-टूक बात करने लगे हैं। अखिलेश ने बीते कुछ दिनों में अपने रवैए में काफी बदलाव किया है। वे अनावश्यक रूप से किसी से उलझने से न सिर्फ बच रहे, बल्कि सॉफ्ट राजनीति के जरिए विरोधियों को भी अपना मुरीद बना रहे। मामला कांग्रेस का हो, ओवैसी का या 2027 के चुनाव के लिए टिकटों का। वे सबको दो-टूक संदेश दे रहे। मसलन बीते दिनों सांसदों के साथ बैठक में अखिलेश ने अपने नेताओं से कहा कि एसआईआर की जिम्मेदारी सिर्फ कार्यकर्ताओं और विधायकों की नहीं, आपकी भी है। इसके साथ ही अखिलेश ने सबसे उनके क्षेत्रों की रिपोर्ट ली। इतना ही नहीं, विधानसभा चुनाव के टिकटों की पैरवी पर दो टूक कहा कि आप सब अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में हर विधानसभा क्षेत्र से तीन-तीन नाम दें। इससे दो चीजें होंगी। पहली- अखिलेश ने भार सांसदों पर डाल दिया। दूसरा- जिले में भी सांसदों की कद्र बढ़ जाएगी, जिससे पार्टी की बाउंडिंग और मजबूत होगी। सांसद भी सोच-समझकर अपने नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुझाएंगे। इसके अलावा अखिलेश यादव सर्वे भी करा रहे हैं कि किस सीट पर कौन मजबूत है? राजेंद्र कुमार कहते हैं- अखिलेश अब नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की राजनीति के नक्शे-कदम पर चल निकले हैं। पार्टी की गुटबाजियों को खत्म करने के लिए साफ संदेश दे रहे हैं। अनावश्यक बयानबाजी से लोगों को रोक रहे। ओवैसी और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बयानबाजी से बचने की नसीहत दे रहे। उनका साफ कहना है कि ओवैसी न तो यूपी में सरकार बनाएंगे और न ही वे मंत्री बनने जा रहे। उन्होंने दूसरे राज्यों में किसे फायदा पहुंचाया और यहां किसे फायदा पहुंचाएंगे, यह लोगों के बीच जाकर बताना है। इसके अलावा अखिलेश यादव ने हाल के दिनों में कुछ पुराने कांग्रेसी नेताओं के साथ-साथ जनता दल से अलग हुए नेताओं से भी मुलाकात की है। इनमें गुजरात के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात शामिल हैं। ओवैसी के डेंट से बचाने की चुनौती
राजनीतिक विशेषज्ञ और मुस्लिम मामलों के जानकार हसन एजाज कहते हैं- ओवैसी के बिहार और महाराष्ट्र के प्रदर्शन को लेकर सपा के नेताओं का चिंतित होना स्वाभाविक है। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए मुश्किल यह है कि वे खुलकर मुस्लिमों की बात करेंगे, तो भाजपा निश्चित रूप से इसे भुनाने का प्रयास करेगी। वहीं, ओवैसी के खिलाफ आक्रामक होंगे तो मुस्लिमों का एक वर्ग नाराज होगा। एजाज अहमद कहते हैं- इससे पहले भी यूपी में कई ऐसे छोटे-छोटे दल सक्रिय रहे हैं। ये दल कुछ सीटों पर अपना असर दिखाते रहे हैं और मुस्लिम वोट अपनी ओर खींचते रहे हैं। इनमें पीस पार्टी, मोमिन कॉन्फ्रेंस जैसे दल शामिल हैं। ऐसे में ओवैसी भाजपा को कैसे फायदा पहुंचा रहे, इसका तर्कसंगत जवाब देने के लिए अपने नेताओं को समझा रहे हैं। जनता के बीच जाकर इस बात को कहने की बात कर रहे हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… MLC को टांगकर ले गई पुलिस; सांसद धरने पर बैठे, मणिकर्णिका घाट जा रहा था सपा प्रतिनिधिमंडल वाराणसी में सपा का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट जाने पर अड़ा हुआ है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने से पहले ही पुलिस प्रशासन ने सपा पदाधिकारियों और पार्टी से जुड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट जाने की कोशिश कर रहा है। कई जगह पुलिस और सपाइयों के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। पढ़ें पूरी खबर