अयोध्या का भदरसा गैंगरेप केस। डेढ़ साल पहले यह मामला पूरे यूपी की सुर्खियों में था। 72 साल के सपा नेता मोईद खान और उनके 20 साल के नौकर राजू खान पर 14 साल की बच्ची से रेप का आरोप था। दोनों गिरफ्तार हुए, जेल भेजे गए। मोईद और उनके रिश्तेदार से जुड़ी संपत्ति पर बुलडोजर की कार्रवाई हुई। अब इस मामले में कोर्ट का फैसला आया। कोर्ट ने मोईद खान को बाइज्जत बरी कर दिया। राजू खान को 20 साल की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट पहुंच गया है। मोईद खान पक्ष का कहना है कि वहां भी ऐसा ही फैसला आएगा। इस पूरे मामले में दैनिक भास्कर की टीम ने दोनों पक्षों से बात की। कोर्ट के 32 पेज के जजमेंट का एनालिसिस किया। वकीलों से बात की। पुलिस जांच की खामियों को भी समझा। आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं। सबसे पहले केस पर नजर डालते हैं… 14 साल की लड़की का मोईद की बेकरी में रेप हुआ
अयोध्या जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर भदरसा गांव है। यहीं मोईद खान का घर है। घर से करीब 500 मीटर दूर उनकी बेकरी है। इतनी ही दूरी पर 14 साल की उस लड़की का घर है। जिसने 29 जुलाई, 2024 को मोईद खान और उनके नौकर राजू खान पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई। उस वक्त लड़की 2 महीने की प्रेग्नेंट थी। कहा कि दोनों ने बेकरी में बुलाकर बार-बार मेरा रेप किया। जिस वक्त FIR दर्ज हुई, उस वक्त मिल्कीपुर में विधानसभा का उपचुनाव होना था इसलिए यह मामला तूल पकड़ गया। केस लिखवाने के अगले ही दिन मोईद खान और राजू खान को पूरा कलंदर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अगले महीने यानी अगस्त में मोईद खान की बेकरी और 2 मंजिला कॉम्प्लेक्स जमींदोज कर दिया गया। इस कॉम्प्लेक्स में 52 दुकानें थीं। कॉम्प्लेक्स मोईद के भाई महमूद खान का था। इसकी देखरेख मोईद और उनके बेटे कर रहे थे। पहले बयान में मोईद का नाम नहीं
हमारी टीम ने कोर्ट के 32 पेज के फैसले को पढ़ा। फिर मोईद के वकील सईद खान से बात की। सईद उसी फैसले को कोट करते हुए कहते हैं- जब लड़की ने शिकायत दर्ज करवाई थी, उस वक्त उसका मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत बयान दर्ज करवाया गया। उसमें पीड़िता ने मोईद के बजाय मोहित का नाम लिया। उस वक्त मजिस्ट्रेट ने बयान को पढ़कर भी सुनाया। लड़की ने किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं की, कहा कि सब ठीक है। इस बयान के बाद लड़की का दूसरा बयान दर्ज करवाया गया। तर्क दिया गया कि उस वक्त उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए उसने मोईद के बजाय मोहित का नाम ले लिया। दूसरे बयान में उसने मोईद का नाम लिया और इसके बाद केस आगे बढ़ा। सईद कहते हैं- हमने कोर्ट के सामने यह बात रखी कि अगर लड़की ने मोहित का नाम लिया तो पुलिस ने मोहित के संबंध में कोई जांच क्यों नहीं की? क्या यह जानने की कोशिश नहीं की कि मोहित कौन है? हमने पूछा कि क्या आपने अपने स्तर पर इसे जांचा? इस पर सईद कहते हैं- हमने जांच की तो पता चला कि मोहित लड़की की बड़ी बहन का देवर है। उसका परिवार रजिस्टर, पिता का नाम सब कुछ कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने इस मामले में माना कि पुलिस ने जांच नहीं की। दूसरी बात यह कि लड़की को जब पुलिस घटनास्थल पर ले गई, तो उसने घटनास्थल बेकरी न दिखाकर 100 मीटर दूर चिलबिल का पेड़ बताया। लड़की से पूछा गया कि मोईद कैसा दिखता है? इस पर उसने कहा कि मोईद मोटा-सा है, जबकि ऐसा नहीं है। पुलिस ने CDR लोकेशन नहीं निकाली, वीडियो नहीं मिला
लड़की ने बताया था कि उसकी राजू खान से अपनी मां के मोबाइल से बातचीत होती थी। उसके बुलाने पर ही वह बेकरी गई थी। वहां कुछ खिला दिया गया, जिसके बाद उसके साथ मोईद ने और फिर राजू ने रेप किया। पुलिस ने इस बयान के आधार पर दोनों की कॉल डिटेल नहीं निकलवाई। न ही घटना के वक्त की लोकेशन की जांच की। लड़की ने एक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल की बात कही। पुलिस ने दोनों के ही फोन को जब्त किए, लेकिन ऐसा कोई भी वीडियो नहीं मिल सका। सईद खान कहते हैं- लड़की ने अपने बयान में कहा था कि वह बेकरी में खून से लथपथ थी। उसे खोजते हुए उसकी मां आई और फिर साथ ले गई। हमने कोर्ट के अंदर पीड़िता से इस मामले पर बात की। उसने जज साहब के सामने इस तरह की कोई भी घटना होने से इनकार कर दिया। लड़की ने जो एप्लिकेशन थाने में दी, उसके बारे में भी पूछा। उसने बताया कि कस्बे की एक दुकान पर बोल-बोल कर लिखवाया। हमने उसी एप्लिकेशन से ब्लैकमेल जैसे शब्दों का मतलब पूछा, पीड़िता नहीं बता सकी। दुकान दिखाने की बात कही, लेकिन वह भी नहीं दिखा सकी। हमने कहा, क्या ऐसा हो सकता है कि भाजपा के नेताओं ने यह कागज लिखवाकर दिया हो, उसने कहा कि हो सकता है। भाजपा नेता की वजह से मेरे पिता को फंसाया गया
हमने इस केस के सिलसिले में मोईद के बड़े बेटे जहीर अहमद से बात की। वह कहते हैं- कोर्ट का धन्यवाद, जिन्होंने सही-गलत का फैसला सुनाया। हम कभी कोर्ट-कचहरी नहीं आए थे, लेकिन इस डेढ़ साल में खूब चक्कर लगाए। जहीर अहमद कहते हैं- लड़की की पहली शिकायत में मेरे पिताजी का नाम नहीं था। स्थानीय भाजपा नेता मंजू निषाद ने मेरे पिता का नाम दिया। वह भदरसा से नगर पंचायत का चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। इसलिए मेरे पिताजी को दुश्मनी के तहत फंसा दिया। इन लोगों ने सीएम योगी को भी गलत जानकारी दी। पीड़िता की मां ने कहा था कि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद मोईद खान को बचा रहे हैं। डीएनए रिपोर्ट बदलवा दी गई। इस पर जहीर कहते हैं- ऐसे कैसे डीएनए रिपोर्ट बदल सकती है। क्या वह किसी के हाथ में होती है? अगर ऐसा होता तो यह भी हो सकता है कि FIR भी फर्जी दर्ज करवाई जा सकती है। जहीर कहते हैं- प्रशासन ने हमारी बेकरी को गिरा दिया। बताया कि वह तालाब की जमीन पर है, जबकि उस पर मुकदमा चल रहा। जानकी प्रसाद से एग्रीमेंट है। हमारे बड़े अब्बा के कॉम्प्लेक्स को गिरा दिया गया, जबकि उन्होंने जमीन बैनामा करवाई थी। क्या तालाब की जमीन का बैनामा हो सकता है? इसके बाद हमारी टीम घटनास्थल पर गई। जिस कॉम्प्लेक्स को गिराया गया था, उसमें 52 दुकानें थीं। जिनसे जमीन ली गई, उनका भी बगल में ही घर है। मोईद के एक दूसरे बेटे हमें जमीन के पिछले हिस्से को दिखाते हुए कहते हैं- अगर ये तालाब था, तो इसके पीछे की जमीन प्रवीण निषाद की कैसे हो सकती है? हालांकि हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे। अब जो होना था, वह हो गया। हमारे पिता पर लगा दाग छूट गया। सरकारी वकील बोले- फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे
हमने इस सिलसिले में लड़की के वकील विनोद उपाध्याय से बात की। विनोद यूपी सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए थे। वह कहते हैं- हम कोर्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते। हम हाईकोर्ट में इस फैसले को चैलेंज करेंगे। मैंने पूरी फाइल बनाई थी, सारे एविडेंस मोईद खान के खिलाफ थे। छोड़ने लायक नहीं था।
हमने पूछा कि वीडियो बनाए जाने और घटनास्थल को लेकर क्या मामला था? विनोद कहते हैं- राजू खान के मोबाइल से वीडियो बनाया गया, लेकिन तुरंत फोन नहीं जब्त किया गया। राजू की गिरफ्तारी के 15-20 दिन बाद उसके परिवार ने एक फोन दे दिया। अब कैसे पता कि वह राजू का ही फोन था? इसी तरह से घटनास्थल को लेकर विवाद हुआ। लड़की के साथ घटना कई बार हुई, पहली घटना बेकरी में हुई। अयोध्या की पॉक्सो कोर्ट की जज निरुपमा विक्रम ने मोईद खान को बाइज्जत बरी करने का निर्देश दिया। वहीं, राजू को 20 साल की सजा सुनाई। हालांकि, मोईद खान की रिहाई अभी नहीं होगी। उनके ऊपर गैंगस्टर के तहत भी केस दर्ज हुआ था। वकीलों का कहना है कि जल्द ही उस मामले में भी जमानत मिलने की संभावना है।
———————– ये खबर भी पढ़ें… मोईद का बेटा बोला- योगी को गलत फीडबैक दिया गया, अब्बू बेगुनाह तो गैंगस्टर कैसे अब्बू को कोर्ट ने बरी कर दिया, लेकिन आज भी लोगों को यकीन दिलाना पड़ता है कि मेरे वालिद ने रेप नहीं किया। मेरे पिता बेगुनाह तो गैंगस्टर का केस कैसे लगा। पहली एफआईआर में अब्बू का नाम नहीं था, बाद में उनका नाम जोड़ा गया। यह कहना है अयोध्या के चर्चित गैंगरेप मामले में आरोपी रहे सपा नेता मोईद के बेटे जहीर खान का। पढ़ें पूरी खबर
अयोध्या जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर भदरसा गांव है। यहीं मोईद खान का घर है। घर से करीब 500 मीटर दूर उनकी बेकरी है। इतनी ही दूरी पर 14 साल की उस लड़की का घर है। जिसने 29 जुलाई, 2024 को मोईद खान और उनके नौकर राजू खान पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई। उस वक्त लड़की 2 महीने की प्रेग्नेंट थी। कहा कि दोनों ने बेकरी में बुलाकर बार-बार मेरा रेप किया। जिस वक्त FIR दर्ज हुई, उस वक्त मिल्कीपुर में विधानसभा का उपचुनाव होना था इसलिए यह मामला तूल पकड़ गया। केस लिखवाने के अगले ही दिन मोईद खान और राजू खान को पूरा कलंदर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अगले महीने यानी अगस्त में मोईद खान की बेकरी और 2 मंजिला कॉम्प्लेक्स जमींदोज कर दिया गया। इस कॉम्प्लेक्स में 52 दुकानें थीं। कॉम्प्लेक्स मोईद के भाई महमूद खान का था। इसकी देखरेख मोईद और उनके बेटे कर रहे थे। पहले बयान में मोईद का नाम नहीं
हमारी टीम ने कोर्ट के 32 पेज के फैसले को पढ़ा। फिर मोईद के वकील सईद खान से बात की। सईद उसी फैसले को कोट करते हुए कहते हैं- जब लड़की ने शिकायत दर्ज करवाई थी, उस वक्त उसका मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत बयान दर्ज करवाया गया। उसमें पीड़िता ने मोईद के बजाय मोहित का नाम लिया। उस वक्त मजिस्ट्रेट ने बयान को पढ़कर भी सुनाया। लड़की ने किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं की, कहा कि सब ठीक है। इस बयान के बाद लड़की का दूसरा बयान दर्ज करवाया गया। तर्क दिया गया कि उस वक्त उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए उसने मोईद के बजाय मोहित का नाम ले लिया। दूसरे बयान में उसने मोईद का नाम लिया और इसके बाद केस आगे बढ़ा। सईद कहते हैं- हमने कोर्ट के सामने यह बात रखी कि अगर लड़की ने मोहित का नाम लिया तो पुलिस ने मोहित के संबंध में कोई जांच क्यों नहीं की? क्या यह जानने की कोशिश नहीं की कि मोहित कौन है? हमने पूछा कि क्या आपने अपने स्तर पर इसे जांचा? इस पर सईद कहते हैं- हमने जांच की तो पता चला कि मोहित लड़की की बड़ी बहन का देवर है। उसका परिवार रजिस्टर, पिता का नाम सब कुछ कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने इस मामले में माना कि पुलिस ने जांच नहीं की। दूसरी बात यह कि लड़की को जब पुलिस घटनास्थल पर ले गई, तो उसने घटनास्थल बेकरी न दिखाकर 100 मीटर दूर चिलबिल का पेड़ बताया। लड़की से पूछा गया कि मोईद कैसा दिखता है? इस पर उसने कहा कि मोईद मोटा-सा है, जबकि ऐसा नहीं है। पुलिस ने CDR लोकेशन नहीं निकाली, वीडियो नहीं मिला
लड़की ने बताया था कि उसकी राजू खान से अपनी मां के मोबाइल से बातचीत होती थी। उसके बुलाने पर ही वह बेकरी गई थी। वहां कुछ खिला दिया गया, जिसके बाद उसके साथ मोईद ने और फिर राजू ने रेप किया। पुलिस ने इस बयान के आधार पर दोनों की कॉल डिटेल नहीं निकलवाई। न ही घटना के वक्त की लोकेशन की जांच की। लड़की ने एक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल की बात कही। पुलिस ने दोनों के ही फोन को जब्त किए, लेकिन ऐसा कोई भी वीडियो नहीं मिल सका। सईद खान कहते हैं- लड़की ने अपने बयान में कहा था कि वह बेकरी में खून से लथपथ थी। उसे खोजते हुए उसकी मां आई और फिर साथ ले गई। हमने कोर्ट के अंदर पीड़िता से इस मामले पर बात की। उसने जज साहब के सामने इस तरह की कोई भी घटना होने से इनकार कर दिया। लड़की ने जो एप्लिकेशन थाने में दी, उसके बारे में भी पूछा। उसने बताया कि कस्बे की एक दुकान पर बोल-बोल कर लिखवाया। हमने उसी एप्लिकेशन से ब्लैकमेल जैसे शब्दों का मतलब पूछा, पीड़िता नहीं बता सकी। दुकान दिखाने की बात कही, लेकिन वह भी नहीं दिखा सकी। हमने कहा, क्या ऐसा हो सकता है कि भाजपा के नेताओं ने यह कागज लिखवाकर दिया हो, उसने कहा कि हो सकता है। भाजपा नेता की वजह से मेरे पिता को फंसाया गया
हमने इस केस के सिलसिले में मोईद के बड़े बेटे जहीर अहमद से बात की। वह कहते हैं- कोर्ट का धन्यवाद, जिन्होंने सही-गलत का फैसला सुनाया। हम कभी कोर्ट-कचहरी नहीं आए थे, लेकिन इस डेढ़ साल में खूब चक्कर लगाए। जहीर अहमद कहते हैं- लड़की की पहली शिकायत में मेरे पिताजी का नाम नहीं था। स्थानीय भाजपा नेता मंजू निषाद ने मेरे पिता का नाम दिया। वह भदरसा से नगर पंचायत का चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। इसलिए मेरे पिताजी को दुश्मनी के तहत फंसा दिया। इन लोगों ने सीएम योगी को भी गलत जानकारी दी। पीड़िता की मां ने कहा था कि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद मोईद खान को बचा रहे हैं। डीएनए रिपोर्ट बदलवा दी गई। इस पर जहीर कहते हैं- ऐसे कैसे डीएनए रिपोर्ट बदल सकती है। क्या वह किसी के हाथ में होती है? अगर ऐसा होता तो यह भी हो सकता है कि FIR भी फर्जी दर्ज करवाई जा सकती है। जहीर कहते हैं- प्रशासन ने हमारी बेकरी को गिरा दिया। बताया कि वह तालाब की जमीन पर है, जबकि उस पर मुकदमा चल रहा। जानकी प्रसाद से एग्रीमेंट है। हमारे बड़े अब्बा के कॉम्प्लेक्स को गिरा दिया गया, जबकि उन्होंने जमीन बैनामा करवाई थी। क्या तालाब की जमीन का बैनामा हो सकता है? इसके बाद हमारी टीम घटनास्थल पर गई। जिस कॉम्प्लेक्स को गिराया गया था, उसमें 52 दुकानें थीं। जिनसे जमीन ली गई, उनका भी बगल में ही घर है। मोईद के एक दूसरे बेटे हमें जमीन के पिछले हिस्से को दिखाते हुए कहते हैं- अगर ये तालाब था, तो इसके पीछे की जमीन प्रवीण निषाद की कैसे हो सकती है? हालांकि हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे। अब जो होना था, वह हो गया। हमारे पिता पर लगा दाग छूट गया। सरकारी वकील बोले- फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे
हमने इस सिलसिले में लड़की के वकील विनोद उपाध्याय से बात की। विनोद यूपी सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए थे। वह कहते हैं- हम कोर्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते। हम हाईकोर्ट में इस फैसले को चैलेंज करेंगे। मैंने पूरी फाइल बनाई थी, सारे एविडेंस मोईद खान के खिलाफ थे। छोड़ने लायक नहीं था।
हमने पूछा कि वीडियो बनाए जाने और घटनास्थल को लेकर क्या मामला था? विनोद कहते हैं- राजू खान के मोबाइल से वीडियो बनाया गया, लेकिन तुरंत फोन नहीं जब्त किया गया। राजू की गिरफ्तारी के 15-20 दिन बाद उसके परिवार ने एक फोन दे दिया। अब कैसे पता कि वह राजू का ही फोन था? इसी तरह से घटनास्थल को लेकर विवाद हुआ। लड़की के साथ घटना कई बार हुई, पहली घटना बेकरी में हुई। अयोध्या की पॉक्सो कोर्ट की जज निरुपमा विक्रम ने मोईद खान को बाइज्जत बरी करने का निर्देश दिया। वहीं, राजू को 20 साल की सजा सुनाई। हालांकि, मोईद खान की रिहाई अभी नहीं होगी। उनके ऊपर गैंगस्टर के तहत भी केस दर्ज हुआ था। वकीलों का कहना है कि जल्द ही उस मामले में भी जमानत मिलने की संभावना है।
———————– ये खबर भी पढ़ें… मोईद का बेटा बोला- योगी को गलत फीडबैक दिया गया, अब्बू बेगुनाह तो गैंगस्टर कैसे अब्बू को कोर्ट ने बरी कर दिया, लेकिन आज भी लोगों को यकीन दिलाना पड़ता है कि मेरे वालिद ने रेप नहीं किया। मेरे पिता बेगुनाह तो गैंगस्टर का केस कैसे लगा। पहली एफआईआर में अब्बू का नाम नहीं था, बाद में उनका नाम जोड़ा गया। यह कहना है अयोध्या के चर्चित गैंगरेप मामले में आरोपी रहे सपा नेता मोईद के बेटे जहीर खान का। पढ़ें पूरी खबर