स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब यूपी से निकलकर उत्तराखंड तक पहुंच गया है। यूपी के मंत्री धर्मपाल सिंह जहां साफ कह चुके हैं कि सरकार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानती। वहीं, बद्रीनाथ धाम से जुड़ी डिमरी पंडितों की पंचायत अविमुक्तेश्वरानंद को ही शंकराचार्य मान रही। यही वजह है कि उन्हें गाड़ू कलश (तेल कलश) यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा चुका है। डिमरी समाज का कहना है कि उनका फैसला किसी मंत्री या सरकार के बयान के आधार पर नहीं, सनातन परंपरा के अनुसार होता है। शंकराचार्य की पहचान आस्था और परंपरा से तय होती है, न कि राजनीतिक या प्रशासनिक रुख से। इसी बीच दैनिक भास्कर एप ने उत्तराखंड सरकार में धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज से सवाल किया कि क्या आप अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानते हैं? इस पर उन्होंने कहा- मैं इस मामले में सीएम धामी से पूछकर बताऊंगा। वहीं, श्री बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने इसे तीर्थ पुरोहितों का निजी धार्मिक निर्णय बताते हुए टिप्पणी से दूरी बना ली। ‘हम सरकार के अधीन नहीं, परंपरा के अधीन हैं’
हमने सबसे पहले श्री बद्रीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी से बात की। उन्होंने 25 जनवरी को अविमुक्तेश्वरानंद को बद्रीनाथ के कपाट खुलने से पहले होने वाली गाड़ू कलश यात्रा का न्योता भेजा है। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी मंत्री के बयान से नहीं, बल्कि सनातन परंपरा से चलते हैं। उन्होंने कहा- यूपी के मंत्री का अपना मत हो सकता है। लेकिन, हम प्रमाणिकता के आधार पर बात करते हैं। 2022 में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी के दो ही शिष्य थे- एक सदानंद सरस्वती और दूसरे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। एक को द्वारका और दूसरे को ज्योतिषपीठ की जिम्मेदारी दी गई। हम सनातनी और परंपरावादी लोग हैं। हमारे लिए वे शंकराचार्य हैं। ‘यह मेरी निजी जागीर नहीं, डिपार्टमेंट और सीएम से पूछकर ही बता पाऊंगा’
इस मामले पर उत्तराखंड के धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा- उत्तराखंड सरकार अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानती है या नहीं, इस पर मैं अभी कोई राय नहीं दे सकता। मुझे पहले डिपार्टमेंट (विभाग) का व्यू लेना पड़ेगा। यह कोई मेरी निजी प्रॉपर्टी का मामला नहीं है। जब तक मैं अधिकारियों और सीएम (मुख्यमंत्री) से बात नहीं कर लेता, मैं कुछ नहीं कह सकता। निमंत्रण की बात पर उन्होंने कहा कि वह निमंत्रण मंदिर समिति (BKTC) ने नहीं दिया है। वह डिमरी समाज का अपना निजी निमंत्रण है। रही बात शंकराचार्य मानने की, तो यह मामला अभी सब-जुडिस (न्यायालय में विचाराधीन) है। पट्टाभिषेक के मामले पर कोर्ट का क्या वर्डिक्ट (फैसला) है, उसका अध्ययन करना पड़ेगा। ‘जिन्होंने बुलाया है…उनसे पूछिए, मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा’
बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से इस मामले पर बात की गई तो वे इस मुद्दे पर पूरी तरह ‘नो कमेंट’ मोड में नजर आए। उन्होंने कहा, यूपी के मंत्री क्या कह रहे हैं, उसका जवाब वही दे पाएंगे। हम सभी संतों का सम्मान करते हैं। लेकिन यह निमंत्रण समिति की तरफ से नहीं गया है। यह पंचायत की यात्रा है। आप उन्हीं से पूछें तो ज्यादा बेहतर होगा। मैं इस विवाद में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। क्या है गाड़ू घड़ा यात्रा जिसमें बुलाए गए अविमुक्तेश्वरानंद इस बार गाड़ू घड़ा यात्रा का शेड्यूल गाड़ू घड़ा यात्रा की शुरुआत 7 अप्रैल को टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित राजमहल से होगी। इसी दिन परंपरा के अनुसार भगवान बद्री विशाल के अभिषेक में इस्तेमाल होने वाला तिल का तेल विधि-विधान से पिरोया जाएगा और चांदी के कलश में भरकर गाड़ू घड़ा तैयार किया जाएगा। अगले दिन, 8 अप्रैल को गाड़ू घड़ा यात्रा ऋषिकेश पहुंचेगी, जहां श्री बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति के विश्राम गृह में इसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसी प्रस्थान कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके बाद 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। कपाट खुलने के दिन इसी पवित्र तिल के तेल से भगवान बद्री विशाल का अभिषेक किया जाएगा और इसके साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। कौन हैं डिमरी ब्राह्मण, क्या है उनका इतिहास… ——————– ये खबर भी पढ़ें : मंत्री धर्मपाल सिंह बोले- शंकराचार्य के आका करते थे गोकशी: अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं, गोकशों के दबाव में अराजकता फैलाना चाहते बरेली में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद गोकशी पर सफेद झूठ बोल रहे हैं। यूपी में जिस गोकशी की बात वो कर रहे हैं, वह दरअसल अविमुक्तेश्वरानंद के ‘आकाओं’ का काम रहा है। वह कथित गोकशो के दबाव में आकर प्रदेश में भ्रम और अराजकता फैलाना चाहते हैं। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। (पढ़ें पूरी खबर)
हमने सबसे पहले श्री बद्रीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी से बात की। उन्होंने 25 जनवरी को अविमुक्तेश्वरानंद को बद्रीनाथ के कपाट खुलने से पहले होने वाली गाड़ू कलश यात्रा का न्योता भेजा है। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी मंत्री के बयान से नहीं, बल्कि सनातन परंपरा से चलते हैं। उन्होंने कहा- यूपी के मंत्री का अपना मत हो सकता है। लेकिन, हम प्रमाणिकता के आधार पर बात करते हैं। 2022 में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी के दो ही शिष्य थे- एक सदानंद सरस्वती और दूसरे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। एक को द्वारका और दूसरे को ज्योतिषपीठ की जिम्मेदारी दी गई। हम सनातनी और परंपरावादी लोग हैं। हमारे लिए वे शंकराचार्य हैं। ‘यह मेरी निजी जागीर नहीं, डिपार्टमेंट और सीएम से पूछकर ही बता पाऊंगा’
इस मामले पर उत्तराखंड के धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा- उत्तराखंड सरकार अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानती है या नहीं, इस पर मैं अभी कोई राय नहीं दे सकता। मुझे पहले डिपार्टमेंट (विभाग) का व्यू लेना पड़ेगा। यह कोई मेरी निजी प्रॉपर्टी का मामला नहीं है। जब तक मैं अधिकारियों और सीएम (मुख्यमंत्री) से बात नहीं कर लेता, मैं कुछ नहीं कह सकता। निमंत्रण की बात पर उन्होंने कहा कि वह निमंत्रण मंदिर समिति (BKTC) ने नहीं दिया है। वह डिमरी समाज का अपना निजी निमंत्रण है। रही बात शंकराचार्य मानने की, तो यह मामला अभी सब-जुडिस (न्यायालय में विचाराधीन) है। पट्टाभिषेक के मामले पर कोर्ट का क्या वर्डिक्ट (फैसला) है, उसका अध्ययन करना पड़ेगा। ‘जिन्होंने बुलाया है…उनसे पूछिए, मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा’
बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से इस मामले पर बात की गई तो वे इस मुद्दे पर पूरी तरह ‘नो कमेंट’ मोड में नजर आए। उन्होंने कहा, यूपी के मंत्री क्या कह रहे हैं, उसका जवाब वही दे पाएंगे। हम सभी संतों का सम्मान करते हैं। लेकिन यह निमंत्रण समिति की तरफ से नहीं गया है। यह पंचायत की यात्रा है। आप उन्हीं से पूछें तो ज्यादा बेहतर होगा। मैं इस विवाद में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। क्या है गाड़ू घड़ा यात्रा जिसमें बुलाए गए अविमुक्तेश्वरानंद इस बार गाड़ू घड़ा यात्रा का शेड्यूल गाड़ू घड़ा यात्रा की शुरुआत 7 अप्रैल को टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित राजमहल से होगी। इसी दिन परंपरा के अनुसार भगवान बद्री विशाल के अभिषेक में इस्तेमाल होने वाला तिल का तेल विधि-विधान से पिरोया जाएगा और चांदी के कलश में भरकर गाड़ू घड़ा तैयार किया जाएगा। अगले दिन, 8 अप्रैल को गाड़ू घड़ा यात्रा ऋषिकेश पहुंचेगी, जहां श्री बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति के विश्राम गृह में इसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसी प्रस्थान कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके बाद 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। कपाट खुलने के दिन इसी पवित्र तिल के तेल से भगवान बद्री विशाल का अभिषेक किया जाएगा और इसके साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। कौन हैं डिमरी ब्राह्मण, क्या है उनका इतिहास… ——————– ये खबर भी पढ़ें : मंत्री धर्मपाल सिंह बोले- शंकराचार्य के आका करते थे गोकशी: अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं, गोकशों के दबाव में अराजकता फैलाना चाहते बरेली में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद गोकशी पर सफेद झूठ बोल रहे हैं। यूपी में जिस गोकशी की बात वो कर रहे हैं, वह दरअसल अविमुक्तेश्वरानंद के ‘आकाओं’ का काम रहा है। वह कथित गोकशो के दबाव में आकर प्रदेश में भ्रम और अराजकता फैलाना चाहते हैं। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। (पढ़ें पूरी खबर)